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शनिवार, 6 मार्च 2021
 
 

ईरान के परमाणु संयंत्रों का अचानक निरीक्षण नहीं कर पाएगा आईएईए

सोमवार, 22 फ़रवरी, 2021  आई बी टी एन खबर ब्यूरो
 
 
संयुक्त राष्ट्र की परमाणु हथियारों की निगरानी करने वाली संस्था अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) का कहना है कि ईरान उसके निरीक्षकों को अपने परमाणु संयंत्रों की निगरानी की तीन महीने के लिए अनुमति देने पर राज़ी हो गया है, लेकिन जल्दबाज़ी में हुए इस समझौते में उसके अधिकारियों के अधिकार कम हो गए हैं और अब वो अचानक निरीक्षण नहीं कर पाएंगे।

ईरान इस सिलसिले में मंगलवार, 23 फ़रवरी 2021 से अपनी नीति में बदलाव कर रहा है क्योंकि साल 2015 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से परमाणु समझौता तोड़े जाने के बाद अमरीका ने उसके ख़िलाफ़ लगाए गए प्रतिबंधों को नहीं हटाया है।

ईरान का कहना है कि अमरीका साल 2015 में हुए परमाणु समझौते का जब तक पूरी तरह पालन नहीं करता, तब तक वो इन उपायों को जारी रखेगा। दूसरी ओर अमरीकी राष्ट्रपति जो बाइडन का कहना है कि शुरूआत ईरान को करना है।

ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर ये विवाद लगभग दो दशक से अंतरराष्ट्रीय एजेंडे पर है। ईरान का दावा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है, जबकि अमरीका और अन्य देशों को संदेह है कि ईरान गुपचुप तरीके से परमाणु हथियार विकसित कर रहा है।

ईरान: यूएन के जांचकर्ताओं को परमाणु संयंत्रों तक जाने से रोकने के लिए क़ानून पास किया

ईरान की संसद ने एक क़ानून पारित किया है जिसके तहत अगर 2015 के परमाणु करार के तहत अमेरिका अपनी शर्तों को पूरा नहीं करता है तो ईरान के परमाणु संयंत्रों में संयुक्त राष्ट्र के जांचकर्ताओं की पहुंच को सीमित कर दिया जाएगा।

मंगलवार, 23 फ़रवरी 2021 की इस डेडलाइन से ठीक दो दिनों पहले रविवार, 21 फरवरी 2021 को ईरान के विदेश मंत्री जावेद ज़रीफ़ ने कहा कि बातचीत में इस पहलू पर भी ग़ौर करने की ज़रूरत होगी कि दोनों पक्ष उन शर्तों को किस तरह लागू करेंगे जो समझौते का हिस्सा हैं।

जावेद ज़रीफ़ ने रविवार, 21 फरवरी 2021 को तेहरान में कहा कि अमेरिका के साथ परमाणु समझौते को बहाल करने के लिए बातचीत तब शुरू हो सकेगी जब दूसरे पक्ष भी अपने वायदों को लागू करना शुरू कर दें।

उन्होंने कहा, ''जब सभी लोग समझौते के अपने हिस्से की शर्तों को लागू करेंगे, बातचीत तभी होगी, वार्ता समझौते में बदलाव के लिए नहीं होगी, या उसमें कुछ और चीज़ें शामिल करने के लिए, क्योंकि उन चीज़ों पर बातचीत हो चुकी हैं।''

जावेद ज़रीफ़ ने कहा, ''हम जिस बात पर वार्ता करेंगे वो इस पर होगी कि हम किस तरह इस बात की गारंटी दे सकते हैं कि अमेरिका ने जो किया वो फिर से दोहराया न जाए।''

अमेरिका, ईरान, चार यूरोपीय मुल्कों और चीन के बीच ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर 2015 में समझौता हुआ था लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने साल 2018 में इसे रद्द कर ईरान पर फिर से व्यापक प्रतिबंध लागू कर दिए थे।

समझौते के अमेरिका के बाहर जाने के बाद ईरान ने यूरेनियम संवर्धन के ग्रेड को पहले के मुक़ाबले बहुत बढ़ा दिया। साथ ही संयुक्त राष्ट्र के जांचकर्ताओं की जांच पर भी रोक लगाई।

बीबीसी की अमेरिकी विदेश मामलों की संवाददाता बारबरा प्लेट ऊशर का कहना है कि अमेरिका और यूरोपीय देशों ने हाल में जो क़दम उठाया वो पिछले चार सालों में ऐसा पहला क़दम था।

वो कहती हैं कि बाइडन प्रशासन ने ईरान के संयुक्त राष्ट्र के राजनयिकों की यात्रा पर लगी रोक में ढिलाई दी है। साथ ही उन्होंने ट्रंप शासन की उस कोशिश को भी पलट दिया है जिसमें वो ईरान पर संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंध लगवाना चाहते थे।

इस बीच आईएईए के प्रमुख रफायल ग्रोसी दो दिनों की अपनी ईरान यात्रा के लिए तेहरान पहुंच चुके हैं।
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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