पाकिस्तान ने ग़ैर-मुस्लिम आबादी पर अमित शाह के दावों को ख़ारिज किया

पाकिस्तान ने भारत के गृह मंत्री अमित शाह के उन दावों को ख़ारिज कर दिया है कि उसके यहां अल्पसंख्यकों की आबादी में लगातार कमी आई है।

भारतीय संसद में नागरिकता संशोधन बिल पर बहस के दौरान अमित शाह ने कहा था कि 1947 में पाकिस्तान की कुल आबादी में धार्मिक अल्पसंख्यक 23 फ़ीसदी थे, जो 2011 में कम होकर 3.7 फ़ीसदी हो गए।

भारत सरकार ने संसद से नागरिकता संशोधन बिल पास किया है जिसके तहत पड़ोसी देश पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ़ग़ानिस्तान से आए अवैध ग़ैर-मुस्लिम प्रवासियों को नागरिकता दी जाएगी।

नए क़ानून में इन प्रवासियों में मुसलमानों को छोड़कर सभी धर्मावलंबियों को नागरिकता देने के प्रावधान हैं। बीजेपी सरकार का कहना है कि इन देशों में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार हुए हैं और उनकी संख्या लगातार कम हो रही है।

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता डॉक्टर मोहम्मद फ़ैसल ने पाकिस्तानी अख़बार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून से शनिवार को कहा कि अमित शाह का दावा ऐतिहासिक तथ्यों और जनगणना के नतीजों से मेल नहीं खाता है।  

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में ग़ैर-मुस्लिमों की आबादी में कमी बांग्लादेश बनने के कारण हुई है और पाकिस्तान में ग़ैर-मुस्लिमों को सताने की बात झूठ के सिवाय कुछ नहीं है।  

डॉक्टर फ़ैसल ने कहा, ''पाकिस्तान के राष्ट्र ध्वज में सफ़ेद रंग हरे रंग की तरह ही है। हमारे राष्ट्र ध्वज में सफ़ेद रंग मुल्क के अल्पसंख्यकों की हिस्सेदारी को दर्शाता है। अमित शाह ने जो आंकड़ा बताया है वो तब का है जब पाकिस्तान का विभाजन नहीं हुआ था।''

पाकिस्तानी अख़बार के मुताबिक़ 1947 में बँटवारे के वक़्त पाकिस्तान में कितने अल्पसंख्यक थे इसका कोई आधिकारिक आँकड़ा नहीं है।

हालांकि पाकिस्तान की 1951 की जनगणना के अनुसार देश में अल्पसंख्यक 14.20 फ़ीसदी थे लेकिन तब बांग्लादेश नहीं बना था।

पाकिस्तान में 2017 में धर्म के आधार पर जनगणना हुई है लेकिन इसका डेटा अभी जारी नहीं किया गया है।

1998 की पाकिस्तान की जनगणना के अनुसार पाकिस्तान की कुल आबादी में अल्पसंख्यक की आबादी 3.7 फ़ीसदी थी।