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सोमवार, 6 दिसम्बर 2021
 
 

कृषि कानूनों की वापसी की पीएम मोदी की घोषणा पर विपक्ष और किसानों ने क्या कहा? भाग- 2

शुक्रवार, 19 नवम्बर, 2021  आई बी टी एन खबर ब्यूरो
 
 
आपकी नीयत और आपके बदलते हुए रुख़ पर विश्वास करना मुश्किल है: प्रियंका गांधी

कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने तीन कृषि क़ानूनों को वापस लेने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फ़ैसले पर कहा कि ''अब चुनाव में हार दिखने लगी तो आपको अचानक इस देश की सच्चाई समझ में आने लगी।''

प्रियंका गांधी ने कहा, ''600 से अधिक किसानों की शहादत, 350 से अधिक दिन का संघर्ष, मोदी जी आपके मंत्री के बेटे ने किसानों को कुचल कर मार डाला, आपको कोई परवाह नहीं थी। आपकी पार्टी के नेताओं ने किसानों का अपमान करते हुए उन्हें आतंकवादी, देशद्रोही, गुंडे, उपद्रवी कहा, आपने ख़ुद आंदोलनजीवी बोला, उनपर लाठियाँ बरसायीं, उन्हें गिरफ़्तार किया।''

''अब चुनाव में हार दिखने लगी तो आपको अचानक इस देश की सच्चाई समझ में आने लगी कि यह देश किसानों ने बनाया है। यह देश किसानों का है। किसान ही इस देश का सच्चा रखवाला है और कोई सरकार किसानों के हित को कुचलकर इस देश को नहीं चला सकती।''

प्रियंका ने कहा, "आपकी नीयत और आपके बदलते हुए रुख़ पर विश्वास करना मुश्किल है।"

जान गंवाने वाले किसानों के परिवार से भी माफ़ी मांगनी चाहिएः मनीष सिसोदिया

कृषि क़ानून रद्द किए जाने पर दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि सरकार को उन किसानों के परिवारों से भी माफ़ी मांगनी चाहिए जिन्होंने इस आंदोलन की वजह से अपनी जान गंवाई।

उन्होंने कहा, ''भाजपा के यही लोग थे जिन्होंने किसानों को आतंकवादी बताया था। सरकार का किसानों के साथ एक साल तक ऐसा व्यवहार करना ग़लत था।''

मनीष सिसोदिया ने तीनों कृषि क़ानूनों को वापस लिए जाने पर दिए गए अपने बधाई संदेश में कहा, ''किसानों व किसान आंदोलन को बधाई। निरंकुश सरकार को आपके एक साल लम्बे अहिंसक आंदोलन ने झुकने को मजबूर कर दिया।''

उन्होंने कहा, ''केंद्र सरकार को सैंकड़ों किसानों की शहादत के सामने आख़िर झुकना पड़ा। सरकार उन किसानों के परिवारों से भी माफ़ी माँगे जिनकी जान इन क़ानूनों के ख़िलाफ़ आंदोलन में गई है।''

सरकार ने वोट के लिए क़ानून वापस लिए हैंः अखिलेश यादव

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा है कि तीन कृषि क़ानून किसानों के हित में तो वापस हुए ही हैं लेकिन सरकार चुनाव से डर गई और वोट के लिए क़ानून वापस लिए गए हैं।

उन्होंने कहा, "हो सकता है कि सरकार चुनाव के बाद फिर से ऐसा कोई क़ानून लेकर आए।"

साथ ही अखिलेश ने यह भी पूछा कि, "यह भरोसा कौन दिलाएगा कि भविष्य में ऐसे क़ानून नहीं आएंगे जिससे किसान संकट में आए?''

किसानों की जीत, अहंकार की हारः भूपेश बघेल

भारत के राज्य छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने तीन कृषि क़ानूनों को वापस लिए जाने पर इसे किसानों की जीत और अहंकार की हार बताया।

उन्होंने कहा, ''देश के किसान जीते हैं और नरेंद्र मोदी का अंहकार हारा है। भाजपा नेताओं द्वारा किसानों को कभी ठग, अंहकारी, कभी चीनी, पाकिस्तानी समर्थक क्या-क्या उनके लिए नहीं कहा गया। प्रधानमंत्री और भाजपा नेताओं को देश और किसानों से माफ़ी मांगनी चाहिए।''

किसान की जीत, पूँजीपतियों के रखवालों और सरकार की हार: तेजस्वी यादव

आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने तीन कृषि क़ानून वापस लेने की घोषणा को किसानों की जीत बताया है।

उन्होंने कहा, ''यह किसान की जीत है, देश की जीत है। यह पूँजीपतियों, उनके रखवालों, नीतीश-भाजपा सरकार और उनके अंहकार की हार है।''

तेजस्वी ने कहा, "विश्व के सबसे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक किसान आंदोलन ने पूँजीपरस्त सरकार को झुकने पर मजबूर किया। आंदोलनजीवियों ने दिखाया कि एकता में शक्ति है। यह सभी की सामूहिक जीत है। बिहार और देश में व्याप्त बेरोज़गारी, महंगाई, निजीकरण के ख़िलाफ़ हमारी जंग जारी रहेगी। भाजपाई उपचुनाव हारे तो इन्होंने पेट्रोल-डीज़ल पर दिखावटी ही सही लेकिन थोड़ा सा टैक्स कम किया।''

''उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब की हार के डर से तीनों काले कृषि क़ानून वापस लेने पड़ रहे है। 26 नवंबर 2020 से किसान आंदोलनरत थे। बिहार विधानसभा चुनाव नतीजों के तुरंत पश्चात किसान हित में हम किसानों के समर्थन में सड़कों पर थे। इसी दिन किसान विरोधी नीतीश-भाजपा ने गाँधी मैदान में इन कृषि क़ानूनों का विरोध एवं किसानों का समर्थन करने पर मुझ सहित हमारे अनेक वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं पर केस दर्ज किया। अंततः सत्य और किसानों की जीत हुई।''
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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