विदेश

स्पेन के प्रधानमंत्री ने अचानक आम चुनाव कराने का ऐलान किया

स्पेन के प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज़ ने सोमवार को अचानक आम चुनाव कराने का ऐलान किया है। 

स्पेन में अगला आम चुनाव 2027 की गर्मियों में होना तय था, लेकिन देश में अब 29 नवंबर 2026 को आम चुनाव होंगे। 

दरअसल, 87 वर्षीया एक महिला के घर का किराया अचानक बढ़ाए जाने का मामला सामने आने के बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए। इसके बाद सरकार ने आवास संकट से निपटने के लिए कई प्रस्ताव तैयार किए। 

पेद्रो सांचेज़ की सरकार ने आवास संकट से निपटने के लिए कुछ अहम प्रस्ताव पेश किए थे, लेकिन संसद में उन्हें समर्थन नहीं मिला और ये ख़ारिज हो गए थे। 

महिला का किराया 500 यूरो से बढ़ाकर 2,650 यूरो कर दिया गया था। 

बाद में इसे घटाकर 1,650 यूरो किया गया, लेकिन यह उनकी 1,350 यूरो की मासिक पेंशन से अब भी 300 यूरो अधिक था। इस मामले के सामने आने के बाद देश भर में प्रदर्शन हुए। 

 पेद्रो सांचेज़ 2018 से स्पेन के प्रधानमंत्री हैं। हालांकि अधिकतर सर्वेक्षणों में अगले चुनाव में कंज़रवेटिव पार्टी को सबसे अधिक सीटें मिलने का दावा किया गया है।  

इमरान ख़ान की रिहाई की मांग को लेकर हज़ारों समर्थकों का इस्लामाबाद की ओर मार्च

पाकिस्तान की जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की रिहाई की मांग को लेकर उनके हज़ारों समर्थक राजधानी इस्लामाबाद की ओर मार्च कर रहे हैं। 

इमरान ख़ान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ (पीटीआई) के समर्थकों का यह मार्च रविवार को ख़ैबर पख़्तूनख़्वा के लक्की मरवत शहर से शुरू हुआ था। यह शहर इस्लामाबाद से करीब 275 किलोमीटर दूर है। 

तहरीक-ए-इंसाफ़ के नेतृत्व में हो रहे इस प्रदर्शन का उद्देश्य सरकार पर इमरान ख़ान की रिहाई के लिए दबाव बनाना है। 

इस बीच 73 वर्षीय इमरान ख़ान की सेहत को लेकर चिंता भी बढ़ रही है। उनके परिवार का दावा है कि जेल प्रशासन की ओर से समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण उनकी दाईं आंख की अधिकांश रोशनी चली गई है। 

क्रिकेटर से राजनेता बने इमरान ख़ान पर 100 से अधिक मामले दर्ज हैं। पिछले साल भ्रष्टाचार के एक मामले में उन्हें 17 साल जेल की सज़ा सुनाई गई थी।  हालांकि, इमरान ख़ान लगातार इन मामलों को 'राजनीतिक रूप से प्रेरित' बताते रहे हैं। 

इस्लामाबाद की ओर होने वाला यह मार्च पहले पिछले सप्ताह प्रस्तावित था।  हालांकि, सरकार और इमरान ख़ान की पार्टी पीटीआई के बीच बातचीत का रास्ता खोलने के लिए इसे टाल दिया गया था। 

दोनों पक्षों के बीच हुई बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी और गतिरोध के बाद मार्च फिर शुरू किया गया। 

भारत और रूस के रिश्तों की नींव 1950 के दशक से ही मज़बूत रही है: जयशंकर

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत और रूस के संबंधों को लेकर कहा कि दोनों देशों के रिश्तों की नींव 1950 के दशक से ही मज़बूत रही है। 

62वीं म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में जयशंकर ने कहा कि बदलते समय के साथ भारत-रूस संबंधों का दायरा भी व्यापक हुआ। 

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, "भारत और रूस के ऐतिहासिक रूप से बहुत अच्छे रिश्ते रहे हैं, ख़ासकर 1950 के दशक से। उस इतिहास को भुलाया नहीं गया है... हमारे लिए सोवियत संघ, एक ऐसा देश था जो कई तरह से हमारे साथ खड़ा रहा, जब हमारी सुरक्षा और हमारी क्षेत्रीय अखंडता पर ख़तरा था। "

उन्होंने पाकिस्तान का नाम लिए बगैर कहा, "ऐसे समय में जब दुनिया के ज़्यादातर देश हमारे पड़ोस में एक सैन्य शासन का समर्थन करना पसंद कर रहे थे, रूस एक ऐसा देश था जिसके साथ हमारे बहुत अच्छे रिश्ते थे।"

उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध को 'दुर्भाग्यपूर्ण संघर्ष' बताते हुए कहा, "इस संघर्ष पर हमारा रुख़ बिल्कुल साफ़ रहा है कि हम इसका अंत देखना चाहते हैं। इसके लिए बातचीत और कूटनीति की ज़रूरत होगी। इस मामले में बातचीत होनी ज़रूरी है।"

एस जयशंकर ने कहा कि भारत युद्ध को रुकवाने के लिए दोनों देशों से बातचीत कर चुका है। 

ब्रिटेन के एयरबेस से अमेरिका ने सभी बॉम्बर विमान हटाए

ब्रिटेन के आरएएफ़ फ़ेयरफ़र्ड एयरबेस से अमेरिका ने अपने सभी बॉम्बर विमान हटा लिए हैं। यह वही ब्रिटिश सैन्य अड्डा है, जहां 27 सितंबर को हुई एक घटना की जांच काउंटर टेरर पुलिस कर रही है। 

अमेरिकी विभाग के एक अधिकारी ने रविवार को इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि एयरबेस पर तैनात सभी अमेरिकी बॉम्बर विमानों को वापस घरेलू ठिकानों पर भेज दिया है। हालांकि, अमेरिका ने विमानों को हटाने के पीछे कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया है। 

अमेरिका का यह फ़ैसला 27 सितंबर की उस घटना के बाद आया है, जब ग्लॉस्टरशायर स्थित आरएएफ़ फ़ेयरफ़र्ड एयरबेस के पास तीन संदिग्ध वाहनों की सूचना मिलने के बाद पुलिस को अलर्ट किया गया था। 

घटना के सिलसिले में शुरुआत में पांच लोगों को "आतंकवाद से जुड़े अपराधों" के संदेह में गिरफ़्तार किया गया था। हालांकि, बाद में उन्हें पुलिस ज़मानत पर रिहा कर दिया गया। इसके बाद ब्रिटिश-ईरानी नागरिक छठे व्यक्ति को भी गिरफ़्तार किया गया था, जिसे बाद में ज़मानत पर छोड़ दिया गया। 

व्हाइटहॉल के स्रोतों ने इस बात से इनकार नहीं किया है कि वॉशिंगटन का अपने बॉम्बर विमानों को हटाने का फ़ैसला फ़ेयरफ़र्ड एयरबेस की घटना के जवाब में लिया गया है। 

रिपोर्ट के मुताबिक़, यह फ़ैसला राजनीतिक स्तर पर नहीं बल्कि सैन्य और परिचालन स्तर पर लिया गया था। अमेरिकी सेना ने इस फ़ैसले की जानकारी अपने ब्रिटिश समकक्षों को दी थी। हालांकि, ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने इस मामले पर टिप्पणी नहीं की है। 

घटना के कुछ दिनों बाद प्रधानमंत्री एंडी बर्नम ने कहा था कि इस मामले में ईरान की भूमिका होने के "मज़बूत संकेत" मिले हैं। हालांकि, उन्होंने इसके समर्थन में कोई विस्तृत जानकारी साझा नहीं की थी। 

दूसरी ओर, ईरान ने इस घटना में किसी भी तरह की संलिप्तता से स्पष्ट रूप से इनकार किया है। 

भारत ने पाकिस्तान हाई कमीशन के कार्यवाहक राजदूत को तलब किया

भारतीय विदेश मंत्रालय ने शनिवार को पाकिस्तान हाई कमीशन के कार्यवाहक राजदूत को तलब किया। 

विदेश मंत्रालय ने बताया, 'पाकिस्तान से जारी अवैध सीमा पार घुसपैठ में मदद' को लेकर भारत ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। 

मंत्रालय ने 2 अक्तूबर 2026 को पंजाब के फ़िरोज़पुर सेक्टर में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर हुई घटना को लेकर पाकिस्तान की ओर से लगाए गए आरोपों को निराधार और दुर्भावनापूर्ण करार देते हुए ख़ारिज कर दिया। 

विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक बयान में बताया, "पाकिस्तान को बताया गया कि तीन लोग भारतीय क्षेत्र में घुस आए थे। बीएसएफ़ की ओर से पाकिस्तान लौटने की कई चेतावनियां दिए जाने के बावजूद वे सीमा पर लगी बाड़ की ओर बढ़ते रहे। सुरक्षा के लिए गंभीर ख़तरा पैदा होने के कारण बीएसएफ़ को उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई करनी पड़ी।"

भारत ने यह क़दम पाकिस्तान की ओर से इस्लामाबाद में भारतीय कार्यवाहक राजदूत को तलब किए जाने के कुछ घंटे बाद उठाया। 

पाकिस्तान ने दावा किया था कि 2 अक्तूबर 2026 को अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बेदियान सेक्टर में भारतीय सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ़) के जवानों ने 'दो पाकिस्तानी नागरिकों की हत्या' की है। 

हूती का सऊदी अरब में अरामको के तेल ठिकानों पर हमले का दावा

बीबीसी न्यूज़ फ़ारसी के मुताबिक, यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद में अरामको के तेल ठिकानों पर हमले का दावा किया है। 

न्यूज़ एजेंसियों के हवाले से बताया गया है कि इन हमलों में हूतियों ने बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल किया। 

हूतियों ने कहा है कि यह हमला सऊदी अरब की ओर से सना और यमन के अन्य क्षेत्रों पर किए गए हमलों के जवाब में किया गया। 

इससे पहले एक प्रत्यक्षदर्शी ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि शनिवार तड़के रियाद में अरामको के तेल ठिकाने के पास धुएं और आग देखी गई। 

सऊदी अरब के अधिकारियों ने अब तक अरामको के तेल ठिकानों पर हमले की पुष्टि नहीं की है।  वहीं, अरामको ने भी इस पर कोई जवाब नहीं दिया है। 

मदीना पर हमले के दावे के बाद, पाकिस्तान और क़तर ने निंदा की

यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन करने वाले सैन्य गठबंधन ने हूती विद्रोहियों पर मदीना में एक बिजली वितरण स्टेशन पर ड्रोन हमला करने का आरोप लगाया है। 

बीबीसी की अरबी सेवा के मुताबिक़, सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि 29 सितंबर, 2026 को सुबह 5 बजकर 11 मिनट पर मदीना में एक बिजली वितरण स्टेशन पर हमला किया गया। 

गठबंधन का कहना है कि घटना की जांच और इस्तेमाल किए गए ड्रोन के मलबे के आकलन के बाद वो इस निष्कर्ष पर पहुंचा। 

बयान में कहा गया है कि हमले से एक पावर ट्रांसफॉर्मर निष्क्रिय हो गया, लेकिन बिजली ट्रांसमिशन पर इसका असर नहीं पड़ा। 

सऊदी गठबंधन ने दावा किया कि जिस यूनिट को निशाना बनाया गया था वह मदीना में पैगंबर की मस्जिद को बिजली की सप्लाई करने वाले सिस्टम का हिस्सा थी। 

पाकिस्तान के विदेश कार्यालय का कहना है कि पाकिस्तान 29 सितंबर, 2026 को मदीना में हूती मिलिशिया की ओर से बिजली वितरण स्टेशन पर किए गए हमले की कड़ी निंदा करता है। 

विदेश कार्यालय ने एक बयान में कहा, "पैगंबर की मस्जिद को बिजली की सप्लाई करने वाले इस सिविल इलेक्ट्रिसिटी इन्फ़्रास्ट्रक्चर पर हमला एक गंभीर उकसावा है और दुनिया भर के लाखों मुसलमानों के लिए गहरी चिंता और दुख का कारण है।"

बयान में स्पष्ट किया गया कि "दो पवित्र मस्जिदों की पवित्रता और उपासकों और तीर्थयात्रियों की सुरक्षा का हर समय सम्मान किया जाना चाहिए।"

क़तर ने भी इस हमले की निंदा की है। 

क़तर के विदेश मंत्रालय ने इसे इस्लाम के पवित्र स्थलों की पवित्रता पर गंभीर हमला, मुसलमानों की भावनाओं को भड़काने की स्पष्ट कोशिश कहा है। 

उसने कहा है कि नागरिकों की जान की पूरी तरह अनदेखी, सऊदी अरब की संप्रभुता का खुला उल्लंघन है। 

उसने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय क़ानून के नियमों का गंभीर उल्लंघन भी है। 

मंत्रालय ने कहा कि ऐसी गैर-जिम्मेदाराना कार्रवाइयों को तुरंत रोका जाना चाहिए। 

डीज़ल की कमी के बीच ट्रंप ने निर्यात रोकने के संकेत दिए

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह यूरोपीय देशों से उनके डीजल भंडार का कुछ हिस्सा जारी करने के लिए कह सकते हैं। 

ट्रंप डीजल की कमी के बीच अमेरिका से इसके निर्यात पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहे हैं। 

ट्रंप की यह टिप्पणी अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के यूरोप से ऐसे भंडार तैयार रखने और जरूरत पड़ने पर उन्हें जारी करने के आग्रह के बाद आई है। 

बेसेंट ने कहा कि बढ़ती कीमतों का बोझ अमेरिकी किसानों, ट्रक चालकों और कारोबारियों पर नहीं डाला जाना चाहिए। 

ईरान में युद्ध के कारण बढ़ती कीमतों के बीच अमेरिका ने डीजल के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी है। 

अमेरिका में मध्यावधि चुनावों से पहले यह मुद्दा अमेरिकी मतदाताओं के लिए अहम बना हुआ है। 

गुरुवार को ब्रिटेन ने यूरोपीय साझेदारों के साथ संभावित प्रतिबंध की स्थिति में डीजल भंडार जारी करने को लेकर बातचीत की। 

अमेरिका दुनिया को डीजल की सप्लाई करने वाला एक अहम देश है। वह रोजाना 12 लाख से 15 लाख बैरल डीजल का निर्यात करता है। 

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि विदेशों में डीजल की सप्लाई पर प्रतिबंध लगाने से दूसरे देशों में कीमतों पर और दबाव पड़ सकता है। 

कैलिनिनग्राद को रूस से काटने की कोशिश हुई तो रूस परमाणु हथियारों के इस्तेमाल के लिए भी तैयार रहेगा: पुतिन

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि अगर रूस को लगता है कि उसके बाल्टिक क्षेत्र में स्थित कैलिनिनग्राद पर सीधे हमला हुआ है, तो वह अपने पास मौजूद सभी हथियारों का इस्तेमाल करेगा। 

पुतिन ने जोर देकर कहा कि रूस '' किसी को धमकी नहीं दे रहा" है। वह सिर्फ पश्चिमी नेताओं के उन बयानों का जवाब दे रहा है, जिनमें कहा गया है कि रूस 2029 या 2030 तक युद्ध की तैयारी कर रहा है। 

इस पूरे सप्ताह रूस ने नेटो पर अपने क्षेत्र की नाकाबंदी की तैयारी करने का आरोप लगाया है। 

कैलिनिनग्राद लिथुआनिया और पोलैंड के बीच स्थित है। रूस ने चेतावनी दी है कि अगर पश्चिम ने कैलिनिनग्राद को रूस के बाकी हिस्सों से काटने की कोशिश की, तो वह परमाणु हथियारों के इस्तेमाल के लिए भी तैयार रहेगा। 

नेटो ने स्थिति को शांत करने की कोशिश की है। उसने जोर देकर कहा है कि वह एक रक्षात्मक गठबंधन है और रूस से अपनी "परमाणु धमकियां" बंद करने को कहा है। 

हाल के महीनों में पश्चिमी सहयोगियों को तथाकथित हाइब्रिड युद्ध की घटनाओं में तेजी का सामना करना पड़ा है, जिनके पीछे रूस का हाथ होने का आरोप लगाया गया है। खास तौर पर पोलैंड और बाल्टिक देशों में ऐसी घटनाएं बढ़ी हैं। 

पिछले हफ्ते ही पोलैंड ने कहा था कि रूस का एक हेलिकॉप्टर कैलिनिनग्राद से लगे उसके इलाके में घुस आया था। वहीं, लिथुआनिया ने कहा था कि उसके लोग रूस की वजह से "लगातार खतरा महसूस कर रहे हैं"। इसकी एक वजह ड्रोन का उसके हवाई क्षेत्र में दाखिल होना भी है। 

ईरान पर ब्रिटेन के गंभीर आरोप पर अब्बास अराग़ची ने जवाब दिया

ब्रिटिश प्रधानमंत्री एंडी बर्नम ने कहा है कि सरकार को इस बात के 'मजबूत संकेत' मिले हैं कि आरएएफ़ फेयरफ़र्ड की घटना में ईरान की भूमिका थी। 

एंडी बर्नम ने ये दावा बीबीसी से बातचीत के दौरान किया है। हालांकि, उन्होंने इस दावे के संबंध में कोई विस्तृत जानकारी साझा नहीं की। 

दरअसल, हाल ही में ब्रिटेन के आरएएफ़ फेयरफ़र्ड एयरबेस के पास चरमपंथी हमले की साज़िश के संदेह में पांच लोगों को गिरफ़्तार किया गया था। यह मिलिट्री बेस अमेरिका से भी जुड़ा है। 

इसी घटना के पीछे ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने ईरान की भूमिका बताई है। 

ब्रिटिश प्रधानमंत्री के बयान पर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन के नेता गलत दिशा में देख रहे हैं। 

अब्बास अराग़ची ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, "पीएम बर्नम कहते हैं कि ब्रिटेन की सरकार इस बात की पुष्टि कर सकती है कि आरएएफ़ फेयरफर्ड की घटना में ईरान की भूमिका रही है। मैं ईरान के इस विश्वास की पुष्टि कर सकता हूँ कि दूसरे देशों के लिए काम करने वाले कथित आतंकवादियों को छोड़ना अपने आप में सब कुछ कह देता है। आप ग़लत जगह पर निशाना लगा रहे हैं।"

दरअसल, अराग़ची का इशारा था कि अभियुक्तों को ज़मानत पर क्यों छोड़ा गया है। यही सवाल बीबीसी ने भी पीएम एंडी बर्नम से पूछा। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि अभियुक्तों को जमानत की कड़ी शर्तों के साथ छोड़ा गया है। 

पीएम ने कहा, "मुझे लगता है कि लोगों को यह समझने की जरूरत है कि जब कहा जाता है कि उन्हें छोड़ दिया गया, तो इसका मतलब वैसा नहीं है, जैसा लोग सोच सकते हैं। जाहिर तौर पर उन पर सबसे कड़ी जमानत की शर्तें लागू हैं। अधिकारी इस मामले को बहुत सख्ती से संभाल रहे हैं और इस पर बहुत करीब से नजर रखी जा रही है। मैं आपको इसका भरोसा दिला सकता हूं।"