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मंगलवार, 27 जुलाई 2021
 
 

नासा का स्पेस लॉन्च सिस्टम का रॉकेट तैयार, चांद पर इंसानों को बसाने की दिशा में पहला क़दम

रविवार, 13 जून, 2021  आई बी टी एन खबर ब्यूरो
 
 
नासा ने अपने पहले शक्तिशाली स्पेस लॉन्च सिस्टम (एसएलएस) के रॉकेट को तैयार कर लिया है। ये रॉकेट इसी दशक के भीतर चांद पर इंसानों को ले जाएगा।

शुक्रवार, 11 जून 2021 को फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर में इंजीनियरों ने रॉकेट के 65 मीटर ऊंचे मूल हिस्से को दो छोटे बूस्टर रॉकेटों के बीच फ़िट किया।

ये पहली बार है जब इस विशाल रॉकेट के तीनों हिस्सों को लॉन्च कंफिग्रेशन में स्थापित किया गया है।

नासा साल 2021 में एसएलएस को उसकी पहली उड़ान पर भेजेगा।

इस मिशन को आर्टेमिस-1 नाम दिया गया है। इसके तहत एसएलएस अमेरिका की अगली पीढ़ी के क्रू व्हीकल ओरियन को चांद की तरफ लेकर जाएगा।

हालांकि पहली उड़ान में इंसानों को नहीं भेजा जाएगा। इंजीनियर 2023 में इंसानों को भेजने से पहले रॉकेट और स्पेसशिप को पूरी तरह परखना चाहते हैं।

स्टेच्यू ऑफ़ लिबर्टी से ऊंचे

एसएलएस में एक विशाल कोर स्टेज है जिसमें प्रोपेलेंट टैंक और चार शक्तिशाली इंजन हैं। इसके दोनों तरफ़ दो 54 मीटर लंबे सॉलिड रॉकेट बूस्टर हैं।

उड़ान के पहले दो मिनट के दौरान ये दोनों बूस्टर रॉकेट ही एसएलएस को ज़मीन से ऊपर उठने के लिए पर्याप्त शक्ति देते हैं।

इस रॉकेट की कोर स्टेज और दोनों ही सॉलिड रॉकेट बूस्टर स्टेच्यू ऑफ़ लिबर्टी की बिना पायदान के ऊंचाई से ऊंचे हैं।

शुक्रवार, 11 जून 2021 और शनिवार, 12 जून 2021 को केनेडी स्पेस सेंटर के इंजीनियरों ने कोर स्टेज को दोनों सॉलिड रॉकेट बूस्टरों के बीच में एक प्लेटफार्म पर खड़ा किया जिसे मोबाइल लॉन्चर कहते हैं।

ये स्ट्रक्चर इस समय नासा की विशाल क्यूबॉइड व्हीकल असेंबली बिल्डिंग (वीएबी) में रखा गया है।

ग्रीन रन क्या है?

मोबाइल लॉन्चर के ज़रिए एसएलएस का परीक्षण और मरम्मत की जा सकती है। इसी के ज़रिए इस विशाल रॉकेट को लॉन्च पैड पर पहुंचाया जाएगा।

इंजीनियरों ने नवंबर 2020 में एसएलएस को मोबाइल लॉन्चर पर रखने का काम शुरू किया था।

जब ये सब किया जा रहा था तब रॉकेट की कोर स्टेज को मिसीसिपी प्रांत में टेस्ट स्टैंड पर रखा गया था। इस दौरान इसका विस्तृत परीक्षण किया जा रहा था जिसे ग्रीन रन कहते हैं।

मार्च 2021 में कोर स्टेज के इंजनों को आठ मिनट के लिए चालू किया गया था। ये परीक्षण कामयाब रहा था।

एसएलएस इतने समय के भीतर ही ज़मीन से अंतरिक्ष में पहुंच जाएगा। ये ग्रीन रन का अंतिम और सबसे ज़रूरी परीक्षण था।

नवीकरण के बाद कोर स्टेज को विशाल नौका के ज़रिए केनेडी स्पेस सेंटर पहुंचाया गया था।

अर्टेमिस-3 1972 में चांद पर अपोलो-17 की लैंडिंग के बाद पहला मिशन होगा जिसमें इंसान फिर से चांद पर क़दम रखेगा। ये अगले कुछ सालों में लॉन्च किया जाएगा।

नासा ने हाल ही में अगली पीढ़ी के मून लैंडर के निर्माण के लिए स्पेस एक्स को ठेका दिया है। स्पेस एक्स इस काम के लिए अपने स्टारशिप डिज़ाइन को अपना रही है।
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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