Current Affairs

अरीबा खान ने लोगों से अपने वार्ड की समस्याओं को लेकर बात की

शुक्रवार, 29 दिसम्बर, 2023 को कांग्रेस के स्थानीय नेता हिफजुर रहमान आज़मी के आवास पर वार्ड नंबर 188 की काउंसलर अरीबा खान ने लोगों से अपने वार्ड क...

धीरज प्रसाद साहू ने अपने घर से मिले 300 करोड़ रुपये के बारे में क्या कहा?

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शुक्रवार, 15 दिसंबर 2023

भारत में...

बीजेपी विधायक को बलात्कार केस में 25 साल जेल की सज़ा, 10 लाख रुपये का जुर्माना

बीजेपी विधायक को बलात्कार केस में 25 साल जेल की सज़ा, 10 लाख रुपये का जुर्माना

शुक्रवार, 15 दिसंबर 2023

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म्यांमार ने अफीम के उत्पादन में अफ़ग़ानिस्तान को पीछे छोड़ पहले स्थान पर पहुंचा

म्यांमार ने अफीम के उत्पादन में अफ़ग़ानिस्तान को पीछे छोड़ पहले स्थान पर पहुंचा

मंगलवार, 12 दिसंबर 2023

संय...

बिहार जातिगत सर्वे: 17.7 फ़ीसदी मुसलमान; हिंदू, बौद्ध और सिख कितने हैं?

भारत में बिहार की नीतीश सरकार ने आज जातिगत सर्वे के आंकड़े जारी कर दिए हैं। सर्वे के दौरान धर्म से जुड़े आंकड़े भी जुटाए गए इसकी भी जानकारी दी ग...

बिहार: नीतीश सरकार ने जातिगत सर्वे के आंकड़े जारी किए, अति पिछड़े 36 फ़ीसदी और पिछड़े 27 फ़ीसदी

भारत में बिहार सरकार ने जातीय जनगणना के आंकड़े जारी कर दिए हैं।  जनगणना के मुताबिक़ पिछड़ा वर्ग की आबादी 27.13 फ़ीसदी है। अति पिछड़ा वर्ग क...

जोकोविच ने यूएस ओपन जीता, 24 ग्रैंड स्लैम जीतने वाले टेनिस स्टार बने

टेनिस खिलाड़ी नोवाक जोकोविच ने डेनिल मेदवेदेव को हरा कर यूएस ओपन जीत लिया है और इसके साथ ही वो 24 ग्रैंड स्लैम जीतने वाले टेनिस स्टार बन गए हैं।...

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वैज्ञानिकों ने कैंसर के बेहतर इलाज के लिए अध्ययन में क्या पाया?

वैज्ञानिकों ने कैंसर के बेहतर इलाज के लिए अध्ययन में क्या पाया?

गुरुवार, 11 जनवरी 2024

इंग्लैंड में वैज्ञानिकों ने एक अध्ययन में पता लगाया है कि किसी मरीज के पूर्ण जेनेटिक मेकअप से कैंसर के बेहतर इलाज में सकारात्मक बदलाव हो सकते हैं।

ये अध्ययन नेचर मेडिसिन में प्रकाशित हुआ है। इसमें 13 हजार से ज़्यादा मरीजों की जानकारियों का विश्लेषण किया गया है।

इसमें ट्यूमर के विकास के पीछे म्यूटेशन का विश्लेषण और डीएनए का अध्ययन ये देखने के लिए किया गया है कि मरीज कहीं इस तरह के जीन के साथ पैदा तो नहीं हुआ जिसकी वजह से इस बीमारी का ख़तरा बढ़ गया।

अनुसंधानकर्ताओं ने पाया कि 90 फ़ीसदी से ज़्यादा मस्तिष्क ट्यूमर, 50 फ़ीसदी आंत और फेफड़े के कैंसर में जेनेटिक बदलाव होते हैं जिससे मरीज के इलाज जैसे कि सर्जरी और खास तरह के इलाज पर असर पड़ता है।

Weekly News

इसराइल-ग़ज़ा युद्धविराम: इसराइली पीएम नेतन्याहू का हमास की मांग मानने से इनकार

इसराइल-ग़ज़ा युद्धविराम: इसराइली पीएम नेतन्याहू का हमास की मांग मानने से इनकार

गुरुवार, 8 फरवरी 2024

इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने प्रस्तावित सीज़फ़ायर पर हमास की शर्तों को ये कहते हुए ख़ारिज कर दिया है कि- कुछ महीनों में ही ग़ज़ा पर ‘पूरी तरह’ जीत संभव है।

नेतन्याहू ने इसराइल समर्थित युद्धविराम प्रस्ताव के जवाब में हमास की कई मांगों को लेकर ये बात कही है।

नेतन्याहू ने कहा कि हमास के साथ बातचीत 'किसी ओर आगे नहीं बढ़' रही है और समूह जो मांग रख रहा है वो 'अजीबोगरीब' है।

सीज़फ़ायर को लेकर बातचीत अब भी चल रही है ताकि किसी डील पर पहुंचा जा सके।

बुधवार, 7 फरवरी 2024 को नेतन्याहू ने मीडिया से बात करते हुए कहा, ''ग़ज़ा पर पूरी तरह जीत के अलावा इसका कोई दूसरा निष्कर्ष नहीं है।  अगर हमास ग़ज़ा में बचा रहता है तो अगला जनसंहार कभी भी हो सकता है।''

माना जा रहा था कि इसराइल हमास की शर्तों पर बातचीत करेगा लेकिन प्रधानमंत्री नेतन्याहू के इस बयान ने साफ़ तौर पर इस तरह की संभावनाओं को ख़त्म दिया।

इसराइली आधिकारियों का कहना है कि हमास इस युद्ध का अंत अपनी शर्तों पर चाहता है जो उसे पूरी तरह नामंज़ूर है।

हमास के वरिष्ठ अधिकारी सामी अबू ज़ुहरी ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा है कि नेतन्याहू की टिप्पणी "राजनीतिक घमंड का एक रूप है", और दिखाती है कि वह क्षेत्र में संघर्ष को आगे बढ़ाना चाहते हैं।

मिस्र के एक आधिकारिक सूत्र ने बीबीसी को बताया कि मिस्र और क़तर की मध्यस्थता में गुरुवार, 8 फरवरी 2024 को राज़धानी काहिरा में बातचीत का नया दौर शुरू होने की उम्मीद है।

मिस्र के एक आधिकारिक सूत्र ने बताया कि मिस्र ने सभी पक्षों से शांतिपूर्ण समझौते पर पहुंचने के लिए सहयोग की अपील की है।

रॉयटर्स के अनुसार हमास की शर्तें हैं-

पहला चरण- युद्ध में 45 दिनों का विराम, जिस दौरान सभी इसराइली महिला बंधकों, 19 साल से कम उम्र के पुरुष बंधकों, बुजुर्गों और बीमारों को छोड़ा जाएगा। बदले में इसराइली जेलों में बंद फ़लीस्तीनी महिलाओं और बच्चों को रिहा किया जाए। इसराइली सेना ग़ज़ा के आबादी वाले इलाकों से हट जाए और अस्पतालों और शरणार्थी शिविरों का पुनर्निर्माण हो।

दूसरा फ़ेज़- जो बचे हुए इसराइली बंधक हैं वो तब छोड़े जाएंगे जब इसराइली सेना पूरी तरह ग़ज़ा से निकल जाएगी।

तीसरा फ़ेज़- दोनों ही पक्ष मारे गए लोगों के शव और उनके सामान एक दूसरे को देंगे।

हमास के द्वारा संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार अब तक ग़ज़ा में 27,700 लोगों की मौत हो चुकी है और 65000 घायल हैं।


भारत म्यांमार से सटी 1643 किलोमीटर लंबी सीमा पर बाड़बंदी करवाएगी

भारत म्यांमार से सटी 1643 किलोमीटर लंबी सीमा पर बाड़बंदी करवाएगी

मंगलवार, 6 फरवरी 2024

भारत की केंद्र सरकार ने म्यांमार से सटी 1643 किलोमीटर लंबी सीमा पर बाड़बंदी करवाने का निर्णय लिया है। भारत के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ट्वीट कर के इसकी जानकारी दी।

अमित शाह ने कहा कि इससे सीमा पर बेहतर सर्विलांस, पेट्रोलिंग और ट्रैकिंग की जा सकेगी। अमित शाह ने कहा कि भारत के राज्य मणिपुर के मोरेह में 10 किलोमीटर लंबी सीमा की बाड़बंदी की जा चुकी है।

अमित शाह ने बताया, "हाइब्रिड सर्विलांस सिस्टम (एचएसएस) के ज़रिए बाड़बंदी के दो पायलट प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है। भारत के राज्यों अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर में एक किलोमीटर लंबी सीमा को इसके तहत बाड़बंद किया जाएगा।''

अमित शाह ने कहा कि मणिपुर में करीब 20 किलोमीटर लंबी बाड़बंदी को मंज़ूरी मिल गई है और इस पर जल्द काम शुरू हो जाएगा।

बाड़बंदी की ये घोषणा ऐसे समय में हुई है जब पिछले कई महीनों से मणिपुर में हिंसा जारी है। मणिपुर राज्य की करीब 400 किलोमीटर लंबी सीमा म्यांमार से लगती है। हाल ही में मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बिरेन सिंह ने पिछली केंद्र सरकारों पर पूर्वोत्तर के राज्यों की अनदेखी करने का आरोप लगाया था।

भारत ने अपने नागरिकों से म्यांमार के रखाइन प्रांत की यात्रा न करने को कहा

मंगलवार, 6 फरवरी 2024

भारत ने अपने नागरिकों से म्यांमार के रखाइन प्रांत की यात्रा न करने को कहा है। इस संबंध में भारत के विदेश मंत्रालय ने एक एडवाइज़री जारी की है।

भारत के विदेश मंत्रालय की एडवाइज़री के अनुसार, "सुरक्षा स्थिति के बिगड़ने, लैंडलाइन सहित अन्य संचार सेवाओं के बाधित होने और बुनियादी सामान की भारी कमी के कारण सभी भारतीयों को ये सलाह दी जाती है कि वे म्यांमार के रखाइन प्रांत न जाएं।''

"जो भारतीय पहले से रखाइन प्रांत में मौजूद हैं, उन्हें फ़ौरन ये इलाक़ा खाली कर देना चाहिए।''

रखाइन प्रांत में साल 2016 से ही हिंसा जारी है। हालांकि, हालिया दिनों में रखाइन प्रांत में म्यांमार की सैन्य सत्ता और विद्रोही गुट अराकन आर्मी (एए) के बीच संघर्ष और तेज़ हुआ है।

बांग्लादेश के सीमावर्ती इलाक़े में दो लोगों की मौत, बांग्लादेश ने म्यांमार के राजदूत को तलब किया

बांग्लादेश के सीमावर्ती इलाक़े में दो लोगों की मौत, बांग्लादेश ने म्यांमार के राजदूत को तलब किया

मंगलवार, 6 फरवरी 2024

बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने सीमा पार से दागे गए मार्टार की वजह से हुई दो मौतों को लेकर म्यांमार के राजदूत को तलब किया है।

म्यांमार की सेना और विद्रोही गुटों के बीच बढ़े संघर्ष की वजह से बांग्लादेश के कुछ सीमावर्ती गाँवों में दहशत का माहौल बन गया है।

म्यांमार की सेना के कई और सैनिक भागकर बांग्लादेश चले गए हैं।  बांग्लादेश में म्यांमार से भागकर आए ऐसे नागरिकों और सैनिकों की संख्या बढ़कर 229 हो गई है।

अराकान विद्रोहियों ने कथित तौर पर सीमा पर कई ठिकानों पर कब्ज़ा कर लिया है।

मामला क्या है?

बांग्लादेश में सोमवार, 5 फरवरी 2024 की सुबह म्यांमार से दागी गई मोर्टार से कम से कम दो लोगों की मौत हो गई थी।

बांग्लादेश से सटी 270 किलोमीटर लंबी म्यांमार के सीमावर्ती इलाकों में नवंबर 2023 से ही हिंसक संघर्ष जारी है, जब विद्रोही अराकान आर्मी (एए) के लड़ाकों ने 2021 के तख्तापलट के बाद से चल रहे सीज़फायर को खत्म करने का ऐलान किया।

समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार म्यांमार की सीमा से सटे बांग्लादेश के गाँव में रहने वालों का कहना है कि वे इस संघर्ष की वजह से भय के माहौल में जी रहे हैं।

बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (बीजीबी) ने मंगलवार, 6 फरवरी 2024 को कॉक्स बाज़ार ज़िले के उखिया में शरण मांगने वाले म्यांमार के बॉर्डर गार्ड पुलिस के सैनिक को हिरासत में लिया।

सहायता एजेंसी डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स का कहना है कि उन्होंने रविवार, 4 फरवरी 2024 को हिंसक संघर्ष में घायल 17 लोगों का इलाज किया है।

डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स ने सोमवार, 5 फरवरी 2024 को बताया कि सभी घायलों को गोली लगी थी। इनमें से दो की जान को ख़तरा था और पाँच गंभीर रूप से घायल थे।

स्थानीय पुलिस चीफ़ अब्दुल मन्नान ने कहा कि 48 वर्षीया बांग्लादेशी महिला, जिनका नाम हुस्ने आरा था, उनकी सोमवार, 5 फरवरी 2024 को मौत हो गई। उनके अलावा एक अज्ञात रोहिंग्या शख्स की भी सोमवार, 5 फरवरी 2024 की दोपहर को मौत हुई है।

हुस्ने आरा की बहू ने कहा, "वे लोग किचन में बैठे थे..जब अचानक मोर्टार आकर गिरा। वह उस रोहिंग्या शख्स को खाना परोस रही थीं। उस शख्स को हमने अपने खेत की देखरेख के लिए काम पर रखा था।''

डच पैरेंट कंपनी ने 'रूस का गूगल' कहे जाने वाले यांडेक्स की रूसी इकाई को बेचा

डच पैरेंट कंपनी ने 'रूस का गूगल' कहे जाने वाले यांडेक्स की रूसी इकाई को बेचा

मंगलवार, 6 फरवरी 2024

'रूस का गूगल' कहे जाने वाले यांडेक्स के मालिक ने कहा है कि कंपनी ने अपना रूस का ऑपरेशन बेच दिया है।

यांडेक्स की डच पैरेंट कंपनी ने कहा है कि उसने रूस के ऑपरेशन को 475 अरब रूबल में बेच दिया है। ये कीमत यांडेक्स की मार्केट कीमत से काफ़ी कम है।

इस बिक्री के साथ ही ये तय हो चुका है कि यांडेक्स के रूस के बिजनेस का मालिकाना हक अब पूरी तरह रूस के ही साथ होगा।

इस कंपनी पर आरोप थे कि इसने यूक्रेन में युद्ध की जानकारी रूस के आम लोगों से छुपायी।

रूस ने इस नए सौदे का स्वागत किया है। कंपनी ने कहा है कि यह "डील 18 महीने से अधिक की योजना और बातचीत की व्यापक अवधि के बाद हुई है।''

सूचना नीति पर रूसी संसद की समिति के उप प्रमुख एंटोन गोरेल्किन ने कहा, "यह वही है जो हम कुछ साल पहले हासिल करना चाहते थे जब यांडेक्स पर पश्चिमी आईटी कंपनियों के कब्ज़े का खतरा था।''

"यांडेक्स कंपनी से कहीं ज़्यादा है, ये रूस के समाज के लिए एक संपत्ति की तरह है।''

माना जाता है कि 5.2 अरब डॉलर का सौदा यांडेक्स की मार्केट कीमत से काफी कम है। एक अनुमान के अनुसार 2021 में इसकी कीमत 30 अरब डॉलर थी।

अमेरिका ने भारत के साथ चार अरब डॉलर के ड्रोन समझौते को मंज़ूरी दी

अमेरिका ने भारत के साथ चार अरब डॉलर के ड्रोन समझौते को मंज़ूरी दी
 
शुक्रवार, 2 फरवरी 2024

भारत को 31 अत्याधुनिक हथियारबंद ड्रोन देने के चार अरब डॉलर के समझौते को अमेरिकी विदेश विभाग ने मंज़ूरी दे दी है।

जून 2023 में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिकी यात्रा के दौरान एमक्यू-9बी प्रीडेटर ड्रोन के समझौते की घोषणा हुई थी।

अमेरिका में एक भारतीय की हत्या की कथित साज़िश की जांच के कारण सीनेट कमेटी ने दिसम्बर 2023 में इस समझौते पर रोक लगा दी थी।

अब इस समझौते को अमेरिकी कांग्रेस ने मंज़ूरी दे दी है।

पेंटागन ने कहा कि इस समझौते में 31 हथियारबंद एमक्यू-9बी स्काईगार्डियन ड्रोन, 170 एजीएएम-114आर हेलफ़ायर मिसाइलें और 310 छोटे व्यास वाले बम, कम्युनिकेशन और सर्विलांस उपकरण और प्रिसीशन ग्लाइड बम की बिक्री शामिल है।

इस समझौते का प्रमुख कॉन्ट्रैक्टर जनरल एटोमिक्स एरोनॉटिक्स सिस्टम्स होगा।

समाचार एजंसी रॉयटर्स के अनुसार, सीनेटर बेन कार्डिन ने कहा कि अमेरिकी सरकार द्वारा गुरपतवंत सिंह पन्नू हत्या की साज़िश की पूरी जांच करने पर सहमति के बाद ही इस समझौते को अंतिम रूप दिया गया।

सीनेटर बेन कार्डिन ने बताया, "बाइडेन प्रशासन ने मांग की है कि अमेरिकी धरती पर साज़िश को लेकर जांच और जवाबदेही तय होनी चाहिए और इस तरह की गतिविधियों को लेकर भारत में भी जवाबदेही तय होनी चाहिए।''

साल 2023 में अमेरिका ने भारत सरकार पर, खालिस्तान का समर्थन करने वाले एक अमेरिकी नागरिक की हत्या की साज़िश रचने का आरोप लगाया था।

गुरुवार, 1 फरवरी 2024 को पेंटागन ने कहा कि "अमेरिका-भारत रणनीतिक रिश्ते को मजबूत करने के लिए, भारत के साथ प्रस्तावित यह ड्रोन समझौता अमेरिका की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा लक्ष्यों में मदद करेगा।''

इसराइल की ग़ज़ा नीति के ख़िलाफ़ पश्चिमी देशों के सैकड़ों ब्यूरोक्रेट्स

इसराइल की ग़ज़ा नीति के ख़िलाफ़ पश्चिमी देशों के सैकड़ों ब्यूरोक्रेट्स

शुक्रवार, 2 फरवरी 2024

अमेरिका और यूरोप में काम कर रहे सैकड़ों अधिकारियों ने एक साझा बयान में अपनी-अपनी सरकारों को इसराइल की ग़ज़ा नीति को लेकर आगाह किया है।

उनका कहना है कि इसराइल की ग़ज़ा नीति से अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों का गंभीर उल्लंघन हो सकता है। इस साझा बयान पर अमेरिका और यूरोप के 800 से अधिक सेवारत अधिकारियों ने अपने दस्तखत किए हैं।

बयान में कहा गया है कि "इस सदी की सबसे भीषण मानवीय तबाही में शामिल होने का जोख़िम उनकी सरकारों ने उठाया है और उनकी विशेषज्ञ सलाह को दरकिनार कर दिया गया।''

पश्चिम में इसराइल के कुछ प्रमुख सहयोगी देशों की सरकारों में उसे लेकर बड़े स्तर पर असंतोष के ये ताज़ा संकेत हैं। इस बयान पर दस्तख़त करने वाले एक व्यक्ति अमेरिकी सरकार में काम कर रहे हैं।

उनके पास राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में काम करने का 25 साल से अधिक समय का अनुभव रहा है। उन्होंने बीबीसी को बताया कि उनकी चिंताएं लगातार खारिज कर दी गईं।

नाम न जाहिर करने की शर्त पर उन्होंने कहा, "जो लोग उस क्षेत्र को और उसकी स्थितियों को समझते हैं, उनकी आवाज़ों को अनसुना किया जा रहा है। जो हो रहा है, अगर हम उसे नहीं रोक पा रहे हैं तो हम कैसे अलग हैं।  हम इसमें सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। ये किसी अन्य हालात से पूरी तरह से अलग है।''

इस ट्रांसअटलांटिक स्टेटमेंट पर अमेरिका, यूरोपीय संघ और ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी समेत यूरोप के 11 देशों के नौकरशाहों ने दस्तखत किए हैं।

उनके साझा बयान में कहा गया है कि ग़ज़ा में अपने मिलिट्री ऑपरेशंस में इसराइल ने किसी मर्यादा का पालन नहीं किया है। इस वजह से वहां हज़ारों आम लोगों की मौत हुई है जिसे रोका जा सकता था। वो जानबूझकर ग़ज़ा में सहायता सामाग्री पहुंचने से रोक रहा है। इससे बड़े पैमाने पर लोगों के भुखमरी का शिकार होने का ख़तरा मंडराने लगा है।

वाराणसी: ज्ञानवापी मस्जिद में स्थित व्यास तहखाने में आज से पूजा शुरू हुई

वाराणसी: ज्ञानवापी मस्जिद में स्थित व्यास तहखाने में आज से पूजा शुरू हुई

गुरुवार, 1 फरवरी 2024

भारत के राज्य उत्तरप्रदेश के वाराणसी की ज़िला अदालत के बुधवार, 31 जनवरी 2024 को दिए फ़ैसले को लागू करते हुए ज़िला प्रशासन ने गुरुवार, 1 फरवरी 2024 की सुबह ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में स्थित व्यास तहखाने में पूजा अर्चना शुरू करवा दी।

वाराणसी के ज़िलाधिकारी एस रा​जलिंगम ने गुरुवार, 1 फरवरी 2024 के तड़के पत्रकारों को इसकी जानकारी दी।

एस रा​जलिंगम ने कहा, "मुझे न्यायालय का जो ऑर्डर है, उसका कंप्लायन्स (पालन) किया गया।''

वहीं ज्ञानवापी परिसर स्थित व्यास तहखाने के सामने की बैरिकेडिंग के बारे में पूछे गए सवाल के उत्तर में एस रा​जलिंगम ने फिर यही कहा कि 'कोर्ट के ऑर्डर का कंप्लायन्स' किया गया।

पत्रकारों ने जब एस रा​जलिंगम से पूछा कि क्या पूजा कराई गई तो एस राजलिंगम ने फिर वही जवाब दिया, "कोर्ट ने जो बोला है उसका कंप्लायन्स किया गया।''

इसे एक संयोग कहे या पूर्व नियोजित योजना कहे कि आज (गुरुवार, 1 फरवरी 2024) से 38 साल पहले 1986 में अयोध्या के बाबरी मस्जिद का ताला 1 फरवरी को ही खोला गया था।

वहीं इस मामले के एक वादी और वकील सोहन लाल आर्य ने गुरुवार, 1 फरवरी 2024 को एएनआई से हुई बातचीत में पुष्टि की है कि व्यास तहखाने में जाने का रास्ता बन गया है, लेकिन दर्शन करने वालों को अभी वहां जाने की इजाज़त नहीं है।

सोहन लाल आर्य ने कहा, "आज (गुरुवार, 1 फरवरी 2024) का दिन बहुत गौरवान्वित क्षण लग रहा है। हमारा रोम रोम पुलकित है। ज़िला जज का कल (बुधवार, 31 जनवरी 2024) का फ़ैसला अभूतपूर्व लगा। अभी वहां की सारी व्यवस्थाएं पूरी हैं लेकिन अभी वहां (व्यास का तहखाना) जनता को दर्शन करने नहीं दिया जा रहा है। इस क्षण का हम 40 सालों से इंतज़ार कर रहे थे।''

सोहन लाल आर्य के अनुसार, "अभी नंदी के बगल से (उत्तर की ओर) बाबा के तहखाने की ओर जाने के लिए अलग से दरवाज़ा बन गया है। वहां पर तीन पुलिसकर्मी थे। उनसे हमने कहा कि दर्शन करने दिया जाए। इस पर उन्होंने कहा कि अभी दर्शन पूजन का अधिकार नहीं है, जैसे ही मिलेगा सभी दर्शनार्थियों को वहां जाने दिया जाएगा।''

इससे पहले, बहुत जल्दी दिखाते हुए वाराणसी के डीएम एस राजलिंगम के साथ पुलिस और प्रशासन के अन्य आला अधिकारी बुधवार, 31 जनवरी 2024 को लगभग रात 11 बजे काशी कॉरिडोर के गेट नंबर चार से अंदर गए। वहां से ज्ञानवापी परिसर के भीतर जाने का रास्ता है।

वहीं ज्ञानवापी परिसर के चारों ओर लगे बैरिकेड में से कुछ हिस्सा काटकर विश्वनाथ मंदिर परिसर स्थित नंदी की प्रतिमा के सामने से रास्ता बनाने के लिए कई मजदूर वहां पहुंचे।

भारी संख्या में पुलिस के जवान भी वहां तैनात किए गए। वाराणसी के पुलिस कमिश्नर अशोक जैन ने बताया कि क़ानून और व्यवस्था के सारे इंतज़ाम किए गए।

तक़रीबन तीन घंटे बाद गुरुवार, 1 फरवरी 2024 को अहले सुबह 2 बजे डीएम एस राजलिंगम ने परिसर से बाहर आकर मीडिया को बताया, ''न्यायालय के आदेश का कंप्लायन्स किया गया।''

वाराणसी की ज़िला अदालत ने बुधवार, 31 जनवरी 2024 को सुनाया था आदेश

बुधवार, 31 जनवरी 2024 को वाराणसी की ज़िला अदालत ने हिंदू पक्ष को ज्ञानवापी मस्जिद के व्यास तहखाने में पूजा का अधिकार दे दिया था।

वाराणसी की ज़िला अदालत ने अपने आदेश में लिखा था, "ज़िला मजिस्ट्रेट, वाराणसी/रिसीवर को निर्देश दिया जाता है कि वह सेटेलमेंट प्लॉट नं-9130 थाना- चौक, ज़िला वाराणसी स्थित भवन के दक्षिण की तरफ स्थित तहखाने, जो कि वादग्रस्त संपत्ति है, वादी तथा काशी विश्वनाथ ट्रस्ट बोर्ड, पुजारी से तहखाने में स्थित मूर्तियों का पूजा, राग-भोग शुरू कराए।''

अदालत ने इस आदेश को लागू करने के लिए प्रशासन को 7 दिन का समय दिया था। लेकिन जिला प्रशासन ने बहुत जल्दी दिखाते हुए 12 घंटे पूरा होते होते कोर्ट के इस आदेश का पालन किया।

काश, भारत के राज्यों के जिला प्रशासन (खासकर वाराणसी का जिला प्रशासन) विकास के कार्यों में इतनी तत्परता दिखाते तो भारत का हर जिला विकसित जिला होता और भारत एक विकसित देश होता। भारत भयंकर गरीबी, भुखमरी और बेरोजगारी की समस्याओं से गंभीर रूप से जूझ रहा है। लेकिन इस ओर भारत और उसके राज्यों की विधायिकाओं और कार्यपलिकाओं का ध्यान नहीं। भारत की राजनीति धार्मिक मुद्दों, धार्मिक आस्था और धार्मिक भावनाओं पर केंद्रित हो गई है। जिसका खामियाजा भारत के अधिकांश लोग भयंकर गरीबी, भुखमरी और बेरोजगारी की जैसी समस्याओं के रूप में झेल रहे हैं।

हालांकि ज्ञानवापी मस्जिद पक्ष ने वाराणसी की ज़िला अदालत के फ़ैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती देने का ऐलान किया है।

इतना तो तय है कि वाराणसी की ज़िला अदालत के इस फैसले से भारत में हिन्दू और मुस्लिम के बीच सांप्रदायिक तनाव बढ़ेगा। जिस प्रकार कोर्ट के फैसले से बाबरी मस्जिद का ताला खोलने के बाद भारत सांप्रदायिकता की आग में दशकों से जल रहा है। अभीतक भारत में सांप्रदायिकता की यह आग बुझी नहीं है कि वाराणसी की ज़िला अदालत के इस फैसले ने भारत को सांप्रदायिकता की आग में दशकों के लिए झोंक दिया। आने वाले वक़्त में क्या होगा? कोई नहीं जनता, लेकिन इतना तो तय है कि भविष्य के भारत पर इसका बुरा असर होगा। भारत का भविष्य अच्छा हो, इसके लिए जरूरी है कि भारत की विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका को बिना सोचे-समझे या किसी एजेंडा के तहत कोई ऐसा विवादास्पद काम और फैसला करने से परहेज करना चाहिए जिससे भारत में आंतरिक अशांति फैले या भारत का भविष्य खतरे में पड़ जाये।

हमारे सामने मणिपुर हाई कोर्ट के द्वारा दिए फैसले का उदाहरण है जिसकी वजह से मणिपुर पिछले कई महीनों से मैतेई (हिन्दू, सनातन धर्म के अनुयायी) और कुकी आदिवासी (ईसाई) के बीच बड़े पैमाने हिंसा का शिकार है। इस हिंसा से लाखों लोग विस्थापित हुए और सैकड़ों लोग मारे गए। कई महिलाओं का बलात्कार हुआ और कई महिलाओं को नंगा घुमाया गया। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मणिपुर हिंसा की वजह से भारत को व्यापक आलोचना और विरोध का सामना करना पड़ा।