मॉब लिंचिंग पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ऐसा लगता है किसी को चिंता ही नहीं है

भारत में सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया के जरिये संदेश फैलने के बाद भारत में भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या की घटनाओं पर चिंता जताते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि कोई चिंतित नहीं है। न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर और न्यायमूर्ति यू ललित की पीठ ने सोशल साइटों पर यौन अपराधों के वीडियो बंद करने से संबंधित मामले की सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की।

पीठ ने कहा कि सोशल मीडिया पर आजकल कई चीजें आ रही हैं। लोगों की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या की जा रही है, लेकिन कोई चिंतित नजर नहीं आता। इससे पहले 17 जुलाई को भारत के प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली एक अन्य पीठ ने कहा था कि भीड़तंत्र द्वारा भयानक कृत्यों को देश के कानून को कुचलने नहीं दिया जा सकता।
 
पीठ ने संसद से भीड़ द्वारा हत्या और गौरक्षा के नाम पर हत्या से कड़ाई से निपटने के लिए नया कानून पारित करने पर विचार करने का अनुरोध किया। पीठ ने इस मामले को आगे की सुनवाई के लिए अगस्त के चौथे सप्ताह तक स्थगित कर दिया।

भीड़ द्वारा हत्या के मामलों पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से केंद्र ने सभी राज्यों से प्रत्येक जिले में पुलिस अधीक्षक स्तर के एक अधिकारी को नियुक्त करने, खुफिया जानकारी जुटाने के लिये विशेष कार्यबल बनाने और सोशल मीडिया पर आने वाली सामग्री पर करीबी नजर रखने को कहा है जिससे बच्चा चोर या गो तस्कर होने के संदेह में किसी पर हमला न किया जाए।

भारत में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने यह भी कहा कि जब भी यह पाया जाएगा कि कोई पुलिस अधिकारी या जिला प्रशासन का कोई अधिकारी भीड़ द्वारा हिंसा या हत्या जैसे अपराधों की रोकथाम, जांच या त्वरित सुनवाई के लिये निर्देशों के अनुपालन में विफल रहता है तो इसे जानबूझकर लापरवाही और कदाचरण के तौर पर देखा जाना चाहिए तथा संबंधित अधिकारी के खिलाफ निश्चित रूप से कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।