गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपचुनाव: बहुजन समाज पार्टी ने समाजवादी पार्टी को समर्थन देने का ऐलान किया
उत्तर प्रदेश में लगभग 25 साल बाद एक नया राजनीतिक समीकरण आकार ले रहा है। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपचुनाव के लिए अखिलेश और मायावती एक साथ हो गये हैं। रविवार (4 मार्च) को गोरखपुर में बहुजन समाज पार्टी ने समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार को समर्थन देने का ऐलान किया।
बी एस पी नेता घनश्याम खरवार ने गोरखपुर में कहा, ''बहन जी के निर्देश पर देश और प्रदेश को खत्म करने वाली ताकतों को खत्म करने के लिए गोरखपुर के उपचुनाव में पिछड़े के बेटे प्रवीण निषाद और समाजवादी पार्टी को समर्थन देने का ऐलान किया है।''
बी एस पी के इलाहाबाद के जोनल कॉर्डिनेटर अशोक गौतम ने कहा कि बी एस पी बीजेपी का सफाया करना चाहती है इसलिए उनकी पार्टी ने एस पी को समर्थन देने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा, ''हमारे कार्यकर्ता बीजेपी को खत्म करना चाहते हैं इसलिए बहुजन समाज पार्टी के कार्यकर्ताओं ने फूलपुर में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार नगेन्द्र सिंह पटेल को वोट और सपोर्ट करने का फैसला किया है।
बता दें कि 11 मार्च को गोरखपुर और फूलपुर उपचुनाव के लिए वोटिंग है। इसके नतीजे 14 मार्च को आएंगे। योगी आदित्यनाथ के सीएम और केशव मोर्या के डिप्टी सीएम बनने से ये सीटें खाली हुईं थी। बीजेपी इस सीट को फिर से हर हाल में जीतना चाहती है, दरअसल इन सीटों के उपचुनाव योगी सरकार की लोकप्रियता का पैमाना भी साबित होंगे।
इससे पहले 1993 में उत्तर प्रदेश की सत्ता में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच ऐतिहासिक गठबंधन हुआ था और मुलायम सिंह ने सत्ता संभाली थी। हालांकि ये सरकार मात्र डेढ़ साल चली थी। मायावती ने 2 जून 1995 को इस सरकार से समर्थन वापस ले लिया और अल्पमत में आकर मुलायम सिंह की सरकार गिर गई।
उस समय उत्तर प्रदेश का बहुचर्चित गेस्ट हाउस कांड काफी सुर्खियों में रहा था। दरअसल मायावती द्वारा समर्थन वापसी के बाद मुलायम सरकार को बचाने के लिए जोड़-तोड़ किये जाने लगे। इसी कड़ी में एस पी के कुछ नेता और विधायक लखनऊ के मीराबाई मार्ग स्थित स्टेट गेस्ट हाउस पहुंच गए, यहां पर मायावती कमरा नंबर - 1 में ठहरी हुई थी। यहां पर बी एस पी सुप्रीमो के साथ कुछ नेताओं ने बदसलूकी की और उनके साथ मारपीट की।
गोरखपुर उपचुनाव के लिए समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच दोस्ती की खबरें काफी समय से आ रहीं थी, लेकिन तीन मार्च को त्रिपुरा में बीजेपी की प्रचंड जीत ने इस दोस्ती को पक्का कर दिया।
