भारत

ओवैसी ने बाबरी मस्जिद ढहाने की घटना को महात्मा गांधी की हत्या से ज्यादा गंभीर बताया

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने बुधवार को बाबरी मस्जिद ढहाने की घटना को महात्मा गांधी की हत्या से ज्यादा गंभीर बताते हुए सुनवाई पूरी होने में देरी की निंदा की।

उन्होंने कहा कि वर्ष 1992 में राष्ट्रीय शर्म के लिए जिम्मेदार लोग आज देश चला रहे हैं।

हैदराबाद से लोकसभा सदस्य ने ट्वीट किया, महात्मा गांधी हत्याकांड की सुनवाई दो वर्ष में पूरी हुई और बाबरी मस्जिद ढहाने की घटना जो एमके गांधी की हत्या से ज्यादा गंभीर है, उसमें अब तक फैसला नहीं आया है।

उन्होंने कहा कि गांधी जी के हत्यारों को दोषी ठहराकर फांसी पर लटकाया गया और बाबरी कांड के आरोपियों को केन्द्रीय मंत्री बनाया गया, पद्म विभूषण से नवाजा गया, न्याय प्रणाली धीरे चलती है।

उन्होंने ये टिप्पणियां ऐसे समय कीं जब उच्चतम न्यायालय ने बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के मामले में भाजपा के शीर्ष नेताओं लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती के खिलाफ आपराधिक साजिश का आरेाप बहाल करने के सीबीआई के अनुरोध को स्वीकार किया।

शीर्ष अदालत ने हालांकि कहा कि राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह को संवैधानिक छूट मिली हुई है और उनके खिलाफ पद से हटने के बाद सुनवाई हो सकती है।

कल्याण सिंह वर्ष 1992 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे।

ओवैसी ने कहा कि इसमें 24 साल की देरी हुई। 24-25 साल गुजर चुके हैं। लेकिन आखिरकार उच्चतम न्यायालय ने फैसला किया कि साजिश का आरोप होना चाहिए। लेकिन मुझे आशा है कि उच्चतम न्यायालय (वर्ष 1992 से लंबित) अवमानना याचिका पर भी फैसला करेगी।

उन्होंने कई ट्वीट में कहा कि क्या कल्याण सिंह इस्तीफा देकर सुनवाई का सामना करेंगे या राज्यपाल होने के पर्दे के पीछे छिपेंगे, क्या मोदी सरकार न्याय के हित में उन्हें हटाएंगे, मुझे संदेह हैं।

ओवैसी ने कहा कि उनको लगता है कि अगर उच्चतम न्यायालय ने कार सेवा की अनुमति नहीं दी होती तो बाबरी मस्जिद नहीं ठहायी जाती और उच्चतम न्यायालय का अभी भी अवमानना याचिका पर सुनवाई करना बाकी है।

उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार के हलफनामा देने के बाद 28 नवंबर 1992 में सांकेतिक कार सेवा की अनुमति दी थी। उत्तर प्रदेश सरकार ने शांतिपूर्ण कार सेवा के लिये हलफनामा दिया था। इसके बाद 6 दिसंबर को कारसेवकों ने 16वीं सदी की बाबरी मस्जिद गिरा दी थी।

'सरकार ने बहुत गलत किया, कोई भी मां अपने बच्‍चे को सेना में भेजने से डरेगी'

बीएसएफ ने अपने जवान तेज बहादुर यादव को बर्खास्‍त कर दिया है। तेज बहादुर यादव ने सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट्स पर वीडियो क्ल्प्सि पोस्‍ट कर पाकिस्‍तानी सीमा से सटे इलाकों में तैनात बीएसएफ जवानों को खराब खाना दिए जाने की शिकायत की थी।

उन्‍हें मंगलवार (19 अप्रैल) को सांबा की समरी सिक्‍योरिटी फोर्स से डिसमिस कर दिया गया। तेज बहादुर यादव को फोर्स का अनुशासन तोड़ने का दोषी पाया गया है, इसके अलावा उन्‍होंने फोर्स के ग्रीवांस रीड्रेसल मैकेनिज्‍म का पालन भी नहीं किया।

इसके अलावा, तेज बहादुर यादव को सेना के सामान्‍य आदेशों का उल्‍लंघन करने का भी दोषी पाया गया। तेज बहादुर यादव ड्यूटी के दौरान दो मोबाइल फोन रखते थे जो कि एसओपी (स्‍टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) के खिलाफ है। इसके अलावा यूनिफॉर्म में सोशल मीडिया पर तस्‍वीरें डालकर भी निर्देशों का उल्‍लंघन है।

तेज बहादुर यादव ने बीएसएफ के इस फैसले पर कहा है कि वे बर्खास्‍तगी के खिलाफ अदालत में अपील करेंगे। हालांकि उनके पास बीएसएफ के उच्‍चतर मुख्‍यालय में अपील करने का विकल्‍प भी मौजूद है।

बीएसएफ द्वारा तेज बहादुर यादव को बर्खास्‍त किए जाने के बाद उनकी पत्‍नी शर्मिला ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश जारी किया। जिसमें उन्‍होंने कहा, ''उसका (यादव) कोर्ट मार्शल कर दिया गया है। उसने जवानों के हित में ये कदम उठाया था और देश को अपना खाना दिखाया था। इसके बाद कोई भी मां अपने बच्‍चे को फौज में भेजेगी क्‍या? उसने ऐसा कौन सा गुनाह किया था जो उसकी 20 साल की सर्विस हो गई थी और उसको डिसमिस कर दिया गया। सरकार को चाहिए था कि उसको बाइज्‍जत घर भेज दे, सरकार ने ये बहुत गलत किया है। इससे कोई भी मां अपने बच्‍चे को सेना में भेजने से डरेगी।''

तेज बहादुर यादव ने फेसबुक पर चार वीडियो शेयर किए थे। इन वीडियो में जली रोटी, पानी वाली दाल को दिखाया गया था।

मीडिया में मामला उजागर होने के बाद केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने तत्काल मामले की जांच का आदेश दिया था। बीएसएफ ने मामले पर सफाई देते हुए खराब खाना दिए जाने से इनकार किया था।

इसके अलावा अधिकारियों ने तेज बहादुर यादव पर अपनी सेवा शर्तों का उल्लंघन करने का भी आरोप लगाया था।

सच दिखाने की मिली सजा: बीएसएफ जवान तेज बहादुर यादव नौकरी से बर्खास्त

बीएसएफ जवान तेज बहादुर यादव को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है। कुछ महीने पहले तेज बहादुर यादव ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर जवानों को मिल रहे खराब खाने की शिकायत की थी।

वीडियो में तेज बहादुर यादव ने खराब खाने की शिकायत की थी। इसके बाद कई जवानों के वीडियो सामने आए थे। इन वीडियो को लेकर काफी विवाद हुआ था।

पीएमओ ने इस मामले में गृह मंत्रालय और बीएसएफ से रिपोर्ट मांगी थी। तेज बहादुर यादव ने अपने सीनियर अधिकारियों पर भी भोजन की राशि के नाम पर घपला करने का आरोप लगाया था। इसके बाद यह वीडियो वायरल हो गया था।

तेज बहादुर यादव ने फेसबुक पर चार वीडियो शेयर किए थे। इन वीडियो में जली रोटी, पानी वाली दाल को दिखाया गया था। मीडिया में मामला उजागर होने के बाद केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने तत्काल मामले की जांच का आदेश दिया था।

बीएसएफ ने मामले पर सफाई देते हुए खराब खाना दिए जाने से इनकार किया था। इसके अलावा अधिकारियों ने तेज बहादुर यादव पर अपनी सेवा शर्तों का उल्लंघन करने का भी आरोप लगाया था।

42 वर्षीय तेज बहादुर यादव हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के रहने वाले हैं। वो 1996 में बीएसएफ में भर्ती हुए थे। उन्हें जम्मू-कश्मीर स्थित राजौरी सेक्टर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) के निकट तैनात किया गया था।

वीडियो में तेज बहादुर यादव ने आरोप लगाया था कि सैनिकों को पिछले 10 दिनों से लगातार जली हुई रोटी और पानी मिली हुई दाल खाने में दी जा रही है।

तेज बहादुर यादव ने यह भी आरोप लगाया था कि कई बार जवानों को भूखा रहना होता है। तेज बहादुर यादव 2032 में रिटायर होने वाले थे, लेकिन उससे पहले ही बीएसएफ ने उन्हें नौकरी से बर्खास्त कर दिया।

खबरें ऐसी भी आई थी कि तेज बहादुर यादव ने इस विवाद के बाद स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) की अर्जी दी थी, लेकिन उस पर कोई फैसला लेने से पहले अधिकारियों ने उसे बर्खास्त कर दिया।

इससे पहले तेज बहादुर यादव के परिवार ने दावा किया था कि वो गायब हो गए हैं, उन्हें सामने लाने के लिए परिवार कोर्ट में गुहार लगाएगा।

परिवार का दावा है कि उन्हें तेज बहादुर के बारे में कोई जानकारी नहीं है कि वे कहां हैं? इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए तेज बहादुर की पत्नी के भाई विजय ने बताया था कि परिवार उनसे संपर्क करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो रहा है।

परिवार ने दावा किया था कि इस बारे में बीएसएफ को दो पत्र भी लिखे, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। विजय ने बताया था कि यादव ने आखिरी बार अपनी पत्नी से बात की थी और कहा था कि बीएसएफ अधिकारी उसे अज्ञात जगह पर ले जा रहे हैं। इससे ज्यादा वह बोल नहीं पाए।

ट्रिपल मर्डर केस में राजद के पूर्व सांसद शहाबुद्दीन बरी हुए

राष्ट्रीय जनता दल के पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन को झारखंड की जमशेदपुर जिला अदालत ने 28 साल पुराने ट्रिपल मर्डर केस में बरी कर दिया है।

हालांकि, यह उनके लिए बड़ी राहत की खबर है। बावजूद इसके वो फिलहाल दिल्ली के तिहाड़ जेल में ही बंद रहेंगे। वो अन्य मामलों में भी सजायफ्ता हैं इसलिए फिलहाल तिहाड़ जेल में ही रहेंगे।

सोमवार (17 अप्रैल) को जदमशेदपुर जिला अदालत ने गवाहों के अभाव में उन्हें बरी कर दिया।

इस मामले में 3 अप्रैल को वीडियो कॉन्फ्रेन्सिंग के जरिए शहाबुद्दीन की पेशी हुई थी। 15 मिनट की पेशी में शहाबुद्दीन ने अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अजीत कुमार सिंह के सामने अपने बयान ऑनलाइन दर्ज कराए थे और खुद को इस मामले में निर्दोष बताया था।

गौरतलब है कि 28 साल पहले जिले के जुगसलाई थाना क्षेत्र से महज 100 मीटर की दूरी पर कांग्रेस युवा अध्यक्ष प्रदीप मिश्रा और उनके दो साथियों जनार्द्धन चौबे और आनंद राव की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी।

इस मामले में पूर्व सांसद रामा सिंह, साहेब सिंह, शहाबुद्दीन समेत कई लोगों को मुख्य आरोपी बनाया गया था।

अदालत के फैसले पर पीड़ित परिवार ने दुख जताया है और कहा कि घटना के मुख्य चश्मदीद बरमेश्वर पाठक ने गवाही नहीं दी इसीलिए सभी आरोपी एक-एक कर बरी हो गए।

गौरतलब है कि 02 फरवरी 1989 की शाम टाटा स्टील पावर हाउस के पास जुगसलाई में प्रदीप मिश्रा और उनके साथियों को गोलियों से भून दिया गया था। इस केस में शहाबुद्दीन समेत कुल आठ लोगों को आरोपी बनाया गया था, जिनमें से तीन की मौत ट्रायल के दौरान हो गई। चार आरोपियों को साल 2006 में बरी कर दिया गया था और अब 28 साल बाद आखिरी आरोपी शहाबुद्दीन को भी बरी कर दिया गया।

कश्मीरी युवक को सेना की जीप के आगे बांधने को अटार्नी जनरल ने सही ठहराया

कश्‍मीर के बड़गाम जिले में सेना द्वारा एक व्‍यक्ति को ढाल बनाकर जीप के आगे बांधने को अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने सही ठहराया है।

उन्‍होंने कहा कि हालात की मांग यही थी और किसी की जान न जाए, यह सुनिश्चित करने का यह एक प्रभावी उपाय था।

भारत की केंद्र सरकार ने भी उस सैन्‍य अधिकारी का साथ दिया है जिसने कथित पत्‍थरबाज को 'मानव ढाल' बनाने का फैसला किया।

भारत सरकार ने अधिकारी द्वारा अपनी यूनिट, पैरामिलिट्री सैनिकों और जम्‍मू-कश्‍मीर के अधिकारियों की सुरक्षा के लिए इस कदम का समर्थन किया है।

सरकार ने सेना की उस जांच का संज्ञान लिया है जो 9 अप्रैल की घटना पर बिठाई गई थी।

जांच में कहा गया है कि कमांडिंग अधिकारी ने हिचकिचाते हुए आखिरी उपाय के तौर पर यह फैसला किया क्‍योंकि उसने महसूस किया कि उसकी यूनिट को उन सड़कों से होकर गुजरना है जहां पत्‍थरबाजों की भीड़ जमा है और जिन्‍होंने आस-पास की छतों पर पोजिशन ले रखी थी। जो जवान भीड़ के बीच फंसे थे, उनमें दर्जन भर स्‍थानीय सरकार के कर्मचारी, 9-10 आईटीबीपी जवान, कश्‍मीर पुलिस के दो कांस्‍टेबल और एक बस ड्राइवर शामिल था।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ 2019 में भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करवाएगा: जस्टिस राजेंद्र सच्चर

दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश और सच्चर कमेटी के प्रमुख सेवानिवृत्त जस्टिस राजेंद्र सच्चर ने एक वेबसाइट को दिए इंटरव्यू में आशंका जतायी है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ 2019 में भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करवाएगा।

भारत में पिछले कुछ समय में मुसलमानों के खिलाफ हिंसा के बढ़ते मामले से जुड़े एक सवाल के जवाब में जस्टिस सच्चर ने कहा, ''मुसलमानों के खिलाफ नफरत से उपजी हिंसा के मामले बढ़े हैं और ये केवल असहिष्णुता का मामला नहीं है। ये असहिष्णुता से बुरी चीज है। सच तो ये है कि उत्तर प्रदेश में भाजपा की जीत के बाद ये खतरा और बढ़ गया है।''

रेडिफ डॉट कॉम को दिए इंटरव्यू में जस्टिस सच्चर ने कहा, ''सबसे खतरनाक संकेत योगी आदित्य नाथ को यूपी का सीएम बनाया जाना है। ये आरएसएस की सोची-समझी योजना का हिस्सा है। हमें भूलना नहीं चाहिए कि नरेंद्र मोदी केवल चेहरा हैं।''

जस्टिस सच्चर ने कहा, ''आरएसएस तय कर चुका है कि 2019 में भाजपा की सत्ता में वापसी के बाद वो भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करवाएगा। मुझे लगता है कि विपक्षी पार्टियां इस खतरे को भांप नहीं पा रही हैं।''

जस्टिस सच्चर ने कहा कि 2019 के लोक सभा चुनाव से पहले योगी आदित्य नाथ को मुख्यमंत्री बनाने के संकेत को सावधानी से पढ़ना चाहिए।

सच्चर ने कहा कि सारे हिंदुओं का आरएसएस से कोई लेना-देना नहीं। हिंदुओं की अलग-अलग संस्कृति, परंपरा और खान-पान की आदतें हैं।

जस्टिस सच्चर के अनुसार, आरएसएस उत्तर प्रदेश में मिली जीत के बाद पहले से ज्यादा ताकतवर हो गया है।

जब आरएसएस भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करवाने की कोशिश करेगा तो इसके क्या परिणाम होंगे? इस पर जस्टिस सच्चर ने कहा कि आरएसएस इस मकसद में कामयाब नहीं हो पाएगा क्योंकि इसका विरोध कई हिंदू ही करेंगे और ये उसकी राह में सबसे बड़ी मुश्किल होगी।

उन्होंने कहा, ''आज भले ही कम लोग इस बारे में खुलकर बोलते हों, लेकिन बहुत से लोग हिंदू राष्ट्र नहीं चाहते।''

जस्टिस सच्चर ने कहा कि भाजपा का साझीदार अकाली दल भी नहीं चाहेगा कि भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित किया जाए। न केवल मुस्लिम बल्कि सिख और ईसाई भी इसका विरोध करेंगे। जस्टिस सच्चर ने कहा कि 2019 के खतरे से बचने के लिए वो सुझाव देंगे कि सभी विरोधी दलों को एक साथ आ जाना चाहिए।

बिल्ला के बेटे का आरोप, करीबी दोस्त ने धोखा देकर पिता की हत्या की

उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा जिले में अपने घर में मारे गए पूर्व आतंकवादी अब्दुल राशिद पार्रे उर्फ बिल्ला के बेटे ने आरोप लगाया कि उसके करीबी दोस्त ने धोखा दिया और उसके पिता की हत्या की।

फयाज अहमद पार्रे ने दावा किया कि उसके दो पड़ोसी नकाब पहने दो अन्य व्यक्तियों के साथ उनके घर आए और कहा कि उन्हें कुछ बात करनी हैं। उन लोगों के हाथों में बंदूकें थीं।

पार्रे ने कहा, ''दो युवक जो हमारे पड़ोस में रहते हैं, हमारे घर पर आए और हमसे घर के दरवाजे खोलने के लिए कहा। मेरे पिता ने कहा कि वे हमारे पड़ोसी हैं और हमसे गेट खोलने के लिए कहा। उनके साथ दो और युवक भी थे, जो वहां से नहीं थे। उनके चेहरे ढ़के हुए थे और उनके पास बंदूकें थीं।''

उसने बताया कि युवक उसके पिता को एक कमरे में ले गए, कमरा बंद किया और उन्हें गोली मार दी।

पूर्व आतंकवादी के बेटे ने कहा, ''मेरे पिता गेट पर थे और मेरा बच्चा उनकी गोद में था। वे मेरे पिता को यह कहते हुए अंदर ले गए कि उन्हें कुछ बात करनी है। मेरे पिता ने उनसे कहा कि वह जानते हैं कि वह वहां उनकी हत्या करने के लिए आए हैं और उन पर गोली चला सकते हैं। इस पर उन्होंने कहा कि वह बात करने आए हैं, मारने नहीं। वे बैठे, पानी पिया और उसके बाद अंदर गए, कमरा बंद किया और गोली मार दी।''

उसने कहा कि सबसे ज्यादा दुखद यह है कि यह धोखाधड़ी एक करीबी मित्र ने की।

फयाज ने कहा कि उसके पिता की इसलिए हत्या की गई क्योंकि वह आतंकवाद रोधी मिलिशिया इख्वान का हिस्सा थे।

उसने कहा, ''हमें पता था कि पाकिस्तानी किसी दिन उनकी हत्या कर देंगे, लेकिन मैने कभी नहीं सोचा था कि मेरा दोस्त उनकी हत्या कर देगा। वह पहले कुछ ऐसे लोगों के साथ थे जिन्हें आपने कुछ नाम दिया है (इख्वान) लेकिन वह पिछले 10 वर्षों से घर पर थे। वह सड़कों पर घूमते थे और उन्हें कुछ नहीं हुआ, किसी ने उन्हें छुआ तक नहीं।''

संदिग्ध आतंकवादियों ने आतंकवाद निरोधक बल के कमांडर पार्रे की 16 अप्रैल की रात को उनके घर पर हत्या कर दी थी।

मल्लापुरम उपचुनाव: आईयूएमएल के पीके कुन्‍हालीकुट्टी 1.71 लाख मतों से जीते

इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के विधायक पी.के. कुन्हालीकुट्टी ने सोमवार को 1,71,038 लाख वोटों से केरल की मल्लापुरम लोकसभा सीट पर जीत हासिल कर ली।

आईयूएमएल के दिग्गज नेता मतगणना प्रक्रिया के सभी चरणों में अपने नजदीकी प्रतिद्वंद्वी मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के उम्मीदवार और युवा नेता एम.बी. फैजल से आगे रहे। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार एन. श्रीप्रकाश तीसरे स्थान पर रहे।

इससे पहले कुन्हालीकुट्टी जब घर से बाहर निकले तो उनके समर्थकों ने उनके समर्थन में नारेबाजी करते हुए उन्हें ऊपर उठा लिया।

कुन्हालीकुट्टी ने मीडिया से कहा कि वे ग्रामीण परिषदों में भी आगे चल रहे हैं, जहां वाम मोर्चा सत्ता में है।

कुन्हालीकुट्टी ने कहा, ''इसका कारण यह है कि मैंने धर्मनिरपेक्ष दृष्टिकोण की जरूरत पर बल दिया और मतदाताओं ने मुझ पर भरोसा जताया है। साथ की कांग्रेस नेतृत्व वाले यूडीएफ की एकता ने भी इसमें मदद की है।''

इस सीट के लिए 12 अप्रैल को वोट डाले गए थे जिनमें 71.33 प्रतिशत मतदान हुआ था।

अब सवाल यह उठता है कि क्या कुन्हालीकुट्टी ई. अहमद से बेहतर प्रदर्शन कर पाएंगे जिन्होंने 2014 के चुनाव में 1.94 लाख वोटों के भारी अंतर से इस सीट पर जीत हासिल की थी।

मल्लापुरम सीट आईयूएमएल नेता ई. अहमद के निधन से रिक्त हो गई थी जो यहां से सांसद थे। मल्लापुरम जिला आईयूएमएल का गढ़ है और अहमद ने 2014 के चुनाव में इस सीट पर भारी अंतर से जीत हासिल की थी। लेकिन 2016 विधानसभा चुनाव के दौरान आईयूएमएल विधायकों की जीत का अंतर कम हो गया था। हालांकि पार्टी ने सभी सात विधानसभा सीटों पर जीत हासिल की थी।

सुप्रीम कोर्ट ने सहारा आम्‍बी वैली की नीलामी के आदेश दिए

सुप्रीम कोर्ट ने सहारा समूह को तगड़ा झटका दिया है। शीर्ष अदालत ने पुणे स्थित समूह की संपत्ति आम्‍बी वैली की नीलामी के आदेश दिए हैं।

सहारा समूह अपने निवेशकर्ताओं को जमा रकम लौटा पाने में नाकाम रहा जिसके बाद अदालत ने यह फैसला दिया। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने सहारा समूह के सुब्रत रॉय को इस मामले में 28 अप्रैल को होने वाली सुनवाई में खुद मौजूद रहने के निर्देश दिए हैं।

शीर्ष अदालत ने 21 मार्च को हुई सुनवाई में सहारा समूह को आगाह किया था कि अगर वह 17 अप्रैल तक बकाया 5,092.6 करोड़ रुपए नहीं जमा कराता, तो पुणे में उसकी आम्‍बी वैली की 39,000 करोड़ रुपए मूल्‍य की प्रमुख संपत्ति की नीलामी की जाएगी। उच्चतम न्यायालय ने इससे पहले धन की वसूली के लिए सहारा समूह की इस प्रमुख संपत्ति की कुर्की का आदेश दिया था।

शीर्ष अदालत ने 21 मार्च की सुनवाई में सहारा समूह से दो सप्ताह में उन संपत्तियों की सूची देने को कहा था जिन पर किसी तरह की देनदारी नहीं है और जिन्हें सार्वजनिक नीलामी के लिए रखा जा सकता है ताकि निवेशकों को लौटाए जाने वाले मूल धन के शेष 14,000 करोड़ रुपए की राशि जुटाई जा सके।

निवेशकों से जुटायी गयी मूल राशि 24,000 करोड़ रुपए है जिसे लौटाया जाना है। यह पैसा सेबी-सहारा खाते में जमा कराया जाना है।

न्यायालय ने पिछले साल 28 नवंबर को सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत राय को जेल से बाहर रहने के लिए 6 फरवरी तक सेबी-सहारा रिफंड खाते में 600 करोड़ रुपए जमा कराने को कहा था।

न्यायालय ने चेतावनी दी थी कि यदि वह ऐसा नहीं कर पाते हैं तो उन्हें वापस जेल भेज दिया जाएगा।

महबूबा ने जनरल रावत से कहा, डंडे से कुछ नहीं निकलेगा, लेकिन आगे से ऐसा मत करना

जम्मू-कश्मीर में फैली अशांति के बीच वहां की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत से मुलाकात की। मीटिंग में महबूबा मुफ्ती ने जवानों के नए वीडियोज पर बात की जो बाद में समाने आए।

उन वीडियोज में जवान कुछ कश्मीरी युवाओं की पिटाई कर रहे थे और डंडे के दम पर उनसे 'पाकिस्तान मुर्दाबाद' के नारे लगवा रहे थे और युवक की पिटाई हो रही थी।

मुफ्ती ने रावत से कहा कि ऐसी कार्रवाई पिछले कुछ सालों में की गई सारी मेहनत पर पानी फेर देगी। साथ ही, उन्होंने उन घटनाओं के लिए जिम्मेदार लोगों पर एक्शन लेने की भी बात कही। दोनों के बीच यह मुलाकात शनिवार (15 अप्रैल) को हुई। इससे पहले एक और वीडियो सामने आया था। उसमें एक आर्मी जीप पर एक कश्मीरी युवक को बांधकर लेकर जाया जा रहा था। उसे देखकर महबूबा ने हैरानी और दुख प्रकट किया था।

महबूबा ने कहा कि ऐसी कार्रवाई के गंभीर नतीजे देखने को मिल सकते हैं।

सूत्रों के मुताबिक, महबूबा ने रावत से यह भी कहा कि ऐसे एक्शन का राज्य पर तो गंभीर प्रभाव होता ही है। साथ ही साथ, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी यह ठीक नहीं है।

मिली जानकारी के मुताबिक, महबूबा ने जनरल रावत को बताया कि जीप वाले वीडियो ने लोगों पर काफी नकारात्मक प्रभाव डाला है और लोग उससे नाराज हैं।

ऐसा पता चला है कि बातचीत के दौरान महबूबा ने कहा, ''डंडे से कुछ नहीं निकलेगा, अबतक जो हुआ सो हुआ, लेकिन आगे से ऐसा मत करना।''

महबूबा ने कहा कि इससे सेना और सरकार द्वारा चलाए जा रहे सद्भावना ऑपरेशन और कश्मीरी युवाओं के लिए जो घूमने का प्रबंध किया जाता है, उसपर प्रभाव पड़ेगा।

जानकारी मिली है कि जनरल रावत ने जल्द से जल्द कुछ करने का भरोसा भी दिया है।

बता दें कि शनिवार (15 अप्रैल) को भी वीडियो सामने आए। उसमें कश्मीरी युवा को डंडों से बुरी तरह पीटा जा रहा था और युवाओं से पाकिस्तान के खिलाफ नारेबाजी करवाई जा रही थी।

हालांकि, यह साफ नहीं है कि वीडियोज कब के हैं? महबूबा दिल्ली आकर पीएम मोदी से मिलना चाहती थीं, लेकिन वे बीजेपी नेताओं के साथ भुवनेश्वर गए हुए थे।

सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत राज्यपाल एन एन वोहरा से भी मिले। सेना के एक अधिकारी ने बताया कि रावत शनिवार (15 अप्रैल) की दोपहर को जम्मू पहुंचे और राजभवन में वोहरा से मुलाकात की। दोनों ने कश्मीर में चुनाव, सुरक्षा, कानून एवं व्यवस्था तथा सीमा पर स्थिति के संबंध में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की।

अधिकारी ने बताया कि सेना प्रमुख ने उन्हें जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा पर बढ़ायी गयी चौकसी और तैनाती के साथ ही घाटी में सेना के आतंक रोधी अभियान के बारे में बताया।