शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा, पहले सुरक्षा हटाई, अब बिल्डिंग ढहाई

बीजेपी सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री शत्रुधन सिन्हा ने मुंबई के जुहू स्थित अपने आवास 'रामायण' में बीएमसी द्वारा तोड़फोड़ किए जाने पर शक जाहिर किया है कि कहीं पार्टी के कद्दावर नेता यशवंत सिन्हा का साथ देने का बदला तो उनसे नहीं लिया जा रहा है।

हालांकि, इस बावत उन्होंने साफ-साफ नहीं लिखा है, लेकिन सोशल मीडिया पर उन्होंने एक के बाद एक कुल छह ट्वीट किए हैं और लिखा है कि लोग उनसे पूछ रहे हैं कि कहीं यह बदला तो नहीं है। उन्होंने लिखा है कि हो सकता है कि लोगों की बातें सही भी हो क्योंकि पहले तो दिल्ली में हमारी सुरक्षा हटाई गई और अब मुंबई में बिल्डिंग में तोड़फोड़ की गई है।

शत्रुघ्न सिन्हा ने लिखा है, ''मुंबई स्थित मेरे घर 'रामायण' में बीएमसी द्वारा की गई तोड़फोड़ की न्यूज चैनलों पर काफी चर्चा है। लोग मुझसे पूछ रहे हैं कि क्या महाराष्ट्र के सतारा में किसानों के मुद्दे पर राजनेता यशवंत सिन्हा का साथ देने और तथ्यों, आंकड़ों और सच्चाई को सामने लाने की ईमानदार राजनीति की कीमत तो मैं नहीं चुका रहा हूं। मेरे पास इसका कोई जवाब नहीं है।''

दूसरे ट्वीट में उन्होंने लिखा है, ''हो सकता है, वो सही हों। पहले तो दिल्ली में हमारी सुरक्षा हटाई गई और अब मुंबई में मेरे घर पर तोड़फोड़। हो सकता है कि मुंबई के रेस्टोरेन्ट में आग लगने की घटना के बाद बीएमसी ने यह कार्रवाई की हो। मैं इसका स्वागत करता हूं। अगर ऐसा है तो यह आगे भी जारी रहना चाहिए।''

शत्रुघ्न सिन्हा ने बीएमसी द्वारा की गई कार्रवाई का विवरण भी दिया है। उन्होंने लिखा है कि घर में काम करने वाले सहायकों के इस्तेमाल के लिए घर की छत पर एक शौचालय बनवाया था जिसे बीएमसी द्वारा तोड़ा गया है।

उन्होंने लिखा है कि मुझे इससे कोई परेशानी नहीं है। पूजा घर भी वहां से हटा दिया गया है, उसे शिफ्ट किया जा रहा है।

बता दें कि भाजपा सांसद और अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा की आठ मंजिला आवासीय इमारत के अवैध विस्तार एवं निर्माण को बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने मंगलवार (09 जनवरी) को गिरा दिया है।

बीएमसी जब यह कार्रवाई कर रही थी। बीजेपी सांसद उस वक्त घर पर ही थे।

पटना साहिब से सांसद शत्रुधन सिन्हा कई मुद्दों पर भाजपा की नीतियों से असहमति जता चुके हैं। आधार कार्ड की जानकारियां लीक होने पर चल रही बहस पर भी उन्होंने सोमवार को अपनी राय जाहिर की थी और कहा था कि आधार ब्यौरे के दुरुपयोग को रेखांकित करने वाली खबर देने वाली पत्रकार को कथित सच्चाई सामने लाने के लिए परेशान किया जा रहा है और पूछा कि क्या देश के लोग किसी 'बनाना रिपब्लिक' में रह रहे हैं।