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मंगलवार, 27 जुलाई 2021
 
 

साइबर हमलों के आरोप पर चीन ने कहा, आरोप बेबुनियाद और दुर्भावनापूर्ण

मंगलवार, 20 जुलाई, 2021  आई बी टी एन खबर ब्यूरो
 
 
चीन ने अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय संघ के उन आरोपों को ख़ारिज किया है जिनमें कहा गया था कि उसने माइक्रोसॉफ़्ट एक्सचेंज सर्वर को निशाना बनाकर एक बड़ा साइबर हमला किया था।

सोमवार, 19 जुलाई 2021 को न्यूज़ीलैंड भी चीन पर साइबर हमले को आरोप लगाने वाले देशों की समूह में शामिल हो गया।

न्यूज़ीलैंड ने चीनी सरकार समर्थित पक्षों को माइक्रोसॉफॉट सर्वर पर हमले के साथ ही अपने यहाँ 'दुर्भावनापूर्ण साइबर गतिविधियों' को अंजाम देने का आरोप लगाया है।

इसके जवाब में वेलिंगटन स्थित चीनी दूतावास ने इन सभी आरोपों को बेबुनियाद और ग़ैर-ज़िम्मेदाराना बताया।

आरोप बेबुनियाद और दुर्भावनापूर्ण: चीन

पत्रकारों के सवाल के जवाब में एक बयान जारी करते हए चीनी दूतावास ने कहा, ''चीन की सरकार साइबर सुरक्षा की कट्टर संरक्षक है। बिना किसी सबूत के आरोप लगाना दुर्भावनापूर्ण है।''

इस बयान में कहा गया है, ''चीन इन आरोपों पर कड़ी असंतुष्टि और विरोध ज़ाहिर करता है। चीन क़ानून के मुताबिक़ हर तरह के साइबर हमलों और साइबर अपराधों के ख़िलाफ़ लड़ता है।''

''साइबरस्पेस की वर्चुअल प्रकृति को देखते हुए यह ज़रूरी है कि साइबर अपराधों की पहचान या जाँच करने वाले के पास स्पष्ट साक्ष्य हों।''

चीनी दूतावास ने कहा, ''हम न्यूज़ीलैंड से ज़ोर देकर कहते हैं कि साइबर अपराधों से जुड़ी घटनाओं की बात करते हुए वो 'शीतयुद्ध वाली' मानसिकता छोड़कर पेशेवर और ज़िम्मेदाराना रवैया अपनाए।''

चीन ने कहा कि न्यूज़ीलैंड को साइबर सुरक्षा की आड़ में दूसरों को राजनीतिक मुद्दों पर गुमराह नहीं करना चाहिए।

चीन इससे पहले भी हैकिंग के आरोपों को सिरे से नकारता रहा है और कहता है कि वह सभी तरह के साइबर अपराधों के ख़िलाफ़ है।

चीन पर क्या आरोप हैं?

अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ ने सोमवार, 19 जुलाई 2021 को चीन के ख़िलाफ़ एक बड़ा साइबर हमला करने का आरोप लगाया है।

यह हमला माइक्रोसॉफ़्ट एक्सचेंज सर्वर पर किया गया था जिससे दुनिया भर में कम से कम 30 हज़ार सर्वर प्रभावित हुए थे।

ब्रिटेन ने इस हमले के लिए चीनी सरकार से समर्थित पक्षों को ज़िम्मेदार ठहराया है।

वहीं, यूरोपीय संघ ने कहा है कि ये हमला "चीनी क्षेत्र" से किया गया है।

चीन की मिनिस्ट्री ऑफ़ स्टेट सिक्योरिटी पर भी व्यापक जासूसी गतिविधियों को अंजाम देने एवं दुस्साहस भरा बर्ताव करने का आरोप लगाया गया है।

अमेरिका और ब्रिटेन पहले भी दूसरे देशों द्वारा चलाए गए साइबर हमलों के ख़िलाफ़ खुलकर सामने आते रहे हैं। लेकिन इस मामले में यूरोपीय संघ ने भी चीन का नाम लिया गया है जो कि बताता है कि हैकिंग की इस घटना को कितनी गंभीरता से लिया गया है।

पश्चिमी देशों के खुफ़िया अधिकारियों के मुताबिक़, चीन का व्यवहार 'काफ़ी गंभीर' था और यह व्यवहार इससे पहले कभी नही देखा गया है।
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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