भारत में केंद्रीय विद्यालयों में प्रार्थना के जरिए हिंदुत्व को बढ़ावा, सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार को नोटिस दिया
भारत में केंद्रीय विद्यालयों में प्रार्थना के जरिए खास धर्म को बढ़ावा देने की जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। बुधवार को जारी इस नोटिस के बाद अब सरकार को सुप्रीम कोर्ट में चार हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करना होगा।
सुप्रीम कोर्ट की इस पहल के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ गई। कहा जा रहा है कि प्रार्थना कोई नई बात नहीं है, बहुत पहले से होती चली आ रही है। इस पर विवाद बेवजह है। हालांकि याचिका दायर करने वाले वकील विनायक शाह का कहना है कि सरकारी विद्यालयों में ऐसी प्रार्थना नहीं होनी चाहिए, जिससे किसी विशेष धर्म (हिंदुत्व) को बढ़ावा मिलता हो।
याची ने आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट से कहा, ''केंद्रीय विद्यालयों में हिंदुत्व का प्रोपोगंडा किया जा रहा, चूंकि स्कूल सरकारी हैं, इस नाते इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती।'' वकील ने दावे के समर्थन में कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 25 और 28 के तहत सरकारी वित्तपोषित स्कूलों में धर्म विशेष को बढ़ावा देने वाला कोई आयोजन नहीं हो सकता।
जनहित याचिका को गंभीरता से लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब माँगा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह संवैधानिक मामला है। इस पर सुप्रीम कोर्ट विचार करेगा कि क्या देश के सभी केंद्रीय विद्यालयों में हकीकत में हिंदी की प्रार्थना धर्म विशेष को बढ़ावा दे रही है। क्या हिंदी की संबंधित प्रार्थना संविधान के मूल्यों के खिलाफ है?
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