कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा है कि अल्बर्टा के लोगों ने स्वतंत्रता पर जनमत संग्रह के प्रस्ताव को ख़ारिज करने के लिए 'स्पष्ट फैसला' दिया है।
उन्होंने कहा, "19 अक्तूबर को अल्बर्टा के लोगों ने स्पष्ट फैसला दिया। उन्होंने एकता को चुना, मिलकर आगे बढ़ने और एक-दूसरे का ख्याल रखने का फ़ैसला किया। सबसे बढ़कर, अल्बर्टा के लोगों ने कनाडा को चुना।"
कार्नी ने कहा, "अब हमारे पास यह अवसर है कि कनाडाई होने के नाते हमें जो कुछ मिला है, उसका पूरा लाभ उठाएं। और हमें दुनिया का सबसे महान देश मिला है। अब हमें अपने देश को हम सभी के लिए और बेहतर बनाना है।"
अल्बर्टा की आज़ादी के लिए ज़रूरी जनमत संग्रह के लिए हुई वोटिंग के शुरुआती नतीजों में 76.5% मतदाताओं ने कनाडा में बने रहने के पक्ष में वोट दिया है।
अल्बर्टा, कनाडा का एक अहम तेल उत्पादक पश्चिमी प्रांत है। अल्बर्टा के लोगों ने इस सवाल पर वोट दिया है कि उन्हें कनाडा में बने रहना चाहिए या इस प्रांत को कनाडा से अलग हो जाने के लिए ज़रूरी जनमत संग्रह कराया जाना चाहिए।
परंपरागत रूप से कंजर्वेटिव समर्थक रहे इस प्रांत में अलगाव के समर्थक, प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की लिबरल सरकार से नाराज़ हैं।
कनाडा पहले भी अपनी एकता को लेकर ख़तरों का सामना कर चुका है, जिनमें कभी-कभी हिंसा भी शामिल रही है।
क्यूबेक प्रांत में 1980 और 1995 में स्वतंत्रता को लेकर दो जनमत संग्रह हुए थे। दोनों में स्वतंत्रता के पक्ष में प्रस्ताव सफल नहीं हुआ।
अल्बर्टा की स्वतंत्रता के समर्थक इस बात को नहीं छिपाते कि उन्हें फ्रेंच भाषी बहुसंख्यक आबादी वाले क्यूबेक प्रांत से प्रेरणा मिलती है।