केरल लव जिहाद: सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाईकोर्ट का फैसला रद्द किया, हादिया की शादी को वैध बताया

भारत में केरल के बहुचर्चित कथित लव जिहाद केस में सुप्रीम कोर्ट ने हादिया के प्रेम विवाह पर मुहर लगा दी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हादिया को अपनी पसंद से जीवन जीने की आजादी है। वह जिंदगी से जुड़े कानून सम्मत फैसले ले सकती है।

इससे पहले केरल हाईकोर्ट ने हादिया और शफीन की शादी को रद्द कर दिया था। इस प्रकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दोनों पति-पत्नी की तरह रह सकेंगे। मई 2017 में केरल हाईकोर्ट ने हादिया की शफीन जहां के साथ शादी को रद्द करते हुए हादिया को मां-बाप के सुपुर्द कर दिया था। इस पर शफीन जहां ने हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

खास बात है कि केरल में बढ़ते लव जिहाद की शिकायतों पर इस केस की जांच एन आई ए भी कर रही थी। गुरुवार ( आठ मार्च) को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए कहा कि केरल हाईकोर्ट को शादी को रद्द नहीं करना चाहिए। हादिया को अपने ढंग से जीवन जीने और सपने पूरे करने की आजादी है।

एन आई ए की जांच पर टिप्पणी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब दो वयस्क अपनी इच्छा से शादी करते हैं तो उसकी जांच कैसे हो सकती है? हां, अगर सरकार को लगता है कि शादी के बाद दंपती में से कोई गलत इरादे से विदेश भागने की कोशिश कर रहा है तो सरकार उसके खिलाफ एक्शन ले सकती है।

हादिया के पति शफीन की तरफ से कांग्रेस नेता और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने बहस की। सिब्बल ने कहा कि अपनी पसंद का जीवनसाथी चुनना हर किसी का मौलिक अधिकार है। हाईकोर्ट के पास यह अधिकार नहीं है कि वह किसी की याचिका पर ही किसी की शादी को रद्द कर दे। हर किसी को सम्मान और स्वतंत्रता के साथ जीने का भारतीय संविधान हक देता है। सिब्बल ने दलील दी कि जब तक दंपती में कोई किसी के खिलाफ शिकायत न दर्ज कराए, तब तक तीसरे को उनकी शादी पर सवाल उठाने का हक नही है।