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राफेल डील घोटाले पर कांग्रेस मुख्यालय में मनीष तिवारी द्वारा एआईसीसी प्रेस ब्रीफिंग

राफेल डील घोटाले पर कांग्रेस मुख्यालय में मनीष तिवारी द्वारा एआईसीसी प्रेस ब्रीफिंग

राजनीतिक दलों का रजिस्ट्रेशन पूरे नाम से होता है : चुनाव आयोग

भारत में चुनाव आयोग ने मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट से कहा कि वह राजनीतिक दलों का रजिस्ट्रेशन उनके संक्षिप्त नाम से नहीं, बल्कि पूरे नाम से करता है। जस्टिस सी हरिशंकर ने मामले की आगे की सुनवाई के लिए अगले साल 22 फरवरी की तारीख तय की है।

वकील अनुपम श्रीवास्त की ओर से दायर की गई इस याचिका में दावा किया गया है कि नई पार्टी का नाम मतदाताओं में भ्रम पैदा कर सकता है।

दरअसल, आपकी अपनी पार्टी (पीपुल्स) का एक राजनीतिक दल के रूप में रजिस्ट्रेशन के खिलाफ आम आदमी पार्टी (आप) ने आपत्ति दर्ज कराई थी, जिसे चुनाव आयोग ने खारिज कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली पार्टी ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की है, जिस पर आयोग ने अदालत में यह दलील दी है।

आम आदमी पार्टी ने इस नई पार्टी का रजिस्ट्रेशन इस आधार पर खत्म करने की मांग की है कि इसका भी संक्षिप्त नाम 'आप' होगा, जिससे मतदाताओं में भ्रम की स्थिति हो सकती है।

न्यूज एजेंसी भाषा के अनुसार, चुनाव आयोग के वकील ने कोर्ट में दलील दी कि आयोग राजनीतिक दलों का रजिस्ट्रेशन उनके पूरे नाम से करता है ना कि संक्षिप्त नाम से, इसलिए इससे कोई भ्रम नहीं होगा।

इससे पहले, आपकी अपनी पार्टी (पीपुल्स) के वकील ने अपना जवाब दाखिल करने के लिए वक्त मांगा। वहीं, आम आदमी पार्टी के वकील ने भी चुनाव आयोग के जवाब पर प्रति उत्तर दाखिल करने के लिए वक्त मांगा।

चुनाव आयोग ने अपने हलफनामे में कई पार्टियों की सूची दी, जिनके संक्षिप्त नाम एक जैसे हैं। साथ ही, कहा कि जब आम आदमी पार्टी का पंजीकरण 2013 में हुआ था, तब एक अन्य पार्टी उसके संक्षिप्त नाम से पहले से पंजीकृत थी।

आम आदमी पार्टी ने चुनाव आयोग के 16 जुलाई के उस आदेश को रद्द करने की मांग की है, जिसके जरिये आपकी अपनी पार्टी (पीपुल्स) के पंजीकरण के खिलाफ उसकी आपत्ति खारिज कर दी गई थी।

गुजरात दंगा : मोदी के क्लीन चिट को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, याचिका पर सोमवार को सुनवाई

भारत में गुजरात दंगा मामले में पीएम नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट दिए जाने को जाकिया जाफरी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, जाकिया की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के लिए तैयार हो गया है और सोमवार को मामले की सुनवाई होगी।

बात दें कि जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे तो उन पर 2002 के गुजरात दंगों का षड़यंत्र रचने का आरोप लगा था।

जाकिया पूर्व कांग्रेस सांसद एहसान जाफरी की पत्नी हैं जिनकी गुजरात दंगों में हत्या कर दी गई थी।

अक्टूबर 2017 में गुजरात हाईकोर्ट ने स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम की जांच को बरकरार रखते हुए नरेंद्र मोदी समेत 58 लोगों को क्लीन चिट दे दी थी। यह याचिका जाकिया जाफरी और तीस्ता सेतलवाड़ की जस्टिस एंड पीस फाउंडेशन ने दाखिल की है जिसने सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एसआईटी और 2002 में क्लोजर रिपोर्ट को पलटने वाले मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश को आधार बनाया गया है।

एहसान जाफरी और अन्य 68 लोगों को गुजरात दंगों के दौरान भीड़ ने हत्या कर दी थी। यह दंगे अहमदाबाद की मुस्लिम बहुल गुलबर्ग सोसायटी में 28 फरवरी 2002 को हुए थे। यह दंगे गोधरा ट्रेन नरसंहार के बाद हुए थे। इस मामलें में जाकिया की शिकायत में वर्ष 2006 में पुलिस ने मोदी, कुछ मंत्रियों और ब्यूरोक्रेट्स के खिलाफ केस दर्ज किया था।

दो साल बाद सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि कुछ मुख्य दंगों की दोबारा जांच करे जिसमें गुलबर्ग सोसयटी मामला भी शामिल है।

27 अप्रैल 2009 को सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी को जाकिया की शिकायत पर कार्रवाई करने को कहा। इस मामले में एसआईटी ने मोदी से मार्च 2012 में पूछताछ की और इसके एक साल बाद क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की। क्लोजर रिपोर्ट में कहा गया कि मोदी के खिलाफ कोई पुख्ता सबूत नहीं मिले।

मोदी सरकार ने 36 राफेल विमानों की खरीद के दस्तावेज याचिकाकर्ताओं को सौंपे

भारत में मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक 36 राफेल विमानों की खरीद के संबंध में किये गए फैसले के ब्योरे वाले दस्तावेज याचिकाकर्ताओं को सौंप दिए हैं।

पीटीआई के मुताबिक, दस्तावेजों के अनुसार राफेल विमानों की खरीद में रक्षा खरीद प्रक्रिया-2013 में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया है। विमान के लिये रक्षा खरीद परिषद की मंजूरी ली गई और भारतीय दल ने फ्रांसीसी पक्ष के साथ बातचीत की।

पीटीआई के मुताबिक, दस्तावेजों में कहा गया है कि फ्रांसीसी पक्ष के साथ बातचीत तकरीबन एक साल चली और समझौते पर हस्ताक्षर करने से पहले मंत्रिमंडल की सुरक्षा मामलों की समिति की मंजूरी ली गई।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 31 अक्टूबर की सुनवाई के दौरान फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीद पर केन्द्र सरकार से ब्योरा मांगा था।

सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार से कहा था कि वह 10 दिनों के भीतर राफेल लड़ाकू विमानों से जुड़े ब्यौरे बंद लिफाफे में सौपें।

तब मोदी सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने अदालत से कहा था कि सरकार के लिए अदालत को कीमतों की जानकारी उपलब्ध कराना संभव नहीं होगा क्योंकि यह जानकारी संसद को भी नहीं दी गई है।

कोर्ट ने केन्द्र से कहा था कि जो सूचनाएं सार्वजनिक की जा सकती हैं। केन्द्र उन्हें याचिकाकर्ताओं के साथ साझा करें।

डील पर सवाल उठाने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने इससे पहले केन्द्र सरकार से राफेल खरीद पर नीतिगत प्रक्रिया से जुड़े ब्योरे को सौंपने का आदेश दिया था। लेकिन, चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता में मामले की सुनवाई कर रही तीन सदस्यीय पीठ ने यह स्पष्ट कर दिया था कि वे सूचना के तौर पर यह जानकारी मांग रहे हैं।

पिछली सुनवाई के दौरान फ्रांस के साथ लड़ाकू विमान राफेल सौदे को लेकर सरकार के फैसले पर उठाए जा रहे सवालों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र से बिना नोटिस जारी किए इसकी खरीद के फैसले की प्रक्रिया का ब्योरा मांगा।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसे कीमत और सौदे के तकनीकी विवरणों से जुड़ी सूचनाएं नहीं चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र से राफेल पर फैसले की प्रक्रिया का ब्योरा सीलबंद लिफाफे में सौंपने को कहा। दो याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह साफ कर दिया कि इसे औपचारिक नोटिस न समझा जाए।

शीर्ष अदालत उन दो जनहित याचिकाओं की सुनवाई कर रही थी जिनमें एक में यह मांग की गई थी कि 36 लड़ाकू राफेल विमानों को फ्रांस से खरीदने के लिए भारत ने जो समझौते किए, उसका पूरा ब्योरा दिया जाए। जबकि, दूसरी याचिका में शीर्ष अदालत के पर्यवेक्षण में विशेष जांच दल बनाए जाने की मांग की गई थी।

मोदी ने शुरू की पहली कंटेनर कार्गो सेवा

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी में देश की पहली कंटेनर कार्गो सेवा की शुरुआत रामनगर बंदरगाह से की। यह बंदरगाह गंगा नदी पर हल्दिया-वाराणसी जलपरिवहन सेवा के तहत बनाया गया है। करीब 36 साल बाद देश की पहली जलपरिवहन परियोजना मूर्त रूप लिया। 1620 किलोमीटर लंबे वाराणसी-हल्दिया इनलैंड वाटर हाइवे का शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने की।

इनलैंड वाटरवेज अथारिटी के अधिकारियों की माने तो इस परियोजना से पांच राज्यों की व्यावसायिक गतिविधियों में तेजी आएगी और एक साथ पांच सौ से दो हजार टन माल की ढुलाई का काम जलपरिवहन के जरिए हो सकेगा। इससे ध्वनि व वायु प्रदूषण में कमी आएगी और रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।

1982 में इंदिरा गाँधी सरकार के समय जल परिवहन मंत्रालय ने योजना पर काम शुरू किया था। मगर इस  परियोजना पर काम रूक गया। 2014 में नये सिरे से इस पर काम शुरू हुआ और चार साल के बाद देश में पहली बार कंटेनर कार्गो शुरू होने जा रही है। इस परियोजना के लिए केन्द्र सरकार ने विश्वबैंक से करीब 5700 करोड़ रुपये की मदद ली गई है। योजना के पहले चरण में बनारस, साहेबगंज समेत पांच स्थानों पर बंदरगाह बनाने का काम चल रहा है। इनलैंड वाटर अथारिटी के वाइस चेयरमैन प्रवीर पांडेय के मुताबिक, पहले चरण की योजना का काम लगभग पूरा हो चुका है। आने वाले दिनों में 1500 से दो हजार टन के  कंटेनर कार्गों का संचालन होगा।

हल्दिया-वाराणसी जलमार्ग परियोजना का ट्रायल 2016 में हुआ। तब दो मालवाहक जहाज से कार और भवन निर्माण सामग्री की खेप आई थी। इसके बाद अब 12 नवंबर को राल्हूपुर स्थित बंदरगाह पर एक मल्टीनेशनल कंपनी का उत्पाद लेकर पहुंचा।

हल्दिया से 13 सौ किलोमीटर से अधिक दूरी तय करके पांच सौ टन माल लेकर शिपिंग कार्गो गत शुक्रवार को बनारस पहुंचा है। इस कार्गो पर एक मल्टीनेशनल कंपनी का माल मंगाया गया है। इसके पीछे मंशा इस नए जल परिवहन मार्ग को विश्व स्तर पर चर्चा में लाना है ताकि अधिक से अधिक मल्टीनेशनल कंपनियां इस व्यावसायिक परिवहन में दिलचस्पी दिखाएं, बजाय इसके कि उन्हें इसके लिए प्रेरित किया जाए। इस जलमार्ग से 20 टन माल, मात्र 15 हजार में 1318 किलोमीटर दूर तक पहुंचाया जा रहा है।

शनिवार को जर्मन क्रेन के जरिए डमी कंटेनर को अनलोड करने का रिहर्सल किया गया। एक तरफ रिहर्सल हो रहा था, उसी समय गंगा की लहरों पर विशाल कार्गो टैगोर में मौजूद क्रू मेंबर्स में हलचल बढ़ी हुई थी। अनलोडिंग के दौरान सभी जरूरी प्रक्रियाएं दोहाराई गईं।

खास बातें
- बनारस-हल्दिया जलमार्ग से कई राज्यों की व्यावसायिक गतिविधियां तेज होंगी।
- प्रदूषण कम होगा और सुरक्षित माल पहुंच सकेगा।
- सड़क मार्ग के बजाए सस्ते दर पर एक साथ छह सौ टन माल की ढुलाई हो सकेगी।
- रोड हाइवे का मेन जंक्शन होने और फ्रेट विलेज बनने से वेयर हाउस, कोल्ड स्टोरेज, पैकेजिंग-रैपिंग, कार्गो  स्टोरेज, रोड ट्रांसपोर्ट सर्विस सुविधा उपलब्ध होगी।
- फिलहाल गंगा के जलस्तर को देखते हुए पांच सौ टन के मालवाहक जहाज चलेंगे
- वाराणसी-पटना के बीच कम जलस्तर वाले स्थानों पर ड्रेजिंग का काम शुरू
- भविष्य में दो हजार टन तक के जहाज चलाने की तैयारी

रामनगर स्थित बंदरगाह एक नजर में
- मल्टीमाडल टर्मिनल पर शुरू हुआ काम : वर्ष 2014
- हल्दिया-वाराणसी परियोजना का ट्रायल : वर्ष 2016
- पहली बार 16 कंटेनर के साथ पहुंचा कार्गो : 9 नवंबर, 2018
- बंदरगाह के जेट्टी की लंबाई : 200 मीटर, चौड़ाई 42 मीटर
- जेट्टी पर 02 मोबाइल हार्बर क्रेन
- अप्रोच मार्ग, आंतरिक मार्ग

चंद्रबाबू ने महागठबंधन को लेकर 22 नवंबर को विपक्षी दलों की बैठक बुलाई

अगले वर्ष लोकसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में सत्ताधारी पार्टी भाजपा को हराने के लिए लगभग सभी प्रमुख विपक्षी दल अपनी ताकत एक करने में जुट गए हैं। इसके लिए तमाम विपक्षी पार्टियों को एकजुट कर समर्थन जुटाने की कोशिशें हो रही हैं। 22 नवंबर को दिल्ली में सभी प्रमुख विपक्षी दलों की एक बैठक हो सकती है, जिसे आम चुनाव से पहले एक बड़ा भाजपा विरोधी मोर्चा बनाने के पहले कदम के रूप में देखा जा रहा है।

अमरावती में शनिवार शाम कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के दूत के तौर पर पहुंचे पार्टी महासचिव अशोक गहलोत ने प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू से मुलाकात की। इसके बाद नायडू ने मीडिया से वार्ता में कहा कि ताकत और एकता के लिए बड़े विपक्षी कार्यक्रम की घोषणा की थी। 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनौती देने के लिए क्षेत्रीय दलों को एक मंच पर लाने के प्रयास में नायडू पिछले एक माह में सभी शीर्ष विपक्षी नेताओं से मिल चुके हैं।

शनिवार को गहलोत से मुलाकात के बाद नायडू ने कहा कि पार्टियां प्रस्तावित बैठक में भविष्य की कार्रवाई की रूपरेखा तय करेंगी।

वहीं, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री नायडू ने कहा कि चुनाव से पहले भाजपा विरोधी दलों को एक साथ लाने के प्रयास चल रहे हैं। वे गठबंधन के लिए समर्थन मांगने के लिए 19 नवंबर या 20 नवंबर को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से भी मुलाकात करेंगे।

उन्होंने कहा, ''एंटी-बीजेपी प्लेटफॉर्म होगा, इसका उद्देश्य देश और महत्वूपर्ण संस्थाओं को बचाना है।''

नायडू इससे पहले राहुल गांधी, डी एम के प्रमुख एम के स्टालिन, कर्नाटक के मुख्यमंत्री कुमारस्वामी, पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा आदि नेताओं से मुलाकात कर चके हैं।

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव : राहुल गांधी ने कहा, सत्ता में आए तो बीजेपी के किए वादों को भी पूरा करेंगे

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए शनिवार को चुनाव प्रचार समाप्त हो जाएगा। शनिवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कांकेर में जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ समृद्ध है, लेकिन लोग गरीब हैं। आपके पास जल, जंगल और खदान जैसे प्राकृतिक संसाधन है, लेकिन छत्तीसगढ़ भारत का सबसे गरीब राज्य है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री कहते हैं कि वह भ्रष्टाचार से लड़ते हैं, लेकिन जब वह छत्तीसगढ़ आते है, तो वह भ्रष्टाचार की बात नहीं करते हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि वह चाहते हैं कि मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ पांच सालों में कृषि का केन्द्र बन जाएं और देश को खाना, फल और सब्जियां मुहैया कराए।

राहुल ने मोदी सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा, ''पिछले चार-पांच सालों में केन्द्र सरकार ने 15 सबसे धनी लोगों को 3.5 लाख करोड़ रुपये दिए। जबकि देश में मनरेगा योजना चलाने के लिए सालाना 35,000 करोड़ रुपये की जरूरत होती है, उन्होंने उस राशि का दस गुना धन 15 चुनिंदा उद्योगपतियों का माफ कर दिया है।''

राहुल ने कहा कि केन्द्र सरकार ने राजकोष की चाभी 15 चुनिंदा लोगों को दे दी है, लेकिन कांग्रेस यह चाभी किसानों, युवाओं, गरीबों, महिलाओं और आदिवासियों को देना चाहती है। उन्होंने कहा कि बीजेपी के 15 साल के शासन में 40 लाख युवा बेरोजगार हैं, आदिवासियों की जमीन उद्योगपतियों को दी जा रही है, शिक्षकों के पद खाली, अधिकांश भूमि में कोई सिंचाई सुविधाएं नहीं है। अन्य राज्यों के लोगों को यहां रोजगार दिया जा रहा है। हम इसे रोक देंगे। छत्तीसगढ़ के लोगों को नौकरियां मिलेंगी और भूमिहीन लोगों को भूमि देंगे।

उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार ने अपने उद्योगपति मित्रों को 3,50,000 करोड़ रुपये दिए, लेकिन छत्तीसगढ़ के किसानों को कोई मदद नहीं मिली। उन्होंने पिछले साढ़े चार सालों में किए गए किसी भी वादे को पूरा नहीं किया। हमने पंजाब के किसानों के लिए ऋण छूट का वादा किया था। हमने यह किया है।

राहुल ने कहा कि अगर हम सत्ता में आए तो 10 दिनों में किसानों का कर्ज माफ करेंगे और बीजेपी ने भी जो वादे किए हैं, उनको पूरा करेंगे। उन्होंने कहा कि लाखों युवक बेरोजगार हैं, किसानों को उनकी फसल का सही पैसा नहीं मिल रहा है। बस्तर में कोई इंड्रस्टी नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर हम जीते तो हर ब्लॉक में फूड प्रोसेसिंग यूनिट खोलेंगे जिससे आपके बेटे और बेटियों को रोजगार मिलेगा।

गौरतलब है कि 90 सदस्यीय छत्तीसगढ़ विधानसभा के लिए दो चरणों में 12 और 20 नवंबर को मतदान होगा। मध्यप्रदेश में विधानसभा के लिए 28 नवंबर को मतदान होगा। चुनाव परिणामों की घोषणा 11 दिसंबर को की जाएगी।

सात महीने के निचले स्तर पर कच्चा तेल, 70 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आया

कच्चा तेल के प्रमुख उत्पादक देशों की अबु धाबी में प्रस्तावित बैठक से पहले शुक्रवार को कच्चा तेल 70 डॉलर प्रति बैरल के स्तर के नीचे आ गया। यह सात महीने का निचला स्तर है।

लंदन में सुबह के सौदों में जनवरी डिलीवरी के लिये ब्रेंट क्रूड (उत्तरी सागर) गिरकर 69.13 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। अप्रैल 2018 के बाद कच्चा तेल पहली बार 70 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से नीचे आया है। न्यूयॉर्क में वेस्ट टेक्सास इंटरमीडियेट गिरकर फरवरी के बाद के निचले स्तर 59.28 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।

यह गिरावट ऐसे समय आई है, जब तेल निर्यातक देशों के संगठन ओपेक और गैर-ओपेक प्रमुख कच्चा तेल उत्पादक देश कीमतों में गिरावट के मद्देनजर उत्पादन में संभावित कटौती को लेकर रविवार को अबु धाबी में बैठक करने वाले हैं।

कच्चा तेल अक्तूबर में चार साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था। उत्पादन बढ़ने, चीन की आर्थिक वृद्धि सुस्त पड़ने और ईरान पर प्रतिबंध के असर की चिंताएं नरम पड़ने से कच्चा तेल के भाव गिरे हैं। अमेरिका में भंडार बढ़ने के संकेत से भी कच्चा तेल नरम पड़ा है। अमेरिका ने इस सप्ताह ईरान पर प्रतिबंध से चीन, भारत और जापान समेत आठ देशों को छूट देने का निर्णय लिया। इससे भी कीमतें कम हुई हैं।

पेट्रोल मूल्य वृद्धि पर कांग्रेस मुख्यालय में पवन खेरा द्वारा एआईसीसी प्रेस ब्रीफिंग

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5 राज्यों में विधानसभा चुनावों पर रणदीप सिंह सुरजेवाला द्वारा एआईसीसी प्रेस ब्रीफिंग

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