योगी आदित्यनाथ को मुस्लिमों के प्रति अपना नजरिया बदलना पड़ेगा: उल्मा काउंसिल

उल्मा काउंसिल के अध्यक्ष मुफ्ती नदीमुद्दीन ने कहा कि अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मुस्लिमों के प्रति अपना नजरिया बदलना पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि इस देश का मुसलमान किसी से डरता नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सबको अपनी पार्टी चुनने का हक है। उत्तर प्रदेश की जनता ने बीजेपी को चुना और बीजेपी ने मोदी को चुना। इससे मुसलमानों को क्या लेना-देना?

उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ के विवादित बयान हैं, बयान थे और वह मुसलमानों के खिलाफ जहर उगलते रहे। एेसे बहुत सारे कैबिनेट में लोग हैं जिन्होंने जहर उगला और आज वह कैबिनेट में हैं।

उन्होंने कहा कि मुसलमानों को सबसे ज्यादा सेक्युलर पार्टियों और मुस्लिम नेताओं ने इस देश में निराश किया है। अब अगर योगी आए हैं तो उन्हें बदलना पड़ेगा।

उन्होंने सुशासन की बात की, सबका साथ सबका विकास की बात की। इसलिए अब अगर हम चाहे कितना ही कहें कि योगी को मुख्यमंत्री नहीं बनना चाहिए था, लेकिन बीजेपी को जनता ने ही देश ही बागडोर संभालने की जिम्मेदारी दी।

नदीमुद्दीन ने कहा, अब योगी मुख्यमंत्री बन गए हैं तो यह उनकी जिम्मेदारी है कि मुसलमानों के प्रति अपना नजरिया बदलें। अगर वह एेसा नहीं करते हैं तो मुसलमानों को भारत के संविधान पर भरोसा कल भी था, आज भी है और कल भी रहेगा।

उन्होंने कहा कि यह देश किसी के कहने पर नहीं चलता, यह देश संविधान पर चलता था, चलता है और आगे भी चलता रहेगा। अगर योगी संविधान के खिलाफ काम करेंगे तो जिस जनता ने उन्हें वोट दिया है वह उन्हें बाहर कर देगी।

उन्होंने कहा कि मुसलमानों को भयभीत करने या डराने की जरूरत नहीं है। मुसलमान किसी से नहीं डरता है क्योंकि संविधान ने सबको बराबरी का हक दिया है। हम सिर्फ अल्लाह से डरते हैं और जब संविधान ने हमें बराबरी का हक दिया है तो आप डराने वाले कौन होते हैं?

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर पीठ के महंत भी हैं और उन्होंने कई बार मुस्लिम विरोधी बयान दिए हैं। उनकी छवि एक कट्टर हिंदूवादी शख्स की रही है।