चारा घोटाला फैसला: लालू यादव को साढ़े तीन साल कैद की सजा, 5 लाख का जुर्माना
चारा घोटाले से जुड़े एक मामले में रांची की विशेष सीबीआई अदालत ने आज (6 जनवरी) लालू प्रसाद यादव को साढ़े तीन साल की सजा और 5 लाख का जुर्माना लगाया है। देवघर ट्रेजरी मामले में फैसला वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनाई गई है। अब लालू यादव को इस अदालत से जमानत नहीं मिल सकेगी। उन्हें जमानत के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाना होगा। अगर लालू प्रसाद यादव 5 लाख रुपये का जुर्माना नहीं चुकाते है तो उन्हें 6 महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
इस मामले में कुल 16 लोगों को दोषी ठहराया गया था। लालू के अलावा फूल चंद, महेश प्रसाद, जुलियस, सुनील कुमार, सुशील कुमार, सुधीर कुमार और राजाराम को भी 3.5 साल कैद व 5 लाख रुपये की सजा दी गई है।
वर्ष 1990 से 1994 के बीच देवघर कोषागार से 89 लाख, 27 हजार रुपये की फर्जीवाड़ा कर अवैध ढंग से पशु चारे के नाम पर निकासी के इस मामले में कुल 38 लोग आरोपी थे, जिनके खिलाफ सीबीआई ने 27 अक्तूबर 1997 को मुकदमा दर्ज किया था और लगभग 21 साल बाद इस मामले में गत 23 दिसंबर को फैसला आया।
सीबीआई की विशेष अदालत ने चारा घोटाले के इस मामले में 23 दिसंबर को लालू प्रसाद समेत तीन नेताओं, तीन आईएएस अधिकारियों के अलावा पशुपालन विभाग के तत्कालीन अधिकारी कृष्ण कुमार प्रसाद, पशु चिकित्साधिकारी सुबीर भट्टाचार्य तथा आठ चारा आपूर्तिकर्ताओं सुशील कुमार झा, सुनील कुमार सिन्हा, राजाराम जोशी, गोपीनाथ दास, संजय कुमार अग्रवाल, ज्योति कुमार झा, सुनील गांधी तथा त्रिपुरारी मोहन प्रसाद को अदालत ने दोषी करार देकर जेल भेज दिया था।
इस केस में दोषियों को रांची की अदालत से जमानत नहीं मिलेगी। उन्हें जमानत के लिए हाई कोर्ट का रुख करना होगा।
जेडीयू नेता केसी त्यागी ने कहा कि हम न्यायालय के इस फैसले का स्वागत करते हैं। यह बिहार की राजनीति के लिए एेतिहासिक फैसला है। यह एक अध्याय का अंत है।
कोर्ट के इस फैसले पर लालू यादव के बेटे तेजस्वी यादव ने कहा कि न्यायपालिका ने अपना काम किया है। हम कोर्ट के फैसले की कॉपी आने के बाद हाई कोर्ट जाकर बेल के लिए अप्लाई करेंगे।
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