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कर्नाटक में 150 सीटें जीत कर कांग्रेस बनाएगी सरकार: बीजेपी महासचिव

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव पी मुरलीधर राव ने पार्टी की बैठक में कहा कि कर्नाटक में अगले साल होने वाले विधान सभा चुनाव में कांग्रेस 150 सीटें जीतेगी। कर्नाटक में सरकार बनाने के लिए 113 सीटें ही काफी होती हैं।

मुरलीधर राव को तुरंत ही अपनी भूल का अहसास हो गया और उन्होंने अपनी बात दुरस्त करते हुए कहा कि कर्नाटक में आगामी विधान सभा चुनाव में भाजपा 150 सीटें जीतेगी, लेकिन मुरलीधर राव की अनचाही भूल से पार्टी को अवांछित नुकसान हो गया।

उनके बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर लीक हो गया। आखिर में मुरलीधर राव ने भाजपा के सोशल मीडिया सेल को उनके संबोधन का पूरा वीडियो जारी करने के लिए कहा।

कर्नाटक में अभी कांग्रेस की सरकार है। कांग्रेस के के सिद्धारमैया राज्य के मुख्यमंत्री हैं। कर्नाटक में पिछला विधान सभा चुनाव मई 2013 में हुआ था। राज्य में विधान सभा की कुल 225 सीटे हैं। पिछले चुनाव में कांग्रेस ने राज्य की 125 सीटों पर जीत हासिल करके भाजपा को सत्ता से बाहर कर दिया था।

भाजपा को 44  और जनता दल (सेकुलर) को 40 सीटों पर जीत मिली थी। बाकी सीटें अन्य पार्टियों और निर्दलियों के खाते में गयी थीं।

2013 के चुनाव में भाजपा को बीएस येदियुरप्पा के पार्टी छोड़ने का बड़ा नुकसान हुआ था। येदियुरप्पा के नेतृत्व में ही भाजपा पहली बार किसी दक्षिण भारतीय राज्य में सरकार बनाने में सफल हुई थी। येदियुरप्पा ने भाजपा से निकलने के बाद अलग पार्टी बनाकर चुनाव लड़ा था।

येदियुरप्पा भले ही अपनी पार्टी को जीत न दिला सके हों, लेकिन उन्होंने भाजपा को हराने में अहम रोल अदा किया था।

जस्टिस कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट का ऑर्डर खारिज किया

सुप्रीम कोर्ट द्वारा गिरफ्तारी का आदेश दिए जाने के करीब एक घंटे बाद ही कोलकाता हाई कोर्ट के जज सीएस कर्णन ने भारत की सर्वोच्च अदालत के आदेश को खारिज करते हुए कहा कि वो पहले ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश को रद्द करने वाला आदेश दे चुके हैं।

जस्टिस कर्णन ने कहा, ''सुप्रीम कोर्ट ने सुबह 11 बजे आदेश दिया। मैंने सुबह 11.20 पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को रद्द करने का आदेश दिया। वो मीडिया को मेरे बयान न छापने का आदेश कैसे दे सकते हैं?''

जस्टिस कर्णन चेन्नई के चेपक गवर्नमेंट गेस्ट हाउस में मीडिया से मुखातिब थे।

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (नौ मई) को मीडिया को जस्टिस कर्णन के किसी भी बयान को न छापने के लिए कहा था। कर्णन ने अपने लेटर पैड पर लिखा एक लिखित बयान जारी किया और कहा कि ये उनका आदेश है।

जस्टिस कर्णन ने कहा कि उन्होंने सीबीआई को सुप्रीम कोर्ट के सात जजों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज करने का आदेश दिया है।

जस्टिस कर्णन ने कहा, ''क्या मैं असमाजिक तत्व हूं? क्या मैं आतंकी हूं? वो प्रतिबंध का आदेश कैसे दे सकते हैं? बगैर मेरा पक्ष सुने उन्होंने मेरे खिलाफ कई फैसले दिए हैं? मैं गिरफ्तारी या जेल से नहीं डरता। आम जनता मेरे साथ है। ये न्यायिक व्यवस्था की पूर्ण विफलता है। मैं पहले ही जेल देख चुका हूं।''

जस्टिस कर्णन ने बताया कि हाई कोर्ट के जज के तौर पर वो करूर, शिवगंगा स्थित जेलों का दौरा कर चुके हैं।

जेल जाने से डरने के सवाल पर जस्टिस कर्णन ने कहा, ''मैं नेपोलियन की तरह हूं, डॉक्टर अंबेडकर का एक दत्तक पुत्र  ..... वो कहते हैं मैं पागल हूं। अगर मैं पागल हूं तो मुझे जेल क्यों भेजा जा रहा है?''

ये पूछने पर की क्या वो राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मिलने वाले हैं? जस्टिस कर्णन ने कहा कि वो पहले राष्ट्रपति को अपना प्रतिनिधित्व भेज चुके हैं। जस्टिस कर्णन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश लागू होने लायक नहीं है और वो मीडिया पर प्रतिबंध के सर्वोच्च अदालत के आदेश को खारिज करने वाला आदेश दे चुके हैं।

जस्टिस कर्णन ने कहा कि ये मामला सुप्रीम कोर्ट के सात जजों और उनके बीच का नहीं बल्कि न्यायापालिका में भ्रष्टाचार का है जिसकी अनदेखी की जा रही है।

जस्टिस कर्णन ने कहा कि एटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने सर्वोच्च अदालत में मामले को सही तरीके से नहीं रखा।

जस्टिस कर्णन को सुप्रीम कोर्ट ने सुनाई 6 महीने की सजा

भारत के मुख्‍य न्‍यायाधीश जेएस खेहर समेत शीर्ष अदालत के 6 अन्‍य जजों को पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाने वाले कलकत्‍ता हाई कोर्ट के जस्टिस कर्णन को सुप्रीम कोर्ट ने 6 महीने कैद की सजा सुनाई है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह सजा उन्हें अदालत की अवमानना मामले में दी है। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें तुरंत गिरफ्तार करने के निर्देश दिए हैं। बंगाल के डीजीपी आज खुद उन्हें गिरफ्तार करेंगे। कोर्ट ने मीडिया पर उनके द्वारा दिए गए आदेशों को छापने को लेकर रोक लगा दी है।

इससे पहले जस्टिस कर्णन ने सीजेआई जेएस खेहर समेत सुप्रीम कोर्ट के 6 अन्‍य जजों को पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। जज ने यह फैसला इन सभी को अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निरोधक) अधिनियम के तहत दोषी पाए जाने पर दिया था।

सीजेआई व 6 अन्‍य जजों को सम्‍मन किए जाने के बाद वह जस्टिस कर्णन के सामने पेश नहीं हुए तो उन्‍होंने गैर-जमानती वारंट जारी करते हुए 8 मई को फिर पेश होने का आदेश जारी किया था।

सोमवार को जब सुप्रीम कोर्ट के जज पेश नहीं हुए तो जस्टिस कर्णन ने इसे अपनी अदालत की अवमानना मानते हुए सभी 7 जजों को 5 साल की सजा सुना दी।

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने उनकी न्‍यायिक कर्त्‍तव्‍यों को जारी रखने की याचिका यह कहते हुए ठुकरा दी थी कि हाई कोर्ट जज दिमागी रूप से ठीक नहीं हैं।

शीर्ष अदालत ने कर्णन के खिलाफ 17 मार्च को जमानती वारंट भी जारी किया था। 2 मई को जस्टिस कर्णन ने संविधान के अनुच्‍छेद 226 का प्रयोग करते हुए सुओ-मोटो आदेश जारी किया था।

1 मई को सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस कर्णन के मानसिक स्वास्थ्य की जांच के लिए मेडिकल बोर्ड के गठन का आदेश दिया था। लेकिन जस्टिस कर्णन ने इसे कराने से मना कर दिया था। कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए जस्टिस कर्णन ने पूछा था कि सर्वोच्च अदालत उनके मानसिक स्वास्थ्य पर सवाल उठाने वाला कौन होता है?

योगी आदित्यनाथ के राज में क्यों रोई आईपीएस लेडी सिंघम

इन दिनों उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के लोकसभा क्षेत्र में पुलिस अधिकारी से बदसलूकी का वीडियो सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर वायरल हो रहा है। वायरल हो रहे वीडियो में भाजपा विधायक डॉक्टर राधा मोहन दास अग्रवाल महिला आईपीएस चारु निगम से बदसलूकी करते हुए नजर आ रहे हैं।

वीडियो में दिखाई दे रहा है कि विधायक राधा मोहन महिला अधिकारी से बहुत ऊंची आवाज में बात कर रहे हैं। इस दौरान आईपीएस चारु लोगों के सामने ही भावुक होकर रोने लग गईं।

वीडियो सामने आने के बाद विधायक राधा मोहन का विरोध किया जा रहा है और उनसे माफी मांगने की बात कही जा रही है।

खबर के अनुसार, विधायक ने माफी मांगने से इंकार दिया है। वहीं, टीवी चैनल इंडिया टुडे में एक प्रोग्राम के दौरान विधायक ने यहां तक कह डाला कि वो छोटी अफसर थी उसे बीच में बोलने की क्या जरूरत थी।

उन्होंने कहा कि मैंने आईपीएस से चुप रहने के लिए कहा, इसमें मैंने क्या गलत कह दिया।

असल में क्षेत्र में देशी और अंग्रेजी शराब की दुकान बंद कराने की मांग को लेकर लोग अचानक आक्रोशित हो गए। इस दौरान क्षेत्र में लगे जाम को खत्म कराने आई पुलिस पर भी नाराज लोगों ने पथराव कर दिया। इस दौरान सीओ गोरखनाथ (आईपीएस) चारु निगम जख्मी हो गईं।

मौके पर पहुंचे विधायक राधा मोहन मामले में बड़े अधिकारियों से बात करने लगे। मगर जैसे ही आईपीएस अधिकारी चारु निगम ने बीच में बोलना चाहा तब विधायक ने उन्हें बुरी तरह डांटना शुरू कर दिया और कहा, तुम मुझे मत बताओ ... मैं तुमसे बात नहीं कर रहा हूँ। ... चुप रहो तुम।

विधायक के इस बर्ताव से आईपीएस बहुत आहत हुईं और मौके पर ही उनकी आंखों से आंसू टपकने लगे।

बता दें कि जाम कर रहे लोगों की शिकायत मिलने पर विधायक राधा मोहन अग्रवाल घटना स्थल पर पहुंचे थे। इस दौरान क्षेत्रीय लोगों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए और आम लोगों की पिटाई करने का आरोप लगाया। इस दौरान विधायक ने पुलिस को भी जमकर फटकार लगाई और बूढ़ी, गर्भवती महिलाओं पर लाठीचार्ज पर पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। बता दें कि मामला रविवार (7 मई, 2017) का है।

जस्टिस कर्णन ने सीजेआई खेहर और सुप्रीम कोर्ट के 6 अन्‍य जजों को सुनाई 5 साल जेल की सजा

कलकत्‍ता हाई कोर्ट के जस्टिस कर्णन ने भारत के मुख्‍य न्‍यायाधीश जेएस खेहर समेत सुप्रीम कोर्ट के 6 अन्‍य जजों को पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। जज ने यह फैसला इन सभी को अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निरोधक) अधिनियम के तहत दोषी पाए जाने पर दिया है।

खुद जस्टिस कर्णन पर न्‍यायपालिका का अपमान करने और सुप्रीम कोर्ट के जजों के खिलाफ भ्रष्‍टाचार के आरोप लगाने को लेकर अदालत के अपमान का आरोप है।

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने उनकी न्‍यायिक कर्त्‍तव्‍यों को जारी रखने की याचिका यह कहते हुए ठुकरा दी थी कि हाई कोर्ट जज दिमागी रूप से ठीक नहीं हैं।

शीर्ष अदालत ने कर्णन के खिलाफ 17 मार्च को जमानती वारंट भी जारी किया था।

2 मई को जस्टिस कर्णन ने संविधान के अनुच्‍छेद 226 का प्रयोग करते हुए सुओ-मोटो आदेश जारी किया था।

सीजेआई व 6 अन्‍य जजों को सम्‍मन किए जाने के बाद वे जस्टिस कर्णन के सामने पेश नहीं हुए तो उन्‍होंने गैर-जमानती वारंट जारी करते हुए 8 मई को फिर पेश होने का आदेश जारी किया था।

सोमवार को जब सुप्रीम कोर्ट के जज पेश नहीं हुए तो जस्टिस कर्णन ने इसे अपनी अदालत की अवमानना मानते हुए सभी 7 जजों को 5 साल की सजा सुना दी।

1 मई को अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस कर्णन के मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य की जांच के लिए मेडिकल बोर्ड गठित करने का आदेश दिया था।

इसके अलावा शीर्ष अदालत ने भारत की सभी संस्‍थाओं से कहा था कि वे जस्टिस कर्णन द्वारा 8 फरवरी से 1 मई तक दिए गए आदेशों को न मानें। शीर्ष अदालत ने जस्टिस कर्णन को अपना पक्ष रखने का मौका दिया था, मगर वे कार्यवाही में हाजिर नहीं हुए थे।

चारा घोटाले में सुप्रीम कोर्ट से लालू प्रसाद यादव को झटका

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को चारा घोटाले में फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की याचिका स्वीकार कर ली है और चारा घोटाले में हर केस का अलग से ट्रायल चलाने का फैसला दिया है। इस तरह सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का फैसला पलट दिया है।

अब राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव पर आपराधिक साजिश का केस चलेगा। सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल को 9 महीने के भीतर खत्म करने का भी निर्देश दिया है। नब्बे के दशक में बिहार में लालू प्रसाद यादव के मुख्यमंत्री काल में लगभग साढ़े नौ सौ करोड़ रुपये का चारा घोटाला हुआ था। वर्ष 1996 में सामने आए इस मामले में लालू यादव के अलावा कुल 47 आरोपी थे, लेकिन लंबे समय से चल रही अदालती कार्यवाही के दौरान 15 आरोपियों की मौत हो गई।

सोमवार को उच्चतम न्यायालय ने झारखंड उच्च न्यायालय के उस आदेश को रद्द किया जिसमें चारा घोटाला मामलों में से एक में दोष सिद्धि के बाद लालू और अन्य के खिलाफ मुकदमों पर रोक लगा दी गई थी। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि झारखंड उच्च न्यायालय के निष्कर्षाें में समरूपता होनी चाहिए और मामले में विभिन्न आरोपियों पर अलग-अलग राय नहीं देनी चाहिए ।

उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील दायर करने में विलंब के लिए सीबीआई की खिंचाई भी की।

उच्चतम न्यायालय ने कहा कि सीबीआई निदेशक को इस महत्वपूर्ण मामले की ओर ध्यान देना चाहिए था और मामले को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी एक अधिकारी को सौंपनी चाहिए थी।

वहीं, कोर्ट के इस फैसले के बाद एक मीडिया समूह से बात करते हुए बिहार भाजपा के नेता सुशील मोदी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार अगर लालू यादव का साथ छोड़ें तो समर्थन पर विचार किया जा सकता है।

जोधाबाई मुगल बादशाह अकबर की पत्नी नहीं थी

ब्रिटिश इतिहासकार लुईस डे एसिस कोरैया ने मुगल बादशाह अकबर की जिंदगी पर सबसे अहम खुलासा किया है। कोरैया कहते हैं कि जोधाबाई को अकबर की पत्नी बताया जाता है, लेकिन वास्तव में अकबर की पत्नी जोधाबाई नहीं थी। कोरैया कहते हैं, असल में जोधाबाई जहांगीर की पत्नी थी।  

लंदन के ब्रिटिश इतिहासकार लुईस डे एसिस कोरैया पिछले कई वर्षों से भारत में रहकर स्वतंत्र रूप से पुर्तगाल और ईसाईयों पर रिसर्च कर रहे हैं। उन्होंने अब तक 6 किताबें लिखी हैं जिसमें से हाल ही में उन्होंने 'पुर्तगाल भारत और मुगल रिश्ते (1510-1735)' नाम की एक किताब रिलीज की है।

इस किताब में अकबर और पुर्तगाली मारिया मार्करनहस के बीच वैवाहिक गठबंधन के बारे में काफी विस्तार से बताया गया है।

वह कहते हैं कि इस संबंध का मुगल, पुर्तगाली और अंग्रेजी स्रोतों में भी जिक्र नहीं है।

मारिया मार्करनहस के बारे में कोरैया लिखते हैं, वह अपनी छोटी बहन जुलियाना के साथ लिस्बन से गोवा सितंबर 1558 में आई थीं।

किताब में कैरैया लिखते हैं, उस जमाने में पुर्तगाल के राजा की यह जिम्मेदारी थी कि वह राज्य के लिए बलिदान देने वालों के अनाथों की रक्षा करें और शादी की उम्र वाली लड़कियों को कॉलोनियों में भेजा जाए। लेकिन बीच में उनके जहाज पर डाकू ने हमला कर दिया और दोनों लड़कियों को गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह के दरबार में लाया गया। सुल्तान बहादुर शाह ने दोनों लड़कियों को मुगल दरबार में पेश किया।

वह लिखते हैं, जैसे ही अकबर की नजर 17 साल की मारिया मार्करनहस पर पड़ी, उन्हें उससे मोहब्बत हो गई और अकबर ने जल्द से जल्द उसे अपनी पत्नी बनाने का फैसला कर लिया।

कोरैया कहते हैं, यूं तो अकबर के हरम में उनके बारे में काफी सामान उपलब्ध है, लेकिन फिर भी मुगल सूत्र इस रिश्ते के बारे में खामोश रहे।

उन्होंने कहा, अकबर के जीवन के बारे में सबसे भरोसेमंद दस्तावेज अबुल फजल द्वारा लिखा गया 'अकबरनामा' माना जाता है इसमें भी इस बारे में कुछ लिखा नहीं गया है।

वहीं मुगल स्रोत्र 'अल बदायूनी' में भी मारिया का कोई जिक्र नहीं मिलता।

कोरैया के मुताबिक, मुगल और पुर्तगालियों के बीच तल्ख रिश्ते होने के कारण उन्होंने यह नहीं कहा कि अकबर की एक ईसाई बीवी थी।

कोरैया ने बताया कि जोधाबाई वह महिला नहीं हैं जिसका जिक्र वह मारिया के तौर पर कर रहे हैं।

कोरैया कहते हैं कि न तो अकबरनामा में और न ही कभी जहांगीर की मां के तौर पर जोधाबाई का जिक्र मिलता है।

उन्होंने कहा, इस अवधि में फारसी रिकॉर्ड में भी इस नाम (जोधाबाई) के किसी शख्स का जिक्र नहीं आता।

जो इतिहासकार जोधाबाई का जिक्र करते हैं वे हैं इतिहासकार जेम्स टॉड। लेकिन वह उनका (जोधाबाई) जिक्र जहांगीर की पत्नी और शाहजहां की मां के तौर पर करते हैं।

कोरैया ने दावा किया कि जहांगीर की मां पुर्तगाली ईसाई (मारिया मार्करनहस) थीं जिसे मरियम-उज़-ज़मानी कहा जाता था।

कोरैया कहते हैं कि जहांगीर हमेशा क्रॉस की एक गोल्ड की चेन पहनकर रहते थे जिसे उन्होंने कभी नहीं उतारा।

कोरैया कहते हैं कि जहांगीर आधा ईसाई थे और उनके महल में यीशु की एक तस्वीर थी और वह आगरा के जेसुइट हाउस में हफ्ते में एक दिन जरूर बिताते थे।

(परवेज़ अनवर नई दिल्ली स्थित जामिया मिल्लिया इस्लामिया के इतिहास विभाग के छात्र रहे हैं तथा आईबीटीएन ग्रुप के फाउंडर, सीईओ, डायरेक्टर और एडिटर-इन-चीफ हैं।)

अरविन्द केजरीवाल करप्शन कर सकते हैं, ये वे कभी नहीं मान सकते हैं: कुमार विश्वास

आम आदमी पार्टी के नेता कुमार विश्वास ने दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा के खुलासे पर मिली जुली प्रतिक्रिया दी है। अपनी पहली प्रतिक्रिया में कुमार विश्वास ने कहा है कि सीएम अरविन्द केजरीवाल करप्शन कर सकते हैं, ये वे कभी नहीं मान सकते हैं।  

उन्होंने कहा कि केजरीवाल की ईमानदारी पर उन्हें इतना भरोसा है कि सीएम के दुश्मन भी ये विश्वास नहीं करेंगे कि उन्होंने रिश्वत ली है।

कुमार विश्वास ने कहा कि अगर कपिल मिश्रा के पास सबूत है तो उन्हें सबूतों के साथ मीडिया के सामने आना चाहिए।

कुमार विश्वास के मुताबिक, केजरीवाल पर आरोप लगाना गलत है और अगर उन्होंने आरोप लगाये हैं तो उन्हें सूबत लेकर आना चाहिए।

कुमार विश्वास ने कहा कि पार्टी में मचे इस सनसनी से आम आदमी पार्टी के ईमानदार कार्यकर्ता आहत हैं।

कुमार विश्वास ने कहा कि वे पार्टी की पीएसी की बैठक में शिरकत करेंगे और इन मुद्दों को उठाएंगे।

इधर आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता योगेन्द्र ने भी कहा है कि कपिल मिश्रा सबूत लेकर सामने आएं।

इससे पहले कुमार विश्वास ने भी शनिवार रात को एक ट्वीट कर आंदोलन की चेतावनी दी थी। उन्होंने लिखा था, ''एक आंदोलन और सही। न थके हैं, न डरे हैं। सत्ता के किसी घड़े का बूँद भर जल भी नहीं चखा इसलिए अभीतक जंतर-मंतर की आग बाक़ी है। साथियो आश्वस्त रहो।''

कपिल मिश्रा ने रविवार सुबह भी एक ट्वीट कर लिखा कि अगर संबंध बिगड़ने के डर से कोई अच्छा अच्छा ही बोलता है तो राज्य का नाश हो जाता है।

बता दें कि आम आदमी पार्टी का ये झगड़ा दिल्ली नगर निगम चुनाव के नतीजे आने के बाद से चल रहा है। आप विधायक अमानतुल्लाह ने कुमार विश्वास पर बीजेपी और आरएसएस के लिए काम करने का आरोप था। इसके बाद पार्टी ने अमानतुल्लाह पर कार्रवाई की थी।

अमानतुल्ला खान का कद बढ़ा, कुमार विश्वास के करीबियों का ‘डिमोशन’

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी के 14 जिला इंचार्ज बदल दिए हैं। उनकी जगहों पर तीन लोगों को पदभार सौंपा गया है।

इंडिया टुडे की खबर के मुताबिक, यह फैसला अरविंद केजरीवाल ने लिया क्योंकि वह दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) चुनाव 2017 के नतीजों से खुश नहीं है।

खबर के मुताबिक, केजरीवाल ने यह फैसला करके कुमार विश्वास के करीबियों के 'पर काटने' का काम किया है।

सोमनाथ भारती, अल्का लांबा और भावना गौड़ जिन्हें कुमार विश्वास का करीबी माना जाता है उनको लाइब्रेरी कमेटी का सदस्य बनाया गया है। इस विभाग में ज्यादा कुछ करने को नहीं होता इसलिए इसको डिमोशन के तौर पर देखा जा रहा है।

साथ ही कुमार विश्वास को समर्थन देने वाले सोमनाथ भारती को विशेषाधिकार समिति के चेयरमैन के पद से हटाकर वहां कैलाश गहलौत को बैठा दिया गया है।

वहीं दूसरी तरफ अमानतुल्ला खान जिनको पार्टी से निलंबित किया गया था उनको चार कमेटी का सदस्य बनाया गया है। साथ ही उन्हें विशेष जांच की कमेटी का भी सदस्य चुना गया है। यह कमेटी ही कुमार विश्वास के खिलाफ बोलने पर उनकी जांच कर रही है। ये सब फैसले शनिवार को हुई मीटिंग में लिए गए। उसमें सोमनाथ के अलावा 40 विधायक पहुंचे थे।

विप्रो के दफ़्तर पर जैविक हमला करने की धमकी

बेंगलुरु स्थित सूचना प्रोद्यौगिकी की मेगा कंपनी विप्रो को एक धमकी भरा मेल मिला है। इस मेल के जरिये कंपनी को 25 मई तक 500 करोड़ रुपये इंटरनेट के जरिये जमा कराने को कहा गया है। ऐसा ना करने की स्थिति में मेल भेजने वाले ने कंपनी के दफ़्तर पर ड्रोन के जरिये जहरीले रसायन से जैविक हमला करने की धमकी दी है।

अज्ञात शख्स से मिले इस मेल में पेमेंट करने के लिए एक लिंक भी दिया गया है और कहा गया है कि वे अपनी धमकी को सच साबित करने का एक नमूना भी देंगे और आने वाले दिनों में जहरीले रसायन का 2 ग्राम सैंपल भी विप्रो के किसी एक दफ़्तर में भेजेंगे।

खबरों के अनुसार, ई मेल भेजने वाले गुमनाम शख्स ने मेल में लिखा है कि अगर कंपनी पैसा नहीं देती है तो कंपनी पर हमले के लिए एक प्राकृतिक जहर रिसिन (Ricin) का इस्तेमाल किया जाएगा।

मेल भेजने वाले का कहना है कि वो कंपनी के कैफेटेरिया में, या फिर ड्रोन के जरिये इस केमिकल को विप्रो परिसर में डाल देगा। उसने ये भी धमकी दी है कि वो इस केमिकल को टॉयलेट सीट पर भी डाल सकता है। इस शख्स ने बिटक्वाइंस के जरिये पेमेंट भेजने की मांग की है। बिटक्वाइंस इंटरनेट के जरिये वित्तीय लेन-देन के लिए इस्तेमाल की जाने वाली करेंसी है।

कंपनी ने इस मामले में पुलिस में शिकायत दर्ज करवा दी है। विप्रो के सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि इस मेल के मिलने के बाद दफ़्तर परिसर में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। इस धमकी का कंपनी के रोजाना ऑपरेशन पर कोई असर नहीं पड़ा है।

बेंगलुरु पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद जांच शुरू कर दी है।  बेंगलुरु पुलिस की साइबर विंग इस केस की जांच कर रही है और मेल कहां से लिखा गया है और किस आईपी एड्रेस के जरिये भेजा गया है इसकी जांच कर रही है।

पुलिस का कहना है कि ये फर्जी मेल भी हो सकता है। बेंगलुरु के एडिशनल कमिश्नर एस रवि ने बताया कि वे अपने सभी साधनों के जरिये ये जानने की कोशिश करेंगे कि ये धमकी वास्तविक है या झूठ। साल 2013 में भी विप्रो ऑफिस को उड़ाने की धमकी मिली थी जो बाद में फर्जी साबित हुई थी।