अखिलेश यादव और मायावती एक साथ रैली करेंगे
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के भोज में शामिल होने के बाद बहुजन समाजवादी पार्टी सुप्रीमो मायावती और समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव पहली बार एक साथ उत्तर प्रदेश में रैली कर सकते हैं।
टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक, इस संयुक्त रैली का आइडिया शुक्रवार को लंच समारोह के दौरान उस वक्त आया था, जब आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने अखिलेश और मायावती से एक साथ आने का अनुरोध किया था।
सपा के सांसद नरेश अग्रवाल ने पुष्टि करते हुए कहा कि इस समारोह में संयुक्त रैलियां करने का प्रस्ताव सामने आया था और सभी बीजेपी विरोधी पार्टियों ने इसका समर्थन किया। उन्होंने टीओआई से कहा कि वक्त की मांग है कि पूरा विपक्ष संयुक्त रूप से बीजेपी के खिलाफ खड़ा हो। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति चुनाव के बाद लालू प्रसाद यादव पटना में 27 अगस्त को एक विशाल रैली का आयोजन करेंगे।
हालांकि वरिष्ठ बसपा नेताओं से इस बारे में संपर्क नहीं हो पाया। लेकिन बैठक में मौजूद रहे सूत्रों ने बताया कि मायावती ने भी इसका समर्थन किया है। सूत्र ने मायावती के हवाले से कहा, मैं 100 प्रतिशत आपके साथ हूँ।
मायावती और अखिलेश की संयुक्त रैली 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले बीजेपी विरोधी फ्रंट को एक रूप दे सकती है।
मार्च 2017 में घोषित हुए यूपी विधानसभा चुनावों में मायावती और अखिलेश को बीजेपी से करारी हार का सामना करना पड़ा था जिसके बाद से उनके साथ आने के कयास लगाए जा रहे थे।
लालू और टीएमसी अध्यक्ष ममता बनर्जी ने भी मायावती और अखिलेश यादव से 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान साथ आने को कहा है।
शुक्रवार को लालू ने उत्तर प्रदेश के संदर्भ में एकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अगर सपा, बसपा और कांग्रेस साथ आ जाएं तो लोकसभा में 70 सीटें जीत सकती हैं।
बता दें कि साल 1993 के बाद कभी बसपा और सपा साथ नहीं आईं। इससे पहले उन्होंने साथ में विधानसभा चुनाव लड़ा था जिसमें उन्हें जीत मिली थी। लेकिन दोनों के बीच कड़वाहट साल 1995 में उस वक्त बढ़ गई जब लखनऊ के एक गेस्ट हाउस में ठहरीं मायावती पर गुंडों ने हमला कर दिया था। उस वक्त उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव थे।
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