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मंगलवार, 18 मई 2021
 
 

दिल्ली हाई कोर्ट की मोदी सरकार को चेतावनी, ऑक्सीजन दो वरना अवमानना का सामना करो

शनिवार, 1 मई, 2021  आई बी टी एन खबर ब्यूरो
 
 


दिल्ली हाई कोर्ट ने शनिवार, 1 मई 2021 को भारत की राजधानी दिल्ली में ऑक्सीजन की कमी के मामले पर सुनवाई करते हुए केंद्र की मोदी सरकार को निर्देश दिया कि वो दिल्ली को उसके हिस्से की 490 मीट्रिक टन ऑक्सीजन कैसे भी उपलब्ध कराए।

जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस रेखा पल्ली की डिविज़न बेंच का यह आदेश कई अस्पतालों की ऑक्सीजन सप्लाई में कमी की शिकायत के बाद आया है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने साथ ही मोदी सरकार को चेतावनी दी कि अगर दिल्ली को आज ही उसके हिस्से की ऑक्सीजन की सप्लाई नहीं हुई तो उसके ख़िलाफ़ अवमानना का मामला भी चलाया जा सकता है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा, ''पानी सिर के ऊपर जा चुका है। अब हमें काम से मतलब है। आप (केंद्र की मोदी सरकार) अभी सब व्यवस्था करिए।''

दिल्ली हाई कोर्ट ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उसके आदेश का पालन नहीं हुआ तो अगली सुनवाई पर संबंधित प्रशासन को कोर्ट में पेश होना होगा।

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि दिल्ली कोई औद्योगिक राज्य नहीं है और उसके पास क्रायोजेनिक टैंकर्स नहीं हैं।

दिल्ली हाई कोर्ट ने बत्रा अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी के कारण 12 मरीज़ों के मारे जाने का संज्ञान लेते हुए कहा, ''दिल्ली में मरते लोगों को देखकर क्या हम अपनी आंखें बंद कर लें।''

दिल्ली हाई कोर्ट ने माना कि दिल्ली का 20 अप्रैल 2021 को ऑक्सीजन का कोटा बढ़ाया गया था और तब से लेकर अब तक किसी भी दिन पूरी सप्लाई उसे नहीं हुई है।

इस मामले की अगली सुनवाई सोमवार, 3 मई 2021 को होगी।

वहीं, ऑक्सीजन की समस्या पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शनिवार, 1 मई 2021 को कहा कि ऑक्सीजन की भारी कमी है और कई अस्पतालों ने इमरजेंसी कॉल दी है।

उन्होंने कहा, ''हमने कोर्ट से कहा है और केंद्र की मोदी सरकार को भी लिखा है कि दिल्ली को 976 टन रोज़ाना ऑक्सीजन की ज़रूरत है लेकिन हमें 490 टन ऑक्सीजन ही दी गई है और कल हमें सिर्फ़ 312 टन ऑक्सीजन मिली थी। आख़िर ऐसे कैसे चलेगा?''

मुख्यमंत्री केजरीवाल ने कहा कि वो नीति-निर्माताओं से हाथ जोड़कर अपील करते हैं कि वे दिल्ली को ऑक्सीजन दें।

अस्पतालों को मौजूदा अनुभव से सीखना चाहिए और ऑक्सीजन प्लांट लगाने चाहिए: दिल्ली हाई कोर्ट

दिल्ली हाई कोर्ट ने शनिवार, 1 मई 2021 को कहा कि अस्पतालों को मौजूदा सीओवीआईडी-19 महामारी के दौरान ऑक्सीजन की कमी के अपने अनुभवों से सीखना चाहिए और इस जीवनरक्षक गैस का उत्पादन करने के लिए प्लांट लगाने चाहिए।

जस्टिस विपिन संघी और रेखा पल्ली की बेंच ने कहा कि खर्चे को देखते हुए कुछ अस्पताल ऑक्सीजन प्लांट जैसी चीज़ों पर पूंजीगत व्यय को कम करते हैं। जबकि ये किसी अस्पताल के लिए ज़रूरत की चीज़ है, ख़ासकर बड़े अस्पतालों के लिए।

बेंच ने कहा, ''ऑक्सीजन प्लांट ज़रूरी हैं। उनका न होना ग़ैर-ज़िम्मेदाराना है।''

छुट्टी के दिन ऑक्सीजन संकट और अन्य सीओवीआईडी-19 संबंधि मसलों को लेकर दायर कई याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा, ''आपको (अस्पतालों को) अपने अनुभव से सीखना चाहिए और एक प्लांट लगाना चाहिए।''

 
 
 
 
 
 
 
 
 

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