सत्ता मिली तो नीति आयोग को ख़त्म कर देंगे : राहुल गांधी

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने नीति आयोग की सरंचना और भूमिका पर सवाल खड़े करते हुए कहा है कि अगर उन्हें सत्ता मिली तो वे नीति आयोग को ख़त्म कर देंगे।

एक ट्वीट के ज़रिए राहुल गांधी ने कहा कि नीति आयोग से कोई भला नहीं हो रहा है, ये सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी के लिए मार्केटिंग प्रेजेंटेशन और झूठे डेटा बनाने का काम करता है।

ट्वीट में राहुल गांधी लिखते हैं कि हम नीति आयोग की जगह एक ऐसा प्लानिंग कमीशन बनाएंगे जिसमें जाने-माने अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों के साथ स्टाफ की संख्या 100 से भी कम होगी।

उल्लेखनीय है कि नीति आयोग अपने मौजूदा स्वरूप में एक जनवरी 2015 से अस्तित्व में आया है जिसे पहले प्लानिंग कमीशन या योजनाआयोग के नाम से जाना जाता था।

नीति यानी नेशनल इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया, को भारत सरकार का 'प्रीमियर पॉलिसी थिंक टैंक' माना जाता है।

भारत का प्रधानमंत्री नीति आयोग का अध्यक्ष होता है।

गवर्निंग काउंसिल में राज्यों के मुख्यमंत्री और केन्द्रशासित प्रदेशों के उपराज्यपाल होते हैं।

विशिष्ट मुद्दों और ऐसे आकस्मिक मामले, जिनका संबंध एक से अधिक राज्य या क्षेत्र से हो, को देखने के लिए क्षेत्रीय परिषद होती है। ये परिषदें विशिष्ट कार्यकाल के लिए बनाई जाती हैं।

भारत के प्रधानमंत्री के निर्देश पर क्षेत्रीय परिषदों की बैठक होती है और इनमें संबंधित क्षेत्र के राज्यों के मुख्यमंत्री और केन्द्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल शामिल होते हैं। इनकी अध्यक्षता नीति आयोग के उपाध्यक्ष करते हैं।

संबंधित कार्य क्षेत्र की जानकारी रखने वाले विशेषज्ञ और कार्यरत लोग, विशेष आमंत्रित के रूप में प्रधानमंत्री द्वारा नामित किए जाते हैं।

पूर्णकालिक संगठनात्मक ढांचे में (अध्यक्ष के तौर पर प्रधानमंत्री के अलावा) एक उपाध्यक्ष होता है जिसे प्रधानमंत्री नियुक्त करते हैं।

इसमें दो तरह के सदस्य होते हैं - पूर्णकालिक और अंशकालिक।

अंशकालिक सदस्यों में अग्रणी विश्वविद्यालय, शोध संस्थानों और संबंधित संस्थानों से अधिकतम दो पदेन सदस्य होते हैं। केन्द्रीय मंत्रिपरिषद से अधिकतम चार सदस्य प्रधानमंत्री द्वारा नामित किए जाते हैं।

इसके अलावा एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी होता है जो भारत सरकार के सचिव स्तर का अधिकारी होता है। उसे एक निश्चित कार्यकाल के लिए प्रधानमंत्री नियुक्त करते हैं। इसके अलावा आवश्यकता के अनुसार एक सचिवालय भी होता है।