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मंगलवार, 27 जुलाई 2021
 
 

बशर अल-असद ने चौथी बार सीरिया के राष्ट्रपति पद की शपथ ली

शनिवार, 17 जुलाई, 2021  आई बी टी एन खबर ब्यूरो
 
 
सीरिया के लगातार तीन बार राष्ट्रपति रह चुके बशर अल-असद ने शनिवार, 17 जुलाई 2021 को चौथी बार देश के राष्ट्रपति पद की शपथ ली है। सीरिया के सरकारी टेलीविज़न ने दमिश्क में हुए शपथग्रहण समारोह का लाइव टेलिकास्ट किया।

शपथ लेने के बाद 55 वर्षीय बशर अल-असद ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए सीरियाई लोगों का धन्यवाद किया और कहा कि "लोगों ने अपना ख़ून देकर अपनी मातृभूमि की रक्षा की है।''

साल 2011 से सीरिया गृहयुद्ध के हालातों से जूझ रहा है। इस कारण यहां लाखों लोगों को विस्थापित होना पड़ा है। अब सालों के संघर्ष के बाद रूस समर्थित सीरियाई सरकारी सेना ने सीरिया के दो तिहाई हिस्से को अपने कब्ज़े में ले लिया है। लेकिन अब भी कई ऐसे इलाक़े हैं जो सरकारी नियंत्रण से बाहर हैं।

समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार सीरिया की 80 फीसदी आबादी ग़रीबी का सामना कर रही है और डॉलर के मुक़ाबले सीरियाई पाउंड में आई गिरावट के कारण सीरिया में महंगाई अपने चरम पर है।

हाल के दिनों में सरकार ने यहां पेट्रोल, ब्रेड, चीनी और चावल की क़ीमतें बढ़ाई हैं।

सीरिया पर लेबनान के संकट का असर

असद ने शनिवार, 17 जुलाई 2021 को कहा कि पड़ोसी देश लेबनान के बैंकों में सीरिया का काफी पैसा फंसा हुआ है और सीरिया की तरक्की में निवेश न होने के पीछे ये मुख्य कारण है। उन्होंने कहा कि एक आकलन के अनुसार क़रीब 40 से 60 अरब डॉलर की रकम है जो फंसी हुई है।

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार पश्चिमी देशों के लगाए प्रतिबंधों से निपटने के लिए सीरिया की कंपनियां लेबनान की बैंकिंग व्यवस्था का फायदा उठाया करती थीं लेकिन आर्थिक संकट से जूझ रहे लेबनान ने साल 2019 में देश के बाहर होने वाले मनी ट्रांसफर पर रोक लगा दी जिससे उनके लिए नई मुश्किल खड़ी हो गईं।

असद ने ये भी कहा कि पश्चिमी देशों के लगाए प्रतिबंधों से बाहर निकलने के लिए सीरिया पूरी कोशिश करेगा। उन्होंने कहा, "ऐसा नहीं हुआ कि प्रतिबंधों के कारण हम अपनी ज़रूरी चीज़ों की व्यवस्था नहीं कर पाए, लेकिन इसके कारण कुछ बड़ी मुसीबतें ज़रूर पैदा हुई हैं।''

विपक्ष और पश्चिमी देशों का आरोप, चुनावों में हुई धांधली

मई 2021 में हुए चुनावों में बशर अल-असद की सीरियाई बाथ पार्टी को 95 फीसदी वोटों के साथ बहुमत मिला था जिसके बाद लगातार चौथी बार वो सात सालों के लिए राष्ट्रपति बन गए हैं।

पिता हाफ़िज़ अल-असद की मौत के बाद साल 2000 में एक रेफरेंडम के ज़रिए बशर अल-असद सबसे पहले राष्ट्रपति बने थे। उनके पिता ने 30 साल तक सीरिया पर शासन किया था। ये चुनाव केवल सीरियाई सरकार के कब्ज़े वाले इलाक़ों में हुए थे जबकि सीरिया में विपक्षी पार्टियों और कुर्दिश हथियारबंद समूहों ने इसे मानने से इनकार कर दिया था।

अमेरिका, फ्रांस, और इटली ने इन चुनावों को नकारते हुए कहा था कि इनमें धांधली हुई थी। उनका कहना था कि 'न तो ये चुनाव स्वतंत्र थे और न ही निष्पक्ष'।
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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