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मंगलवार, 22 जून 2021
 
 

जापान के लिए टोक्यो ओलंपिक रद्द करना मुश्किल क्यों है?

शनिवार, 15 मई, 2021  आई बी टी एन खबर ब्यूरो
 
 
2021 में टोक्यो में होने वाले ओलंपिक खेलों को केवल दो महीनों का वक़्त बाक़ी है। इस बीच कोरोना महामारी के बढ़ते असर को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे रद्द करने की मांग कर रहे हैं।

हाल में जापान में किए गए एक ओपिनियन पोल में सत्तर फीसदी लोगों ने खेलों को रद्द किए जाने के पक्ष में वोट किया। हाल में टोक्यो और तीन और प्रांतों में संक्रमण के मामले बढ़ने के कारण इमर्जेंसी लागू की गई है।

लेकिन, जापान ने अब तक इसे रद्द करने को लेकर कोई फ़ैसला नहीं किया है। इंटरनेशनल ओलंपिक कमिटी भी इसके आयोजन को लेकर आगे बढ़ रही है।

लेकिन क्या ओलंपिक खेलों को रद्द करना वाकई मुश्किल है?

मुश्किलें क्या हैं?

इसी सप्ताह जापान के प्रधानमंत्री योशिहिदे सूगा ने पहली बार आम लोगों की राय को मानते हुए कहा कि ''सरकार ओलंपिक को अपनी प्राथमिकता नहीं बनाएगी।'' हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि ओलंपिक खेलों के आयोजन या उसे रद्द करने का फ़ैसला आख़िर में इंटरनेशल ओलंपिक कमिटी (आईओसी) को लेना होता है।

अंतरराष्ट्रीय स्पोर्ट्स लॉयर एलेक्ज़ेंडर मिगुएल मेस्त्रे कहते हैं कि आईओसी और टोक्यो शहर के बीच हुए समझौते के अनुसार ओलंपिक खेल आईओसी की ''विशेष संपत्ति'' है और इस समझौते को रदद् करने का फ़ैसला केवल वही ले सकता है।

वो कहते हैं कि युद्ध या गृह युद्ध जैसी स्थिति हो या फिर अगर आईओसी को लगे कि किसी कारण से खेल में हिस्सा लेने वालों की जान के लिए ख़तरा पैदा हो सकता है तो वो खेलों को रद्द कर सकता है। लेकिन कोरोना महामारी को इस तरह के ख़तरे के रूप में देखा नहीं जा रहा है।

वो कहते हैं कि अगर जापान इसे रद्द करने का फ़ैसला करता है तो ये एकतरफा फ़ैसला होगा और इसके लिए उसे आईओसी के विरोध में जाना होगा। इसके बाद इसका खामियाज़ा स्थानीय आयोजकों को भुगतना पड़ेगा।

अगर ओलंपिक खेल रद्द नहीं हुए तो वो 23 जुलाई 2021 से शुरू होंगे।

अर्थव्यवस्था का सवाल भी

मेलबर्न युनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर जैक एंडरसन कहते हैं कि जापान को पहले से समझौते की शर्तों के बारे में पता था लेकिन उसे इस बात का कोई अंदाज़ा नहीं था कि कोरोना महामारी पूरी दुनिया को इस तरह प्रभावित करने वाली है।

वो कहते हैं, ''चूंकि ये खेल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होते हैं, इनमें अरबों डॉलर खर्च किए जाते है। ऐसे में फिलहाल जापान समझौते में बने रहते हुए आईओसी के फ़ैसले का इंतज़ार कर सकता है।''

जानकार मानते हैं कि खेल आयोजन के लिए किये गये अधिकतर काम का इंश्योरेंस किया गया है और खेल रद्द हुए तो इंश्योरेंस कंपनियों को बड़ा झटका लग सकता है।

लेकिन मामला केवल पैसों का ही नहीं है। आख़िरी बार साल 1964 में जापान ने समर ओलंपिक खेलों का आयोजन किया था। उस वक़्त जापान दूसरे विश्व युद्ध के बाद पुनर्वास के काम में लगा था और ये उसके लिए उसकी प्रगति का प्रतीक माना गया।

इस बार भी जापान के लिए खेलों का आयोजन सम्मान की बात है। क्योंकि अगले अंतरराष्ट्रीय खेल, विंटर ओलंपिक फरवरी 2022 में होंगे और इसका आयोजन चीन के बीजिंग में होने वाला है जिसे जापान अपना प्रतिद्वंदी मानता है।

प्रोफ़ेसर जैक एंडरसन के अनुसार, ''बीते कुछ सालों में जापान में आर्थिक ठहराव देखा जा रहा है। पहले यहां सूनामी आई और फिर फुकुशिमा परमाणु हादसा हुआ। इन खेलों को जापान के विकास के तौर पर देखा जा रहा है। इसलिए ये सरकार के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो गए हैं।''
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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