30 नवंबर 2014 की रात 11 बजे लोया ने अपनी पत्नी शर्मिला को अपने मोबाइल से नागपुर से फोन किया। करीब 40 मिनट हुई बातचीत में वे दिन भर की अपनी व्यस्तताएं उनहें बताते रहे। लोया अपने एक सहकर्मी जज सपना जोशी की बेटी की शादी में हिस्सा लेने नागपुर गए थे। उन्होंने शुरुआत में नहीं जाने का आग्रह किया था, लेकिन उनके दो सहकर्मी जजों ने साथ चलने का दबाव बनाया। लोया ने पत्नी को बताया कि शादी से होकर वे आचुके हैं और बाद में वे रिसेप्शन में गए। उन्होंने बेटे अनुज का हालचाल भी पूछा। उन्होंने पत्नी को बताया कि वे साथी जजों के संग रवि भवन में रुके हुए थे। यह नागपुर के सिविल लाइंस इलाके में स्थित एक सरकारी वीआइपी गेस्टहाउस है।
लोया ने कथित रूप से यह आखिरी कॉल की थी और यही उनका अपने परिवार के साथ हुआ आखिरी कथित संवाद भी था। उनके परिवार को उनके निधन की खबर अगली सुबह मिली।
उनके पिता हरकिशन लोया से जब मैं पहली बार लातूर शहर के करीब स्थित उनके पैतृक गांव गाटेगांव में नवंबर 2016 में मिला, तब उन्होंने बताया था कि 1 दिसंबर 2014 को तड़के ”मुंबई में उसकी पत्नी, लातूर में मेरे पास और धुले, जलगांव व औरंगाबाद में मेरी बेटियों के पास कॉल आया।” इन्हें बताया गया कि ”बृज रात में गुज़र गए, उनका पंचनामा हो चुका है और उनका पार्थिव शरीर लातूर जिले के गाटेगांव स्थित हमारे पैतृक निवास पर भेजा जा चुका है।” उन्हेांने बताया, ”मुझे लगा कि कोई भूचाल आ गया हो और मेरी जिंदगी बिखर गई।”
परिवार को बताया गया था कि लोया की मौत कार्डियक अरेस्ट (दिल का दौरा) से हुई थी। हरकिशन ने बताया, ”हमें बताया गया था कि उन्हें सीने में दर्द हुआ था, जिसके बाद उनहें नागपुर के एक निजी अस्पताल दांडे हास्पिटल में ऑटोरिक्शा से ले जाया गया, जहां उन्हें कुछ चिकित्सा दी गई।” लोया की बहन बियाणी दांडे हास्पिटल को ”एक रहस्यमय जगह” बताती हैं और कहती हैं कि उन्हें ”बाद में पता चला कि वहां ईसीजी यूनिट काम नहीं कर रही थी।।” बाद में हरकिशन ने बताया, लोया को ”मेडिट्रिना हॉस्पिटल में शिफ्ट कर दिया गया”- शहर का एक और निजी अस्पताल- ”जहां उन्हें पहुंचते ही मृत घोषित कर दिया गया।”
अपनी मौत के वक्त लोया केवल एक ही मुकदमे की सुनवाई कर रहे थे, जो सोहराबुद्दीन हत्याकांड था। उस वक्त पूरे देश की निगाह इस मुकदमे पर लगी हुई थी। सुप्रीम कोर्ट ने 2012 में आदेश दिया था कि इस मामले की सुनवाई को गुजरात से हटाकर महाराष्अ्र में ले जाया जाए। उसका कहना था कि उसे ”भरोसा है कि सुनवाई की शुचिता को कायम रखने के लिए ज़रूरी है कि उसे राज्य से बाहर शिफ्ट कर दिया जाए।” सुप्रीम कोर्ट ने यह भी आदेश दिया था कि इसकी सुनवाई शुरू से लेकर अंत तक ही एक ही जज करेगा, लेकिन इस आदेश का उल्लंघन करते हुए पहले सुनवाई कर रहे जज जेटी उत्पट को 2014 के मध्य में सीबीआइ की विशेष अदालत से हटा कर उनकी जगह लोया को ला दिया गया।
उत्पअ ने 6 जून 2014 को अमित शाह को अदालत में पेश न होने को लेकर फटकार लगाई थी। अगली तारीख 20 जून को भी अमित शाह नहीं पेश हुए। उत्पट ने इसके बाद 26 जून की तारीख मुकर्रर की। सुनवाई से एक दिन पहले 25 जून को उनका तबादला हो गया। इसके बाद आए लोया ने 31 अक्टूबर 2014 को सवाल उठाया कि आखिर शाह मुंबई में होते हुए भी उस तारीख पर क्यों नहीं कोर्ट आए। उन्होंने अगली सुनवाई की तारीख 15 दिसंबर तय की थी।
लोया की 1 दिसंबर को हुई मौत की खबर अगले दिन कुछ ही अखबारों में छपी और इसे मीडिया में उतनी तवज्जो नहीं मिल सकी। दि इंडियन एक्सप्रेस ने लोया की ”मौत दिल का दौरा पड़ने से” हुई बताते हुए लिखा, ”उनके करीबी सूत्रों ने बताया कि लोया की मेडिकल हिस्ट्री दुरुस्त थी।” मीडिया का ध्यान कुछ वक्त के लिए 3 दिसंबर को इस ओर गया जब तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने संसद के बाहर इस मामले में जांच की मांग को लेकर एक प्रदर्शन किया जहां शीतसत्र चल रहा था। अगले ही दिन सोहराबुद्दीन के भाई रुबाबुद्दीन ने सीबीआइ को एक पत्र लिखकर लोया की मौत पर आश्चर्य व्यक्त किया।
सांसदों के प्रदर्शन या रुबाबुद्दीन के ख़त का कोई नतीजा नहीं निकला। लोया की मौत के इर्द-गिर्द परिस्थितियों को लेकर कोई फॉलो-अप ख़बर मीडिया में नहीं चली।
लोया के परिजनों से कई बार हुए संवाद के आधार पर मैंने इस बात को सिलसिलेवार ढंग से दर्ज किया कि सोहराबुद्दीन के केस की सुनवाई करते वक्त उन्हें किन हालात से गुज़रना पड़ा और उनकी मौत के बाद क्या हुआ। बियाणी ने मुझे अपनी डायरी की प्रति भी दी जिसमें उनके भाई की मौत से पहले और बाद के दिनों का विवरण दर्ज है। इन डायरियों में उन्होंने इस घटना के कई ऐसे आयामों को दर्ज किया है जो उन्हें परेशान करते थे। मैं लोया की पत्नी और बेटे के पास भी गया, लेकिन उन्होंने कुछ भी बोलने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि उन्हें अपनी जान का डर है।
धुले निवासी बियाणी ने मुझे बताया कि 1 दिसंबर 2014 की सुबह उनके पास एक कॉल आई। दूसरी तरफ़ कोई बार्डे नाम का व्यक्ति था जो खुद को जज कह रहा था। उसने उन्हें लातूर से कोई 30 किलामीटर दूर स्थित गाटेगांव निकलने को कहा जहां लोया का पार्थिव शरीर भेजा गया था। इसी व्यक्ति ने बियाणी और परिवार के अन्य सदस्यों को सूचना दी थी कि लाश का पंचनामा हो चुका है और मौत की वजह दिल का दौरा पड़ना है।
लोया के पिता आम तौर से गाटेगांव में रहते हैं लेकिन उस वक्त वे लातूर में अपनी एक बेटी के घर पर थे। उनके पास भी फोन आया था कि उनके बेटे की लाश गाटेगांव भेजी जा रही है। बियाणी ने मुझे बताया था, ”ईश्वर बहेटी नाम के आरएसएस के एक कार्यकर्ता ने पिता को बताया था कि वह लाश के गाटेगांव पहुंचने की व्यवस्था कर रहा है। कोई नहीं जानता कि उसे क्यों, कब और कैसे बृज लोया की मौत की खबर मिली।”
लोया की एक और बहन सरिता मांधाने औरंगाबाद में ट्यूशन सेंटर चलाती हैं और उस वक्त वे लातूर में थीं। उन्होंने मुझे बताया कि उनके पास सुबह करीब 5 बजे बार्डे का फोन आया था यह बताने के लिए कि लोया नहीं रहे। उन्होंने बताया, ”उसने कहा कि बृज नागपुर में गुज़र गए हैं और हमें उसने नागपुर आने को कहा।” वे तुरंत लातूर के हॉस्पिटल अपने भतीजे को लेने निकल गईं जहां वह भर्ती था, लेकिन ”हम जैसे ही अस्पताल से निकल रहे थे, ईश्वर बहेटी नाम का व्यक्ति वहां आ पहुंचा। मैं अब भी नहीं जानती कि उसे कैसे पता था कि हम सारदा हॉस्पिटल में थे।” मांधाने के अनुसार बहेटी ने उन्हें बताया कि वे रात से ही नागपुर के लोगों से संपर्क में हैं और इस बात पर ज़ोर दिया कि नागपुर जाने का कोई मतलब नहीं है क्योंकि लाश को एम्बुलेंस से गाटेगांव लाया जा रहा है।” उन्होंने कहा, ”वह हमें अपने घर ले गया यह कहते हुए कि वह सब कुछ देख लेगा।” (इस कहानी के छपने के वक्त तक बहेटी को भेजे मेरे सवालों का जवाब नहीं आया था)।
बियाणी के गाटेगांव पहुंचने तक रात हो चुकी थी- बाकी बहनें पहले ही पैतृक घर पहुंच चुकी थीं। बियाणी की डायरी में दर्ज है कि उनके वहां पहुंचने के बाद लाश रात 11.30 के आसपास वहां लाई गई। चौंकाने वाली बात यह थी कि नागपुर से लाई गई लाश के साथ लोया का कोई भी सहकर्मी मौजूद नहीं था। केवल एम्बुलेंस का ड्राइवर था। बियाणी कहती हैं, ”यह चौंकाने वाली बात थी। जिन दो जजों ने उनसे आग्रह किया था कि वे शादी में नागपुर चलें, वे साथ नहीं थे। परिवार को मौत और पंचनामे की खबर देने वाले मिस्टर बार्डे भी साथ नहीं थे। यह सवाल मुझे परेशान करता है: आखिर इस लाश के साथ कोई क्यों नहीं था?” उनकी डायरी में लिखा है, ”वे सीबीआइ कोर्ट के जज थे। उनके पास सुरक्षाकर्मी होने चाहिए थे और कायदे से उन्हें लाया जाना चाहिए था।”
लोया की पत्नी शर्मिला और उनकी बेटी अपूर्वा व बेटा अनुज मुंबई से गाटेगांव एकाध जजों के साथ आए। उनमें से एक ”लगातार अनुज और दूसरों से कह रहा था कि किसी से कुछ नहीं बोलना है।” बियाणी ने मुझे बताया, ”अनुज दुखी था और डरा हुआ भी था, लेकिन उसने अपना हौसला बनाए रखा और अपनी मां के साथ बना रहा।”
बियाणी बताती हैं कि लाश देखते ही उन्हें दाल में कुछ काला जान पड़ा। उन्होंने मुझे बताया, ”शर्ट के पीछे उनकी गरदन पर खून के धब्बे थे।” उन्होंने यह भी बताया कि उनका ”चश्मा गले से नीचे था।” मांधाने ने मुझे बताया कि लोया का चश्मा ”उनकी देह के नीचे फंसा हुआ था।”
उस वक्त बियाणी की डायरी में दर्ज एक टिप्पणी कहती है, ”उनके कॉलर पर खून था। उनकी बेल्ट उलटी दिशा में मोड़ी हुई थी। पैंट की क्लिप टूटी हुई थी। मेरे अंकल को भी महसूस हुआ था कि कुछ संदिग्ध है।” हरकिशन ने मुझे बताया, ”उसके कपड़ों पर खून के दाग थे।” मांधाने ने बताया कि उन्होंने भी ”गरदन पर खून” देखा था। उन्होंने बताया कि ”उनके सिर पर चोट थी और खून था… पीछे की तरफ” और ”उनकी शर्ट पर खून के धब्बे थे।” हरकिशन ने बताया, ”उसकी शर्ट पर बाएं कंधे से लेकर कमर तक खून था।”
नागपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज द्वारा जारी उनकी पंचनामा रिपोर्ट हालांकि ”कपड़ों की हालत- पानी से भीगा, खून से सना या क़ै अथवा फीकल मैटर से गंदा” के अंतर्गत हस्तलिखित एंट्री दर्ज करती है- ”सूखा”।
बियाणी को लाश की स्थिति संदिग्ध लगी क्योंकि एक डॉक्टर होने के नाते ”मैं जानती हूं कि पीएम के दौरन खून नहीं निकलता क्योंकि हृदय और फेफड़े काम नहीं कर रहे होते हैं।” उन्होंने कहा कि दोबारा पंचनामे की मांग भी उन्होंने की थी, लेकिन वहां इकट्ठा लोया के दोस्तों और सहकर्मियों ने ”हमें हतोत्साहित किया, यह कहते हुए कि मामले को और जटिल बनाने की ज़रूरत नहीं है।”
हरकिशन बताते हैं कि परिवार तनाव में था और डरा हुआ था लेकिन लोया की अंत्येष्टि करने का उस पर दबाव बनाया गया।
कानूनी जानकार कहते हैं कि यदि लोया की मौत संदिग्ध थी- यह तथ्य कि पंचनामे का आदेश दिया गया, खुद इसकी पुष्टि करता है- तो एक पंचनामा रिपोर्ट बनाई जानी चाहिए थी और एक मेडिको-लीगल केस दायर किया जाना चाहिए था। पुणे के एक वरिष्ठ वकील असीम सरोदे कहते हैं, ”कानूनी प्रक्रिया के मुताबिक अपेक्षा की जाती है कि पुलिस विभाग मृतक के तमाम निजी सामान को ज़ब्त कर के सील कर देगा, पंचनामे में उनकी सूची बनाएगा और जस का तस परिवार को सौंप देगा।” बियाणी कहती हैं कि परिवार को पंचनामे की प्रति तक नहीं दी गई।
लोया का मोबाइल फोन परिवार को लौटा दिया गया लेकिन बियाणी कहती हैं कि बहेटी ने उसे लौटाया, पुलिस ने नहीं। वे बताती हैं, ”हमें तीसरे या चौथे दिन उनका मोबाइल मिला। मैंने तुरंत उसकी मांग की थी। उसमें उनकी कॉल और बाकी चीज़ों का विवरण होता। हमें सब पता चल गया होता अगर वह मिल जाता। और एसएमएस भी। इस खबर के एक या दो दिन पहले एक संदेश आया था, ”सर, इन लोगों से बचकर रहिए।’ वह एसएमएस फोन में था। बाकी सब कुछ डिलीट कर दिया गया था।”
बियाणी के पास लोया की मौत वाली रात और अगली सुबह को लेकर तमाम सवाल हैं। उनमें एक सवाल यह था कि लोया को ऑटोरिक्शा में क्यों और कैसे अस्पताल ले जाया गया जबकि रवि भवन से सबसे करीबी ऑटो स्टैंड दो किलोमीटर दूर है। बियाणी कहती हैं, ”रवि भवन के पास कोई ऑटो स्टैंड नहीं है और लोगों को तो दिन के वक्त भी रवि भवन के पास ऑटो रिक्शा नहीं मिलता। उनके साथ के लोगों ने आधी रात में ऑटोरिक्शा का इंतज़ाम कैसे किया होगा?”
बाकी सवालों के जवाब भी नदारद हैं। लोया को अस्पताल ले जाते वक्त परिवार को सूचना क्यों नहीं दी गई? उनकी मौत होते ही ख़बर क्यों नहीं की गई? पंचनामे की मंजूरी परिवार से क्यों नहीं ली गई या फिर प्रक्रिया शुरू करने से पहले ही क्यों नहीं सूचित कर दिया गया कि पंचनामा होना है? पोस्ट-मॉर्टम की सिफारिश किसने की और क्यों? आखिर लोया की मौत के बारे ऐसा क्या संदिग्ध था कि पंचनामे का सुझाव दिया गया? दांडे अस्पताल में उन्हें कौन सी दवा दी गई? क्या उस वक्त रवि भवन में एक भी गाड़ी नहीं थी लोया को अस्पताल ले जाने के लिए, जबकि वहां नियमित रूप से मंत्री, आइएएस, आइपीएस, जज सहित तमाम वीआइपी ठहरते हें? महाराष्ट्र असेंबली का शीत सत्र नागपुर में 7 दिसंबर से शुरू होना था और सैकड़ों अधिकारी पहले से ही इसकी तैयारियों के लिए वहां जुट जाते हैं। रवि भवन में 30 नवंबर और 1 दिसंबर को ठहरे बाकी वीआइपी कौन थे?” वकील सरोदे कहते हैं, ”ये सारे सवाल बेहद जायज़ हैं। दांडे अस्पताल में लोया को दी गई चिकित्सा की सूचना परिवार को क्यों नहीं दी गई? क्या इन सवालों के जवाब से किसी के लिए दिक्कत पैदा हो सकती है?”
बियाणी कहती हैं, ”ऐसे सवाल अब भी परिवार, मित्रों और परिजनों को परेशान करते हैं।”
वे कहती हैं कि उनका संदेह और पुख्ता हुआ जब लोया को नागपुर जाने के लिए आग्रह करने वाले जज परिवार से मिलने उनकी मौत के ”डेढ़ महीने बाद” तक नहीं आए। इतने दिनों बाद जाकर परिवार को लोया के आखिरी क्षणों का विवरण जानने को मिल सका। बियाणी के अनुसार दोनों जजों ने परिवार को बताया कि लोया को सीने में दर्द रात साढ़े बारह बजे हुआ था, फिर वे उनहें दांडे अस्पताल एक ऑटोरिक्शा में ले गए, और वहां ”वे खुद ही सीढ़ी चढ़कर ऊपर गए और उन्हें कुछ चिकित्सा दी गई। उन्हें मेडिट्रिना अस्पताल ले जाया गया जहां पहुंचते ही उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।”
इसके बावजूद कई सवालों के जवाब नहीं मिल सके हैं। बियाणी ने बताया, ”हमने दांडे अस्पताल में दी गई चिकित्सा के बारे में पता करने की कोशिश की लेकिन वहां के डॉक्टरों और स्टाफ ने कोई भी विवरण देने से इनकार कर दिया।”
मैंने लोया की पोस्ट-मॉर्टम निकलवाई जो नागपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज में की गई थी। यह रिपोर्ट अपने आप में कई सवालों को जन्म देती है।
रिपोर्ट के हर पन्ने पर सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर, सदर थाना, नागपुर के दस्तखत हैं, साथ ही एक और व्यक्ति के दस्तखत हैं जिसने नाम के साथ लिखा है ”मैयाताजा चलतभाऊ” यानी मृतक का चचेरा भाई। ज़ाहिर है, पंचनामे के बाद इसी व्यक्ति ने लाश अपने कब्ज़े में ली होगी। लोया के पिता कहते हैं, ”मेरा कोई भाई या चचेरा भाई नागपुर में नहीं है। किसने इस रिपोर्ट पर साइन किया, यह सवाल भी अनुत्तरित है।”
इसके अलावा, रिपोर्ट कहती है कि लाश को मेडिटिना अस्पताल से नागपुर मेडिकल कॉलेज सीताबर्दी पुलिस थाने के द्वारा भेजा गया और उसे लेकर थाने का पंकज नामक एक सिपाही आया था, जिसकी बैज संख्या 6238 है। रिपोर्ट के मुताबिक लाश 1 दिसंबर 2014 को दिन में 10.50 पर लाई गई, पोस्ट-मॉर्टम 10.55 पर शुरू हुआ और 11.55 पर खत्म हुआ।
रिपोर्ट यह भी कहती है कि पुलिस के अनुसार लोया को ”1/12/14 की सुबह 4.00 बजे सीने में दर्द हुआ और 6.15 बजे मौत हुई।” इसमें कहा गया है कि ”पहले उन्हें दांडे अस्पताल ले जाया गया और फिर मेडिट्रिना अस्पताल लाया गया जहां उन्हें मृत घोषित किया गया।”
रिपोर्अ में मौत का वक्त सबह 6.15 बजे बेमेल जान पड़ता है क्योंकि लोया के परिजनों के मुताबिक उन्हें सुबह 5 बजे से ही फोन आने लग गए थे। मेरी जांच के दौरान नागपुर मेडिकल कॉलेज और सीताबर्दी थाने के दो सूत्रों ने बताया कि उन्हें लोया की मौत की सूचना आधी रात को ही मिल चुकी थी और उन्होंने खुद रात में लाश देखी थी। उनके मुताबिक पोस्ट-मॉर्टम आधी रात के तुरंत बाद ही कर दिया गया था। परिवार के लोगों को आए फोन के अलावा सूत्रों के दिए विवरण पोस्ट-मॉर्टम रिपोर्ट के इस दावे पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं कि लोया की मौत का समय सुबह 6.15 बजे था।
मेडिकल कॉलेज के सूत्र- जो पोस्ट-मॉर्टम जांच का गवाह है- ने मुझे यह भी बताया कि वह जानता था कि ऊपर से आदेश आया था कि ”इस तरह से लाश में चीरा लगाओ कि पीएम हुआ जान पड़े और फिर उसे सिल दो।”
रिपोर्ट मौत की संभावित वजह ”कोरोनरी आर्टरी इनसफीशिएंसी” को बताती है। मुंबई के प्रतिष्ठित कार्डियोलॉजिस्ट हसमुख रावत के मुताबिक ”आम तौर से बुढ़ापे, परिवार की हिस्ट्री, धूमंपान, उच्च कोलेस्ट्रॉल, उच्च रक्तचाप, मोटापा, मधुमेह आदि के कारण कोरोनरी आर्टरी इनसफीशिएंसी होती है।” बियाणी कहती हैं कि उनके भाई के साथ ऐसा कुछ भी नहीं था। वे कहती हैं, ”बृज 48 के थे। हमारे माता-पिता 85 और 80 साल के हैं और वे स्वस्थ हैं। उन्हें दिल की बीमारी की कोई शिकायत नहीं है। वे केवल चाय पीते थे, बरसों से दिन में दो घंटे टेबल टेनिस खेलते आए थे, उन्हें न मधुमेह था न रक्तचाप।”
बियाणी ने मुझे बताया कि उन्हें अपने भाई की मौत की आधिकारिक मेडिकल वजह विश्वास करने योग्य नहीं लगती। वे कहती हैं, ”मैं खुद एक डॉक्टर हूं और एसिडिटी हो या खांसी, छोटी सी शिकायत के लिए भी बृज मुझसे ही सलाह लेते थे। उन्हें दिल के रोग की कोई शिकायत नहीं थी और हमारे परिवार में भी इसकी कोई हिस्ट्री नहीं है।”
(निरंजन टाकले की 21 नवंबर 2017 को लिखी यह रिपोर्ताज अंग्रेज़ी पत्रिका दि कारवां से साभार प्रकाशित है - संपादक)
भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर स्टैंडर्ड एंड पुअर्स (एस एंड बी) ने अपनी रेटिंग जारी की है। शुक्रवार को आई इस रेटिंग में भारत के ग्रेड में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया गया है। यह बीबीबी ही है। जबकि, आउटलुक स्थिर बताया गया है।
यह जानकारी कई टीवी रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से दी गई है। हालांकि, अभी आधिकारिक बयान आना बाकी है।
स्टैंडर्ड ऐंड पुअर्स ने मोदी सरकार की ओर से अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर उठाए गए कदमों की सराहना तो की, लेकिन रेटिंग अपग्रेड नहीं की।
बता दें कि बीबीबी ग्रेड इन्वेस्टमेंट संबंधित सबसे निचली श्रेणी है।
इससे पहले हाल ही में मूडीज ने भारत की रेटिंग एक पायदान बढ़ाकर बीएए2 कर दी थी। रेटिंग में यह सुधार 13 साल बाद हुआ था। आर्थिक एवं संस्थागत सुधारों से घरेलू अर्थव्यवस्था में वृद्धि की संभावनाएं बेहतर होने के कारण एजेंसी ने यह सुधार किया था। इससे पहले साल 2004 में भारत की रेटिंग सुधारकर बीएए3 की गई थी। बीएए3 रेटिंग निवेश श्रेणी का सबसे निचला दर्जा है। 2015 में उसने रेटिंग परिदृश्य को सकारात्मक से स्थिर किया था।
दरअसल, यह रेटिंग किसी भी देश के निवेश माहौल का सूचक होता है। यह निवेशकों को किसी देश में निवेश से संबंधित जोखिमों की जानकारी देता है। इन जोखिमों में राजनीतिक जोखिम भी शामिल होता है।
लंबे समय से भारत को रेटिंग एजेंसियां निवेश की सबसे निचली श्रेणी बीएए3 में रखती आई हैं। मूडीज ने अब इसे एक पायदान ऊपर किया था। रेटिंग में यह सुधार ऐसे समय में किया गया, जब कुछ ही दिनों पहले विश्व बैंक की कारोबार सुगमता (ईज ऑफ डूइंग बिजनस) रिपोर्ट में भारत का स्थान 30 पायदान ऊपर कर 100 कर दिया गया था।
लेकिन भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर स्टैंडर्ड एंड पुअर्स (एस एंड बी) ने अपनी रेटिंग जारी की है। शुक्रवार को आई इस रेटिंग में भारत के ग्रेड में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया गया है। यह बीबीबी ही है। जबकि, आउटलुक स्थिर बताया गया है।
वैज्ञानिकों ने पृथ्वी के अलावा इंसानों के रहने के लिए एक अलग दुनिया को खोज में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने हाल ही में एक ऐसा ग्रह ढूंढा है जो धरती के काफी करीब है, जहां इंसानी जीवन संभव हो सकता है।
ऐस्ट्रोनॉमी से संबंधित एक पत्रिका के अनुसार, पृथ्वी के आकार का 'रॉस 128' ग्रह छोटा और हल्के लाल रंग का है। यह पृथ्वी से 11 हजार प्रकाश वर्ष दूर है। हालांकि यह ग्रह पृथ्वी की तुलना में थोड़ा भारी है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि हमारे सोलर सिस्टम से दूर इस ग्रह पर मानव जीवन संभव है।
वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस ग्रह का भार पृथ्वी से करीब डेढ़ गुना ज्यादा है। यह ग्रह प्रॉक्सिमा सेंचुरी के बाद हमारी पृथ्वी से दूसरा निकटतम ग्रह है, जहां जीवन की संभावना हो सकती है।
महाराष्ट्र में 2,400 पोस्टमैन की नियुक्ति के घोटाले का खुलासा हुआ है। ये खुलासा विजिलेंस विभाग ने किया है।
भारतीय डाक विभाग में पोस्टमैन घोटाला गोवा में भी हुआ है। इसके साक्ष्य विजिलेंस विभाग को मिल गए हैं।
घोटाले की शिकायत मुंबई पुलिस से की गई है, जिसके बाद पुलिस ने मनिपाल टेक्नोलॉजी लिमिटेड (MTL)के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
दरअसल इस कंपनी को 2015 में डाक विभाग में पोस्टमैन की निुयुक्ति कराने को लेकर टेंडर दिया गया था। इस टेंडर में उन्हें पोस्टमैन के साथ ही मेल गार्ड की नियुक्ति का भी जिम्मा दिया गया था। पुलिस ने यह एफआईआर मुंबई असिस्टेंट पोस्ट मास्टर जनरल की शिकायत पर दर्ज की है।
इस घोटाले में पी वी माल्या का नाम सामने आ रहा है। मुंबई उच्च न्यायाल में इस घोटाले को लेकर सुनवाई शुरू हो रही है। इसमें जस्टिस ए एम बदर ने आरोपी माल्या को गिरफ्तारी पूर्व जमानत देने से इंकार कर दिया है। यह फैसला न्यायालय ने 3 नवंबर को सुनाया था।
आपको बता दें कि महाराष्ट्र और गोवा में बीजेपी सरकार है।
मशहूर भौतिक वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग ने एक बार फिर मानव जाति को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि मानव जाति को अपना अस्तित्व बचाये रखने के लिए जल्द ही दूसरी धरती या फिर प्लानेट खोज लेना चाहिए।
वायर मैगज़ीन को दिए अपने इंटरव्यू में स्टीफन हॉकिंग ने कहा कि विश्व अत्यधिक पर्यावरणीय एवं प्रौद्योगिकीय चुनौतियों का सामना कर रहा है और मानवता की रक्षा के लिए एकजुट होने तथा साथ काम करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि हमारे पास अब अपने ग्रह को नष्ट करने की टेक्नोलॉजी है, लेकिन इससे बच निकलने की क्षमता अब तक विकसित नहीं की है। शायद कुछ सौ साल में हम तारों के बीच मानव बस्तियां बसा लेंगे, लेकिन फिलहाल हमारे पास सिर्फ एक ग्रह है और इसे बचाने के लिए हमें साथ मिल कर काम करने की जरूरत है।
मशहूर वैज्ञानिक हॉकिंग ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता धरती पर मानव के विनाश का कारण बनेगा। उन्होंने कहा कि मुझे डर है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मनुष्य को धरती से दूसरे ग्रह पर पलायन करने के लिए मजबूर कर देगा। ऐसे में लोगों को वक्त रहते दूसरे ग्रहों पर जल्द ही अपना नया ठिकाना ढूढ़ लेना चाहिए।
अमेरिकी वैज्ञानिकों ने बुधवार को दो नए आणविक संपादन उपकरण का निर्माण किया है। इससे म्यूटेशनों को ठीक करने में मदद मिलेगी। म्यूटेशन बहुत से बीमारियों का कारण बनता है, जिनमें से कुछ का कोई उपचार नहीं है।
हॉवर्ड विश्वविद्यालय के डेविड लियू और ब्रॉड इंस्टीट्यूट ऑफ एम आई टी और हार्वर्ड जीन में गलतियों को ठीक करने का एक अत्यंत ही सटीक तरीका प्रदान करता है, जो डीओक्सीरिबो न्यूक्लिक एसिड या डीएनए के बने होते हैं।
ब्रॉड इंस्टीट्यूट के आण्विक जीवविज्ञानी फेंग झांग द्वारा एक दूसरी खोज, जो राइबोन्यूक्लिक एसिड या आरएनए को संपादित करने पर ध्यान केंद्रित करता है। ये डीएनए को बदले बिना प्रोटीन बनाने के लिए आनुवंशिक निर्देश करता है।
भारत के डॉक्टर या प्राइमरी केयर कंसल्टेंट, मरीजों को सिर्फ दो मिनट का वक्त देते हैं। इसका खुलासा एक रिसर्च से हुआ है। मेडिकल कंसल्टेशन पर हुए सबसे बड़े इंटरनेशनल शोध में यह बात सामने आई है।
पड़ोसी देशों बंग्लादेश और पाकिस्तान में स्थिति और भी बदतर है, यहां कंसल्टिंग टाइम औसतन 48 सेकंड से 1.3 मिनट ही है।
यह शोध गुरुवार को मेडिकल जर्नल बी एम जे ओपन में प्रकाशित हुआ है। इसके विपरीत स्वीडन, अमेरिका और नॉर्वे जैसे देशों में कंसल्टेशन का औसत समय 20 मिनट होता है।
यह शोध यूनाइटेड किंगडम के कई अस्पतालों के शोधकर्ताओं ने किया था।
जर्नल में कहा गया है, ''यह चिंता की बात है कि 18 ऐसे देश, जहां की दुनिया की 50 फीसदी आबादी रहती है। यहां का औसत कंसल्टेशन टाइम 5 या इससे कम मिनट है।
स्टडी के मुताबिक, मरीज ज्यादा वक्त फार्मेसी में या ऐंटीबायॉटिक दवाएं खाकर बिता रहे हैं और उनके डॉक्टरों से रिश्ते उतने अच्छे नहीं है।
कंसल्टेशन का वक्त कम होने का मतलब है कि हेल्थकेयर सिस्टम में ज्यादा बड़ी समस्या है। भारत के परिपेक्ष्य में लोकल एक्सपर्ट्स का कहना है कि ये अस्पतालों में भीड़ और प्राइमरी केयर फिजिशन की कमी को दर्शाता है। प्राइमरी केयर डॉक्टर कंसल्टेंट्स से अलग होते हैं जो कि मेडिसिन की खास ब्रांच में ट्रेनिंग पाए होते हैं।
भारत में कंसल्टेशन को दो मिनट का वक्त मिलने वाली बात से किसी को भी हैरानी नहीं हुई। हेल्थ कंमेंटेटर रवि दुग्गल का कहना है, ''यह बात सभी को पता है कि अस्पतालों में भीड़भाड़ के चलते डॉक्टर मरीजों को कम वक्त दे पाते हैं।''
डॉ दुग्गल के मुताबिक, ''कोई नई बात नहीं है कि डॉक्टर मरीजों के लक्षणों में भ्रमित हो जाएं।''
वहीं प्राइवेट क्लीनिक और अस्पतालों में भी भीड़ का यही हाल है। यहां डॉक्टर सिर्फ लक्षण पूछते हैं और बहुत कम ही शारीरिक परीक्षण कर पाते हैं।
वेस्टर्न और इंडियन कंसल्टेशन में बीमारियों में फर्क होता है। महाराष्ट्र के डॉक्टर सुहास बताते हैं, ''स्वीडन में मरीज को वायरल फीवर के बजाय साइकोसोशल समस्या होती है। वही भारत में अगर डॉक्टर को हवा में मौजूद किसी खास तरह के वायरस के बारे में जानकारी है तो वह कई लोगों का आसानी से इलाज कर सकता है।'' बी एम जे ओपन स्टडी में कई देशों की स्वास्थ्य सेवाओं की ख़राब हालत को देखा गया।
भारत के दिल्ली में मंगलवार को वायु प्रदूषण बेहद गंभीर स्तर पर पहुंच गया। प्रदूषण परमीसिबल स्टैंडर्ड (सहन करने लायक स्तर) से कई गुना अधिक होने के कारण पूरी दिल्ली धुंध की मोटी चादर में लिपट गई।
बीती शाम से वायु की गुणवत्ता और दृश्यता में तेजी से गिरावट आ रही है तथा नमी और प्रदूषकों के मेल के कारण शहर में घनी धुंध छा गई है।
मंगलवार सुबह दस बजे तक केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने हवा की गुणवत्ता को बेहद गंभीर स्थिति में बताया जिसका मतलब यह है कि प्रदूषण बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है।
वर्तमान हालात के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित पर्यावरण प्रदूषण रोकथाम एवं नियंत्रण प्राधिकरण (ई पी सी) द्वारा ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (जी आर ए पी) के तहत तय उपाय इस्तेमाल में लाए जा सकते हैं जिसमें पार्किंग शुल्क को चार गुना बढ़ाया जाना शामिल है।
अगर स्थिति और खराब होती है और कम से कम 48 घंटों तक बनी रहती है तो जी आर ए पी के तहत आने वाला कार्यबल स्कूलों को बंद कर सकता है और सम-विषम (आॅड-ईवन) योजना को फिर शुरू कर सकता है।
पिछली बार हवा की गुणवत्ता दीपावली के एक दिन बाद 20 अक्टूबर को बेहद गंभीर स्थिति में पहुंची थी। तब से प्रदूषण के स्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और हवा की गुणवत्ता काफी खराब स्तर पर बनी हुई है। यह अत्यंत गंभीर से बेहतर स्थिति है, लेकिन वैश्विक मानकों के मुताबिक यह भी खतरनाक है।
वायु गुणवत्ता बेहद खराब होने का मतलब है कि लंबे समय तक इसके संपर्क में आने पर लोगों को सॉंस संबंधी परेशानी हो सकती है, जबकि बेहद गंभीर स्तर पर होने का मतलब है कि यह सेहतमंद लोगों पर भी असर डाल सकती है और सॉंस तथा दिल के मरीजों को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है।
सी पी सी बी के एयर लैब प्रमुख दीपांकर साहा ने बताया कि हवा बिलकुल भी नहीं चल रही जिस वजह से यह हालात बने हैं। वहीं, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आई एम ए) ने दिल्ली में हवा के खराब गुणवत्ता को देखते हुए इसे पब्लिक हेल्थ के लिए बेहद हानिकारक बताया है। आई एम ए के प्रेसिडेंट डॉ. के के अग्रवाल ने स्कूल बंद करने और लोगों को घर से बाहर ना जाने की अपील की है।
मौसम में मौजूद नमी ने जमीन पर स्थित स्रोतों से निकलने वाले प्रदूषकों को वहीं पर रोक दिया है। मौसम का हाल बताने वाली निजी एजेंसी स्कायमेट का कहना है कि पड़ोसी राज्य पंजाब और हरियाणा में बड़े पैमाने पर पराली जलाई जा रही है और वहां से हवा दोपहर के वक्त शहर में प्रवेश कर रही है। सी पी सी बी ने पड़ोसी शहर नोएडा और गाजियाबाद में भी हवा की गुणवत्ता बेहद गंभीर बताई है।
केरल की पी विजयन सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि राज्य पुलिस ने एक हिंदू महिला के इस्लाम धर्म स्वीकार करने और फिर एक मुस्लिम व्यक्ति से उसकी शादी के मामले की गहन जांच की है और ऐसा कुछ नहीं पाया कि मामले की छानबीन राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंपी जा सके।
सुप्रीम कोर्ट ने 16 अगस्त को एनआईए को निर्देश दिया था कि वह इस बात की जांच करे कि इस मामले में कथित 'लव जिहाद' का कोई व्यापक पहलू तो शामिल नहीं है।
इस मामले में हिंदू महिला हादिया ने अपना धर्म परिवर्तन कर इस्लाम स्वीकार कर लिया था और बाद में केरल के एक मुस्लिम युवक शफीन जहां से शादी कर ली थी।
केरल सरकार ने कहा कि यूं तो उसने मामले की जांच एनआईए को सौंपने के अदालत के निर्देश का पालन किया, लेकिन पुलिस को अब तक किसी ऐसे अपराध का पता नहीं चला है जिससे वैधानिक तौर पर मामले को केंद्रीय एजेंसी के हवाले किया जा सके।
पिछले दिसंबर में महिला से शादी करने वाले और उच्च न्यायालय की ओर से अपनी शादी रद्द करने के फैसले को चुनौती देने वाले शफीन जहां ने हाल में एक अंतरिम याचिका दाखिल कर उस आदेश को वापस लेने की मांग की जिसमें मामले की जांच एनआईए को सौंपने की बात कही गई थी।
उसने दावा किया था कि महिला ने अपनी शादी से कई महीने पहले धर्मांतरण किया था और शादी एक वैवाहिक वेबसाइट के जरिए तय हुई थी।
अतिरिक्त हलफनामे में राज्य सरकार ने कहा कि पुलिस जांच करने में सक्षम है और यदि कोई अनुसूचित अपराध सामने आया होता तो उसने केंद्र को इसकी जानकारी दी होती।
हलफनामे में कहा गया, ''केरल पुलिस की अपराध शाखा ने प्रभावी और ईमानदार तरीके से जांच की थी। केरल पुलिस की ओर से अब तक की गई जांच में किसी अनुसूचित अपराध के होने की घटना सामने नहीं आई है कि इसे एनआईए कानून 2008 की धारा छह के तहत केंद्र सरकार को सूचित किया जाए।''
राज्य ने अपने हलफनामे में कहा, ''केरल पुलिस ने प्रभावी तरीके से उपरोक्त अपराध की गहन जांच की है।''
शफीन जहां ने सुप्रीम कोर्ट का रुख तब किया, जब केरल उच्च न्यायालय ने उसकी शादी रद्द करते हुए कहा कि यह देश की महिलाओं की आजादी का अपमान है।
इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने तीन अक्तूबर को कहा कि वह इस सवाल पर गौर करेगा कि शफीन जहां और हिंदू महिला की शादी को निरस्त करने के लिए क्या उच्च न्यायालय रिट क्षेत्राधिकार के तहत अपनी शक्ति का इस्तेमाल कर सकता है।
अमेरिका ने कहा है कि परमाणु नि:शस्त्रीकरण संधि से एक भी परमाणु हथियार का उन्मूलन नहीं होगा।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब परमाणु हथियारों को दुनिया से समाप्त कर, इसे इतिहास बनाने का प्रयास करने वाले संगठन आईकैन को इस साल का नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया है।
इस साल नोबेल शांति पुरस्कार पाने वाले संस्थान द्वारा सर्मिथत परमाणु हथियार निषेध संधि पर अमेरिका का कहना है कि उसका इसपर हस्ताक्षर करने का कोई इरादा नहीं है।
हालांकि उसने परमाणु नि:शस्त्रीकरण के लिए वातावरण तैयार पर अपनी प्रतिबद्धता जताई।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने एएफपी को बताया, ''आज की घोषणा से संधि पर अमेरिका के रुख में बदलाव नहीं आएगा।
अमेरिका इसका समर्थन नहीं करता है और वह परमाणु हथियारों पर प्रतिबंध लगाने वाली संधि पर हस्ताक्षर नहीं करेगा।''
प्रवक्ता ने कहा, ''यह संधि दुनिया को ज्यादा शांतिपूर्ण नहीं बनाएगी, इससे एक भी परमाणु हथियार का उन्मूलन नहीं होगा और न ही इससे किसी देश की सुरक्षा बढ़ेगी।''
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि विश्व में परमाणु हथियार से लैस देशों में से किसी ने भी इस संधि का अभी तक समर्थन नहीं किया है।
गौरतलब है कि अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब परमाणु हथियारों को दुनिया से समाप्त कर, इसे इतिहास बनाने का प्रयास करने वाले इंटरनेशनल कैम्पेन टू एबोलिश न्यूक्लियर वेपंस (आईकैन) को इस साल का नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया है।
बता दें कि इस साल जुलाई महीने में संयुक्त राष्ट्र में 122 देशों द्वारा इस संधि को स्वीकार करने में इस संगठन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। यह संधि बड़े पैमाने पर प्रतीकात्मक ही थी क्योंकि परमाणु हथियार रखने वाले या संदिग्ध नौ देशों- अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन, भारत, पाकिस्तान, इस्राइल और उत्तर कोरिया ने इस संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए थे।
इसके साथ ही उत्तर कोरिया और ईरान से जुड़ा परमाणु हथियार संकट गहरा रहा है, यह बेहद समीचीन है।
पुरस्कार का घोषणा करते हुए नोर्वेगिएन नोबेल कमेटी के अध्यक्ष बेरिट रिएस एंडर्सन ने कहा कि आई सी ए एन ग्रुप द्वारा परमाणु हथियारों को समाप्त करने के लिए बहुत बड़े पैमाने पर कैंपेन चलाया गया है। परमाणु हथियारों के कारण मानवतावादी परिणामों को खतरा पहुंच सकता है जिसे ध्यान में रखते हुए ऐसे हथियारों के लिए की जानी वाली संधि के विरुध आई सी ए एन लड़ता आया है। पिछले काफी समय से आई सी ए एन संस्था दुनिया को न्यूक्लियर मुक्त बनाने के लिए जी जान से लगी हुई है।









