ये विचारधाराओं का संघर्ष है, बीजेपी कैंडिडेट रामनाथ कोविंद को समर्थन नहीं दे सकते: डी राजा
राष्ट्रपति चुनाव पर एनडीए के साथ विपक्ष के सहमति के आसार नहीं दिख रहे हैं। सीपीआई नेता डी राजा ने कहा है कि विपक्षी दलों को बीजेपी के खिलाफ एकजुट होकर अपना राष्ट्रपति उम्मीदवार खड़ा करना चाहिए।
वामपंथी नेता डी राजा ने कहा कि इस पर जोर रहेगा कि देश में राष्ट्रपति का चुनाव हो। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों को बीजेपी उम्मीदवार राम नाथ कोविंद के खिलाफ एक मजबूत दलित नेता को खड़ा करना चाहिए।
डी राजा ने कहा कि ये विचारधाराओं का संघर्ष है, और राष्ट्रपति पद के लिए बकायदा चुनाव होना चाहिए। अंग्रेजी न्यूज़ चैनल एनडीटीवी से बात करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी पूर्व गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे और पूर्व स्पीकर मीरा कुमार के नाम पर विचार करने के लिए तैयार है। ये दोनों ही नेता दलित समुदाय से आते हैं और यूपीए शासन में अहम पदों पर रहे।
हालांकि वामपंथी नेता ने नाम तय करने का जिम्मा मुख्य रुप से कांग्रेस पर छोड़ दिया है।
बीजेपी की अगुवाई वाली एनडीए ने राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए दलित नेता रामनाथ कोविंद का नाम आगे कर मास्टर स्ट्रोक चला है। दलित समुदाय से होने की वजह से विपक्ष भी बीजेपी के इस कैंडिडेट का खुलकर विरोध नहीं कर पा रहा है। बीजेडी, टीआरएस जैसे कई दलों ने रामनाथ कोविंद को समर्थन का ऐलान कर दिया है, वहीं ज्यादातर कह रहे हैं कि वे जल्द ही अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट करेंगे।
डी राजा ने कहा कि हम 22 जून को आयोजित विपक्ष के बैठक का इंतजार करेंगे, इसके बाद ही राष्ट्रपति पद के नाम पर आखिरी फैसला लिया जाएगा।
बता दें कि राष्ट्रपति पद के लिए कांग्रेस अपना उम्मीदवार उतारने के लिए रणनीति बना रहा है, इसके लिए एनडीए में फूट डालने की नीति पर भी काम की जा रही है। शिवसेना रामनाथ कोविंद के नाम पर अपनी असहमति जता चुकी है और कृषि वैज्ञानिक एम एस स्वामीनाथन का नाम आगे बढ़ा चुकी है। अगर कांग्रेस भी इस नाम पर सहमति जता दे तो शिवसेना इस नाम पर हर हाल में सहमति जताएगी। विपक्ष सुशील कुमार शिंदे, मीरा कुमार के अलावा गोपाल कृष्ण गांधी, और बाबा साहेब अंबेडकर के पौत्र प्रकाश यशवंत अंबेडकर के नाम पर भी विचार विमर्श कर रही है।
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