रामपाल दो केसों में बरी; देशद्रोह और हत्या का केस चलता रहेगा; जेल में ही रहेगा
रामपाल को दो केसों में बरी कर दिया गया है। रामपाल पर दो क्रिमिनल केस थे। पहले केस लोगों को बंधक बनाने का था। दूसरा केस पुलिस पर हमला करने का था।
लेकिन देशद्रोह और हत्या का मुकदमा उस पर चलता रहेगा। सतलोक आश्रम में जब रामपाल को पुलिस पकड़ने आई थी तब वहां पुलिस पर हमला हुआ था। उसके बाद जिन लोगों को बाहर निकाला गया था। उन्होंने रामपाल पर बंधक बनाने का आरोप लगाया था।
विवाद 2006 में शुरू हुआ था। जब रामपाल ने सत्यार्थ प्रकाश (आर्य समाज की किताब) के कुछ हिस्से पर आपत्ति जताई थी। इसकी वजह से रामपाल और आर्य समाज को मानने वाले कुछ लोगों में झड़प हो गई।
आर्य समाज के लोगों ने रोहतक में मौजूद रामपाल के आश्रम को बंद करने की कोशिश की। फिर कथित रूप से रामपाल के समर्थकों ने गोलियां चला दी। जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई और 160 जख्मी हो गए। रामपाल पर इस पूरे मामले की साजिश रचने का आरोप है।
राम रहीम के मामले में तो उसके दोषी घोषित होने के बाद हिंसा हुई, लेकिन रामपाल को तो पकड़ना भी पुलिस के लिए आसान नहीं था।
बात 2014 की है। हत्या मामले में रामपाल को 43 बार कोर्ट में हाजिर होने के लिए कहा जा चुका था, लेकिन वह नहीं आया। इसके बाद उसे गिरफ्तार करने के लिए पुलिस हिसार के बरवाला वाले आश्रम पहुंची थी। वह जगह चंडीगढ़ से 200 किलोमीटर दूर है। वहां बाबा के 15,000 समर्थक मौजूद थे जिन्होंने पुलिस पर हमला कर दिया। पुलिस अंदर नहीं जा पा रही थी।
लगभग दो हफ्ते तक बड़े से गेट से बंद आश्रम के पीछे लोग छिपे रहे। फिर पुलिस ने वहां बिजली और पानी की सप्लाई काट दी। उसके बाद जब खाना खत्म होने लगा तब लोग धीरे-धीरे बाहर आने लगे।
कई लोगों का तो कहना था कि उनको अंदर कैद कर लिया गया था और मानव ढाल की तरह इस्तेमाल किया गया था। पूरी घटना में 200 लोग जख्मी हुए थे। छह लोग मारे गए थे। जिसमें पांच महिलाएं और एक बच्चा भी शामिल था। रामपाल के समर्थकों ने अंदर से पुलिस पर गोलियां, पत्थर सब चलाए थे। पेट्रोल बम और एसिड बम भी फेंके गए थे।
रामपाल फिलहाल जेल में है। उसे 2014 में गिरफ्तार किया गया था। 67 साल के रामपाल पर मर्डर का भी एक केस है। खट्टर सरकार आने के बाद पहली बार राज्य में ऐसी घटना हुई थी। इस पर बीजेपी की काफी किरकिरी हुई थी।
फिलहाल रामपाल जेल में ही रहेगा क्योंकि उस पर बाकी केस अभी चल रहे हैं। रामपाल पर फैसला आने के बाद उसके वकील ने इसे सच्चाई की जीत बताया।
