जज लोया केस: कांग्रेस का आरोप - फैसले की कॉपी रविशंकर प्रसाद के पास पहले ही पहुंच गई

जज लोया के मौत के केस में सुप्रीम कोर्ट ने एस आई टी जांच कराने की इजाजत देने से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद प्रतिक्रियाओं की भरमार आ गई है।

कांग्रेस पार्टी ने अदालत के फैसले पर नाखुशी जताई है तो भाजपा ने कांग्रेस को घेरना शुरू कर दिया है। बीजेपी नेता और केंद्रीय कानून मंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि कांग्रेस को राजनीतिक लड़ाई लड़ने के लिए अदालती गलियारों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

अब कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाल ने भारत के कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद पर बड़ा गंभीर आरोप लगाया है।

रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट कर सवाल उठाया है कि सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट की कॉपी कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद के पास कैसे आई? जबकि इसकी कॉपी अभी तक ना तो प्रेस को मिली है और ना ही वकीलों को, और सुप्रीम कोर्ट का वेबसाइट हैक भी है।

इससे पहले जस्टिस बी एच लोया की मौत की जांच एस आई टी से कराने से संबंधित एक याचिका की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकीलों को फटकार लगाई।

अदालत ने जस्टिस लोया की मौत की जांच एस आई टी से कराए जाने की मांग खारिज कर दी और कहा कि देखने में आ रहा है कि व्यापार और राजनीतिक हित साधने के लिए सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिकाएं दाखिल की जा रही हैं और ऐसी याचिकाओं से अदालत का काफी समय बर्बाद हो रहा है। कोर्ट ने इस केस के याचिकाकर्ता दुष्यंत दवे, इंदिरा जयसिंह और प्रशांत भूषण को फटकार लगाते हुए कहा कि आप लोगों ने इस केस के बहाने न्यायपालिका पर सीधा हमला करना शुरू कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद वरिष्ठ वकील और याचिकाकर्ता प्रशांत भूषण ने इसे सुप्रीम कोर्ट के लिए काला दिन करार दिया। उन्होंने कहा कि जस्टिस लोया के मौत की स्वतंत्र जांच कराई जा सकती थी। इधर जैसे ही इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का बहुप्रतीक्षित फैसला आया, उसके कुछ ही समय बाद सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट के हैक होने की खबर भी मीडिया में चलने लगीं। इस हैकिंग में ब्राजील के हैकर्स की संलिप्ता का अंदेशा जताया गया है।

लेकिन सवाल उठता है कि जज लोया की मौत से संबंधित फैसला आने के बाद ब्राजील के हैकर्स भारत के सुप्रीम कोर्ट का वेबसाइट हैक क्यों करेंगे, इससे उनके किस प्रकार के हित की पूर्ति होगी! जो लोग ब्राजील के हैकर्स की संलिप्ता का अंदेशा जता रहे हैं, उनको हवा में बात करने के बजाय सबूत पेश करनी चाहिए।

बता दें कि हाल में भारत के गृह मंत्रालय की वेबसाइट भी हैक हुई थी।