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बुधवार, 21 अप्रैल 2021
 
 

अनिल देशमुख पहुँचे सुप्रीम कोर्ट: क्या सीबीआई जाँच से उद्धव सरकार ख़तरे में आ गई है?

मंगलवार, 6 अप्रैल, 2021  परवेज़ अनवर, एमडी & सीईओ, आईबीटीएन ग्रुप
 
 
भारत के राज्य महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख ने बॉम्बे हाईकोर्ट और सीबीआई पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट से राहत देने की अपील की है।

उनके कथित भ्रष्टाचार की सीबीआई से जाँच कराने के बॉम्बे हाईकोर्ट के फ़ैसले को चुनौती देते हुए उन्होंने मंगलवार, मंगलवार, 6 अप्रैल 2021 को सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पीटिशन दायर की।

मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने उनके ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए थे।

देशमुख ने अपनी याचिका में कहा है कि बॉम्बे हाईकोर्ट को लगता है कि महाराष्ट्र राज्य की पूरी मशीनरी भरोसा करने योग्य नहीं है और इसीलिए राज्य की किसी जाँच एजेंसी को इसकी ज़िम्मेदारी नहीं दी सकती है।

उन्होंने कहा कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक स्वतंत्र जाँच एजेंसी को मामले की छानबीन की ज़िम्मेदारी दी, यह जानते हुए भी कि पिछले कई मामलों में इस जाँच एजेंसी का काम इस योग्य नहीं रहा है कि अदालत उस एजेंसी पर पूरी तरह विश्वास कर सके।

देशमुख ने कहा कि यह बहुत चिंता की बात है कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने संविधान के आर्टिकल 226 के तहत मिले अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए राज्य की पूरी मशीनरी की अनदेखी की है।

देशमुख ने सर्वोच्च अदालत से तत्काल आंतरिक राहत देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि अगर बॉम्बे हाईकोर्ट के फ़ैसले को तुरंत स्थगित नहीं किया गया तो याचिकाकर्ता को अपूरणीय क्षति होगी।

अनिल देशमुख ने अपनी याचिका में बॉम्बे हाईकोर्ट पर सवाल उठाते हुए कहा, ''हाईकोर्ट ने इस बात पर ज़रा भी ध्यान नहीं दिया कि अदालत के सामने एक ज़र्रा बराबर भी सबूत नहीं रखे गए थे जो कि यह साबित कर सकते थे कि उन पर जो आरोप लगाए गए हैं उनमें ज़रा सी भी कोई सच्चाई है।''

देशमुख ने कहा कि पूर्व पुलिस कमिश्नर ने दूसरों की कथित बातचीत का हवाला दिया है जो कि पूरी तरह सुनी-सुनाई बात है और उन्होंने अदालत के सामने कोई ठोस सबूत नहीं रखा है जिन पर कानूनी तौर पर भरोसा किया जा सके।

देशमुख ने कहा कि हाईकोर्ट ने बिना उनको नोटिस दिए हुए एक ऐसी एजेंसी को उनके ख़िलाफ़ जाँच करने का आदेश दिया जिन पर राज्य सरकार को कोई भरोसा नहीं है।

अनिल देशमुख मामले में महाराष्ट्र सरकार पहुँची सुप्रीम कोर्ट

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख के ख़िलाफ़ सीबीआई जाँच पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने अनिल देशमुख के कथित भ्रष्टाचार की सीबीआई से जाँच कराने के आदेश दिए थे जिसके बाद अनिल देशमुख को गृहमंत्री के पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा था।

मुंबई के पूर्व पुलिस पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस करके अनिल देशमुख पर भ्रष्टाचार में शामिल होने के गंभीर आरोप लगाए थे।

परमबीर सिंह ने आरोप लगाया था कि गृहमंत्री पुलिस के ज़रिए हर महीने 100 करोड़ रुपए की उगाही कराना चाहते थे।

परमबीर सिंह पहले सुप्रीम कोर्ट गए थे लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनकी अपील को ख़ारिज कर दिया था और बॉम्बे हाईकोर्ट जाने की सलाह दी थी।

परमबीर सिंह बॉम्बे हाईकोर्ट गए और हाईकोर्ट ने सीबीआई जाँच के आदेश दे दिए।

अब महाराष्ट्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि वो अनिल देशमुख के ख़िलाफ़ सीबीआई जाँच के आदेश पर रोक लगा दे।

अनिल देशमुख की सीबीआई जाँच से उद्धव ठाकरे सरकार पर मंडराता ख़तरा?

मुंबई हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख के ख़िलाफ़ मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह के आरोपों की जाँच सीबीआई से कराने के आदेश दिए हैं।

इस जाँच के आदेश के बाद अनिल देशमुख ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सीबीआई जाँच से उद्धव सरकार ख़तरे में आ गई है?

मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने आरोप लगाया है कि गृह मंत्री अनिल देशमुख ने प्रत्येक महीने 100 करोड़ रूपये जुटाने की माँग की थी। अनिल देशमुख ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को भेजे अपने इस्तीफ़े में कहा है कि सीबीआई द्वारा मामले की जाँच को देखते हुए उनका पद पर बने रहना नैतिक रूप से सही नहीं होगा।

लगातार दो महीनों में दो मंत्रियों के इस्तीफ़े - पहले वन मंत्री संजय राठौड़ और फिर गृह मंत्री अनिल देशमुख के इस्तीफ़े - से उद्धव ठाकरे सरकार के अस्तित्व पर सवालिया निशान लग रहे हैं।

सचिन वाझे मामले में अब एक ओर नेशनल इंविस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) जाँच कर रही है तो दूसरी ओर अनिल देशमुख पर लगे आरोपों की जाँच सीबीआई करेगी। यहां यह ध्यान देने की बात है कि ये दोनों एजेंसियां बीजेपी शासित भारत के केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन काम करती हैं, यही वजह है कि उद्धव ठाकरे सरकार के अस्तित्व को लेकर सवाल उठ रहे हैं। उद्धव ठाकरे सरकार के लिए आने वाले दिनों में चुनौती बढ़ेगी, इससे इनकार नहीं किया जा सकता है।
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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