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बुधवार, 29 सितम्बर 2021
 
 

करनाल में किसानों ने हफ़्ते भर से जारी धरना ख़त्म करने की घोषणा की

शनिवार, 11 सितम्बर, 2021  आई बी टी एन खबर ब्यूरो
 
 
भारत में किसान नेताओं ने शनिवार, 11 सितम्बर 2021 को करनाल के प्रशासनिक अधिकारियों के साथ एक प्रेस वार्ता करते हुए ऐलान किया है कि करनाल, मिनी सचिवालय के पास जारी धरना ख़त्म कर दिया जाएगा।

किसान नेता बीते कुछ दिनों से किसानों के साथ निर्ममता से पेश आने का आदेश देने वाले करनाल के पूर्व एसडीएम आयुष सिन्हा पर कार्रवाई की मांग कर रहे थे।

हरियाणा सरकार ने इस मामले में आयुष सिन्हा का ट्रांसफर कर दिया था। लेकिन किसान लगातार इस मामले की जांच करवाए जाने की मांग कर रहे थे।

इन मांगों को लेकर प्रशासन और किसानों के बीच में तनातनी बनी हुई थी। और इस समस्या का हल निकालने के लिए दोनों पक्षों के बीच बैठकें हो रही थीं।

इस प्रेस वार्ता में बताया गया है कि 28 अगस्त 2021 को बस्तर टोल प्लाज़ा पर हुई घटना की जांच सेवानिवृत्त न्यायाधीशों द्वारा कराई जाएगी और एक माह के भीतर जांच पूरी कर ली जाएगी। इस दौरान आयुष सिन्हा छुट्टी पर रहेंगे।

इसके साथ ही मृतक सुशील काजल के परिवार के सदस्य को एक महीने के भीतर डीसी रेट पर नौकरी दी जाएगी।

पूरा मामला क्या है?

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर 28 अगस्त 2021 को बीजेपी नेताओं की एक बैठक में हिस्सा लेने आने वाले थे। और किसान नेता मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का घेराव करने की कोशिश कर रहे थे।

इस कोशिश में किसान नेताओं ने भारी संख्या में करनाल हाइवे पर जाम लगाया। इसके बाद पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज किया।

इस घटना में सुशील काजल नामक किसान की मौत हो गयी। हालांकि, प्रशासन का कहना है कि प्रशासनिक कार्रवाई में सुशील काजल की मौत नहीं हुई।

इस घटना के साथ ही करनाल के एसडीएम आयुष सिन्हा का एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें वह किसानों के साथ निर्ममता से पेश आने का आदेश देते हुए दिख रहे थे।

हालांकि, आयुष सिन्हा ने सफाई देते हुए कहा था कि पत्थरबाज़ी शुरू हो गयी थी और उन्होंने उचित रूप से बल प्रयोग करने का आदेश दिया था।

लेकिन इस वीडियो में आयुष सिन्हा कहते दिख रहे थे कि "उठा-उठा के मारना पीछे सबको। हमें किसी भी हालत में ये नाका टूटने नहीं देना है। हमारे पास पर्याप्त फोर्स है। हम दो दिन से सोए नहीं हैं। लेकिन आपको थोड़ी नींद लेने के बाद यहां आना है। मेरे पास एक भी बंदा निकल कर नहीं आना चाहिए। अगर आए तो सर फूटा हुआ होना चाहिए उसका, क्लियर है आपको।''

सोशल मीडिया पर वायरल हुई इस क्लिप को देखने के बाद कई पूर्व एवं मौजूदा अधिकारियों ने संबंधित अधिकारी के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग की थी।

इसके साथ-साथ विपक्षी दलों के नेताओं और संयुक्त किसान मोर्चा ने आयुष सिन्हा के इस्तीफे की मांग की।

हालांकि, हरियाणा सरकार इस मामले में अधिकारी का बचाव करते हुए दिख रही थी।

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने आयुष सिन्हा का बचाव करते हुए कहा था कि अधिकारी ने शब्दों का चुनाव सही ढंग से नहीं किया।

हालांकि, उन्होंने पुलिस द्वारा की गयी कार्रवाई का बचाव किया था।

लगभग इसी तरह करनाल के डीएम निशांत यादव ने भी आयुष सिन्हा का बचाव किया था।

उन्होंने कहा था, "कुछ शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए था। करनाल प्रशासन के प्रमुख होने के नाते मैं अपना खेद व्यक्त करता हूं। लेकिन एसडीएम एक अच्छे अधिकारी हैं। उन्होंने उस मौके पर गरमा-गरमी भरे हालात में कुछ शब्दों का इस्तेमाल किया जो कि उन्हें नहीं करना चाहिए था। लेकिन उनका इरादा ग़लत नहीं था।''
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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