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मंगलवार, 7 दिसम्बर 2021
 
 

द्विपक्षीय संबंधों पर भारत की स्थिति के संबंध में चीन को कोई संदेह नहीं होना चाहिए: एस जयशंकर

शनिवार, 20 नवम्बर, 2021  आई बी टी एन खबर ब्यूरो
 
 
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि द्विपक्षीय संबंधों पर भारत की स्थिति के संबंध में चीन को कोई संदेह नहीं होना चाहिए।

भारत के विदेश मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत और चीन के बीच सीमा को लेकर गतिरोध जारी है और बीते एक महीने से सैन्य कमांडर स्तर पर होने वाली बातचीत भी रुकी हुई है।

सिंगापुर में ब्लूमबर्ग न्यू इकनॉमिक फ़ोरम में बोलते हुए भारत के विदेश मंत्री ने कहा कि मुझे नहीं लगता है चीन को इस संबंध में कोई भी संदेह है कि द्विपक्षीय रिश्तों में हमारी स्थिति क्या है। या हम अपने संबंधों में कहां खड़े हैं। इस द्विपक्षीय संबंध में क्या है जो सही नहीं हुआ।

उन्होंने कहा, ''मैं अपने चीनी समकक्ष वांग यी के साथ कई बार मिला हूँ। जैसा कि आपने यह समझा होगा कि मैं बिल्कुल निष्पक्ष होकर बोलता हूँ, तार्किक बोलता हूँ और अपनी बात को पूरी स्पष्टता के साथ रखता हूँ तो ऐसे में अगर वह सुनना चाहते हैं तो मुझे पूरा यक़ीन है कि उन्होंने बिल्कुल सुना होगा।''

उन्होंने आगे कहा कि बेशक हम हमारे रिश्तों में एक ख़ास मुद्दे पर ख़राब दौर से गुज़र रहे हैं क्योंकि उन्होंने कुछ क़दम ऐसे उठाए हैं, जिससे हमारे बीच के समझौते का उल्लंघन हुआ।

इसे लेकर अब भी उनके पास कोई सटीक और विश्वसनीय स्पष्टीकरण नहीं है। यह बात एक बार फिर विचार करने के लिए मजबूर करती है कि आख़िर वे हमारे बीच के रिश्तों को कहाँ लेकर जाना चाहते हैं। लेकिन इसका जवाब उन्हें ही देना है।

अमेरिका के साथ संबंधों पर एस जयशंकर ने कहा कि आज की तारीख़ में अमेरिका कहीं अधिक सहज साझेदार है। एस जयशंकर ने कहा, ''वे नए विचारों का स्वागत करने के लिए तैयार हैं। बीते समय की तुलना में आज वे साथ मिलकर काम करने और विचारों को लेकर कहीं अधिक खुले हुए हैं।''

उन्होंने उन बातों को निराधार बताया कि अमेरिका की स्थिति अब पहले की तरह नहीं है।

उन्होंने कहा कि इसे किसी भी तरह से इस तरह नहीं देखा जाना चाहिए और मेरे हिसाब से यह निराधार और हास्यास्पद है।

इस सम्मेलन में शामिल हुए एस जयशंकर ने कहा कि यह सच है कि चीन विस्तार कर रहा है लेकिन चीन की प्रवृत्ति और उसके विस्तार का तरीक़ा बहुत अलग है और हम ऐसी स्थिति में नहीं हैं, जहां चीन अनिवार्य तौर पर अमेरिका की जगह ले।

हालांकि चीन और अमेरिका के बारे में सोचना स्वाभाविक है।

एस जयशंकर ने बदलते समीकरणों पर कहा कि असल बात यह है कि भारत समेत दुनिया के कई देश अब मैदान में आ चुके हैं।
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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