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मंगलवार, 18 मई 2021
 
 

व्हॉट्सऐप की नई प्राइवेसी पॉलिसी पर प्रतिस्पर्धा आयोग ने दिल्ली हाई कोर्ट में जवाब दिया

मंगलवार, 13 अप्रैल, 2021  आई बी टी एन खबर ब्यूरो
 
 
"व्हॉट्सऐप की नई प्राइवेसी पॉलिसी से बेहिसाब डेटा जुटाए जाएंगे और ग्राहकों को उनके रुझान के हिसाब से ज़्यादा से ज़्यादा विज्ञापन दिखाकर उन्हें 'तंग किया जाएगा' ताकि और नए ग्राहक बनाए जा सकें और इस तरह से ये अपनी प्रभावशाली स्थिति का कथित तौर पर बेजा इस्तेमाल है।''

ये बात भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने दिल्ली हाई कोर्ट को मंगलवार, 13 अप्रैल, 2021 को कही।

मैसेजिंग प्लेटफॉर्म व्हॉट्सऐप की नई प्राइवेसी पॉलिसी की जांच के आदेश देने के फ़ैसले का बचाव कर रहे प्रतिस्पर्धा आयोग की तरफ़ से सीनियर एडवोकेट अमन लेखी ने जस्टिस नवीन चावला की कोर्ट में ये जवाब दाखिल किया।

अमन लेखी ने कहा, ''कॉम्पिटिशन कमीशन प्रतिस्पर्धा के पहलू की जांच कर रहा था न कि किसी व्यक्ति विशेष की प्राइवेसी के कथित उल्लंघन की जिस पर सुप्रीम कोर्ट विचार कर रही है।''

उन्होंने कहा, ''ज्यूरिसडिक्शन (क्षेत्राधिकार) की ग़लती का सवाल ही नहीं पैदा होता। प्रतिस्पर्धा आयोग के फ़ैसले को चुनौती देने वाली व्हॉट्सऐप और फ़ेसबुक की याचिका 'अयोग्य और ग़लत बुनियाद' पर आधारित है।''

दिल्ली हाई कोर्ट में इस मामले में व्हॉट्सऐप और फ़ेसबुक की ओर से सीनियर एडवोकेट हरीश साल्वे और मुकुल रोहतगी पैरवी कर रही हैं। प्रतिस्पर्धा आयोग ने 24 मार्च 2021 को व्हॉट्सऐप की नई प्राइवेसी पॉलिसी की जांच का आदेश दिया था।

इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने अपना फ़ैसला सुरक्षित रखा है।

अमन लेखी ने हाई कोर्ट को बताया कि व्हॉट्सऐप जो डेटा कलेक्ट करती है और उस डेटा को फ़ेसबुक के साथ शेयर करना ग़ैर प्रतिस्पर्धात्मक व्यवहार है या अपनी प्रभावशाली स्थिति का बेजा इस्तेमाल है या नहीं, इसका फ़ैसला केवल जांच के बाद ही हो सकता है।

उन्होंने दलील दी, ''जो डेटा जुटाए जा रहे हैं, उसमें यूजर का लोकेशन, वो किस तरह का डिवाइस इस्तेमाल करता है, किससे इंटरनेट की सेवा लेता है और वो किससे बात कर रहा है, इन सब बातों से उस ग्राहक की पसंद नापसंद का ब्योरा और प्रोफाइल तैयार की जाएगी जिसका सुनिश्चित किस्म के विज्ञापनों के जरिये आर्थिक दोहन किया जाएगा और ये बात ग्राहकों को तंग करने के दायरे में आती है।''

उन्होंने ये भी कहा कि जांच का आदेश केवल एक प्रशासनिक कार्यवाही है और मामले की मौजूदा स्थिति ऐसी नहीं है जिसका कोई क़ानूनी दायित्व बनेगा।

दोनों सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने ये कहा है कि जब सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट प्राइवेसी पॉलिसी के मामले पर विचार कर रहा है तो प्रतिस्पर्धा आयोग को इस मामले में दखल नहीं देना चाहिए।
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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