शंकर सिंह वाघेला को पार्टी से निकाला नहीं गया था: कांग्रेस
गुजरात कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शंकर सिंह वाघेला ने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा देने का ऐलान किया। उससे पहले वाघेला ने कहा कि उनको पार्टी ने 24 घंटे पहले ही निकाल दिया है।
वाघेला के इन आरोपों को कांग्रेस ने गलत बताया। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, वाघेला जी के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया गया है। उन्हें पार्टी से निकाले जाने की बात भी बेबुनियाद है। वाघेला जी चाहते थे कि इस वक्त जो राज्य में कांग्रेस अध्यक्ष हैं उनको हटा दिया जाए। लेकिन पार्टी हमेशा किसी भी एक शख्स से बड़ी होती है।
गुजरात कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शंकर सिंह वाघेला ने शुक्रवार (21 जुलाई) को अपने 77वें जन्मदिन पर आयोजित एक कार्यक्रम में कांग्रेस से निकाले जाने की बात कही थी। गुजरात के गांधीनगर में आयोजित कार्यक्रम में वाघेला ने बताया कि उन्हें 24 घंटे पहले पार्टी से निकाला जा चुका है।
वाघेला ने कहा, ''कांग्रेस ने मुझे 24 घंटे पहले निकाल दिया, ये सोचकर कि पता नहीं मैं क्या कहता, विनाश काल विपरीत बुद्धि।''
हालांकि कुछ देर बाद वाघेला ने मीडिया से कहा कि उन्होंने कांग्रेस केे सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। वाघेला ने गुजरात विधान सभा में नेता विपक्ष के पद से भी इस्तीफा दे दिया है।
वाघेला ने कहा है कि वो किसी अन्य राजनीतिक पार्टी से नहीं जुड़ेंगे। वाघेला ने साफ किया कि वो राजनीति में सक्रिय रहेंगे।
गुजरात में इस साल के अंत में चुनाव होने वाले हैं। वाघेला ने अपने समर्थकों के बीच जन्मदिन का केक काटते हुए कहा कि वो 77 नॉट आउट पर खेल रहे हैं और उनका संन्यास लेने का कोई इरादा नहीं है।
दूसरी तरफ वरिष्ठ कांग्रेस नेता अंबिका सोनी ने पार्टी की हिमाचल प्रदेश प्रभारी पद से इस्तीफा दे दिया है। हिमाचल प्रदेश में भी इस साल के अंत में चुनाव होने हैं।
शंकर सिंह वाघेला ने कार्यक्रम में मौजूद समर्थकों से कहा कि उन्होंने भगवान शिव से विष को अपने गले में धारण करना सीखा है।
वाघेला कांग्रेस में शामिल होने से पहले बीजेपी के वरिष्ठ नेता थे। वो गुजरात के 12वें मुख्यमंत्री रहे हैं। वाघले केंद्र सरकार में भी मंत्री रह चुके हैं।
वाघेला और कांग्रेस के बीच अनबन की खबर पिछले कई महीनों से आ रही थी। इस अनबन की शुरूआत तब हुई, जब वाघेला ने कुछ महीने पहले ट्विटर पर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को अनफॉलो कर दिया था।
वाघेला ने कई मौकों पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी की आलोचना की। उन्होंने राहुल गांधी के नेतृत्व क्षमता पर भी सवाल उठाया था।
उसके बाद से ही इस बात की अटकल लगाई जा रही थी कि उन्हें या तो पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए निकाल दिया जाएगा या वो खुद पार्टी छोड़ देंगे।
वाघेला ने जून के आखिरी हफ्ते में कहा था कि गुजरात में कांग्रेस आत्मघाती रास्ते पर चल रही है और ऐसा ही रहा तो वो उसके पीछे नहीं जाएंगे।
इसी बीच ये खबर भी आई कि वाघेला शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) और नीतीश कुमार की जदयू के साथ मिलकर गुजरात में एक तीसरा मोर्चा बना सकते हैं।
माना जा रहा है कि गुजरात विधान सभा चुनाव में वाघेला ज्यादा बड़ी भूमिका चाहते थे जो कांग्रेस आलाकमान उन्हें नहीं दे रहा था इस वजह से वो पार्टी और नेतृत्व से नाराज चल रहे थे।
