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राष्ट्रपति चुनाव: राम नाथ कोविंद के खिलाफ संयुक्त उम्मीदवार उतार सकता है विपक्ष

भारतीय जनता पार्टी ने सोमवार को बिहार के राज्यपाल राम नाथ कोविंद को एनडीए का राष्ट्रपति उम्मीदवार घोषित कर दिया। हालांकि विपक्ष कोविंद के नाम पर समर्थन के मूड में नजर नहीं आ रहा है।

कहा जा रहा है कि एनडीए के उम्मीदवार के खिलाफ विपक्ष अपना कैंडिडेट खड़ा करेगा और इसकी तलाश भी शुरू कर दी गई है। कयास लग रहे हैं कि कोविंद के खिलाफ विपक्ष किसी दलित चेहरे को ही उम्मीदवार बनाएगा।

मायावती की पार्टी बहुजन समाज पार्टी और ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस अपने अगले कदम को लेकर संशय में है। वहीं, लेफ्ट पार्टियों के अंदर चर्चा है कि कोविंद के खिलाफ विपक्ष एक ज्वाइंट उम्मीदवार खड़ा कर सकता है।

इंडिया टुडे ने अपने सूत्रों के हवाले से बताया, ''कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष में राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के तौर पर चार लोगों का नाम शॉर्टलिस्ट किया गया है। जिन नामों की चर्चा है, उनमें सबसे आगे लोकसभा की पूर्व स्पीकर मीरा कुमार, पूर्व गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे, प्रकाश यशवंत आंबेडकर और पूर्व नौकशाह गोपाल कृष्ण गांधी है।

प्रकाश यशवंत आंबेडकर, संविधान निर्माता डॉक्टर भीमराव आंबेडकर के पौत्र और यशवंत भीमराव अम्बेडकर के पुत्र हैं।

वहीं, गोपाल कृष्ण गांधी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के पोते हैं और रिटायर्ड आईएएस हैं। गांधी 2004 से 2009 तक पश्चिम बंगाल के राज्यपाल भी रह चुके हैं। उम्मीद की जा रही है कि विपक्ष 22 जून को बैठक करेगा और उसके बाद उम्मीदवार का ऐलान करेगा।

टीवी रिपोर्ट्स के मुताबिक, राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के लिए भारत के जाने-माने कृषि वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन का नाम भी सामने आ रहा है। कहा जा रहा है कि स्वामीनाथन के नाम पर भी कांग्रेस विचार कर रही है। इसे एनडीए में फूट डालने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है। एनडीए में बीजेपी की सहयोगी पार्टी शिवसेना पहले भी स्वामीनाथन के नाम को आगे बढ़ा चुकी है। ऐसे में कांग्रेस को उम्मीद है कि अगर स्वामीनाथन का नाम राष्ट्रपति के लिए आगे आता है तो शिवसेना उसका समर्थन कर सकती है।

शिवसेना ने कोविंद को राष्ट्रपति उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद सवाल उठाए थे। पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि अगर सिर्फ दलित वोटों के लिए कोविंद को चुना गया है तो वह एनडीए उम्मीदवार का समर्थन नहीं करेगी। इससे देश को कोई लाभ नहीं होगा। शिवसेना ने कभी किसी को ढाल बनाकर राजनीति नहीं की।

किसान योगदिवस पर विरोध जताएंगे

भारतीय किसान यूनियन ने केंद्र सरकार के खिलाफ 21 जून को योग दिवस पर लखनऊ की सड़कों पर शवासन कर योग दिवस मनाने का निर्णय लिया है। योग दिवस के दिन जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लखनऊ में योग करेंगे, तब किसान वहां की सड़कों पर विरोध में शवासन करते हुए मिलेंगे।

भारतीय किसान यूनियन का आरोप है कि केंद्र सरकार की गलत नीतियों की वजह से किसान आज मरणावस्था में पहुंच गया है। हरिद्वार में गंगा के तट पर स्थित लालकोठी परिसर में भारतीय किसान यूनियन की तीन दिवसीय राट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में किसानों ने केंद्र सरकार की जमकर निंदा की। एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को किसान विरोधी करार दिया और केंद्र की किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ 31 जुलाई को लखनऊ में किसान महापंचायत करने और पंचायत के बाद दिल्ली कूच करने का फैसला लिया है।

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार हर मोर्चे पर नाकाम साबित हो रही है। किसानों के भले के लिए केंद्र सरकार ने जितने भी वादे किए थे, उनमें से एक भी वादा पूरा नहीं किया गया है। बैठक में केंद्र सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई लड़ने का ऐलान किया गया। बैठक में किसानों ने उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड और मध्यप्रदेश की सरकार को सिरे से किसान विरोधी बताया।

बैठक में प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर हत्या का मुकदमा दर्ज करने, स्वामीनाथन की रिपोर्ट लागू करने, राज्यों में बिजली और खेती से जुड़े हुए उपकरणों की बढ़ी कीमत वापस लेने की मांग की गई।

भारतीय किसान यूनियन ने बीजेपी की मानसिकता को किसान विरोधी बताया। भारतीय किसान यूनियन ने केंद्र सरकार से खेती से जुड़े उत्पादों का लाभकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करने की मांग की।

भारतीय किसान यूनियन ने हरिद्वार के जिला प्रशासन के मार्फत उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को पिथौरागढ़ के किसान द्वारा की गई आत्महत्या के विरोध में ज्ञापन सौंपा।

राष्ट्रपति चुनाव: दलित नेता मीरा कुमार बन सकती है कांग्रेस की उम्मीदवार

बीजेपी द्वारा बिहार के मौजूदा गवर्नर और दलित नेता राम नाथ कोविंद को राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाए जाने के बाद अब कांग्रेस भी राष्ट्रपति चुनाव में अपना उम्मीदवार खड़ा कर सकती है।

कोविंद के नाम के ऐलान के बाद कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने आरोप लगाया कि बीजेपी ने नाम का ऐलान करने से पहले सहमति नहीं ली, जबकि ऐसा करने का वादा किया था।

लिहाजा, माना जा रहा है कि बीजेपी के दलित कार्ड के जवाब में कांग्रेस भी दलित नेता को राष्ट्रपति चुनाव में उतारेगी।

सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार को इस पद के लिए चुनावी मैदान में उतार सकती है। मीरा कुमार बड़े दलित नेता और भूतपूर्व रक्षा मंत्री जगजीवन राम की बेटी हैं। वो विदेश सेवा की अधिकारी भी रह चुकी हैं। बिहार के सासाराम से लोक सभा चुनाव जीतने वालीं मीरा कुमार 15वीं लोकसभा की अध्यक्ष रह चुकी हैं। उन्हें देश की पहली महिला स्पीकर होने का गौरव हासिल है।

मीरा कुमार का जन्म बिहार के भोजपुर जिले में हुआ है। वह भारत के पूर्व उप प्रधानमंत्री जगजीवन राम की बेटी हैं। मीरा कॉन्वेन्ट एडुकेटेड हैं। उनकी शिक्षा देहरादून, जयपुर और दिल्ली में हुई है। उन्होंने दिल्ली के इंद्रप्रस्थ कॉलेज और मिरांडा हाउस से एमए और एलएलबी किया है। 1970 में उनका चयन भारतीय विदेश सेवा के लिए हुआ। इसके बाद उन्होंने कई देशों में अपनी सेवा दी है। वो यूपीए-1 की मनमोहन सिंह सरकार में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री रह चुकी हैं। वो 8वीं, 11वीं, 12वीं, 14वीं और 15वीं लोकसभा की सदस्य रह चुकी हैं।

मीरा कुमार ने साल 1985 में राजनीति में प्रवेश किया था। उस वक्त उन्होंने उत्तर प्रदेश के बिजनौर लोकसभा सीट से चुनाव जाता था और प्रमुख दलित नेता और आज के केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान और बसपा सुप्रीमो मायावती को हराया था। इसके बाद वो 8वीं, 11वीं और 12वीं लोकसभा में दिल्ली के करोलबाग से सांसद चुनी गई थीं। 1999 में उन्हें करोलबाग से हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद उन्होंने अपने पिता की पारंपरिक सीट बिहार के सासाराम की ओर रुख किया, जहां से उन्होंने साल 2004 और 2009 का लोकसभा चुनाव जीता। हालांकि, 2014 के चुनाव में उन्हें वहां से भी हार का सामना करना पड़ा। उन्हें भाजपा के छेदी पासवान ने 63 हजार से ज्यादा वोटों से हराया।

हिंदू-मुस्लिम विवाद सुलझाने के लिए जन संघ संस्थापक गृहयुद्ध चाहते थे: त्रिपुरा गवर्नर

त्रिपुरा के गवर्नर तथागत रॉय के एक ट्वीट को लेकर बवाल मच गया है। 18 जून को किए गए उनके एक ट्वीट को लेकर यह विवाद हुआ है।

अपने ट्वीट में तथागत रॉय ने भारतीय जन संघ (अब भारतीय जनता पार्टी) के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बारे में ट्वीट करते हुए लिखा है कि मुखर्जी हिंदू-मुस्लिम विवाद सुलझाने के लिए गृहयुद्ध चाहते थे।

रॉय ने दावा किया है कि उन्होंने यह बात 1946 में श्यामा प्रसाद मुखर्जी की एक डायरी एंट्री के हिस्से से किया है। अपने इस ट्रवीट के लिए उनकी सोशल मीडिया पर काफी आलोचना भी हुई। कई लोगों ने उनकी गृहयुद्ध भड़काने के लिए आलोचना भी की जिसकी सफाई पेश करते हुए उन्होंने कहा कि वह गृहयुद्ध भड़काने की नहीं बल्कि मुखर्जी की बात को कोट कर रहे थे।

अपने इस ट्वीट के बाद रॉय सोशल मीडिया पर ट्रोल भी हो गए। लोगों ने आलोचना कहा कि साम्प्रदायिक हिंसा भड़काने के लिए उनकी गिरफ्तारी की जाए। मामले को लेकर इंडियन एक्सप्रेस ने रॉय से बात करने की कोशिश की, लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया।

रॉय ने कहा कि वह 70 साल पुरानी एक डायरी के हवाले से यह बात कह रहे थे। उन्होंने लिखा- ''गृहयुद्ध की बात भारत के विभाजन से पहले की थी और यह भविष्यवाणी तब सच साबित हो गई जब जिन्ना ने इसके सात महीने बाद गृहयुद्ध छेड़ दिया और पाकिस्तान हासिल करने में कामयाब रहे। इन बातों के सच साबित होने का डॉ. मुखर्जी ने अनुमान लगाया था।''

बता दें इससे पहले भी कई बार तथागत राय के ट्विट से विवाद हो गया था। अगस्त 2015 में 1993 मुंबई बम धमाकों के दोषी याकूब मेमन के ट्विट को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। उन्होंने ट्वीट में लिखा था कि याकूब मेमन के अंतिम संस्कार में शामिल होने वाले लोग संभावित आतंकवादी हो सकते हैं और उन लोगों पर कड़ी नजर रखनी चाहिए।

लश्‍कर के हमले में शहीद फिरोज डार ने फेसबुक पर लिखा था

जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में अचाबल में संदिग्ध लश्कर आतंकवादियों द्वारा घात लगाकर किये गए हमले में शहीद हुए छह पुलिसकर्मियों में शामिल फिरोज अहमद डार (32) को शुक्रवार रात पुलवामा जिले के डोगरीपुरा गांव स्थित उनके परिवार के पैतृक कब्रिस्तान में दफना दिया गया। इस दौरान उनके गांव और उनके विभाग के कई लोगों ने उन्हें अश्रुपूर्ण विदाई दी।

हमले में शामिल आतंकवादियों ने पुलिसकर्मियों के हथियार ले जाने से पहले उनके चेहरे विकृत करने का प्रयास किया था। डार के परिवार और मित्र जब उनकी अंतिम यात्रा की तैयारी कर रहे थे, डार द्वारा 18 जनवरी 2013 को लिखे गए शब्द सभी को याद आ रहे थे।

उन्होंने लिखा था, ''क्या आपने एक पल के लिए भी रूककर खुद से सवाल किया कि मेरी कब्र में मेरे साथ पहली रात को क्या होगा? उस पल के बारे में सोचना जब तुम्हारे शव को नहलाया जा रहा होगा और तुम्हारी कब्र तैयार की जा रही होगी।''

डार ने अपने फेसबुक वाल पर लिखा था, ''उस दिन के बारे में सोचो जब लोग तुम्हें तुम्हारी कब्र तक ले जा रहे होंगे और तुम्हारा परिवार रो रहा होगा ....  उस पल के बारे में सोचो जब तुम्हें तुम्हारी कब्र में डाला जा रहा होगा।''

डार के गांव के लोगों की आंखें नम थीं। ग्रामीण डार को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए उनके घर के बाहर जमा हुए थे। डार की दो पुत्रियां, छह वर्षीया अदाह और दो वर्षीया सिमरन नहीं समझ पा रही थीं कि अचानक उनके घर के बाहर लोग क्यों जमा हुए हैं। डार की पत्नी मुबीना अख्तर और उनके वृद्ध माता-पिता चिल्ला रहे थे और अपनी छाती पीट रहे थे।

लश्कर आतंकी मट्टू के मारे जाने के बाद आतंकियों ने राज्य के दूसरे हिस्से में स्टेशन हाउस ऑफिसर सहित छह पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी थी।

सूत्रों के अनुसार, पुलिसकर्मियों की हत्या के बाद आतंकियों ने उनके शवों के साथ बर्बरता भी की। आतंकियों ने ये हमला दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले के अच्छाबल में किया। इस दौरान पुलिसकर्मी अपनी ड्यूटी से वापस शाम सात बजे सुमो में लौट रहे थे तब घात लगाकर बैठे आतंकियों ने पुलिस पेट्रोल टीम पर हमला बोला और अंधाधुंध फायरिंग कर 6 पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी।  इस हमले की जिम्मेदारी लश्कर ने ली थी।

गोरखालैंड आंदोलन: जीजेएम-पुलिस की झड़प में दो की मौत, 36 पुलिसकर्मी घायल

उत्तरी पश्चिम बंगाल की पहाड़ियों में शनिवार को गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) के समर्थकों के साथ हुई झड़प में 36 पुलिसकर्मी गंभीर रुप से घायल हो गए हैं जिनमें से 20 पुलिसकर्मी को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

एडीजी अनुज शर्मा ने बताया की जीजेएम के समर्थकों ने पुलिसबल और जवानों पर कांच की बोतलों और पत्थरों से हमला किया गया जिसके जवाब में पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े।

गोरखा जनमुक्ति मोर्चा पृथक राज्य की मांग को लेकर 6 दिनों से अनिश्चितकालीन बंद पर है। उन्होंने बताया कि पूरे इलाके में निषेधाज्ञा लागू है और जुलूस निकालने की अनुमति किसी को भी नहीं दी गई है। जीजेएम समर्थकों ने आदेशों का उल्लंघन किया और जुलूस निकाला। जब पुलिस ने उन्हें रोका तो प्रदर्शनकारियों ने उन पर पत्थर तथा बोतलें फेंकीं। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया।

इसी बीच जीजेएम ने दावा किया कि पुलिस गोलीबारी में उसके दो समर्थकों की मौत हो गई और पांच गंभीर रूप से घायल हो गए। जीजेएम के सहायक महासचिव बिनय तमांग ने कहा, ''दो लोगों की मौत हो गई है और पांच गंभीर रूप से घायल हुए हैं। हम अपने लोगों की तलाश कर रहे हैं।''

पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की बात से इंकार किया है। एडीजी (कानून-व्यवस्था) अनुज शर्मा ने कहा, ''पुलिस ने गोलीबारी नहीं की। जीजेएम ने हमारे वाहनों में आग लगाई है। हम घटना की जांच कर रहे हैं।''

जीजेएम द्वारा उत्तरी बंगाल की पहाड़ियों में आहूत बंद का शनिवार को छठा दिन है, जब क्षेत्र में हिंसा और प्रदर्शनों की ताजा घटनाएं हुई हैं। इससे पहले जीजेएम के तमांग ने दावा किया कि पुलिस ने उनके घर पर छापेमारी और तोड़फोड़ की।

वहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) द्वारा की जा रही तोड़-फोड़ की निंदा की और राज्य के उत्तरी पहाड़ी इलाके में हो रही हिंसा को गहरी साजिश करार दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा, ''यह एक गहरी साजिश है। इतने सारे हथियार और लड़ाई के सामान अकेले एक दिन में नहीं आ सकते। यहां एक अंतर्राष्ट्रीय और राज्य की सीमा है। वे संविधान का उल्लंघन कर रहे हैं। वे केवल बम फेंक रहे हैं। वे गैरकानूनी तरीके से हथियारों और बमों को एकत्र कर रहे हैं।''

बनर्जी ने आरोप लगाया कि जीजेएम का पूर्वोत्तर राज्यों के आतंकी समूहों से संबंध है। उन्होंने कहा, ''मुझे बताया गया है कि पूर्वोत्तर भारत के भूमिगत उग्रवादियों के साथ उनका संबंध है। मैंने अनुरोध किया है कि उन्हें दार्जिलिंग में किसी तरह की कोई मदद नहीं करनी चाहिए।''

बैंक खाता खोलने के लिए आधार कार्ड है जरूरी

केंद्र सरकार ने बैंक खाता खोलने के लिए आधार कार्ड जरूरी कर दिया है। इतना ही नहीं, पचास हजार रुपए और उससे ऊपर के लेन-देन में भी आधार कार्ड जरूरी होगा। यह जानकारी पीटीआई द्वारा मिली है।

सभी खाता धारकों को 31 दिसंबर 2017 तक आधार जमा करवाने के लिए कहा गया है। वर्ना अकाउंट को बंद किया जा सकता है।

भारत में एक अरब लोगों के आधार कार्ड बन चुके हैं। लगभग देश की 80 प्रतिशत जनसंख्‍या के पास आधार कार्ड हैं। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने साढ़े पांच साल में एक अरब से अधिक आधार कार्ड जारी किए हैं। केंद्रीय संचार मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने सोमवार को यह जानकारी दी। रवि शंकर प्रसाद ने कहा, ''देश में 100 करोड़ से अधिक निवासी आधार के तहत पंजीकृत हैं। आधार बिना बिचौलिए के गरीबों तक पहुंचने का एक जरिया है।''

पहला आधार कार्ड 2010 में जारी किया गया था। अब वयस्कों में 93 फीसदी के पास, 5-18 वर्ष के बच्चों में 67 फीसदी के पास और पांच साल तक के बच्चों में 20 फीसदी के पास है। 13 राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में 90 फीसदी आबादी के पास आधार कार्ड है, जबकि 13 अन्य में यह 75-90 फीसदी के पास है। रवि शंकर प्रसाद ने कहा, ''हर रोज 5-7 लाख से अधिक लोग आधार में पंजीकरण कराते हैं। यह अब दुनिया में सबसे बड़ा ऑनलाइन डिजिटल पहचान का मंच बन चुका है।''

1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट फैसला: गैंगस्टर अबू सलेम सहित 6 दोषी करार

1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले में शुक्रवार को विशेष टाडा कोर्ट में गैंगस्टर अबू सलेम सहित सात आरोपियों पर फैसला सुनाया गया है। कोर्ट ने अबू सलेम समेत 6 आरोपियों को दोषी करार दिया है, जबकि एक आरोपी अब्दुल काय्यूम को बरी कर दिया है।

कोर्ट ने एक-एक करके आरोपियों पर फैसला सुनाया। अबू सलेम के अलावा मुस्तफा डोसा, फिरोज अब्दुल रशीद खान, ताहिर मर्चेंट, करीमुल्ला खान व रियाज सिददीकी को भी दोषी करार दिया गया है। सलेम को भरूच से मुंबई हथियार लाने का दोषी पाया गया है। मुस्तफा डोसा को हत्या, साजिश और आतंकी गतिविधियों का दोषी पाया गया है। फिरोज अब्दुल रशीद खान को साजिश रचने और हत्या का दोषी पाया गया है। ताहिर मर्चेंट का धमाके की साजिश में शामिल रहने का दोषी पाया गया है।

टाडा कोर्ट का मानना है कि मुस्तफा डोसा, अबू सलेम, ताहिर मर्चेंट और फिरोज खान मुख्य साजिशकर्ता थे। कोर्ट ने सुनवाई की अगली तारीख 19 जून तय की है।

सात आरोपियों में सलेम, मुस्तफा डोसा, करीमुल्ला खान, फिरोज अब्दुल रशीद खान, रियाज सिददीकी, ताहिर मर्चेंट तथा अब्दुल कायूम शामिल थे। इन सातों को 2003 से 2010 के बीच गिरफ्तार किया गया था और इनपर आपराधिक साजिश रचने, सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने और हत्या के आरोप लगे थे। इस मामले में यह दूसरे चरण की सुनवाई है। इससे पहले साल 2007 में सुनवाई के पहले चरण में टाडा अदालत ने इस मामले में सौ आरोपियों को दोषी ठहराया था, जबकि 23 लोग बरी हुए थे। इन सात आरोपियों की सुनवाई मुख्य मामले से अलग कर दी गई थी क्योंकि उन्हें मुख्य सुनवाई खत्म होने के वक्त गिरफ्तार किया गया था।

हालांकि यह निश्चित तौर पर कहा जा सकता है कि अबू सलेम को फांसी की सजा दी भी जाती है तो उसे फांसी नहीं लगाई जाएगी। दरअसल पुतर्गाल से प्रत्यार्पण संधि के दौरान यह शर्त रखी गई थी कि अबू सलेम को फांसी नहीं दी जा सकती, वर्तमान 9 केस से अलग कोई केस नहीं चलाया जाएगा, 25 साल से ज्यादा की सजा नहीं दी जाएगी और किसी अन्य देश को नहीं सौंपा जाएगा।

बता दें कि 1993 में मुंबई में 13 सीरियल ब्लास्ट हुए थे। विस्फोट में 257 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 713 गंभीर रूप से घायल हुए थे। इसके अलावा 27 करोड़ रूपये की संपत्ति नष्ट हो गई थी। सलेम पर गुजरात से मुंबई हथियार ले जाने का आरोप था। सलेम ने अवैध रूप से हथियार रखने के आरोपी अभिनेता संजय दत्त को ए के 56 राइफलें, 250 कारतूस और कुछ हथगोले 16 जनवरी 1993 को उनके आवास पर उन्हें सौंपे थे। दो दिन बाद 18 जनवरी 1993 को सलेम तथा दो अन्य संजय दत्त के घर गये और वहां से दो राइफलें तथा कुछ गोलियां लेकर वापस आए थे।

अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम और मेमन को इस हमले का मास्टरमाइंड माना गया था। जहां दाऊद इब्राहिम, टाइगर मेमन और अयुब मेमन फरार हैं, लेकिन याकुब मेमन को पकड़ लिया गया था। याकुब को 30 जुलाई 2015 में नागपुर जेल में फांसी दी गई थी।

जम्मू-कश्मीर: अनंतनाग में पुलिस पर आतंकी हमला, 6 जवान शहीद

जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले के अचबल में पुलिस पार्टी पर आज (शुक्रवार, 16 जून को) बड़ा आतंकी हमला हुआ है। हमले में 6 जवान शहीद हो गए हैं, जबकि कुछ के घायल होने की भी खबर है।

आतंकियों ने घात लगाकर पुलिस पार्टी पर हमला किया है। शहीद होने वालों में एसएचओ फिरोज डार भी शामिल हैं। हालांकि, पुलिस की तरफ से अभी तक एचएचओ के शहीद होने की पुष्टि नहीं की जा सकी है।

बता दें कि जम्मू-कश्मीर में पुलिस को आतंकी लगातार निशाना बना रहे हैं। गुरुवार को भी आतंकियों ने पुलिस पर दो अलग-अलग जगहों पर हमले किए थे जिसमें दो जवान शहीद हो गए थे। गुरुवार शाम आतंकवादियों ने श्रीनगर के हैदरपोरा में पुलिस गश्ती दल पर भी हमला किया था।

बता दें कि जम्मू-कश्मीर में बड़े पैमाने पर आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन चलाया जा रहा है। इस दौरान कुलगाम में शुक्रवार को ही आतंकवादियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई गोलीबारी में एक नागरिक की मौत हो गई। मुठभेड़ स्थल के पास इस व्यक्ति को गोली लगी थी।

पुलिस सूत्रों ने कहा कि कुलगाम के अरवानी गांव में मोहम्मद अशरफ को गोली लगी थी।

सूत्रों के मुताबिक, घायल को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां उसने गंभीर रूप से जख्मी होने के कारण दम तोड़ दिया।

नोटबंदी का समर्थन करने वाले पत्रकार ने कहा, नोटबंदी ने भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था की कमर तोड़ दी

8 नवंबर, 2016 को रात 8 बजे जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 व 1,000 रुपए के नोटों को बंद करने का ऐलान किया। इसके बाद अगले चार-पांच महीने इस फैसले से पैदा हुई स्थिति को संभालने में लग गए।

फैसले के बाद, पक्ष और विपक्ष में कई तर्क दिए गए, कई गणमान्‍य हस्तियों, उद्योगपतियों, पत्रकारों ने अपनी राय जाहिर की। फैसले के आलोचकों ने इसे 'आपदा' बताया तो समर्थकों को इसमें नरेंद्र मोदी का 'मास्‍टरस्‍ट्रोक' दिखा।

फैसला लिए 8 महीने हो चुके हैं मगर धरातल पर हालात अभी भी पूरी तरह बहाल नहीं हो सके हैं। विभिन्‍न संस्‍थानों, रिसर्च फर्मों और खुद रिजर्व बैंक ने नोटबंदी की वजह से अ‍र्थव्‍यवस्‍था पर प्रतिकूल प्रभाव की बात मानी है।

नोटबंदी के फैसले का पुरजोर समर्थन करने वाले दक्षिणपंथी मैगजीन 'स्‍वराज्‍य' के संपादक आर जगन्‍नाथन ने यह माना है कि उन्‍होंने इस बारे में गलत अनुमान लगाया। जगन्‍नाथन ने मैगजीन में लिखे एक लेख में कहा है कि 'यह मिया कल्‍पा (गलती मानने) का समय है।'

जगन्‍नाथन ने अपनी राय में बदलाव की वजह बताते हुए लिखा है कि अब, खासकर कर्ज माफी के लिए किसान आंदोलन के बाद, मुझे लगता है कि नोटबंदी के बहीखाते में लाभ के मुकाबले हानि का कॉलम ज्‍यादा भरा है। यह (नोटबंदी) फेल हो गया।''

वह लिखते हैं, ''मोदी के 500 व 1,000 रुपए के नोटों को अवैध घोषित करने के 7 महीने बाद, हालात ये हैं कि खर्च, फायदों पर भारी पड़ रहा है। और किसान कर्ज माफी का नोटबंदी से सीधा जुड़ाव है।''

जगन्‍नाथन के अनुसार, किसानों के बढ़ते विरोध और नोटबंदी में संबंध है। वह लिखते हैं, ''अब यह स्‍पष्‍ट तौर पर कहा जा सकता है कि नोटबंदी वह आखिरी कदम था जिसने किसानों की कमर तोड़ दी, और किसानों के विरोधों की श्रृंखला तथा कर्ज माफी की राजनैतिक मांग उठनी शुरू हुई।''

जगन्‍नाथन के मुताबिक, ''नोटबंदी से इतना नुकसान होगा जितना पहले कभी नहीं हुआ। लगातार पड़े दो सूखों ने भी नोटबंदी जितना आघात नहीं पहुंचाया था। पिछले तीन सालों में मोदी सरकार द्वारा दिखाया गया अच्‍छा काम राज्‍य सरकार के समाजवादी के बुलबुले से धुल जाएगा।''

जगन्‍नाथन ने नरेंद्र मोदी के बारे में लिखा है, ''काले धन की कमर तोड़ने के लिए कड़े फैसले लेने वाले बोल्‍ड नेता जैसा बनने की सोचना अच्‍छा है, मगर यह ठीक बात नहीं कि इसे आधे-अधूरे तरीके से किया जाए और उस काम में भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था की कमर तोड़ दी जाए।''