कश्मीर मुद्दे को सुलझाने के लिए भारत को अमेरिका और चीन की मदद लेनी चाहिए: फारूक अब्‍दुल्‍ला

जम्मू-कश्मीर के हालात दिन प्रतिदिन बिगड़ते जा रहे हैं। इसे लेकर आए दिन विपक्ष केंद्र और राज्य सरकार पर हमला बोलते हुए कहता है कि न तो केंद्र सरकार इसके लिए कुछ कर पा रही है और न ही बीजेपी गठबंधन वाली राज्य की पीडीपी सरकार।

कश्मीर घाटी में बढ़ते तनाव को लेकर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अबदुल्ला ने शुक्रवार (21 जुलाई) को एएनआई से कहा कि कश्मीर मुद्दे को सुलझाने के लिए भारत को अमेरिका और चीन की मदद लेनी चाहिए।

अबदुल्ला ने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कह चुके हैं कि वे कश्मीर मुद्दे को खत्म कराना चाहते हैं और साथ ही चीन भी कह चुका है कि वह इस मुद्दे को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता करने के लिए तैयार है।

इसके बाद फारूक अबदुल्ला  ने कहा कि जब दोनों देश आगे बढ़कर कश्मीर मुद्दे को सुलझाना चाह रहे हैं तो इस मसले को हल करने के लिए दोस्तों को इस्तेमाल करना चाहिए। सरकार को उनसे बातचीत करनी चाहिए।

इसके बाद अबदुल्ला ने कहा कि एटम बम भारत के पास भी है और पाकिस्तान के पास भी, लेकिन युद्ध से हल नहीं निकाला जा सकता। केवल बातचीत करके इस मामले को सुलझाया जा सकता है। इससे पहले अपने एक बयान में अबदुल्ला ने कहा था कि कश्मीरी युवा अपना जीवन कश्मीर मुद्दों के लिए कुर्बान कर रहे हैं, न कि पर्यटन के लिए।

देश विरोधी नारों से न तो देश टूटा है और न ही टूटेगा। यह बात उन्होंने उत्तर प्रदेश के मेरठ में आयोजित एक कार्यक्रम में कही थी। उन्होंने कहा था कि कश्मीर में इस तरह के नारे लगाए जाना आम बात है।

हाल ही में जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा था कि कश्मीर मुद्दे के  लिए चीन जिम्मेदार है। दिल्ली में गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात के बाद महबूबा ने कहा, ''कश्मीर में समस्या कानून व्यवस्था की नहीं है। बाहरी ताकतों का माहौल बिगाड़ने में हाथ है। विदेशी ताकतों द्वारा घुसपैठ की लड़ाई है और अब तो चीन भी इसमें हाथ डाल रहा है।''

इस पर बात करते हुए फारूक अबदुल्ला ने कहा था कि मुझे नहीं पता कि चीन कश्मीर में दखल दे रहा है या नहीं। उनको ज्यादा जानकारी होगी क्योंकि वह मुख्यमंत्री हैं। मेरा मानना है कि चीन से लड़ाई लेना अच्छा नहीं होगा। हम लोगों को बातचीत से मामले को हल करना चाहिए।