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चीन ने चांद के पृथ्वी से दिखाई नहीं देने वाले हिस्से पर अंतरिक्ष यान उतारा

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रविवार, 2 जून 2024

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नेतन्याहू युद्ध अपराधी हैं, इसराइल के पास 34,000 फ़लस्तीनियों को मारने का अधिकार नहीं: बर्नी सैंडर्स

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एक राष्ट्र के रूप में फ़लस्तीन के अस्तित्व के बिना इसराइल नहीं रह सकता है: सऊदी अरब

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इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस ने इसराइल को रफ़ाह में मिलिट्री ऑपरेशन रोकने आदेश दिया

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पाकिस्तान के बाद भारत ने किर्गिस्तान में रह रहे भारतीय स्टूडेंट्स के लिए हिदायत जारी की

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चीन ने चांद के पृथ्वी से दिखाई नहीं देने वाले हिस्से पर अंतरिक्ष यान उतारा

चीन ने चांद के पृथ्वी से दिखाई नहीं देने वाले हिस्से पर अंतरिक्ष यान उतारा

रविवार, 2 जून 2024

चीन का कहना है कि उसका चालक रहित अंतरिक्ष यान चांद के उस हिस्से पर उतरा है जो पृथ्वी से दिखाई नहीं देता है।

ये चांद का वो इलाक़ा है जहां अभी तक कोई नहीं गया है और किसी ने अभी तक यहां जाने की कोशिश भी नहीं की थी।

चाइना नेशनल स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (सीएनएसए) ने एक बयान में बताया है- चांग-ई-6 विमान बीजिंग के समयानुसार सुबह 06:23 बजे चांद के दक्षिणी ध्रुव के पास एटकेन बेसिन में उतरने में कामयाब रहा।

चीन ने ये अभियान 3 मई 2024 को रवाना किया था। इस अभियान का मक़सद चांद के इस हिस्से से चट्टान और मिट्टी इकट्ठा करके धरती पर लाना है।

ये अभियान चांद की सबसे प्राचीन चट्टानों को इकट्ठा कर सकता है। चांद के दक्षिणी ध्रुव पर विशाल क्रेटर है, जहां ये यान उतरा है।

इस अभियान के सामने कई मुश्किलें भी थीं। चांद के पार पहुंचने पर यान के साथ संपर्क करना मुश्किल हो जाता है।

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चीन ने चांद के पृथ्वी से दिखाई नहीं देने वाले हिस्से पर अंतरिक्ष यान उतारा

चीन ने चांद के पृथ्वी से दिखाई नहीं देने वाले हिस्से पर अंतरिक्ष यान उतारा

रविवार, 2 जून 2024

चीन का कहना है कि उसका चालक रहित अंतरिक्ष यान चांद के उस हिस्से पर उतरा है जो पृथ्वी से दिखाई नहीं देता है।

ये चांद का वो इलाक़ा है जहां अभी तक कोई नहीं गया है और किसी ने अभी तक यहां जाने की कोशिश भी नहीं की थी।

चाइना नेशनल स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (सीएनएसए) ने एक बयान में बताया है- चांग-ई-6 विमान बीजिंग के समयानुसार सुबह 06:23 बजे चांद के दक्षिणी ध्रुव के पास एटकेन बेसिन में उतरने में कामयाब रहा।

चीन ने ये अभियान 3 मई 2024 को रवाना किया था। इस अभियान का मक़सद चांद के इस हिस्से से चट्टान और मिट्टी इकट्ठा करके धरती पर लाना है।

ये अभियान चांद की सबसे प्राचीन चट्टानों को इकट्ठा कर सकता है। चांद के दक्षिणी ध्रुव पर विशाल क्रेटर है, जहां ये यान उतरा है।

इस अभियान के सामने कई मुश्किलें भी थीं। चांद के पार पहुंचने पर यान के साथ संपर्क करना मुश्किल हो जाता है।


नेतन्याहू युद्ध अपराधी हैं, इसराइल के पास 34,000 फ़लस्तीनियों को मारने का अधिकार नहीं: बर्नी सैंडर्स

नेतन्याहू युद्ध अपराधी हैं, इसराइल के पास 34,000 फ़लस्तीनियों को मारने का अधिकार नहीं: बर्नी सैंडर्स

रविवार, 2 जून 2024

अमेरिका के वरिष्ठ डेमोक्रेटिक नेता बर्नी सैंडर्स ने इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू को युद्ध अपराधी कहा है।

बर्नी सैंडर्स का कहना है कि नेतन्याहू को कांग्रेस के संयुक्त सत्र के लिए नहीं बुलाया जाना चाहिए था। बर्नी सैंडर्स ने कहा है कि वो कांग्रेस के संयुक्त सत्र में हिस्सा नहीं लेंगे।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बर्नी सैंडर्स ने एक थ्रेड पोस्ट किया है।  बर्नी सैंडर्स ने कहा, "नेतन्याहू युद्ध अपराधी हैं और उन्हें कांग्रेस के संयुक्त सत्र के लिए नहीं बुलाया जाना चाहिए था। मैं इस सत्र में हिस्सा नहीं ले रहा हूं।''

बर्नी सैंडर्स ने कहा, "इसराइल के पास हमास के हमले के ख़िलाफ़ खुद को सुरक्षित रखने का अधिकार है, लेकिन इस अधिकार से आपको फ़लस्तीनियों के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ने की अनुमति नहीं मिल जाती है।''

बर्नी सैंडर्स ने कहा, "इसराइल के पास 34,000 फ़लस्तीनियों को मारने का अधिकार नहीं है। आप 19,000 बच्चों को नहीं मार सकते हैं। आपके पास ग़ज़ा की स्वास्थ्य व्यवस्था को बर्बाद करने का अधिकार नहीं है। आप 400 से ज्यादा स्वास्थ्य कर्मियों को नहीं मार सकते हैं।''

बर्नी सैंडर्स ने कहा, "इसराइल ग़ज़ा में मानवीय मदद को नहीं रोक सकता है। यह अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है। इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट ने नेतन्याहू और हमास के नेता याह्या सिनवार के ख़िलाफ़ अरेस्ट वारंट जारी किया है। इन दोनों ने अंतरराष्ट्रीय कानून को तोड़ा है।''

अमेरिकी कांग्रेस ने नेतन्याहू को संयुक्त सत्र में हिस्सा लेने का न्योता दिया है।

हमास संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक़ सात अक्टूबर 2023 के बाद से इसराइल के हमलों से 36,000 से ज्यादा फ़लस्तीनियों की मौत हो चुकी है।

एक राष्ट्र के रूप में फ़लस्तीन के अस्तित्व के बिना इसराइल नहीं रह सकता है: सऊदी अरब

एक राष्ट्र के रूप में फ़लस्तीन के अस्तित्व के बिना इसराइल नहीं रह सकता है: सऊदी अरब

इसराइल को फ़लस्तीन का अस्तित्व स्वीकार करना होगा: सऊदी अरब

मंगलवार, 28 मई 2024

रफ़ाह के शरणार्थी कैंप पर इसराइल के जानलेवा हमले के बाद दुनिया के कई देशों से प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

सऊदी अरब ने कहा है कि इसराइल को फ़लस्तीन का अस्तित्व स्वीकार करना होगा। सऊदी अरब के विदेश मंत्री फ़ैसल बिन फरहान ने मंगलवार, 28 मई 2024 को कहा कि एक राष्ट्र के रूप में फ़लस्तीन के अस्तित्व के बिना इसराइल नहीं रह सकता है।

सऊदी अरब के इस बयान को काफ़ी अहम माना जा रहा है।

रफ़ाह में हमले के बाद कई देशों में सड़कों पर लोग उतर आए हैं और इसराइल के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

इस्लामिक देशों के संगठन ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इस्लामिक कोऑपरेशन यानी ओआईसी ने भी प्रतिक्रिया दी है।

इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस ने इसराइल को रफ़ाह में मिलिट्री ऑपरेशन रोकने आदेश दिया

इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस ने इसराइल को रफ़ाह में मिलिट्री ऑपरेशन रोकने आदेश दिया

शुक्रवार, 24 मई 2024

इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (आईसीजे) ने इसराइल को ग़ज़ा के रफ़ाह में चलाए जा रहे सैन्य अभियान को रोकने का आदेश दिया है।

आईसीजे ने दक्षिण अफ्रीका की याचिका पर यह फ़ैसला सुनाया।

आईसीजे ने कहा है कि इसराइल को रफ़ाह में चलाए जा रहे सैन्य अभियान को तुरंत रोक देना चाहिए, इससे फ़लस्तीनियों को खतरा है।

आईसीजे ने इसराइल को शुक्रवार, 24 मई 2024 के फैसले पर उठाए जाने वाले कदमों को लेकर एक महीने के अंदर रिपोर्ट देने के लिए कहा है।

आईसीजे के फैसले की मुख्ये बातें:

- रफ़ाह में सैन्य अभियान बंद होना चाहिए।
- मानवीय सहायता के लिए मिस्र के साथ लगने वाली रफ़ाह की सीमाओं को खोला जाना चाहिए।
- इन बातों पर जो कदम उठाए जाएं उनकी रिपोर्ट एक महीने के अंदर जमा होनी चाहिए।  

हाल के दिनों में इसराइल ने रफ़ाह में सैन्य अभियान को तेज किया है।

इसराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू हमास को मात देने के लिए रफ़ाह में चलाए जा रहे अभियान को जरूरी बता रहे हैं।

अमेरिका समेत कई मानवीय संगठन इस बात की आशंका जता चुके हैं कि इसराइल के रफ़ाह में चलाए जा रहे अभियान से हज़ारों फलस्तीनियों की जान को ख़तरा है।

फिलहाल रफ़ाह में 10 लाख से ज्यादा फलस्तीनियों ने शरण ले रखी है।

पाकिस्तान के बाद भारत ने किर्गिस्तान में रह रहे भारतीय स्टूडेंट्स के लिए हिदायत जारी की

पाकिस्तान के बाद भारत ने किर्गिस्तान में रह रहे भारतीय स्टूडेंट्स के लिए हिदायत जारी की

प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने किर्गिस्तान में पाकिस्तानी स्टूडेंट्स की सुरक्षा पर चिंता ज़ाहिर की

शनिवार, 18 मई 2024

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में पाकिस्तानी स्टूडेंट्स की सुरक्षा को लेकर चिंता ज़ाहिर की है।

शहबाज़ शरीफ़ ने एक्स पर पोस्ट किया, ''किर्गिस्तान के बिश्केक में पाकिस्तानी स्टूडेंट्स की सुरक्षा को लेकर मैं बेहद चिंतित हूं।''

''दूतावास को स्टूडेंट्स की हर तरीके़ से मदद करने का आदेश दिया गया है। मेरा ऑफ़िस दूतावास के संपर्क में बना हुआ है और लगातार स्थिति पर नज़र बनाकर रखी जा रही है।''

बिश्केक में स्टूडेंट्स हॉस्टल के बाहर हुई हिंसक घटनाओं के बाद किर्गिस्तान स्थित पाकिस्तान के दूतावास ने स्टूडेंट्स से बाहर नहीं निकलने के लिए कहा है।

पाकिस्तान के दूतावास ने एक्स पर पोस्ट किया है, ''हम पाकिस्तानी स्टूडेंट्स की सुरक्षा के लिए लगातार स्थानीय प्रशासन के संपर्क में बने हुए हैं।''

पाकिस्तान की तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी ने एक्स पर एक वीडियो पोस्ट किया।

इस वीडियो में ख़ुद को मेडिकल का स्टूडेंट बताने वाले नौजवान ने कहा, ''हम किर्गिस्तान में मेडिकल की पढ़ाई करने आए हैं। अरब लोगों और स्थानीय लोगों के बीच झगड़ा हुआ।''

''इस झगड़े की वजह से तीन स्टूडेंट्स की मौत हो गई है. चाक़ू और बंदूक़ का इस्तेमाल हो रहा है। बच्चे, महिलाएं और कोई भी यहां सुरक्षित नहीं है।  हम हॉस्टल के अंदर हैं और हमने अपने दरवाज़े बंद कर लिए हैं। कई स्टूडेंट्स घायल हुए हैं।''

भारत ने किर्गिस्तान में रह रहे भारतीय स्टूडेंट्स के लिए हिदायत जारी की

शनिवार, 18 मई 2024

किर्गिस्तान स्थित भारत के दूतावास ने भारतीय स्टूडेंट्स की सुरक्षा के मद्देनज़र हिदायत जारी की है।

भारतीय दूतावास ने स्टूडेंट्स को घरों से बाहर नहीं निकलने की हिदायत दी है।

किर्गिस्तान स्थित भारतीय दूतावास ने एक्स पर पोस्ट किया, ''हम अपने स्टूडेंट्स के साथ संपर्क में बने हुए हैं। फिलहाल स्थिति शांतिपूर्ण है। लेकिन हम स्टूडेंट्स को हॉस्टल के अंदर रहने की हिदायत दे रहे हैं।''

''किसी भी मामले पर दूतावास के साथ संपर्क किया जा सकता है। इस नंबर 0555710041 पर हम 24 घंटे उपलब्ध हैं।''

इराक़ की सेना ने बग़दाद के दक्षिणी हिस्से में एक ठिकाने पर बड़े विस्फोट का दावा किया

इराक़ की सेना ने बग़दाद के दक्षिणी हिस्से में एक ठिकाने पर बड़े विस्फोट का दावा किया

शनिवार, 20 अप्रैल 2024

इराक़ की सेना का कहना है कि बग़दाद के दक्षिणी हिस्से में एक ठिकाने पर हुए बड़े विस्फोट में ईरान समर्थक मिलिशिया के एक सदस्य की मौत हुई है और आठ अन्य लोग घायल हुए हैं।

इराक़ की सेना ने कहा है कि धमाके के वक्त या उससे पहले इस इलाके में कोई ड्रोन या लड़ाकू विमान नहीं देखा गया था। ईरान समर्थित गुट पॉपुलर मोबिलाइज़ेशन फ़ोर्सेज़ ने खुद कहा है कि ये विस्फोट एक हमले का नतीजा था।

ये विस्फोट ऐसे समय में हुआ है जब इसराइल और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। शुक्रवार, 19 अप्रैल 2024 को इसराइल ने ईरान के इस्फ़हान शहर पर हमला किया, जिसका अंदेशा पहले से था। इससे पहले शनिवार, 13 अप्रैल 2024 की रात को ईरान ने इसराइल पर 300 से अधिक ड्रोन और मिसाइलों से हमला किया था।

हालांकि, इसराइल ने दावा किया कि उसने अपने सहयोगियों अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और जॉर्डन की मदद से इस हमले को विफल कर दिया। एक अप्रैल 2024 को सीरिया के दमिश्क में ईरानी वाणिज्य दूतावास पर हमला हुआ था जिसमें उसके कई शीर्ष कमांडरों की मौत हुई थी।

इसराइल ने इस हमले पर कोई सीधी टिप्पणी नहीं की, लेकिन ईरान ने इसराइल को ही इस हमले का ज़िम्मेदार ठहराया। इसके जवाब में ही ईरान ने इसराइल पर हमला किया था।

ईरानी विदेश मंत्री ने चेतावनी दी है कि अगर इसराइल ने उसके हितों पर हमले किए तो उनका देश त्वरित और ज़्यादा से ज़्यादा प्रतिक्रिया देगा।

ये कहना गलत है कि भारत में साल 2014 से पहले कुछ नहीं हुआ: अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज़

ये कहना गलत है कि भारत में साल 2014 से पहले कुछ नहीं हुआ: अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज़

शनिवार, 20 अप्रैल 2024

मशहूर अर्थशास्त्री और सामाजिक कार्यकर्ता ज्यां द्रेज़ का मानना है कि भारत की अर्थव्यवस्था का वर्तमान स्वरूप आने वाले पांच साल में भारत को अधिक बुरी हालत में डालने वाला है।

ज्यां द्रेज़ ने कहा कि इससे सामाजिक असमानता बड़े स्तर पर बढ़ेगी। इससे भारत का आम नागरिक परेशान होगा। क्योंकि, भारत की मौजूदा नरेंद्र मोदी सरकार के कार्यकाल में पिछले 10 साल में लोगों की वास्तविक मज़दूरी में कोई वृद्धि नहीं हुई है।

ज्यां द्रेज़ ने कहा कि सरकार के आंकड़े ही अर्थव्यवस्था की कमियां उजागर कर रहे हैं। हमें इस पर चिंता करने की ज़रूरत है।

ज्यां द्रेज और आईआईटी दिल्ली में अर्थशास्त्र की प्रोफ़ेसर रितिका खेड़ा ने रांची प्रेस क्लब में आयोजित एक प्रेस वार्ता में आंकड़ों के साथ अर्थव्यवस्था से जुड़े तथ्य बताए।

इस कॉन्फ़्रेंस का आयोजन लोकतंत्र बचाओ मोर्चा ने किया था। इस दौरान भारत की आज़ादी के बाद साल 1951 से भारत की अर्थव्यवस्था और सामाजिक स्थिति में हुए ग्रोथ और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के कार्यकाल के दौरान साल 2014 के दौरान हुए विकास की भी तुलना की गई।

मोदी सरकार से पहले भारत कहां खड़ा था?

ज्यां द्रेज ने कहा, "यह कहा जाना गलत है कि भारत में साल 2014 से पहले कुछ हुआ ही नहीं। भारत के लोगों की प्रति व्यक्ति आय (कांस्टेंट प्राइस) 1951 में सिर्फ़ 100 थी, जो साल 2011 में 511 हो गई। लाइफ एक्सपेक्टेंसी 1951 में सिर्फ़ 32 साल थी, जो साल 2011 तक 66 साल हो चुकी थी।''

"इसी अवधि में महिलाओं की साक्षरता दर नौ फ़ीसदी से बढ़कर 65 फ़ीसदी और पुरूषों की 27 फ़ीसदी से बढ़कर 82 फ़ीसदी हो गई। नवजात शिशुओं के मृत्यु दर पर ज़बरदस्त तरीक़े से काबू पाया गया। 1951 में जहां प्रति 1000 नवजात बच्चों में से 180 की मौत हो जाती थी, वह संख्या साल 2011 में घटकर 44 पर आ गई। यह मोदी सरकार के पहले की उपलब्धियां हैं।''

मोदी सरकार में इकोनॉमी नीचे गई: ज्यां द्रेज

ज्यां द्रेज ने कहा, "यूपीए सरकार में ग्रॉस नेशनल इनकम (कांस्टेंट प्राइस) 6.8 फ़ीसदी था, जो बीजेपी की मौजूदा मोदी सरकार में घटकर 5.5 फ़ीसदी पर आ गया। रियल कंजप्शन 5 फ़ीसदी से घटकर 3 फ़ीसदी पर आया। कृषि मज़दूरों की वार्षिक वृद्धि दर साल 2004-05 और 2014-15 के बीच 6.8 प्रतिशत थी। वह साल 2014-15 से 2021-22 के दौरान घटकर माइनस 1.3 प्रतिशत हो गई।''

नहीं हुई जनगणना, नहीं मिला लाभ

ज्यां द्रेज और रितिका खेड़ा ने कहा कि भारत सरकार ने साल 2021 में जनगणना ही नहीं कराई। आज़ादी के बाद ऐसा पहली दफ़ा हुआ, जब जनगणना ही नहीं हुई। इस कारण अकेले भारत के राज्य झारखंड में 44 लाख योग्य लोग जन वितरण प्रणाली की सुविधाओं से वंचित हैं। पूरे भारत में ऐसे वंचित लोगों की संख्या 100 मिलियन से भी अधिक है।

योजनाओं के नाम बदले, इससे कई दिक़्क़तें: रितिका खेड़ा

अर्थशास्त्री रितिका खेड़ा ने कहा, "मोदी सरकार में कई पुरानी योजनाओं के नाम बदल दिए गए। इन्होंने न केवल यूपीए सरकार के समय से चल रही योजनाओं के नाम बदले, बल्कि अपनी सरकार की योजनाओं की भी री-ब्रैंडिंग की। मसलन, आयुष्मान योजना के तहत चलने वाले वेलनेस सेंटर का नाम अब आयुष्मान आरोग्य मंदिर कर दिया गया। केरल सरकार ने मलयाली भाषा भाषियों के लिए इसका पुराना नाम ही रखने की अपील की, तो सरकार इस पर सहमत नहीं हुई। इससे केरल के लोगों को इसका लाभ ही नहीं मिल पा रहा है।''

अर्थव्यवस्था कहां है?

रितिका खेड़ा ने कहा, "भारत सरकार में शामिल नेता गर्व से कहते हैं कि जीडीपी के मामले में भारत दुनिया में तीसरे नंबर पर आ गया है। लेकिन, प्रति व्यक्ति आय के नज़रिये से भारत का रैंक दुनिया के 170 देशों में 120 वें नंबर पर है। यह कैसी ग्रोथ है। इस पर सवाल तो उठने ही चाहिए।''