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अखिलेश यादव और मायावती एक साथ रैली करेंगे

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के भोज में शामिल होने के बाद बहुजन समाजवादी पार्टी सुप्रीमो मायावती और समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव पहली बार एक साथ उत्तर प्रदेश में रैली कर सकते हैं।

टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक, इस संयुक्त रैली का आइडिया शुक्रवार को लंच समारोह के दौरान उस वक्त आया था, जब आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने अखिलेश और मायावती से एक साथ आने का अनुरोध किया था।

सपा के सांसद नरेश अग्रवाल ने पुष्टि करते हुए कहा कि इस समारोह में संयुक्त रैलियां करने का प्रस्ताव सामने आया था और सभी बीजेपी विरोधी पार्टियों ने इसका समर्थन किया। उन्होंने टीओआई से कहा कि वक्त की मांग है कि पूरा विपक्ष संयुक्त रूप से बीजेपी के खिलाफ खड़ा हो। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति चुनाव के बाद लालू प्रसाद यादव पटना में 27 अगस्त को एक विशाल रैली का आयोजन करेंगे।

हालांकि वरिष्ठ बसपा नेताओं से इस बारे में संपर्क नहीं हो पाया। लेकिन बैठक में मौजूद रहे सूत्रों ने बताया कि मायावती ने भी इसका समर्थन किया है। सूत्र ने मायावती के हवाले से कहा, मैं 100 प्रतिशत आपके साथ हूँ।

मायावती और अखिलेश की संयुक्त रैली 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले बीजेपी विरोधी फ्रंट को एक रूप दे सकती है।

मार्च 2017 में घोषित हुए यूपी विधानसभा चुनावों में मायावती और अखिलेश को बीजेपी से करारी हार का सामना करना पड़ा था जिसके बाद से उनके साथ आने के कयास लगाए जा रहे थे।

लालू और टीएमसी अध्यक्ष ममता बनर्जी ने भी मायावती और अखिलेश यादव से 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान साथ आने को कहा है।

शुक्रवार को लालू ने उत्तर प्रदेश के संदर्भ में एकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अगर सपा, बसपा और कांग्रेस साथ आ जाएं तो लोकसभा में 70 सीटें जीत सकती हैं।

बता दें कि साल 1993 के बाद कभी बसपा और सपा साथ नहीं आईं। इससे पहले उन्होंने साथ में विधानसभा चुनाव लड़ा था जिसमें उन्हें जीत मिली थी। लेकिन दोनों के बीच कड़वाहट साल 1995 में उस वक्त बढ़ गई जब लखनऊ के एक गेस्ट हाउस में ठहरीं मायावती पर गुंडों ने हमला कर दिया था। उस वक्त उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव थे।

सहारनपुर बॉर्डर पर पुलिस से राहुल गांधी ने कहा, आप मुझे बॉर्डर पर नहीं रोक सकते थे

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी ने आज सहारनपुर के हिंसा से प्रभावित लोगों के परिजनों से मुलाकात की और निष्पक्ष जांच की मांग की। कांग्रेस उपाध्यक्ष के साथ मौजूद वरिष्ठ कांग्रेसी नेता पीएल पुनिया ने सहारनपुर से फोन पर बताया कि राहुल ने हिंसा से प्रभावित लोगों को विश्वास दिलाया कि वह उनको इंसाफ दिलाए जाने के लिए काम करेंगे।

राहुल गाँधी ने प्रशासनिक अधिकारियों से कहा कि इस जातीय हिंसा की निष्पक्ष जांच करें और इलाके में शांति और भाईचारा बहाल करने के लिये काम करें।

जिला प्रशासन ने कांग्रेस उपाध्यक्ष को जिले में प्रवेश करने की इजाजत नहीं दी थी। प्रशासन ने जिले की सीमा पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे और राहुल को जिले की सीमा पर रोक लिया गया।

इस पर कांग्रेस नेता ने प्रशासन से पूछा कि उन्हें किस कानून के अन्तर्गत शहर में जाने की इजाजत नहीं दी जा रही है। इसका एक वीडियो भी न्यूज एजेंसी एएनआई ने जारी किया है जिसमें राहुल एक पुलिस अफसर से कह रहे हैं कि आपने किस कानून के तहत मुझे रोकने की कोशिश की? आप मुझे बॉर्डर पर नहीं रोक सकते थे, लेकिन आपने रोका। इसके बाद वह नजदीक के एक ढाबे पर गए और वहाँ उन्होंने जातीय हिंसा से प्रभावित लोगों और उनके परिजनों से मुलाकात की।

पुनिया ने बताया कि राहुल गाँधी ने प्रशासन से कहा कि उन्हें हिंसा के शिकार अस्पताल में भर्ती लोगों से मिलने के लिए अस्पताल में जाने के इजाजत दें।

इस पर प्रशासन ने बताया कि अस्पताल में भर्ती सभी लोगों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। उन्होंने कहा कि शुक्रवार रात प्रशासन ने अस्पताल में भर्ती 23 लोगों को छुट्टी दे दी गई।

पुनिया ने बताया कि हिंसा प्रभावित लोगों से बातचीत के दौरान राहुल ने जिन दलितों के घर जलाए गए उन्हें कम मुआवजा देने की बात भी उठाई। इस पर जिलाधिकारी ने उन्हें आश्वासन दिया कि वह इस मामले की समीक्षा करेंगे और इस दिशा में आवश्यक कदम उठाएंगे। उन्होंने बताया कि राहुल बाद में दिल्ली वापस लौट गए।

इससे पहले आज सुबह राहुल गाँधी कांग्रेस के उत्तर प्रदेश प्रभारी गुलाम नबी आजाद और प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर के साथ दिल्ली से सहारनपुर के लिए रवाना हुए थे।

सहारनपुर में मौजूद अतिरिक्त महानिदेशक (कानून व्यवस्था) आदित्य मिश्रा ने कहा था कि राहुल से अनुरोध किया जाएगा कि वह शहर न आएं और अगर उन्होंने जिद की तो उनके खिलाफ धारा 144 के तहत कार्रवाई की जाएगी।

हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडर सबजार अहमद भट्ट को सुरक्षा बलों ने मार गिराया

भारतीय सेना ने आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब दिया है। भारतीय सेना ने कहा कि उसने पिछले 24 घंटे में 10 घुसपैठियों और आतंकियों को मार गिराया है।

न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय सेना की नॉर्दन कमांड ने कहा कि उसने रमजान के महीने में जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान और उसके द्वारा प्रायोजित आतंकी गतिविधियों की कोशिशों को नाकाम कर दिया है।

एक आधिकारिक विज्ञप्ति में नॉर्दन कमांड ने कहा, पिछले 24 घंटों में 10 आतंकियों और घुसपैठियों को मार गिराया गया है। रामपुर सेक्टर के पास एलओसी पर 6 आतंकियों को ढ़ेर कर दिया गया।

वहीं दक्षिणी कश्मीर के त्राल में 2 आतंकियों को सेना ने मार दिया। सेना ने हिजबुल मुजाहिद्दीन के कमांडर सबजार अहमद भट्ट को भी त्राल में हुए एन्काउंटर में ढ़ेर कर दिया।

बुरहान वानी के बाद भट्ट को हिजबुल कमांडर बनाया गया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सबजार अहमद भट्ट के मारे जाने के बाद कश्मीर घाटी में कई जगह हिंसा भड़क उठी है। 8 जुलाई 2016 को बुरहान वानी के मारे जाने के बाद भी एेसी ही हिंसा देखने को मिली थी। इसी को देखते हुए सरकार ने कश्मीर घाटी में इंटरनेट सर्विसेज पर रोक लगा दी है।

बुरहान वानी के मारे जाने के बाद हिंसा में 90 लोगों की मरने की खबर थी, जबकि कई लोग घायल हो गए थे। प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए सेना ने पेलेट गन का इस्तेमाल किया था जिसके बाद कई लोगों की आंखों की रोशनी चली गई थीं।

जेवर गैंगरेप मामला: चारों महिलाओं के साथ रेप के कोई सबूत नहीं मिले

ग्रेटर नोएडा में चार महिलाओं के साथ गैंगरेप और एक शख्स की हत्या के मामले में नया मोड़ आ गया। शुक्रवार शाम को गौतमबुद्ध नगर के चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉक्टर अनुराग भर्गाव ने कहा कि प्रारंभिक जांच में रेप की बात सामने नहीं आई है। उनके मुताबिक, मेडिकल रिपोर्ट में अभी तक कोई भी ऐसे सबूत नहीं मिले हैं जिससे रेप की पुष्टि होती हो।

गैंगरेप मामले को लेकर नोएडा के डीएम, एसएसपी और चीफ मेडिकल अफसर ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने बताया कि डॉक्टरों को जांच के दौरान प्राइवेट पार्ट्स में कोई इंजरी या सिमेन नहीं मिला हैं।

यह बात उस समय सामने आई है जब गुरुवार को महिलाओं ने आरोप लगाया था कि यमुना एक्सप्रेस-वे पर 6 लुटेरे उन्हें खेतों में घसीट ले गए और उनका गैंगरेप किया। साथ ही बचाने की कोशिश करने वाले पुरुष रिश्तेदार की गोली मारकर हत्या कर दी।

उन्होंने बताया कि कुछ और टेस्ट के लिए महिलाओं के कपड़ों और टिश्यू सैंपल को जांच के लिए लखनऊ स्थित फोरेंसिक लैब में भेजा गया है। टेस्ट के नतीजे दो से तीन हफ्तों में आ जाएंगे। गौतमबुद्ध नगर के एसएसपी लव कुमार ने कहा कि रेप के जो लक्षण होते हैं, अभी तक कोई भी ऐसा लक्षण मेडिकल रिपोर्ट के हिसाब से नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि घटना के पीछे बदमाशों का उद्देश्य लूटपाट था।

इस मामले में पुलिस ने शुक्रवार को चार लोगों को गिरफ्तार किया है। जानकारी के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए चारों लोग पीड़ित परिवार के पड़ोसी हैं।

उत्तर प्रदेश पुलिस की एसटीएफ के एक अधिकारी ने बताया, ''यमुना एक्सप्रेसवे पर जेवर से दो किलोमीटर दूर गुरुवार को एक कबाड़ कारोबारी की हत्या कर दी गई और उसकी माँ, पत्नी, बहन और बहू के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया। विशेष कार्य बल (एसटीएफ) ने इस सिलसिले में चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।'' यह गिरफ्तारी पीड़ित महिलाओं द्वारा दिए गए बयान के आधार पर की गई है।

बता दें कि बुधवार की रात 1.30 बजे के आसपास नोएडा से कोई 60 किलोमीटर दूर जेवर-बुलंदशहर राजमार्ग पर इस घटना को उस समय अंजाम दिया गया, जब ग्रेटर नोएडा निवासी परिवार के आठ सदस्य एक बीमार रिश्तेदार को देखने बुलंदशहर की ओर जा रहे थे।

पीड़ितों के मुताबिक, हथियारों से लैस छह लोगों ने सबोटा गांव के निकट टायर पर गोली चलाकर ईको वैन को रोक दिया और बंदूक के दम पर सामूहिक दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया।

पुलिस ने बताया कि कबाड़ कारोबारी शकील कुरैशी (40) ने जब इसका विरोध किया, तो उन्होंने उसकी गोली मारकर हत्या कर दी और 47,000 रुपये समेत मोबाइल फोन व कीमती समान लूट लिये।

लखनऊ में नहीं दिखा रमजान का चाँद, पहला रोजा 28 मई को

इस साल रमजान के महीने की शुरुआत 28 मई से होगी। लखनऊ में मरकजी चांद, खालिद फिरंगी महली ने कहा कि अभी तक रमजान का चांद नहीं देखा गया है इसलिए पहला रोजा 28 मई को होगा।

रमजान के पाक महीने में रोजे रखने वाले मुस्लिमों के लिए विशेष हेल्पलाइन शुरू की जा रही है। मजलिस-ए-उलेमा-ए-हिंद की ओर शुरू की जा रही इस हेल्पलाइन पर रमजान के दौरान कोई भी समस्या आने पर फोन से सूचना देकर उसका निस्तारण कराया जा सकेगा।

मजलिस-ए-उलेमा-ए-हिंद के कार्यालय प्रभारी ने कहा कि महिलाओं के लिए जो हेल्पलाइन तीन वर्षों से जारी है, उस पर ज्यादातर महिलाएं व्हाट्स एप के द्वारा प्रश्न पूछती हैं, इसलिए इस बार भी यही प्रक्रिया जारी रहेगी। महिलाएं 08896150234 व्हाट्स एप नंबर पर अपने सवाल भेज सकती हैं।

उन्होंने बताया कि रोजेदार कार्यालय समय 10:30 से शाम 05:00 के बीच अपने सवाल पूछ सकते हैं। पुरुषों के लिए 09451096580 और 09452901404 दो हेल्पलाइन नंबर जारी किए जा रहे हैं।

इस्लाम धर्म में रमजान को सबसे पवित्र महीना माना जाता है। इस पवित्र महीने में मुस्लिम समुदाय के लोग रोजा रखते हैं। रमजान के महीने में सूर्योदय से लेकर सूर्योस्त तक रोजा रखा जाता है, इस दौरान कुछ भी खाया-पिया नहीं जाता है। पूरे महीने रात में विशेष नमाज अदा की जाती है जिसे तरावीह कहते हैं। रोजे को अरबी भाषा में सोम कहा जाता है। इसका मतलब होता है रुकना। रोजे चांद दिखने से शुरु होते हैं जिस शाम को चांद दिखाई देता है, उसकी अगली सुबह से रोजे शुरू हो जाते हैं।

इस्लाम मज़हब में रोजा रखना अनिवार्य माना जाता है, लेकिन कुछ लोगों को छूट भी मिलती है। जैसे की बीमार, दूध पिलाने वाली महिला और अबोध बच्चों तो इस माह में रोजा रखने की छूट दी जाती है। लेकिन बाद में वो (बीमार, दूध पिलाने वाली महिला) किसी दूसरे महीने में रोजा रख सकते हैं।

रमजान के महीने में रोजा रखने के पीछे तर्क दिया जाता है कि इस दौरान व्यक्ति अपनी बुरी आदतों से दूर रहने के साथ-साथ खुद पर भी संयम रखता है। दिन में कुछ भी नहीं खाया जाता। लेकिन कहा जाता है कि खाने के अलावा व्यक्ति को खाने के बारे में सोचना भी नहीं चाहिए। रोजे के दौरान अगर कोई व्यक्ति झूठ बोलता है, पीठ पीछे किसी की बुराई करता है, झूठी कसम खाता है, लालच करता है, या कोई गलत काम करता है तो उसका रोजा टूटा हुआ माना जाता है।

बताया जाता है कि रमजान के महीने में कोई भी नेक काम किया जाता है तो उसका 70 गुना सवाब मिलता है। इसके अलावा इस महीने में ज्यादा से ज्यादा इबादत करनी होती है, जिससे सवाब मिलता है। इसके अलावा पूरे साल में किए गए गुनाहों से माफी भी मांगी जा सकती है।

सांप्रदायिक हिंसा के लिए भारतीय जनता पार्टी जिम्मेदार है: अखिलेश यादव

सहारनपुर हिंसा मामले को लेकर उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि बीते विधानसभा चुनावों के दौरान दिवाली और रमज़ान, श्मशान और कब्रिस्तान को बांटने वाली पार्टी राज्य में हिंसात्मक घटनाएं बढ़ने के लिए जिम्मेदार है।

पूर्व सीएम ने आगे बताया कि आप भाजपा से क्या उम्मीद कर सकते हैं? जिन्होंने उत्तर प्रदेश में चुनावी अभियान के दौरान भारतीय त्यौहारों (दिवाली और रमजान), बिजली, श्मशान और कब्रिस्तान को बांट दिया, हम उनसे क्या उम्मीद करें? सांप्रदायिक हिंसा के लिए यही पार्टी जिम्मेदार है। हमारी पार्टी हर प्रभावित इलाके में गई। हमारी सरकार के दौरान लोगों को हर किस्म की सुविधाएं दी गईं।

सहारनपुर में दो समुदायों के बीच हुई भिड़ंत और हिंसा के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को 174 अधिकारियों का तबादला किया था। गृह मंत्रालय ने भी उत्तर प्रदेश सरकार को सहारनपुर में हुई इस हिंसा से जुड़ी रिपोर्ट जमा करने के लिए कहा था।

इससे पहले सहारनपुर में दोनों समुदायों के बीच हुई हिंसा को काबू न कर पाने के लिए यहां के जिलाधिकारी नागेंद्र प्रसाद सिंह को हटा दिया गया था। मंगलवार को हुई हिंसा में एक शख्स की मौत हो गई थी। जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। बसपा सुप्रीमो मायावती भी सहारनपुर पहुंची थीं।

राज्य सरकार ने हिंसा के दौरान मारे गए शख्स के घरवालों को 15 लाख रुपये का मुआवजा देने का ऐलान किया था। एक अन्य घटना में पांच मई को शब्बीरपुर और सिम्लाना गांव में दलितों और राजपूतों के बीच झड़प हुई थी। उसमें एक शख्स की मौत हो गई थी। जबकि 16 लोग घायल हो गए थे, जिसमें एक हेड कांस्टेबल भी शामिल था।

सेना किसी महिला को उठाकर रेप कर सकती है, कोई कुछ बोल भी नहीं सकता: कम्युनिस्ट नेता

केरल के कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) नेता ने भारतीय सेना पर विवादित बयान दिया है। सीपीएम की केरल इकाई के सेक्रेटरी कोडियारी बालाकृष्णन ने कहा कि सेना किसी भी महिला को अगवा कर सकती है और उसका बलात्कार कर सकती है।

सीपीएम नेता के बयान पर विपक्षी दलों ने कड़ा एतराज जताया है। सीपीएम नेता ने केरल में एक जनसभा ये विवादित बयान दिया।

सीपीएम नेता ने कहा, ''अगर सेना कन्नूर में आती है तो उसका जनता से संघर्ष होगा।''

सीपीएम नेता ने कहा, ''वो (सेना) कुछ भी कर सकते हैं। अगर वो चार लोगों को एक साथ खड़ा देखेंगे तो उन्हें गोली भी मार सकते हैं।''

सीपीएम नेता ने कहा, ''वो (किसी) भी महिला को उठा सकते हैं और उसके साथ बलात्कार कर सकते हैं। किसी के पास उनसे सवाल करने का अधिकार नहीं है। सेना की यही हालत है।''

केरल का कन्नूर पिछले कुछ समय से राजनीतिक हिंसा का शिकार रहा है। कन्नूर जिले में आरएसएस, बीजेपी और सीपीएम के कई कार्यकर्ताओं की मौत हो चुकी है। केरल में सीपीएम के नेतृत्व वाली लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) की सरकार है। आरएसएस और बीजेपी हिंसा के लिए सीपीएम सरकार को दोषी ठहराते रहे हैं। जबकि सीपीएम इससे इनकार करता रहा है।

बीते दिनों केरल के राज्यपाल न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) पी. सदाशिवम ने केरल के मुख्यमंत्री पी. विजयन को राजनीतिक रूप से अशांत कन्नूर जिले में फैली गुंडागर्दी, हिंसा और हत्या और घटनाओं पर फौरन लगाम लगाने का निर्देश दिया था। राजभवन में 3 सदस्यीय बीजेपी प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन सौंप कर कन्नूर में हुई आरएसएस पदाधिकारी बिजू की हत्या पर कार्रवाई की मांग की थी। राज्यपाल ने ज्ञापन मुख्यमंत्री के पास भेजते हुए उनसे ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए फौरन आवश्यक कार्रवाई करने को कहा था।

शशि थरूर ने अरनब गोस्वामी पर मानहानि का मुकदमा ठोका

कांग्रेस के सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर ने रिपब्लिक टीवी के एडिटर इन चीफ अरबन गोस्वामी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया है। मानहानि केस दर्ज कराने की जानकारी पूर्व केंद्रीय मंत्री ने फेसबुक और ट्विटर पर दी।

थरूर ने बताया कि उन्होंने शुक्रवार को दिल्ली हाई कोर्ट में अरनब के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया है। गोस्वामी के रिपब्लिक टीवी ने ऑन एयर होने के बाद थरुर की पत्नी सुनंदा पुष्कर की मौत से जुड़े मामले को लेकर खुलासा किया। रिपब्लिक टीवी ने दावा किया था सुनंदा की मौत के बाद थरूर कमरे में आए थे और सुंनदा की लाश को हटाया गया था।

अरनब गोस्वामी के चैनल रिपब्लिक टीवी ने अपने विशेष प्रोग्राम में सुनंदा पुष्कर की मौत को लेकर खुलासा किया था। प्रोग्राम में दावा किया गया था कि सुनंदा पुष्कर की मौत के बाद कांग्रेस नेता शशि थरूर कमरे में वापस आए थे। एंकर अरनब गोस्वामी ने स्पेशल प्रोग्राम के जरिए कहा कि शशि थरूर के कमरे में आने के बाद सबूतों से छेड़छाड़ की गई थी। यहां तक की सुनंदा पुष्कर की लाश को भी हटाया गया था। प्रोग्राम में दावा किया गया था इन रिकॉर्डिंग को पहले कभी सार्वजनिक नहीं किया गया। हमारे पास पुख्ता सबूत हैं कि सुनंदा पुष्कर की हत्या के बाद शशि थरूर रूम नंबर 309 में सुबह और शाम को वापस आए थे।

बता दें कि कांग्रेस लीडर की पत्नी सुनंद पुष्कर दिल्ली के एक पांच सितारा होटल में मृत पाई गई थी। हत्या के बाद से अब तक इस मर्डर मिस्ट्री को लेकर खुलासा नहीं हो सका है। इस दौरान शशि थरूर खुद अपनी पत्नी की हत्या के शक के दायरे में बने रहे।

हालांकि कई महीने तक जांच और फॉरेंसिक रिपोर्ट के बाद भी पुलिस किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई। मामले की जांच अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई तक भी पहुंची, लेकिन वहां से भी कुछ खास जानकारी निकलकर सामने नहीं आई। बाद में खुलासा किया गया कि दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरने के बाद थरूर और सुनंदा के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई थी।

एएनआई ने गलती मानी, कश्‍मीर के पुंछ के मुगल रोड पर कोई हादसा नहीं हुआ है

जम्‍मू-कश्‍मीर के पुंछ में एक सड़क हादसे की खबर झूठ निकली।

समाचार एजेंसी एएनआई ने पहले ट्वीट कर जानकारी दी थी कि मुगल रोड पर बस अंसतुलित होकर गिर गई। बस में मौजूद बच्‍चे राजौरी के मंजाकोट के रहने वाले बताए जा रहे हैं।

वहीं डीडी न्‍यूज के अनुसार, हादसे में कम से कम 38 बच्‍चों की मौत हुई।

हालांकि एएनआई ने ट्विटर पर सफाई जारी करते हुए कहा है कि ''यह समाचार गलत है। स्‍थानीय अधिकारियों द्वारा दी गई शुरुआती रिपोर्ट्स गलत थीं। पुंछ के मुगल रोड पर कोई हादसा नहीं हुआ है।''

कश्‍मीर में बस हादसे में कम से कम 38 बच्‍चों की मौत: एएनआई और डीडी न्‍यूज

जम्‍मू-कश्‍मीर के पुंछ में एक सड़क हादसे में कम से कम 38 बच्‍चों की मौत की खबर है।

एएनआई के अनुसार, मुगल रोड पर बस अंसतुलित हो गई। बस में मौजूद बच्‍चे राजौरी के मंजाकोट के रहने वाले बताए जा रहे हैं।

डीडी न्‍यूज के अनुसार, हादसे में कम से कम 38 बच्‍चों की मौत हुई है। घटना की विस्‍तृत जानकारी की प्रतीक्षा है।

वहीं, मध्‍य प्रदेश के नीमुच जिले में एक सड़क हादसे में कम से कम 11 लोगों की मौत हो गई, जबकि 12 घायल हो गए। तीथयात्रियों को लेकर जा रही ट्रैक्‍टर-ट्रॉली का संतुलन बिगड़ने से यह हादसा हुआ।

उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में बड़ागांव थाना क्षेत्र में तीव्र गति से जा रही कार अनियंत्रित होकर पुलिया से टकरा गई, जिससे कार सवार दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। स्थानीय लोगों की सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने शवों को बाहर निकाल कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

कानपुर से झांसी की ओर जा रही कार (उप्र 93 एक्यू 2122) झांसी के बड़ागांव थाना क्षेत्र में अनियंत्रित हो गई और तीव्र गति में पुलिया से टकरा गई। हादसे में कार सवार दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। शिनाख्त में एक की पहचान वासिद हुसैन के रूप में हुई है। दूसरे की शिनाख्त का प्रयास पुलिस कर रही है।

वहीं, नई दिल्‍ली में एक कालोनी में ट्रकों को ले जाने को लेकर हुए विवाद ने संघर्ष का रूप ले लिया और इसमें गोली चल गई। मामले में पांच लोग घायल हुए हैं। पुलिस ने यह जानकारी दी।

घटना बुधवार रात हुई जब दक्षिण दिल्ली में वसंत कुंज निवासी 39 वर्षीय हरपाल ने विनोद खत्री से भवन निर्माण सामग्री से भरे ट्रकों को कालोनी के रास्ते से नहीं ले जाने के लिए कहा। उनका कहना था कि इससे सड़क को क्षति पहुंच सकती है।

पुलिस ने कहा, ''इसके बाद रात में खत्री अपने पुत्र और लगभग 15 अन्य लोगों के साथ लाठियों, लोहे की छड़ों और बंदूकों से लैस होकर आया। इन लोगों ने हरपाल पर हमला किया और उसे गोली मारने की कोशिश की।''