कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्जिवय सिंह ने सेना को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने सेना पर कश्मीरियों को मारने का आरोप लगाया।
दिग्जिवय सिंह ने कहा कि कश्मीरियों को घाटी में तैनात सेना भी मारती है और आंतकी भी मारते हैं। कश्मीरियों को आतंकी और सेना दोनों मारते हैं।
कश्मीर में युवाओं द्वारा सीआरपीएफ जवानों के साथ बदसूलकी और कश्मीरी युवक को कथित तौर पर जीप के आगे बांधकर घूमने का वीडियो सामने आया जिसके बाद कांग्रेस महासचिव दिग्विजय ने यह बयान दिया।
जवानों के साथ हुई इस घटना पर सीआरपीएफ इंस्पेक्टर जनरल रविदीप सिंह साही ने कहा कि प्रथम दृष्टया वीडियो विश्वसनीय प्रतीत हो रहा है और सेना इस मामले में कानूनी रूप से कड़ी कार्रवाई करेगी। जम्मू-कश्मीर में हमारी शिकायत पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर ली है।
एबीपी न्यूज के मुताबिक, दिग्विजय सिंह ने कहा, ''कश्मीरी दोनों तरफ से मारे जा रहे हैं .... उधर से आतंकवाद उनको मारता है और यहां पर हमारी सेना उनको मारती है।''
साथ ही दिग्विजय सिंह ने कश्मीरियों द्वारा सीआरपीएफ जवानों के साथ की गई मारपीट के वीडियो को भी दरकिनार कर दिया। हालांकि दिग्विजय सिंह की ओर से भारत के खिलाफ नारे लगाने वाले और सेना पर पथराव करने वालों के खिलाफ कुछ भी नहीं कहा गया।
कांग्रेसी नेता ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि वह 2018-19 में पाकिस्तान से युद्ध करवा सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जब वह (मोदी) जनता से किए गए वादे को पूरा नहीं कर पाएंगे तो पाकिस्तान के खिलाफ माहौल बनाएंगे।
उन्होंने मोदी सरकार की कश्मीर नीति पर सवाल उठाते हुए 2019 में पाकिस्तान से युद्ध की आशंका जताई है। इससे पहले दिग्विजय सिंह ने ट्विटर पर लिखा- मैं मानता हूं कि अगर आप कश्मीर चाहते हैं तो पहले आपको कश्मीरियों को जीतना होगा। पीडीपी और भाजपा के बीच बुनियादी मुद्दों पर विरोधाभास कश्मीरी लोगों के बीच आत्मविश्वास का आह्वान नहीं करता है।
गौरतलब है कि कुछ दिन चुनाव ड्यूटी से लौट रहे सीआरपीएफ के जवानों का वीडियो सामने आया था जिसमें कश्मीरी युवा उनके साथ बदसलूकी कर रहे हैं। यही नहीं, उन्हें लात और हाथ से मार भी रहे हैं। इसके बावजूद भी कंधों पर बंदूक ताने जवानों ने बिना किसी प्रतिक्रिया के वहां से जाते हुए अपनी समझदारी का परिचय दिया। इस वीडियो के सामने आने के बाद लोगों में बहुत गुस्सा है। लोग इस घटना की कड़ी निंदा कर रहे हैं। इसी बीच कथित तौर पर जीप पर कश्मीरी युवक को बांधकर घूमाने का वीडियो भी सामने आया है।
उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार जाने के साथ ही समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव की मुश्किलें शुरू हो गई हैं। खबर है कि आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर को धमकी देने के मामले में पुलिस जल्द ही मुलायम सिंह की आवाज का नमूना लेगी।
पुलिस शिकायतकर्ता अधिकारी की आवाज का भी नमूना लेगी। फिर उसका मिलान किया जाएगा। अमिताभ ठाकुर द्वारा लखनऊ के हजरतगंज थाने में दर्ज कराए गए मुकदमे की जांच कर रहे सीओ दिनेश कुमार सिंह ने लखनऊ की सीजेएम संध्या श्रीवास्तव की अदालत में सौंपे अपनी रिपोर्ट में यह बात कही है।
गौरतलब है कि दो साल पहले 10 जुलाई, 2015 को अमिताभ ठाकुर ने हजरतगंज थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि मुलायम सिंह यादव ने उन्हें फोन पर धमकी दी है। उस वक्त आनन-फानन में हजरतगंज पुलिस ने मामले की विवेचना कर अक्टूबर 2015 में अपनी अंतिम रिपोर्ट कोर्ट में सौंप दी थी।
इसके बाद कोर्ट ने अगस्त 2016 में जांचकर्ता पुलिस अधिकारी को दोनों की आवाज का नमूना लेकर विधि विज्ञान प्रयोगशाला से जांच कराने का आदेश दिया था, लेकिन तब से उस पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकी थी। अब जब राज्य में सत्ता परिवर्तन हो चुका है तो इस मामले में विवेचना अधिकारी ने 30 मार्च को कोर्ट में अपनी रिपोर्ट सौंपते हुए कहा कि चुनावी ड्यूटी होने और अन्य कार्यों की वजह से वो इस मामले में आगे कार्रवाई नहीं कर सके थे।
सीओ की रिपोर्ट पर संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए तारीख तय कर दी है।
अब अधिकारी दोनों ही लोगों की बातचीत का अध्ययन करेंगे और दोनों की ही आवाज का नमूना लेकर उसे जांच के लिए भेजेंगे।
भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान में मौत की सजा सुनाए जाने पर भारत सरकार ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने राज्यसभा में कहा कि भारत यह सुनिश्चित करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा कि पाकिस्तान में भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को न्याय मिले।
उन्होंने कहा, ''हमारे पास यह कहने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है कि अगर इस सजा की तामील की जाती है तो यह सुनियोजित हत्या की कार्रवाई होगी।''
सुषमा ने कहा कि कुलभूषण जाधव पर जो आरोप लगाए गए हैं, वह मनगढ़ंत तथा हास्यास्पद हैं और उनके द्वारा गलत काम करने का कोई सबूत नहीं है।
उन्होंने कहा कि जाधव ईरान में कारोबार करते थे और वहां से उनका अपहरण कर पाकिस्तान लाया गया। उन्हें बचाव का मौका दिए बिना मुकदमा चलाया गया। जाधव के मामले में सुषमा स्वराज ने कांग्रेस सांसद शशि थरूर से प्रस्ताव तैयार करने में मदद मांगी है। यह प्रस्ताव संसद के दोनों सदनों में पेश किया जाएगा।
संसद में बयान देने के बाद विदेश मंत्री सुषमा कांग्रेस सांसदों की तरफ गईं। वहां उन्होंने थरूर से प्रस्ताव तैयार करने का अनुरोध किया। इस पर शशि थरूर ने अपने दल के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे से अनुमति लेने के बाद खुशी-खुशी अनुरोध को मान लिया।
थरूर ने बाद में एनडीटीवी को बताया, ''यह ऐसा मामला है जो हम सब से जुड़ा हुआ है।'' गौरतलब है कि पिछले साल भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2008 मुंबई हमले में आरोपी जकी-उर-रहमान लखवी की रिहाई की निंदा को लेकर ड्राफ्ट तैयार करने को कहा था।
जाधव के मामले में राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि जाधव को एक सुनियोजित तरीके से फंसाया गया है। यह विश्व मंच पर भारत की छवि खराब करने की कोशिश है। पाकिस्तान अब तक भारत के साथ जो कुछ करता आया है, उसका आरोप अब वह जाधव पर मढ़कर उन्हें फंसा रहा है।
सुबह लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने पर भाजपा के किरीट सोमैया ने यह मामला उठाया और सरकार से पाकिस्तान की इस कार्रवाई की निंदा किए जाने की मांग की।
कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि केंद्र सरकार इस मामले में चुप क्यों बैठी है?
उन्होंने कहा कि विदेश मंत्री को जाधव को बचाने की कोशिश करनी चाहिए अन्यथा यह भारत की कमजोरी साबित होगा।
लोकसभा में सदस्यों द्वारा यह मुद्दा उठाए जाने पर गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, ''पाकिस्तान द्वारा जाधव को फांसी की सजा सुनाए जाने पर पूरा देश न केवल चिंतित है बल्कि आक्रोशित भी है। सरकार इस सजा की कड़ी निंदा करती है जो कि कानून और न्याय के मूलभूत सिद्धांतों को ध्यान में रखे बिना सुनायी गयी है। कुलभूषण जाधव को बचाने के लिए भारत सरकार जो भी करना होगा, करेगी। कुलभूषण के साथ न्याय होगा।''
ओडिशा के भद्रक में भड़की हिंसा के बाद सरकार ने 48 घंटों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह प्रतिबंध रविवार (9 अप्रैल) की शाम 7 बजे से लागू हुआ जो कि भद्रक और आस-पास के इलाकों पर रहेगा।
ओडिशा पुलिस की अपराध शाखा ने भद्रक शहर में हुई सांप्रदायिक हिंसा की एक घटना की जांच शुरू कर दी है, जहां सोमवार सुबह तक कर्फ्यू लागू है। रविवार को प्रारंभ में सुबह आठ बजे से 11 बजे तक शहर में निषेधाज्ञा में ढील दी गई, और बाद में यह अवधि दोपहर 12 बजे तक बढ़ा दी गई, ताकि लोग आवश्यक उपभोक्ता वस्तुओं की खरीदारी कर सकें।
पुलिस के एक अधिकारी ने कहा कि बाद में कर्फ्यू लगा दिया गया जो सोमवार सुबह सात बजे तक रहेगा।
ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने कहा है कि शहर में किसी अप्रिय घटना से बचने के लिए लगभग 35 प्लांटून पुलिस बल तैनात किए गए हैं, और त्वरित कार्रवाई बल (आरएएफ) की दो कंपनियां भद्रक भेजी गई हैं।
नवीन पटनायक ने रविवार को नई दिल्ली में अंतर-राज्य परिषद स्थायी समिति की बैठक में हिस्सा लिया।
उन्होंने कहा कि भद्रक के मुद्दे पर उन्होंने गृहमंत्री राजनाथ सिंह से चर्चा की है और उन्होंने आश्वस्त किया है कि आरएएफ की दो कंपनियां राज्य को भेजी जाएंगी।
इस बीच अपराध शाखा ने हिंदू देवताओं को लेकर सोशल मीडिया पर की गई कथित आक्रामक टिप्पणी की जांच शुरू कर दी है। इसी टिप्पणी के कारण शहर में गुरुवार और शुक्रवार को अशांति पैदा हो गई थी।
अपराध शाखा के विशेष महानिदेशक बी.के. शर्मा ने कहा, ''सोशल मीडिया पर की गई कथित आक्रामक टिप्पणी और अफवाहों की अपराध शाखा ने जांच शुरू कर दी है। अपराध शाखा का साइबर सेल व्हाट्सएप डाटा की जांच कर रहा है। ग्रुप एडमिन्स से डाटा उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है।''
उन्होंने यह भी कहा कि इसके पीछे के लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने शनिवार को संघर्षो के सिलसिले में 35 लोगों को हिरासत में ले लिया था।
उप-राजस्व आयुक्त एबी ओटा ने कहा कि हालात में काफी सुधार आया है, मगर हालात सामान्य होने में कुछ दिन लगेंगे। उन्होंने कहा कि धीरे-धीरे कर्फ्यू में ढील दी जाएगी। सोशल साइट पर हिंदू देवी-देवता राम और सीता को लेकर किए गए कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर शुक्रवार को भद्रक में हिंसा भड़क उठी थी। अस्थिरता को देखते हुए इलाके में कर्फ्यू लगा दिया गया।
श्रीनगर लोकसभा क्षेत्र में मतदान के दौरान आज हिंसा हुई तथा सुरक्षाबलों की गोलीबारी में कम से कम सात लोगों की जान चली गयी, जबकि मध्यप्रदेश में अटेर विधानसभा चुनाव में दो स्थानों से गोलीबारी की खबर है।
हालांकि कर्नाटक, और मध्य प्रदेश के दो-दो, पश्चिम बंगाल, असम, राजस्थान और दिल्ली के एक-एक विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव शांतिपूर्ण संपन्न हो गया।
पांच राज्यों की आठ विधानसभा सीटों और श्रीनगर लोकसभा सीट पर आज उपचुनाव हुए। श्रीनगर, बडगाम और गांदेरबल जिलों में दो दर्जनों से अधिक स्थानों से पथराव की खबर है, ये तीनों ही जिले श्रीनगर लोकसभा क्षेत्र में आते हैं। इस सीट के मुख्य प्रतिद्वंदी नेशनल कांफ्रेंंस और कांग्रेस के संयुक्त उम्मीदवार फारूक अब्दुल्ला तथा सत्तारूढ़ पीडीपी के उम्मीदवार नजीर अहमद खान हैं।
भीड़ को नियंत्रित करने में सुरक्षाबलों की मदद के लिए सेना बुला ली गयी। भीड़ पथराव कर रही थी। उसने गांदेरबल में पेट्रोल बम फेंककर मतदान केंद्र में आग लगा दी।
अधिकारियों के अनुसार, हिंसा में 100 से अधिक सुरक्षाकर्मी घायल हो गए। पुलिस गोलीबारी में कई नागरिक भी घायल हो गए।
जम्मू-कश्मीर के मुख्य निर्वाचन अधिकारी शांतमनु ने बताया कि इस संसदीय सीट पर महज 6.5 फीसदी मतदान हुआ। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ''मैं फिलहाल पुनर्मतदान के बारे में कुछ नहीं कह सकता। यह आंकड़ा करीब 50 या 100 या उससे अधिक मतदान केंद्र पर हो सकता है।'' जम्मू-कश्मीर में चरारे शरीफ के पखेरपोरा और बडगाम जिले के बीरवाह और छदूरा में दो-दो लोगों की मौत हुई। बडगाम जिले में ही मैगाम में एक व्यक्ति की हिंसा में जान चली गयी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनके पिता फारूक अब्दुल्ला ने महबूबा मुफ्ती की अगुवाई वाली सरकार की सुचारू ढंग से चुनाव कराने में पूरी तरह विफल रहने को लेकर आलोचना की।
मध्यप्रदेश के भी दो स्थानों से गोलीबारी की घटनाओं की खबर है। अटेर विधानसभा सीट के उपचुनाव मेंं कांग्रेस और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हुई।
हालांकि मध्यप्रदेश चुनाव आयोग ने बूथ पर कब्जे की खबरों से इनकार किया और कहा कि इन घटनाओं के बाद सुरक्षा कड़ी कर दी गयी।
संसद ने देश में ऐतिहासिक कर सुधार व्यवस्था जीएसटी को लागू करने का मार्ग प्रशस्त करते हुए आज वस्तु एवं सेवा कर से जुड़े चार विधेयकों को मंजूरी दे दी।
साथ ही सरकार ने आश्वस्त किया कि नयी कर प्रणाली में उपभोक्ताओं और राज्यों के हितों को पूरी तरह से सुरक्षित रखा जाएगा तथा कृषि पर कर नहीं लगाया जाएगा।
राज्यसभा ने आज केंद्रीय माल एवं सेवा कर विधेयक 2017 'जीएसटी विधेयक', एकीकृत माल एवं सेवा कर विधेयक 2017 आई जीएसटी विधेयक', संघ राज्य क्षेत्र माल एवं सेवाकर विधेयक 2017 और माल एवं सेवाकर 'राज्यों को प्रतिकर' विधेयक 2017 को सम्मिलित चर्चा के बाद लोकसभा को ध्वनिमत से लौटा दिया। इन विधेयकों पर लाये गये विपक्ष के संशोधनों को उच्च सदन ने खारिज कर दिया।
धन विधेयक होने के कारण इन चारों विधेयकों पर राज्यसभा में केवल चर्चा करने का अधिकार था। लोकसभा 29 मार्च को इन विधेयकों को मंजूरी दे चुकी है।
वस्तु एवं सेवा कर संबंधी विधेयकों पर चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री अरूण जेटली ने विपक्ष की इन आशंकाओं को निर्मूल बताया कि इन विधेयकों के जरिये कराधान के मामले में संसद के अधिकारों के साथ समझौता किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि पहली बात तो यह है कि इसी संसद ने संविधान में संशोधन कर जीएसटी परिषद को करों की दर की सिफारिश करने का अधिकार दिया है।
जेटली ने कहा कि जीएसटी परिषद पहली संघीय निर्णय करने वाली संस्था है। संविधान संशोधन के आधार पर जीएसटी परिषद को मॉडल कानून बनाने का अधिकार दिया गया। जहां तक कानून बनाने की बात है तो यह संघीय ढांचे के आधार पर होगा, वहीं संसद और राज्य विधानसभाओं की सर्वोच्चता बनी रहेगी। हालांकि इन सिफारिशों पर ध्यान रखना होगा क्योंकि अलग-अलग राज्य अगर-अलग दर तय करेंगे तो अराजक स्थिति उत्पन्न हो जायेगी। यह इसकी सौहार्दपूर्ण व्याख्या है और इसका कोई दूसरा अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि संविधान में संशोधन कर यह सुनिश्चित किया गया है कि यह देश का एकमात्र ऐसा कर होगा जिसे राज्य एवं केंद्र एक साथ एकत्र करेंगे। एक समान कर बनाने की बजाए कई कर दर होने के बारे में आपत्तियों पर स्थिति स्पष्ट करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि कई खाद्य उत्पाद हैं जिनपर अभी शून्य कर लगता है और जीएसटी प्रणाली लागू होने के बाद भी कोई कर नहीं लगेगा। कई चीजें ऐसी होती हैं जिन पर एक समान दर से कर नहीं लगाया जा सकता। जैसे तंबाकू, शराब आदि की दरें ऊँची होती हैं जबकि कपड़ों पर सामान्य दर होती है।
जेटली ने कहा कि जीएसटी परिषद में चर्चा के दौरान यह तय हुआ कि आरंभ में कई कर लगाना ज्यादा सरल होगा। वित्त मंत्री ने कहा कि जीएसटी परिषद ने विचार-विमर्श के बाद जीएसटी व्यवस्था में 0, 5, 12, 18 और 28 प्रतिशत की दरें तय की है। लक्जरी कारों, बोतल बंद पेयों, तंबाकू उत्पाद जैसी अहितकर वस्तुओं एवं कोयला जैसी पर्यावरण से जुड़ी सामग्री पर इसके ऊपर अतिरिक्त उपकर भी लगाने की बात कही है।
उन्होंने कहा कि 28 प्रतिशत से अधिक लगने वाला उपकर (सेस) मुआवजा कोष में जायेगा और जिन राज्यों को नुकसान हो रहा है, उन्हें इसमें से राशि दी जायेगी। ऐसा भी सुझाव आया कि इसे कर के रूप में लगाया जाए। लेकिन कर के रूप में लगाने से उपभोक्ताओं पर प्रभाव पड़ता। बहरहाल, उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त कर नहीं लगाया जायेगा।
जेटली ने कहा कि मुआवजा उन राज्यों को दिया जायेगा जिन्हें जीएसटी प्रणाली लागू होने से नुकसान हो रहा हो। यह आरंभ के पांच वर्षो के लिए होगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नीत संप्रग सरकार के दौरान इसलिए जीएसटी पर आमसहमति नहीं बन सकी क्योंकि नुकसान वाले राज्यों को मुआवजे के लिए कोई पेशकश नहीं की गई थी। जीएसटी में मुआवजे का प्रावधान 'डील करने में सहायक' हुआ और राज्य साथ आए।
जीएसटी में रीयल इस्टेट क्षेत्र को शामिल नहीं किये जाने पर कई सदस्यों की आपत्ति पर स्पष्टीकरण देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि यह एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें राज्यों को काफी राजस्व मिलता है। इसमें रजिस्ट्री तथा अन्य शुल्कों से राज्यों की आय होती है इसलिए राज्यों की राय के आधार पर इसे जीएसटी में शामिल नहीं किया गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जीएसटी परिषद में कोई भी फैसला लेने में केंद्र का वोट केवल एक तिहाई है जबकि दो तिहाई वोट राज्यों को है। इसलिए कोई भी फैसला करते समय केंद्र अपनी राय थोपने के पक्ष में नहीं है।
वस्तु एवं सेवा कर को संवैधानिक मंजूरी प्राप्त पहला संघीय अनुबंध करार देते हुए जेटली ने कहा कि उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त कर का भार नहीं डालते हुए जीएसटी के माध्यम से देश में 'एक राष्ट्र, एक कर' की प्रणाली लागू करने का मार्ग प्रशस्त होगा। वित्त मंत्री ने कहा कि जीएसटी परिषद कर ढांचे को सर्वसम्मति से तय कर रही है और इस बारे में अब तक 12 बैठकें हो चुकी हैं। यह विधेयक केंद्र और राज्य सरकारों के बीच साझी संप्रभुता के सिद्धांत पर आधारित है और यह ऐसी पहली पहल है।
जीएसटी के लागू होने पर केंद्रीय स्तर पर लगने वाले उत्पाद शुल्क, सेवाकर और राज्यों में लगने वाले मूल्य वर्धित कर (वैट) सहित कई अन्य कर इसमें समाहित हो जायेंगे। जेटली ने विधेयकों को स्पष्ट करते हुए कहा कि केंद्रीय जीएसटी संबंधी विधेयक के माध्यम से उत्पाद, सेवा कर और अतिरिक्त सीमा शुल्क समाप्त हो जाने की स्थिति में केंद्र को कर लगाने का अधिकार होगा। समन्वित जीएसटी या आईजीएसटी के जरिये वस्तु और सेवाओं की राज्यों में आवाजाही पर केंद्र को कर लगाने का अधिकार होगा।
कर छूट के संबंध में मुनाफे कमाने से रोकने के उपबंध के बारे में स्थिति स्पष्ट करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि अगर 4.5 प्रतिशत कर छूट दी जाती है तब इसका अर्थ यह नहीं कि उसे निजी मुनाफा माना जाए बल्कि इसका लाभ उपभोक्ताओं को भी दिया जाए। इस उपबंध का आशय यही है।
वित्त मंत्री ने कहा कि रियल इस्टेट की तरह ही स्थिति शराब और पेट्रोलियम उत्पादों के संबंध में भी थी। राज्यों के साथ चर्चा के बाद पेट्रोलियम पदार्थो को इसके दायरे में लाया गया है, लेकिन इसे अभी शून्य दर के तहत रखा गया है। इस पर जीएसटी परिषद विचार करेगी। शराब अभी भी इसके दायरे से बाहर है।
वित्त मंत्री ने कहा कि पहले एक व्यक्ति को व्यवसाय के लिए कई मूल्यांकन एजेंसियों के पास जाना पड़ता था। आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए उत्पाद शुल्क, सेवा कर, राज्य वैट, मनोरंजन कर, प्रवेश शुल्क, लक्जरी टैक्स एवं कई अन्य कर से गुजरना पड़ता था।
वित्त मंत्री ने कहा कि वस्तुओं और सेवाओं का देश में सुगम प्रवाह नहीं था। ऐसे में जीएसटी प्रणाली को आगे बढ़ाया गया। एक ऐसा कर जहां एक मूल्यांकन अधिकारी हो। अधिकतर स्व मूल्यांकन हों और आॅडिट मामलों को छोड़कर केवल सीमित मूल्यांकन हो।
जेटली ने कहा कि कर के ऊपर कर लगता है जिससे मु्रदास्फीति की प्रवृत्ति बढ़ती है। इसलिए सारे देश को एक बाजार बनाने का विचार आया। यह बात आई कि सरल व्यवस्था देश के अंदर लाई जाए। कृषि को जीएसटी के दायरे में लाने को निर्मूल बताते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि कृषि एवं कृषक को पंजीकरण की आवश्यकता नहीं होती है। धारा 23 के तहत कृषक एवं कृषि को छूट मिली हुई है। इसलिए इस छूट की व्याख्या के लिए परिभाषा में इसे रखा गया है। इस बारे में कोई भ्रम नहीं होना चाहिए। जेटली ने कहा कि कृषि उत्पाद जब शून्य दर वाले हैं तब इस बारे में कोई भ्रम की स्थिति नहीं होनी चाहिए।
इस बारे में कांग्रेस की आपत्तियों को खारिज करते हुए जेटली ने कहा कि 29 राज्य, दो केंद्र शासित प्रदेश और केंद्र ने इस पर विचार किया जिसमें कांग्रेस शासित प्रदेश के आठ वित्त मंत्री शामिल थे। ''तब क्या इन सभी ने मिलकर एक खास वर्ग के खिलाफ साजिश की?'' जीएसटी लागू होने के बाद वस्तु एवं जिंस की कीमतों में वृद्धि की आशंकाओं को खारिज करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि कर की दर वर्तमान स्तर पर रखी जाएगी ताकि इसका मुद्रास्फीति संबंधी प्रभाव नहीं पड़े।
जेटली ने कहा कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा जीएसटी के बारे में अपना एक विधान लाएगी। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के वित्त मंत्री ने जीएसटी परिषद की सभी बैठकों में भाग लिया है।
उच्च सदन ने तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन का जो संशोधन खारिज किया उसमें कहा गया था कि जीएसटी परिषद के सभी फैसलों की संसद से मंजूरी दिलवायी जानी चाहिए।
अलवर में गौ-रक्षकों द्वारा एक व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या किए जाने के मामले पर दिल्ली की सियासत गर्मा गई है। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार (6 मार्च) को राजस्थान में सत्तारूढ़ बीजेपी सरकार को निशाने पर लिया।
राहुल ने ट्वीट कर कहा कि ''जब सरकार अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेती है और हत्यारी भीड़ को शासन करने देती है तो बहुत बड़ी आपदाएं होती हैं। अलवर में कानून-व्यवस्था बुरी तरह ध्वस्त हो गई है।''
राहुल ने उम्मीद जताई कि सरकार दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगी।
उन्होंने लिखा, ''हम सरकार से अपेक्षा रखते हैं कि वह इस बर्बर और संवेदनहीन हमले के जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई करेगी। सभी भारतीयों को इस अंधी बर्बरता की निंदा करनी ही चाहिए।''
गौरक्षकों द्वारा पीटे जाने के बाद, 55 वर्षीय पहलू खान की सोमवार को अलवर जिला अस्पताल में मौत हो गई थी। मामला शनिवार का है जब कथित तौर पर जानवरों को जयपुर से हरियाणा ले जा रहे 16 लोगों को रोका गया। पुलिस ने इस संबंध में बुधवार को तीन लोगों को गिरफ्तार किया है।
गुरुवार को कांग्रेस ने संसद में जोर-शोर से यह मामला उठाया। विपक्ष के सांसदों ने जमकर हंगामा किया और सरकार से जवाब मांगा।
कांग्रेस की ओर से दिग्विजिय सिंह ने ये मामला सदन में उठाया। विपक्ष को जवाब देते हुए संसदीय कार्य राज्यमंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि ''जिस तरह की घटना पेश की जा रही है, ऐसी कोई घटना जमीन पर नहीं हुई है।''
इसके बाद राज्यसभा के उपसभापति पी जे कुरियन ने इस मामले में सरकार से रिपोर्ट मांगी। उन्होंने कहा कि जब तक ये तथ्य प्रमाणित नहीं हो जाता है कि हिंसा हुई है, तब तक इस मुद्दे पर चर्चा नहीं की जा सकती है।
नकवी के जवाब में कांग्रेस के गुलाम नबी आजाद ने कहा कि पूरी दुनिया अलवर की हिंसा से परिचित है, लेकिन मंत्री महोदय को इसकी जानकारी नहीं है, ये बेहद दुखद है।
उन्होंने कहा, ''मुझे बहुत दुख है कि मंत्री महोदय को इस घटना की इतनी कम जानकारी है, यहां तक की न्यूयॉर्क टाइम्स भी इस बारे में जानता है, लेकिन मंत्री महोदय नहीं जानते हैं।''
उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों का एक लाख रुपये तक का कर्ज माफ करने का ऐलान कर दिया है। गुरुवार को भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर ने मौद्रिक नीति जारी की। आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल ने उत्तर प्रदेश सरकार के इस फैसले को चिंता का विषय बताया।
उत्तर प्रदेश सरकार ने अपनी पहली ही कैबिनेट बैठक में अपना चुनावी वादा पूरा करते हुए छोटे किसानों का 36,359 करोड़ रुपये कर्ज माफ करने का फैसला लिया था।
आरबीआई गर्वनर ने सरकार द्वारा लोन माफ, जैसे फैसले के नकारात्मक पहलुओं के बारे में बताते हुए कहा कि इससे नैतिक खतरा बढ़ता है।
उर्जित पटेल ने कहा, लोन माफी जैसे कदम का सरकारी खजाने में असर पड़ता है जो पहले से ही घाटे में होता है।
लोन माफी से महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो सकता है।
उर्जित ने कहा कि कर्ज माफी से बैंकों की भी परेशानी बढ़ती है। साथ ही टैक्स देने वालों पर बोझ बढ़ता है।
उन्होंने कहा कि लोन माफी जैसे वादे को चुनाव प्रचार में न किए जाने पर सहमति बननी चाहिए। ऐसा कहा जा रहा है कि उत्तर प्रदेश सरकार 36,359 करोड़ रुपये का लोन बॉन्ड्स के जरिए माफ करेगी। हालांकि सरकारी खजाना सही स्थिति में नहीं है। उत्तर प्रदेश सरकार का घाटा 4 साल के उच्चतम स्तर पर है। अगर तीन बड़े राज्यों की बात करें तो उनमें सबसे बुरी हालत उत्तर प्रदेश की है।
मौद्रिक नीति समीक्षा में आरबीआई ने रेपो रेट 6.25% पर ही बरकरार रखा। हालांकि, रिवर्स रीपो रेट 5.75 प्रतिशत से बढ़ाकर 6 प्रतिशत कर दिया है। यानी, रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट में अंतर 0.50 प्रतिशत से घटकर 0.25 प्रतिशत रह गया।
रिजर्व बैंक के मुताबिक, अगली छमाही (अप्रैल-सितंबर) में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई दर 4.5 प्रतिशत रहेगी, जबकि उसके आगे से छह महीने (अक्टूबर-मार्च छमाही) में 5 प्रतिशत तक की महंगाई का अनुमान लगाया गया है।
बैंक को भी अपने कामों के लिए कर्ज लेना पड़ता है। ऐसे में सभी बैंक भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से कर्ज लेते हैं। रिजर्व बैंक जिस दर से उनसे ब्याज वसूल करता है, उसे रेपो रेट कहते हैं। अगर बैंकों को सस्ते ब्याज पर पैसा मिलेगा तो वह लोगों को भी सस्ता लोन दे सकेगा जिसकी ब्याज दर कम होंगी। जब बैंक के पास पैसा ज्यादा होता है तो वह रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पास अपना पैसा रख देता है। इसपर आरबीआई उन्हें ब्याज देता है। यानी जो ब्याज आरबीआई द्वारा दिया जाता है उसको रिजर्व रेपो रेट कहते हैं।
उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार (6 अप्रैल) को उस याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रखा जिसमें बाबरी मस्जिद ढहाने के मामले में लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती सहित वरिष्ठ भाजपा नेताओं के खिलाफ साजिश के आरोप बहाल करने की मांग की गई है।
शीर्ष अदालत इस बारे में भी फैसला करेगी कि वीवीआईपी आरोपियों के खिलाफ सुनवाई रायबरेली की एक अदालत से लखनऊ स्थानान्तरित की जा सकती है या नहीं।
छह दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद गिराने से संबंधित दो तरह के मामले हैं। पहला अज्ञात कारसेवकों से जुड़ा है जिसमें सुनवाई लखनऊ की एक अदालत में चल रही है, जबकि दूसरी तरह के मामले रायबरेली की एक अदालत में वीवीआईपी से संबंधित हैं।
न्यायमूर्ति पीसी घोष और न्यायमूर्ति आरएफ नरीमन की पीठ ने यह भी संकेत दिये कि वे सुनवाई रायबरेली से लखनऊ की एक अदालत में स्थानान्तरित करके दोनों तरह के मामलों की संयुक्त सुनवाई करने का आदेश दे सकते हैं।
पीठ ने कहा कि चूंकि 25 साल गुजर चुके हैं, न्याय के हित में वह रोजाना समयबद्ध तरीके से सुनवाई का आदेश देने पर विचार करेगी ताकि इसे दो साल के भीतर पूरा करने का प्रयास हो।
बीजेपी नेता एल के आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी समेत एक दर्जन नेता जिसमें विनय कटियार और यूपी के पूर्व सीएम कल्याण सिंह का नाम शामिल है उनपर बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में लगे साजिश के आरोपों को रायबरेली की कोर्ट ने हटा दिया था।
2010 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भी निचली अदालत का फैसला मान लिया था। उसके बाद सीबीआई ने कोर्ट के ऑर्डर के खिलाफ अपील की थी।
उत्तर प्रदेश विधान सभा के चुनाव परिणाम देखने के बाद बसपा प्रमुख मायावती ने जो आरोप ईवीएम मशीनों पर लगाए हैं, उस पर बहस शांत होती नहीं दिख रही है।
सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने चुनाव आयोग को चैलेंज तक दे डाला। अरविंद केजरीवाल ने कहा कि चुनाव आयोग कहता है कि ईवीएम मशीनों के साथ किसी तरह की छेड़खानी नहीं हो सकती, हम कहते हैं कि चुनाव आयोग 72 घंटों के लिए हमें ईवीएम मशीन सौंप दे। हम 72 घंटों में मशीन को टेंपर करके दिखा देंगे।
अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के निकाय चुनावों में बैलट पेपर से ही वोटिंग कराने की गुहार लगाई है।
केजरीवाल ने मध्य प्रदेश के भिंड में पकड़ी गई ईवीएम मशीन पर भी सवाल उठाए हैं।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि भिंड में किसी भी बटन को दबाने पर बीजेपी की स्लिप निकल रही थी।
केजरीवाल ने सवाल उठाया कि मध्य प्रदेश में यूपी के कंडिडेट की पर्ची क्यों निकल रही थी?
इस मशीन को केजरीवाल ने कानपुर के गोविंदनगर विधानसभा सीट पर इस्तेमाल मशीन बताते हुए पूछा कि आखिर ये यूपी से एमपी क्यों लाई गई? कानून कहता है कि एक बार मशीन से वोटिंग होने पर उस मशीन का इस्तेमाल अगले 45 दिनों तक नहीं कर सकते हैं। फिर चुनाव आयोग के कानून की धज्जियां क्यों उड़ाइ गईं?
वोटिंग मशीन में इस्तेमाल होने वाले सॉफ्टवेयर पर भी दिल्ली के मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया। अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पता नहीं इन मशीनों में ऐसा कौन सा सॉफ्टवेयर इस्तेमाल होता है जिसे लेकर चुनाव आयोग इतना आश्वस्त है। आयोग को चुनौती देते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आयोग हमें सिर्फ 72 घंटों के लिए ईवीएम दे दे, फिर हम दिखा देंगे कि कैसे री-राईट भी किया जा सकता है और री-रीड भी।
आपको बता दें कि 23 अप्रैल को दिल्ली में निकाय चुनाव होने हैं। चुनावों में किसी प्रकार की धांधली ना हो इसलिए दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने चुनाव आयोग से बैलेट पेपर के इस्तेमाल की बात कही है।









