सुप्रीम कोर्ट ने इंस्टैंट ट्रिपल तलाक को असंवैधानिक बताया

भारत में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिपल तलाक के मुद्दे पर अपना फैसला सुना दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को असंवैधानिक बताया। साथ ही इसपर छह महीने के भीतर सरकार को कानून बनाना होगा।

इस मामले पर पांच जजों की बेंच ने सुनवाई की। दो जज तीन तलाक के पक्ष में थे, वहीं दो इसके खिलाफ। बहुमत के हिसाब से तीन जजों के फैसले को बेंच का फैसला माना गया।

बेंच में जस्टिस जे एस खेहर, जस्टिस कुरिएन जोसेफ, आर एफ नरीमन, यू यू ललित और एस अब्दुल नज़ीर शामिल थे। इस केस की सुनवाई 11 मई को शुरु हुई थी। जजों ने इस केस में 18 मई को अपना फैसला सुरक्षित रख दिया था।

इससे पहले ही सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया था कि यह एक विचार करने का मुद्दा है कि मुसलमानों में ट्रिपल तलाक जानबूझकर किया जाने वाला मौलिक अधिकार का अभ्यास है, न कि बहुविवाह बनाए जाने वाले अभ्यास का।

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर इस फैसले का स्वागत किया।

शिया मौलवी मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि शिया पर्सनल लॉ बोर्ड 2007 से तीन तलाक के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहा है।
केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर खुशी जताई।

फैसला आने के बाद मुस्लिम महिलाएं काफी खुश थीं। जिन महिलाओं ने इसके खिलाफ याचिका डाली हुई थी उन्होंने फैसला का स्वागत किया।

जस्टिस नरीमन, ललित और कुरियन ने ट्रिपल तलाक को असंवैधानिक बताया। तीनों ने मिलकर जस्टिस नजीर और चीफ जस्टिस खेहर की बात पर अपनी असहमति जताई।

संसद को छह महीने के अंदर इसके लिए कानून बनाना होगा।

जस्टिस खेहर ने कहा है कि तीन तलाक की प्रक्रिया पर छह महीने तक रोक रहेगी। इस वक्त में सरकार को नया कानून बनाना होगा।

जस्टिस खेहर ने अपने फैसले में अपहोल्ड शब्द का इस्तेमाल किया है। उन्होंने कहा है कि तीन तलाक बना रहेगा।

कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद कोर्ट के मददगार की भूमिका में हैं।

यह मुद्दा 16 अक्टूबर, 2015 में शुरु हुआ था जब सुप्रीम कोर्ट की बेंच द्वारा सी जे आई से कहा गया था कि एक बेंच को सेट किया जाए जो कि यह जांच कर सके कि तलाक के नाम पर मुस्लिम महिलाओं के साथ भेदभाव किया जा रहा है।

बेंच ने यह बात उस समय कही थी जब वे हिंदू उत्तराधिकार से जुड़े एक केस की सुनवाई कर रहा था। इसके बाद 5 फरवरी, 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी से कहा था कि वे उन याचिकाओं में अपना सहयोग करें जिनमें ट्रिपल तलाक, निकाह हलाला और बहुविवाह जैसी प्रथाओं को चुनौती दी गई है।

इसके बाद इस मामले पर कई सुनवाई हुईं जिनमें ट्रिपल तलाक जैसे मुद्दों को लेकर कोर्ट ने भी गंभीरता दिखाई।

केंद्र सरकार ने भी ट्रिपल तलाक का कड़ा विरोध करते हुए कोर्ट से कहा कि ऐसी प्रथाओं पर एक बार जमीनी स्तर पर विचार करने की आवश्यकता है।

16 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने इन मुद्दों की सुनवाई के लिए पांच जजों की बेंच का गठन किया था।