राष्ट्रपति चुनाव: राम नाथ कोविंद के खिलाफ संयुक्त उम्मीदवार उतार सकता है विपक्ष

भारतीय जनता पार्टी ने सोमवार को बिहार के राज्यपाल राम नाथ कोविंद को एनडीए का राष्ट्रपति उम्मीदवार घोषित कर दिया। हालांकि विपक्ष कोविंद के नाम पर समर्थन के मूड में नजर नहीं आ रहा है।

कहा जा रहा है कि एनडीए के उम्मीदवार के खिलाफ विपक्ष अपना कैंडिडेट खड़ा करेगा और इसकी तलाश भी शुरू कर दी गई है। कयास लग रहे हैं कि कोविंद के खिलाफ विपक्ष किसी दलित चेहरे को ही उम्मीदवार बनाएगा।

मायावती की पार्टी बहुजन समाज पार्टी और ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस अपने अगले कदम को लेकर संशय में है। वहीं, लेफ्ट पार्टियों के अंदर चर्चा है कि कोविंद के खिलाफ विपक्ष एक ज्वाइंट उम्मीदवार खड़ा कर सकता है।

इंडिया टुडे ने अपने सूत्रों के हवाले से बताया, ''कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष में राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के तौर पर चार लोगों का नाम शॉर्टलिस्ट किया गया है। जिन नामों की चर्चा है, उनमें सबसे आगे लोकसभा की पूर्व स्पीकर मीरा कुमार, पूर्व गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे, प्रकाश यशवंत आंबेडकर और पूर्व नौकशाह गोपाल कृष्ण गांधी है।

प्रकाश यशवंत आंबेडकर, संविधान निर्माता डॉक्टर भीमराव आंबेडकर के पौत्र और यशवंत भीमराव अम्बेडकर के पुत्र हैं।

वहीं, गोपाल कृष्ण गांधी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के पोते हैं और रिटायर्ड आईएएस हैं। गांधी 2004 से 2009 तक पश्चिम बंगाल के राज्यपाल भी रह चुके हैं। उम्मीद की जा रही है कि विपक्ष 22 जून को बैठक करेगा और उसके बाद उम्मीदवार का ऐलान करेगा।

टीवी रिपोर्ट्स के मुताबिक, राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के लिए भारत के जाने-माने कृषि वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन का नाम भी सामने आ रहा है। कहा जा रहा है कि स्वामीनाथन के नाम पर भी कांग्रेस विचार कर रही है। इसे एनडीए में फूट डालने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है। एनडीए में बीजेपी की सहयोगी पार्टी शिवसेना पहले भी स्वामीनाथन के नाम को आगे बढ़ा चुकी है। ऐसे में कांग्रेस को उम्मीद है कि अगर स्वामीनाथन का नाम राष्ट्रपति के लिए आगे आता है तो शिवसेना उसका समर्थन कर सकती है।

शिवसेना ने कोविंद को राष्ट्रपति उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद सवाल उठाए थे। पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि अगर सिर्फ दलित वोटों के लिए कोविंद को चुना गया है तो वह एनडीए उम्मीदवार का समर्थन नहीं करेगी। इससे देश को कोई लाभ नहीं होगा। शिवसेना ने कभी किसी को ढाल बनाकर राजनीति नहीं की।