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शुक्रवार, 26 फ़रवरी 2021
 
 

संयुक्त राष्ट्र ने पहली बार किसान आंदोलन पर नसीहत दी

शुक्रवार, 5 फ़रवरी, 2021  आई बी टी एन खबर ब्यूरो
 
 
भारत के किसान आंदोलन पर संयुक्त राष्ट्र ने पहली बार बयान दिया है।

संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार संस्था ने भारत में चल रहे किसान आंदोलन को लेकर प्रशासन और प्रदर्शनकारियों दोनों से अधिकतम संयम बरतने की अपील की है।

यूएन ह्यूमन राइट्स ने साथ ही नसीहत देते हुए कहा है कि शांतिपूर्ण तरीक़े से इकट्ठा होने और अभिव्यक्ति के अधिकारों की ऑफ़लाइन और ऑनलाइन दोनों जगह सुरक्षा होनी चाहिए।

संस्था ने कहा कि ये ज़रूरी है कि सभी के मानवाधिकारों का सम्मान करते हुए न्यायसंगत समाधान निकाला जाए।

ये पहली बार है जब संयुक्त राष्ट्र ने भारत में बीते दो महीने से ज़्यादा वक़्त से दिल्ली की सीमाओं पर जारी किसान प्रदर्शन को लेकर कुछ कहा है।

इससे पहले कुछ जानी-मानी विदेशी हस्तियां भी भारत के किसान आंदोलन को लेकर प्रतिक्रिया दे चुकी हैं, जिस पर भारत सरकार ने आपत्ति जताई थी।

दो फरवरी 2021 को मशहूर अंतरराष्ट्रीय पॉप सिंगर रिहाना ने इस मुद्दे पर ट्वीट था कि ''इस बारे में कोई बात क्यों नहीं कर रहा है?''

इसके बाद अमेरिकी उप-राष्ट्रपति कमला हैरिस की भांजी मीना हैरिस, पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग और पूर्व पॉर्न स्टार मिया ख़लीफ़ा ने भी इस मुद्दे पर ट्वीट किया।

पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग ने भारत में चल रहे किसान आंदोलन को अपना समर्थन दिया और मीना हैरिस ने लिखा कि ''हम सभी को भारत में इंटरनेट शटडाउन और किसान प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षाबलों की हिंसा को लेकर नाराज़गी जतानी चाहिए।''

रिहाना के ट्वीट के अगले दिन यानी तीन फरवरी 2021 को भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर एक बयान जारी किया था।

भारत सरकार ने किया बचाव

भारत सरकार ने अंतरराष्ट्रीय हस्तियों की ओर से किए गए ट्वीट्स के बाद किसी का नाम लिए बग़ैर टिप्पणी की और कहा कि सोशल मीडिया पर बड़ी हस्तियों को ज़िम्मेदारीपूर्वक व्यवहार करना चाहिए।

भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा, ''भारत की संसद ने व्यापक बहस और चर्चा के बाद, कृषि क्षेत्र से संबंधित सुधारवादी क़ानून पारित किया। ये सुधार किसानों को अधिक लचीलापन और बाज़ार में व्यापक पहुंच देते हैं। ये सुधार आर्थिक और पारिस्थितिक रूप से सतत खेती का मार्ग प्रशस्त करते हैं।''

साथ ही कहा, ''भारत के कुछ हिस्सों में किसानों का एक बहुत छोटा वर्ग इन सुधारों से सहमत नहीं है। भारत सरकार ने प्रदर्शनकारियों की भावनाओं का सम्मान करते हुए, उनके प्रतिनिधियों के साथ बातचीत शुरू की है। इस कोशिश में अब तक ग्यारह दौर की वार्ता हो चुकी है जिनमें केंद्रीय मंत्री हिस्सा ले रहे हैं। सरकार ही नहीं, भारत के प्रधानमंत्री की ओर से इन क़ानूनों को स्थगित करने का प्रस्ताव भी दिया गया है।''

भारत के विदेश मंत्रालय की ओर से बताया गया है कि कुछ वेस्टेड इंटरेस्ट ग्रुप्स की ओर से इन आंदोलनों को पटरी से उतारने की कोशिश की जा रही है और इन निहित स्वार्थ समूहों में से कुछ ने भारत के ख़िलाफ़ अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने की भी कोशिश की है।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि ऐसे मामलों पर टिप्पणी करने से पहले, हम आग्रह करेंगे कि तथ्यों का पता लगाया जाए, और मुद्दों की उचित समझ पैदा की जाए। ''मशहूर हस्तियों द्वारा सनसनीखेज सोशल मीडिया हैशटैग और टिप्पणियों के प्रलोभन का शिकार होना, न तो सटीक है और न ही ज़िम्मेदार है।''

विदेश मंत्रालय ने अपने पोस्ट में दो हैशटैग का इस्तेमाल भी किया था और कहा था कि ''इन विरोधों को भारत के लोकतांत्रिक लोकाचार और राजनीति के संदर्भ में और गतिरोध को हल करने के लिए सरकार और संबंधित किसान समूहों के प्रयासों के साथ देखा जाना चाहिए।''

इसके बाद भारत सरकार के मंत्रियों समेत कई खिलाड़ियों, फ़िल्मी हस्तियों, गायिकाओं ने भी सरकार के समर्थन में ट्वीट किए।

नवंबर 2020 से दिल्ली की सीमा पर प्रदर्शन कर रहे किसानों की मांग है कि केंद्र सरकार के तीनों कृषि क़ानून वापिस लिए जाएं, जबकि मोदी सरकार 18 महीनों तक इन क़ानूनों को ना लागू करने की बात कर रही है।

दोनों पक्षों के बीच इस मुद्दे को लेकर ग्यारह दौर की बातचीत हुई है लेकिन अब तक कोई नतीजा नहीं निकल पाया।

इस बीच 26 जनवरी 2021 को गणतंत्र दिवस के मौक़े पर दिल्ली में किसानों ने ट्रैक्टर रैली निकाली थी। इस दौरान बड़ी संख्या में किसान अपने ट्रैक्टर लेकर दिल्ली के भीतर आए। एक समूह ने लाल क़िले पर सिखों का केसरी झंडा भी लहरा दिया था।

इस घटना के बाद से ही दिल्ली की सीमाओं पर (सिंधु बॉर्डर, गाज़ीपुर बॉर्डर और टिकरी बॉर्डर) पर सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई। वहां बैरिकेडिंग और कॉन्क्रीट ब्लॉक्स के अलावा कंटीले तार बिछा दिए गए।

किसान आंदोलन में आए दिन अपडेट राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्ख़ियां बन रहे हैं।
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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