यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन करने वाले सैन्य गठबंधन ने हूती विद्रोहियों पर मदीना में एक बिजली वितरण स्टेशन पर ड्रोन हमला करने का आरोप लगाया है।
बीबीसी की अरबी सेवा के मुताबिक़, सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि 29 सितंबर, 2026 को सुबह 5 बजकर 11 मिनट पर मदीना में एक बिजली वितरण स्टेशन पर हमला किया गया।
गठबंधन का कहना है कि घटना की जांच और इस्तेमाल किए गए ड्रोन के मलबे के आकलन के बाद वो इस निष्कर्ष पर पहुंचा।
बयान में कहा गया है कि हमले से एक पावर ट्रांसफॉर्मर निष्क्रिय हो गया, लेकिन बिजली ट्रांसमिशन पर इसका असर नहीं पड़ा।
सऊदी गठबंधन ने दावा किया कि जिस यूनिट को निशाना बनाया गया था वह मदीना में पैगंबर की मस्जिद को बिजली की सप्लाई करने वाले सिस्टम का हिस्सा थी।
पाकिस्तान के विदेश कार्यालय का कहना है कि पाकिस्तान 29 सितंबर, 2026 को मदीना में हूती मिलिशिया की ओर से बिजली वितरण स्टेशन पर किए गए हमले की कड़ी निंदा करता है।
विदेश कार्यालय ने एक बयान में कहा, "पैगंबर की मस्जिद को बिजली की सप्लाई करने वाले इस सिविल इलेक्ट्रिसिटी इन्फ़्रास्ट्रक्चर पर हमला एक गंभीर उकसावा है और दुनिया भर के लाखों मुसलमानों के लिए गहरी चिंता और दुख का कारण है।"
बयान में स्पष्ट किया गया कि "दो पवित्र मस्जिदों की पवित्रता और उपासकों और तीर्थयात्रियों की सुरक्षा का हर समय सम्मान किया जाना चाहिए।"
क़तर ने भी इस हमले की निंदा की है।
क़तर के विदेश मंत्रालय ने इसे इस्लाम के पवित्र स्थलों की पवित्रता पर गंभीर हमला, मुसलमानों की भावनाओं को भड़काने की स्पष्ट कोशिश कहा है।
उसने कहा है कि नागरिकों की जान की पूरी तरह अनदेखी, सऊदी अरब की संप्रभुता का खुला उल्लंघन है।
उसने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय क़ानून के नियमों का गंभीर उल्लंघन भी है।
मंत्रालय ने कहा कि ऐसी गैर-जिम्मेदाराना कार्रवाइयों को तुरंत रोका जाना चाहिए।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह यूरोपीय देशों से उनके डीजल भंडार का कुछ हिस्सा जारी करने के लिए कह सकते हैं।
ट्रंप डीजल की कमी के बीच अमेरिका से इसके निर्यात पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहे हैं।
ट्रंप की यह टिप्पणी अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के यूरोप से ऐसे भंडार तैयार रखने और जरूरत पड़ने पर उन्हें जारी करने के आग्रह के बाद आई है।
बेसेंट ने कहा कि बढ़ती कीमतों का बोझ अमेरिकी किसानों, ट्रक चालकों और कारोबारियों पर नहीं डाला जाना चाहिए।
ईरान में युद्ध के कारण बढ़ती कीमतों के बीच अमेरिका ने डीजल के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी है।
अमेरिका में मध्यावधि चुनावों से पहले यह मुद्दा अमेरिकी मतदाताओं के लिए अहम बना हुआ है।
गुरुवार को ब्रिटेन ने यूरोपीय साझेदारों के साथ संभावित प्रतिबंध की स्थिति में डीजल भंडार जारी करने को लेकर बातचीत की।
अमेरिका दुनिया को डीजल की सप्लाई करने वाला एक अहम देश है। वह रोजाना 12 लाख से 15 लाख बैरल डीजल का निर्यात करता है।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि विदेशों में डीजल की सप्लाई पर प्रतिबंध लगाने से दूसरे देशों में कीमतों पर और दबाव पड़ सकता है।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि अगर रूस को लगता है कि उसके बाल्टिक क्षेत्र में स्थित कैलिनिनग्राद पर सीधे हमला हुआ है, तो वह अपने पास मौजूद सभी हथियारों का इस्तेमाल करेगा।
पुतिन ने जोर देकर कहा कि रूस '' किसी को धमकी नहीं दे रहा" है। वह सिर्फ पश्चिमी नेताओं के उन बयानों का जवाब दे रहा है, जिनमें कहा गया है कि रूस 2029 या 2030 तक युद्ध की तैयारी कर रहा है।
इस पूरे सप्ताह रूस ने नेटो पर अपने क्षेत्र की नाकाबंदी की तैयारी करने का आरोप लगाया है।
कैलिनिनग्राद लिथुआनिया और पोलैंड के बीच स्थित है। रूस ने चेतावनी दी है कि अगर पश्चिम ने कैलिनिनग्राद को रूस के बाकी हिस्सों से काटने की कोशिश की, तो वह परमाणु हथियारों के इस्तेमाल के लिए भी तैयार रहेगा।
नेटो ने स्थिति को शांत करने की कोशिश की है। उसने जोर देकर कहा है कि वह एक रक्षात्मक गठबंधन है और रूस से अपनी "परमाणु धमकियां" बंद करने को कहा है।
हाल के महीनों में पश्चिमी सहयोगियों को तथाकथित हाइब्रिड युद्ध की घटनाओं में तेजी का सामना करना पड़ा है, जिनके पीछे रूस का हाथ होने का आरोप लगाया गया है। खास तौर पर पोलैंड और बाल्टिक देशों में ऐसी घटनाएं बढ़ी हैं।
पिछले हफ्ते ही पोलैंड ने कहा था कि रूस का एक हेलिकॉप्टर कैलिनिनग्राद से लगे उसके इलाके में घुस आया था। वहीं, लिथुआनिया ने कहा था कि उसके लोग रूस की वजह से "लगातार खतरा महसूस कर रहे हैं"। इसकी एक वजह ड्रोन का उसके हवाई क्षेत्र में दाखिल होना भी है।
ब्रिटिश प्रधानमंत्री एंडी बर्नम ने कहा है कि सरकार को इस बात के 'मजबूत संकेत' मिले हैं कि आरएएफ़ फेयरफ़र्ड की घटना में ईरान की भूमिका थी।
एंडी बर्नम ने ये दावा बीबीसी से बातचीत के दौरान किया है। हालांकि, उन्होंने इस दावे के संबंध में कोई विस्तृत जानकारी साझा नहीं की।
दरअसल, हाल ही में ब्रिटेन के आरएएफ़ फेयरफ़र्ड एयरबेस के पास चरमपंथी हमले की साज़िश के संदेह में पांच लोगों को गिरफ़्तार किया गया था। यह मिलिट्री बेस अमेरिका से भी जुड़ा है।
इसी घटना के पीछे ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने ईरान की भूमिका बताई है।
ब्रिटिश प्रधानमंत्री के बयान पर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन के नेता गलत दिशा में देख रहे हैं।
अब्बास अराग़ची ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, "पीएम बर्नम कहते हैं कि ब्रिटेन की सरकार इस बात की पुष्टि कर सकती है कि आरएएफ़ फेयरफर्ड की घटना में ईरान की भूमिका रही है। मैं ईरान के इस विश्वास की पुष्टि कर सकता हूँ कि दूसरे देशों के लिए काम करने वाले कथित आतंकवादियों को छोड़ना अपने आप में सब कुछ कह देता है। आप ग़लत जगह पर निशाना लगा रहे हैं।"
दरअसल, अराग़ची का इशारा था कि अभियुक्तों को ज़मानत पर क्यों छोड़ा गया है। यही सवाल बीबीसी ने भी पीएम एंडी बर्नम से पूछा। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि अभियुक्तों को जमानत की कड़ी शर्तों के साथ छोड़ा गया है।
पीएम ने कहा, "मुझे लगता है कि लोगों को यह समझने की जरूरत है कि जब कहा जाता है कि उन्हें छोड़ दिया गया, तो इसका मतलब वैसा नहीं है, जैसा लोग सोच सकते हैं। जाहिर तौर पर उन पर सबसे कड़ी जमानत की शर्तें लागू हैं। अधिकारी इस मामले को बहुत सख्ती से संभाल रहे हैं और इस पर बहुत करीब से नजर रखी जा रही है। मैं आपको इसका भरोसा दिला सकता हूं।"
रूस ने एक बार फिर यूक्रेन पर बड़ा हमला किया है। यूक्रेन के प्रधानमंत्री सेरही कोरेत्स्की के मुताबिक़, रूस ने वसंत ऋतु के बाद पहली बार यूक्रेन के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर इतना बड़ा हमला किया है।
इस हमले का मुख्य निशाना यूक्रेन की राजधानी कीएव और उसके आसपास का इलाक़ा रहा।
कोरेत्स्की ने बताया कि रातभर हुए हमलों में पूरे देश में कम से कम पांच लोगों की मौत हुई है। इनमें कीएव क्षेत्र का एक बच्चा भी शामिल है।
इन हमलों का असर बिजली आपूर्ति पर भी पड़ा। यूक्रेन की सबसे बड़ी निजी एनर्जी कंपनी डीटीईके ने कहा कि राजधानी में "मुश्किल रात" के बाद 8,000 घरों की बिजली बहाल कर दी गई है।
रूस के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि उसके निशानों में ट्रिपिल्स्का पावर स्टेशन भी शामिल था। यह कीएव को बिजली सप्लाई करने वाला सबसे बड़ा केंद्र है।
टेलीग्राम पर जारी बयान में कोरेत्स्की ने कहा, "गर्मी के मौसम के बाद शायद ही कोई ऐसा दिन गुज़रा हो, जब दुश्मन ने हमारी एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला न किया हो।"
उन्होंने कहा, "हालांकि, पिछले हीटिंग सीजन के खत्म होने के बाद इस स्तर का बड़ा और संयुक्त हमला पहली बार हुआ है।"
यूक्रेन को पहले से आशंका थी कि रूस उसके बिजली नेटवर्क पर एक और लंबा हमला कर सकता है। 2022 में रूस के आक्रमण के बाद से हर सर्दी में ऐसे हमले होते रहे हैं।
प्रधानमंत्री के मुताबिक़, रातभर में यूक्रेन के 11 क्षेत्रों को निशाना बनाया गया। हमलों में रिहायशी इमारतों, सामाजिक ढांचे, नागरिक उद्योगों और रेलवे नेटवर्क को भी नुक़सान पहुंचा है।
एससीओ की इस्लामाबाद में चल रही बैठक में भारत हुआ शामिल
मंगलवार, 29 सितम्बर, 2026
भारत-पाकिस्तान के बीच जारी तनाव के बावजूद शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के राष्ट्रीय समन्वयकों की इस्लामाबाद में चल रही बैठक में भारत समेत संगठन के सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं।
भारत ने एससीओ के समन्वयकों की बैठक में हिस्सा लेने के लिए एक प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद भेजा है।
इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी आलोक डिमरी कर रहे है।
आलोक डिमरी विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव हैं। वह एससीओ के लिए भारत के समन्वयक भी हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच लगभग एक दशक से द्विपक्षीय वार्ता नहीं हुई है।
दोनों देशों के बीच आख़िरी बार दिसंबर 2015 में बातचीत हुई थी। उस समय भारत की तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज "व्यापक द्विपक्षीय वार्ता" प्रक्रिया को फिर से शुरू करने के अनुरोध के साथ इस्लामाबाद गई थीं।
हालांकि जनवरी 2016 में पठानकोट हमले के बाद यह प्रक्रिया फिर से ठप पड़ गई थी।
भारत सरकार का रुख़ रहा है कि पाकिस्तान के साथ बातचीत तभी संभव है जब "माहौल पूरी तरह चरमपंथ से मुक्त हो"।
हालांकि भारत एससीओ जैसे बहुपक्षीय मंचों पर पाकिस्तान के साथ भागीदारी के लिए तैयार है।
अगले साल एसईओ शिखर सम्मेलन की पाकिस्तान अध्यक्षता करेगा
यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब पाकिस्तान ने इसी महीने 2026-27 के लिए एससीओ की अध्यक्षता संभाली है। इसके साथ ही अगस्त 2027 में संगठन के राष्ट्राध्यक्षों के शिखर सम्मेलन की मेज़बानी भी इस्लामाबाद को करनी है।
28 सितंबर से शुरू हुई इस तीन दिवसीय बैठक का समापन 30 सितंबर को होना है। पाकिस्तान की अध्यक्षता के दौरान एससीओ की गतिविधियों के कार्यक्रम पर विचार किया जा रहा है। इसके अलावा आने वाली बैठकों, महत्वपूर्ण आयोजनों की तैयारियों और संगठन के एजेंडे से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी चर्चा हो रही है।
इस बैठक में भारत की भागीदारी इसलिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि यह दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में तनाव के माहौल के बीच हो रही है।
इस्लामाबाद में हो रही यह बैठक अगले साल होने वाले एससीओ शिखर सम्मेलन की तैयारियों की प्रक्रिया का शुरुआती चरण भी है।
पाकिस्तान ने कहा है कि अगस्त 2027 में होने वाले शिखर सम्मेलन में एससीओ के सभी सदस्य देशों के नेताओं को आमंत्रित किया जाएगा यानी यह निमंत्रण भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी जाएगा।
2026 में स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ की नाकेबंदी और मौजूदा तेल कीमतों के अनुमानों के वैश्विक आर्थिक असर का विश्लेषण
2026 में स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ की समुद्री नाकेबंदी ने एक ऐसी स्थिति पैदा कर दी है जिसे इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) "इतिहास की सबसे बड़ी वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा चुनौती" कहती है। 22 अप्रैल तक, वैश्विक अर्थव्यवस्था 14-दिनों के संघर्ष-विराम की समय-सीमा खत्म होने और इस्लामाबाद में बातचीत के अनिश्चित रूप से फिर से शुरू होने के बीच एक बड़े दांव वाले इंतज़ार के खेल में फंसी हुई है।
आर्थिक सुनामी: एक अभूतपूर्व आपूर्ति संकट
इस नाकेबंदी ने प्रभावी रूप से प्रतिदिन लगभग 21 मिलियन बैरल तेल—जो दुनिया की कुल आपूर्ति का लगभग 20% है—और बड़ी मात्रा में लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) को फंसा दिया है। पिछले संकटों के विपरीत, इस बार का संकट "ऊर्जा-गहन" विनिर्माण और खाद्य सुरक्षा, दोनों को एक साथ प्रभावित कर रहा है।
विनिर्माण में ठहराव: EU और UK में, रसायन और इस्पात निर्माताओं ने कीमतों में 30% तक की बढ़ोतरी (सरचार्ज) लागू कर दी है। विश्लेषकों ने उन क्षेत्रों में "स्थायी औद्योगीकरण-समाप्ति" (deindustrialization) की चेतावनी दी है जो कच्चे माल की बढ़ती लागत को वहन करने में असमर्थ हैं।
"किराना आपातकाल": गल्फ़ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) के देश, जो अपनी खाद्य आयात का 80% हिस्सा स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ के रास्ते मंगाते हैं, उन्होंने मार्च के मध्य में मुख्य खाद्य पदार्थों की कीमतों में 40–120% की भारी बढ़ोतरी देखी; जिसके चलते उन्हें बुनियादी सामानों की आपातकालीन हवाई आपूर्ति (airlifts) करनी पड़ी।
GDP और मुद्रास्फीति: विभिन्न मॉडलों के अनुसार, यदि यह नाकेबंदी लंबे समय तक जारी रहती है, तो अकेले पहले वर्ष में ही वैश्विक GDP में $2 ट्रिलियन की भारी गिरावट आ सकती है। 2026 के लिए मुद्रास्फीति के अनुमानों को जापान, दक्षिण कोरिया और EU जैसी प्रमुख ऊर्जा-आयात करने वाली अर्थव्यवस्थाओं में 8-15% तक बढ़ा दिया गया है।
तेल कीमतों के अनुमान: "इस्लामाबाद प्रीमियम"
बाज़ार में मौजूदा अस्थिरता का मुख्य कारण "इस्लामाबाद प्रीमियम" है—यानी कूटनीतिक प्रयासों की सफलता या विफलता की धारणा के आधार पर तेल की कीमतों में होने वाला उतार-चढ़ाव।
परिदृश्य अनुमानित ब्रेंट कीमत आर्थिक प्रभाव
संघर्ष-विराम का विस्तार US $85 – $95 अस्थायी स्थिरता; बाज़ार फिर भी तनावपूर्ण बने रहेंगे।
बातचीत की विफलता / नाकेबंदी का जारी रहना US $110 – $130 तेल के भंडार में 1.7 बिलियन बैरल तक की कमी; मंदी और भी गहरी होगी।
पूर्ण सैन्य टकराव US $200 – $300+ "मांग में भारी गिरावट" (Demand destruction) की शुरुआत; गैर-आवश्यक परिवहन व्यवस्था का पूरी तरह ठप हो जाना।
मौजूदा स्थिति: ब्रेंट क्रूड इस समय लगभग US $100.48 के आसपास है, जिसमें आज 2% की बढ़ोतरी हुई है। इसकी वजह वे रिपोर्टें हैं जिनमें कहा गया है कि ईरान ने मौजूदा संघर्ष-विराम के बावजूद दो जहाज़ों (MSC Francesca और Epaminodes) को रोक लिया है।
इस्लामाबाद में कूटनीतिक गतिरोध
बातचीत का दूसरा दौर मुख्य रूप से इसलिए नहीं हो पाएगा क्योंकि 13 अप्रैल, 2026 को राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा लगाई गई अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को तेहरान संघर्ष-विराम की भावना का उल्लंघन मानता है।
20 अप्रैल को IRNA की एक रिपोर्ट में कहा गया, "मौजूदा हालात में सार्थक बातचीत की कोई स्पष्ट संभावना नहीं दिख रही है," और उसने अमेरिका की किसी समझौते की बातों को "मीडिया का खेल" करार दिया।
दूसरे दौर की राह में रुकावटें
हालांकि अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance अमेरिकी टीम का नेतृत्व करने के लिए तैयार हैं, लेकिन ईरानी प्रतिनिधिमंडल अभी तक इस्लामाबाद नहीं पहुंचा है। मुख्य मुद्दे अभी भी बने हुए हैं:
संप्रभुता बनाम सुरक्षा: ईरान ठोस बातचीत शुरू होने से पहले नौसैनिक नाकेबंदी को तुरंत हटाने की मांग कर रहा है।
"एकीकृत प्रस्ताव": राष्ट्रपति ट्रंप ने आज आधी रात (22 अप्रैल, 2026) से संघर्ष-विराम को अनिश्चित काल के लिए बढ़ा दिया है, ताकि ईरान अपना "एकीकृत प्रस्ताव" पेश कर सके; लेकिन उन्होंने चेतावनी भी दी है कि जब तक कोई अंतिम समझौता नहीं हो जाता, तब तक नाकेबंदी जारी रहेगी।
"इस्लामाबाद II" वार्ता की विफलता से संभवतः तुरंत ही सैन्य कार्रवाई (kinetic operations) फिर से शुरू हो जाएगी, और बाज़ार "लंबे समय तक चलने वाले व्यवधान के परिदृश्य" के लिए तैयार हैं।
विस्मृति की कगार पर: इस्लामाबाद में बातचीत फिर से शुरू होने से पहले की नाज़ुक शांति
इस्लामाबाद — दुनिया की साँसें थमी हुई हैं, क्योंकि घड़ी बुधवार, 22 अप्रैल की आधी रात की ओर बढ़ रही है—वह समय जब 2026 के ईरान युद्ध में 14 दिनों का तनावपूर्ण युद्धविराम खत्म होने वाला है। जहाँ इस्लामाबाद की सड़कों पर शांति वार्ता के दूसरे दौर की उम्मीद में अर्धसैनिक बलों की गश्त लगी हुई है, वहीं कूटनीतिक माहौल में बारूद की गंध और आपसी अविश्वास घुला हुआ है।
यह संघर्ष, जिसमें संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल की संयुक्त सैन्य शक्ति इस्लामिक गणराज्य के खिलाफ खड़ी है, इस महीने की शुरुआत में एक गतिरोध पर पहुँच गया था। हालाँकि, अभी जो "शांति" दिख रही है, वह कागज़ जितनी पतली है। जैसे-जैसे दोनों पक्ष पाकिस्तान में बातचीत की मेज़ पर लौटने की तैयारी कर रहे हैं, दाँव क्षेत्रीय वर्चस्व से हटकर वैश्विक आर्थिक अस्तित्व पर आ गए हैं।
पहले दौर की विफलता
बातचीत का पहला दौर, जो 11-12 अप्रैल को इस्लामाबाद के सेरेना होटल में हुआ था, 21 घंटे की लंबी बातचीत के बाद एक कड़वे गतिरोध पर समाप्त हुआ। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी प्रतिनिधियों के नेतृत्व में हुए ये सत्र दो ऐसे मुद्दों पर टूट गए, जिन पर कोई समझौता संभव नहीं था:
होरमुज़ की दुविधा: अमेरिका ने वैश्विक तेल प्रवाह को बहाल करने के लिए होरमुज़ जलडमरूमध्य को बिना किसी शर्त के फिर से खोलने की मांग की। ईरान ने इसके जवाब में सभी प्राथमिक और माध्यमिक प्रतिबंधों को तुरंत हटाने की मांग रखी।
परमाणु 'रेडलाइन': वाशिंगटन ने समृद्ध यूरेनियम के भंडार को पूरी तरह से हटाने पर ज़ोर दिया। तेहरान ने "ऑपरेशन मिडनाइट हैमर" (ईरान की परमाणु सुविधाओं पर हाल ही में हुए अमेरिकी हमले) का हवाला देते हुए, यूरेनियम संवर्धन के अपने संप्रभु अधिकार के मुद्दे पर पीछे हटने से इनकार कर दिया।
इस विफलता के बाद, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरानी बंदरगाहों पर पूरी तरह से नौसैनिक नाकाबंदी लगा दी—एक ऐसा कदम जिसे तेहरान ने "पूर्ण युद्ध का कृत्य" करार दिया है।
हमलों की ज़द में एक नाज़ुक युद्धविराम
8 अप्रैल को आधिकारिक तौर पर शत्रुता समाप्त होने के बावजूद, यह "युद्धविराम" बिल्कुल भी शांत नहीं रहा है। ईरान ने इज़राइल पर "ऑपरेशन इटरनल डार्कनेस" के ज़रिए इस समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है—यह दक्षिणी लेबनान में हवाई हमलों की एक बड़ी श्रृंखला थी। इज़राइल का कहना है कि ये हमले हिज़्बुल्लाह के ठिकानों को निशाना बनाते हैं, जो ईरान-विशिष्ट समझौते के दायरे में नहीं आते।
ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर ग़ालिबफ़ ने कहा, "हम धमकियों के साये में बातचीत स्वीकार नहीं करते।" "अगर झड़पें फिर से शुरू होती हैं, तो ईरान युद्ध के मैदान में अपने नए दांव दिखाने के लिए तैयार है।"
दूसरे दौर की राह
आज, 21 अप्रैल तक, बातचीत फिर से शुरू होने की संभावना बेहद अनिश्चित बनी हुई है। जहाँ अमेरिकी अधिकारी "संभली हुई उम्मीद" जता रहे हैं, वहीं ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने अमेरिकी "बदनीयती" का हवाला देते हुए अभी तक इस्लामाबाद के लिए उड़ान नहीं भरी है।
14-दिन का सीज़फ़ायर शुरू
8 अप्रैल, 2026
पाकिस्तान की मध्यस्थता से, अमेरिका, इज़राइल और ईरान राजनयिक तनाव कम करने के लिए सीधे सैन्य हमले रोकने पर सहमत हुए।
इस्लामाबाद में पहली बातचीत नाकाम
12 अप्रैल, 2026
21 घंटे की बातचीत के बाद बातचीत टूट गई। जेडी वैंस बिना किसी समझौता ज्ञापन (MOU) के ही लौट गए।
नौसैनिक नाकाबंदी लागू
13 अप्रैल, 2026
राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के समुद्री व्यापार पर पूरी तरह से नाकाबंदी की घोषणा की, जिससे ब्रेंट क्रूड की कीमतें $95 प्रति बैरल से ऊपर पहुँच गईं।
सीज़फ़ायर खत्म होने की समय सीमा
22 अप्रैल, 2026
मौजूदा संघर्ष विराम आधी रात को खत्म हो जाएगा। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर कोई समझौता नहीं हुआ, तो इसके बाद "ढेर सारे बम" बरसेंगे।
आने वाले दिनों में क्या उम्मीद करें
अगर दूसरा दौर आगे बढ़ता है, तो मध्यस्थों—जिनका नेतृत्व पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ कर रहे हैं—से एक "दो-चरणों वाला ढाँचा" प्रस्तावित करने की उम्मीद है। इसमें होर्मुज़ जलडमरूमध्य को आंशिक रूप से फिर से खोलने और प्रतिबंधों में सीमित राहत के बदले 45 दिनों का बढ़ा हुआ सीज़फ़ायर शामिल होगा।
हालाँकि, एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध का साया मंडरा रहा है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) की "इतिहास के सबसे बड़े ऊर्जा संकट" की चेतावनी के साथ, इस्लामाबाद में प्रतिनिधि केवल तीन देशों के भविष्य पर ही बातचीत नहीं कर रहे हैं—बल्कि वे वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिरता पर भी बातचीत कर रहे हैं।
ईरान ने अमेरिका से युद्ध खत्म करने के लिए पाकिस्तान को भेजा शांति प्रस्ताव
मंगलवार, 7 अप्रैल, 2026
बीबीसी मॉनिटरिंग के मुआबिक, ईरान ने पाकिस्तान को एक शांति प्रस्ताव दिया है, जिसका मक़सद अमेरिका के साथ चल रहे युद्ध का 'हमेशा के लिए अंत' करना है। यह जानकारी सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए ने सोमवार को दी।
आईआरएनए ने बताया कि अमेरिका की ओर से आए प्रस्ताव पर ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने जवाब पहुंचाया है। ईरान की लीडरशिप ने क़रीब दो हफ़्तों तक गहन समीक्षा की, इसके बाद अपना जवाब भेजा है।
ईरान की ओर से जवाब तब भेजा गया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को मंगलवार तक की डेडलाइन दी है। ट्रंप ने धमकी दी है कि स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ नहीं खुला तो वो ईरान के पावर प्लांट्स और पुलों को निशाना बनाया जाएगा।
6 अप्रैल, 2026 को ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बग़ाई ने पुष्टि करते हुए बताया कि संदेशों का आदान-प्रदान मध्यस्थों के ज़रिए हुआ है। लेकिन उन्होंने कहा कि तेहरान ने अमेरिका की "15 बिंदुओं वाली योजना" को ठुकरा दिया है।
आईआरएनए ने बताया कि ईरान के दस पैराग्राफ़ वाले जवाब में युद्धविराम के विचार को "पिछले अनुभवों" का हवाला देते हुए ख़ारिज किया गया। इसके बजाय ईरान ने अपने शर्तों पर स्थायी समाधान की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।
एजेंसी के अनुसार, तेहरान के दस्तावेज़ में कई मांगें शामिल हैं- जैसे क्षेत्रीय संघर्षों का अंत, होर्मुज़ स्ट्रेट से सुरक्षित आवाजाही का समझौता, पुनर्निर्माण करना और प्रतिबंधों को हटाना।
एयरमैन को बचाने के अमेरिकी मिशन पर ईरान ने क्या कहा?
मंगलवार, 7 अप्रैल, 2026
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बग़ाई ने कहा है कि अमेरिका की इस्फ़हान में हुई कार्रवाई का मक़सद "ईरान से यूरेनियम चुराना" भी हो सकता है।
जबकि अमेरिका ने इस्फ़हान के दक्षिण में हुई कार्रवाई को अपने लापता एयरमैन को बचाने का मिशन बताया था। यह एयरमैन ईरानी आसमान में निशाना बने दूसरे एफ़-15 लड़ाकू विमान का क्रू मेंबर था।
सोमवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पेंटागन ने इस कार्रवाई को "अपनी जीत" बताया था। वहीं सोशल मीडिया पर कुछ लोग और जानकारों ने अंदेशा जताया कि इतनी बड़ी कार्रवाई का मक़सद इस्फ़हान से 200 किलोग्राम संवर्धित यूरेनियम ट्रांसफ़र करना था।
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता बग़ाई ने भी कहा कि इस्फ़हान के दक्षिण हुए अमेरिकी ऑपरेशन का मक़सद ईरान से 'यूरेनियम चुराना' हो सकता है और इस संभावना को अनदेखा नहीं किया जा सकता।
हालांकि, व्हाइट हाउस और अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इन क़यासों पर कोई जवाब नहीं दिया है।
दूसरी ओर, ईरान का कहना है कि अमेरिका को इस मिशन में काफ़ी नुक़सान का सामना करना पड़ा है।









