भगोड़ा हीरा कारोबारी और भारत में वांटेड नीरव मोदी इस वक्त कहां है? इस बारे में कोई पुख्ता जानकारी भारत सरकार के पास नहीं है। इस बीच एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि नीरव मोदी अभी न्यूयॉर्क में है और वो अभी तक भारत सरकार द्वारा निलंबित किये गये अपने पासपोर्ट पर ही विदेश घूम रहा है। नीरव मोदी ने अपने खिलाफ सी बी आई जांच शुरू होने से पहले ही जनवरी के महीने में भारत छोड़ दिया था।
पंजाब नेशनल बैंक से करोड़ों रुपये लोन लेकर नीरव मोदी विदेश में बैठा है। सूत्रों के मुताबिक, नीरव पहले मुंबई से यू ए ई गया, उसके बाद हॉन्गकॉन्ग और लंदन। इसके बाद मार्च के महीने में उसने यू के छोड़ दिया और अभी फिलहाल वो न्यूयॉर्क में है।
एन डी टी वी ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि 14 फरवरी को नीरव ने हॉन्गकॉन्ग छोड़ दिया। इसका मतलब यह हुआ कि जिस समय भारत सरकार ने हॉन्गकॉन्ग अथॉरिटी से नीरव को गिरफ्तार करने की गुजारिश की थी, उस वक्त वो हॉन्गकॉन्ग में था ही नहीं। 12 अप्रैल को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने बतलाया था कि हमारे द्वारा दी गई सूचना के बारे में हॉन्गकॉन्ग अथॉरिटी विचार कर रही है और नीरव मोदी की गिरफ्तारी को लेकर भी प्रयास किये जा रहे हैं।
फिलहाल भारत सरकार नीरव मोदी, मेहुल चौकसी और विजय माल्या जैसे डिफॉल्टरों को भारत वापस लाने के प्रयास में जुटी है। इस बीच केंद्र सरकार ने भगोड़े आर्थिक अपराधियों के खिलाफ एक नया अध्यादेश भी लाया है। इस अध्यादेश में यह प्रावधान किया गया है कि भगोड़े आर्थिक अपराधियों की संपत्ति बेचकर कर्ज देने वालों के नुकसान की भरपायी की जा सकेगी और आरोपी देश लौटने के बाद अपनी प्रॉपर्टी पर दावा भी नहीं कर सकेगा।
आपको बता दें कि फर्जी साखपत्रों के जरिए बैंक से 13 हजार करोड़ रुपए से अधिक का कर्ज घोटाला करने के आरोपी हीरा कारोबारी नीरव मोदी और उसके रिश्तेदार मेहुल चौकसी के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो और प्रवर्तन निदेशालय जांच कर रही है। नीरव मोदी और उनके साझेदार जांच शुरू होने के पहले ही भारत से फरार हो गए। अब बैंक के सामने कर्ज की वसूली की चुनौती है।
भारतीय उद्योग जगत के लिए सोमवार (23 अप्रैल) का दिन ऐतिहासिक रहा। भारत की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज (TCS) मार्केट कैपिटलाइजेशन (कंपनी के शेयर का बाजार मूल्य) के मामले में 100 अरब डॉलर (6.7 लाख करोड़ रुपये) के जादुई आंकड़े को पार करने वाली पहली भारतीय कंपनी बन गई है। टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज के शेयर में लगातार वृद्धि के कारण टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज का एम-कैप 101 अरब डॉलर तक पहुंच गया। दो व्यावसायिक दिनों में टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज के शेयर में लगातार बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है।
टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज का एम-कैप पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड सभी कंपनियों के मूल्य (80 अरब डॉलर) से कहीं ज्यादा हो गया है।
इसके साथ ही टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज, एच डी एफ सी बैंक, आई टी सी, हिंदुस्तान यूनिलिवर, मारुति सुजुकी और इंफोसिस जैसी दिग्गज कंपनियों से ज्यादा बाजार मूल्य वाली हो गई है।
टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज के बेहतरीन प्रदर्शन को देखते हुए बाजार विशेषज्ञ कंपनी के स्टॉक को लेकर बेहद आशावन हैं। इसे देखते हुए टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज के टारगेट प्राइस (संभावित मूल्य) में भी वृद्धि कर दी गई है।
बिजनेस स्टैंडर्ड के अनुसार, टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज द्वारा पिछले सप्ताह वित्तीय लाभ की घोषणा करने के बाद कम से कम छह विदेशी ब्रॉकरेज कंपनियों ने टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज के स्टॉक प्राइस टारगेट में 15 फीसद से ज्यादा की वृद्धि कर दी थी। टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज की घोषणा के बाद बैंकिंग और फायनेंशियल सेक्टर पर भी इसका अनुकूल असर पड़ने की उम्मीद है। इन क्षेत्रों में भी विकास की रफ्तार बढ़ने की उम्मीद है।
भारत की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज का एम-कैप 128 देशों की जी डी पी के बराबर है। इनमें श्रीलंका, इक्वाडोर, स्लोवाकिया, केन्या, लग्जेम्बर्ग, कोस्टारिका, बुल्गारिया और जॉर्डन जैसे देश शामिल हैं। दुनिया भर में 64-65 देशों की जी डी पी ही 100 अरब डॉलर से ज्यादा है।
टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज का एम-कैप भारत के कुल बजट खर्च (वित्त वर्ष 2019) का एक चौथाई से भी ज्यादा हो गया है। वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा 1 फरवरी को पेश आम बजट में कुल खर्च का आकलन 24.42 लाख करोड़ रुपये था। वहीं, टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज का एम-कैप 6.7 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का हो गया है। ऐसे में यह आंकड़ा भारत के कुल बजट खर्च का तकरीबन 27 फीसद तक पहुंच गया है।
टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज 100 अरब डॉलर के मार्केट कैपिटलाइजेशन के साथ ही एप्पल, माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, फेसबुक और अमेजन जैसी कंपनियों की श्रेणी में आ गई है।
बता दें कि एप्पल दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनी है। अमेरिकी कंपनी एप्पल का मौजूदा बाजार मूल्य 840 अरब डॉलर है। इसके बाद गूगल की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट (746 अरब डॉलर), आमेजन (740.79 अरब डॉलर) और माइक्रोसॉफ्ट (731 अरब डॉलर) का नंबर आता है।
डीजल और पेट्रोल की कीमत रोजाना बदलती हैं। 20 अप्रैल को डीजल की कीमत दिल्ली में 65.31 रुपए प्रति लीटर पर पहुंच गई है। इंडियन ऑयल की वेबसाइट के मुताबिक, आज तक के रिकॉर्ड में डीजल कभी इतना महंगा नहीं बिका है। वहीं दिल्ली में पेट्रोल की बात करें तो इसकी कीमत 74.08 रुपए प्रति लीटर है। इससे पहले इतना महंगा पेट्रोल सितंबर 2013 में बिका था। 19 अप्रैल को पेट्रोल दिल्ली में 74.07 रुपए प्रति लीटर बिका। 20 अप्रैल को इसमें 1 पैसा प्रति लीटर की बढ़ोत्तरी हो गई। वहीं दिल्ली में 19 अप्रैल को डीजल 65.27 रुपए प्रति लीटर बिका। इसमें 20 अप्रैल को 4 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोत्तरी हुई।
वहीं मुंबई की बात करें तो मुंबई में 20 अप्रैल को 1 लीटर डीजल की कीमत 69.54 रुपए है। वहीं एक लीटर पेट्रोल की कीमत 81.93 रुपए प्रति लीटर पर पहुंच गई है। पेट्रोल की यह कीमत 55 महीने बाद इस स्तर पर पहुंची है। कोलकाता की बात करें तो कोलकाता में 20 अप्रैल को 1 लीटर डीजल की कीमत 68.01 रुपए है। वहीं एक लीटर पेट्रोल की कीमत 76.78 रुपए प्रति लीटर पर पहुंच गई है। चैन्नई की बात करें तो चैन्नई में 20 अप्रैल को 1 लीटर डीजल की कीमत 68.90 रुपए है। वहीं एक लीटर पेट्रोल की कीमत 76.85 रुपए प्रति लीटर पर पहुंच गई है।
हालांकि जनवरी में पेट्रोल की कीमतें 83 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गई थी। बाद में अंतराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें गिरने से इसकी कीमत कम भी हुई थी। हालिया बजट में भारत के वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले उपकर में कमी का ऐलान किया था। जिसके बाद पेट्रो उत्पादों के दाम कुछ घटे थे, लेकिन एक बार फिर अंतराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई वृद्धि से कीमतें फिर आसमान पर पहुंचने की संभावना है।
19 अप्रैल को अंतराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 75 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। जिसके बाद पेट्रोलियम पदार्थों के दामों में बढ़ोत्तरी तय माना जा रहा है। इसी वजह से अटकलें लगाई जा रही हैं कि शुक्रवार से पेट्रोल-डीजल की कीमतों में फिर से वृद्धि होगी जिसका सीधा असर मंहगाई पर पड़ेगा। अप्रैल के शुरुआत में दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 73.83 रुपए और डीजल की कीमत 64.69 रुपए प्रति लीटर थी। भारत के चारों मेट्रो सिटी दिल्ली, कोलकाता, मुंबई और चेन्नई में डीजल की कीमत सबसे ज्यादा दर्ज की गई थी।
एंबी वैली की संपत्तियों की नीलामी आखिरकार शुरू हो गई है। इसके तहत वैली में मौजूद तकरीबन 300 वाहनों को संभावित खरीदारों के समक्ष रखा गया था। नीलामी का आयोजन आजाद मैदान में स्थित मुंबई पुलिस क्लब में किया गया। इनमें 166 कारें और 126 दोपहिया वाहन हैं। कुछ वाहनों की मौजूदा स्थिति से खरीदारों को निराशा भी हुई।
सबसे पहले कारों को लोगों को सामने पेश किया गया था। ट्रांसपाेर्टर राकेश टाकले दो पिक-अप ट्रक खरीदने के इरादे से बोली में शामिल हुए थे, लेकिन उन्हें सिर्फ टोयोटा इनोवा से ही संतोष करना पड़ा। उन्होंने इनोवा छह लाख रुपये में खरीदी। सतारा के संकेत शानबाग को उम्मीद थी कि वह अपने बच्चों के लिए मर्सीडीज बेंज स्प्रिंटर वैन खरीदने में सफल होंगे। उन्होंने इसके लिए 20 लाख रुपये तक की बोली लगाई थी। उन्होंने बताया कि वैन के लिए बोली लगाने वालों में सिर्फ दो व्यक्ति ही थे। ऐसे में बोली अचानक से 21 लाख से 50 लाख और फिर 67 लाख रुपये तक पहुंच गई थी। इस तरह संकेत वैन खरीदने में सफल नहीं हो सके। उन्होंने बताया कि इतनी ज्यादा कीमत देकर मर्सीडीज बेंज स्प्रिंटर वैन खरीदने का कोई तुक नहीं था।
सुप्रीम कोर्ट ने निवेशकों का पैसा नहीं लौटाने के कारण सुब्रत राय सहारा की संपत्तियों को बेचकर पैसा जुटाने का आदेश दिया था। शीर्ष अदालत ने दिसंबर में एंबी वैली की नीलामी की इजाजत दी थी। इसके लिए बांबे हाई कोर्ट को आधिकारिक तौर पर अधिकृत (ऑफिशियल लिक्विडेटर) किया गया था। नीलामी प्रक्रिया को आठ सप्ताह में पूरा करने को कहा गया है।
एंबी वैली का कुल मूल्य 37,000 करोड़ रुपये आंका गया है। पहले इसकी नीलामी एक साथ ही कराने की योजना थी, लेकिन विशेषज्ञों ने शीर्ष अदालत को बताया कि कोई एक कंपनी, संगठन या व्यक्ति अकेले इसे नहीं खरीद सकता है। इसके बाद एंबी वैली को टुकड़ों में बेचने का फैसला किया गया। इसी रणनीति के तहत सबसे पहले एंबी वैली में मौजूद वाहनों की नीलामी प्रक्रिया शुरू की गई है।
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के कई आदेश के बाद भी सहारा ग्रुप ने निवेशकों के पैसे नहीं लौटाए। इसके बाद अदालत ने कंपनी की स्वामित्व वाली संपत्तियों की नीलामी करने का फैसला लिया।
भारत में पेट्रोल-डीजल के दामों में रिकॉर्ड वृद्धि ने आम आदमी पर महंगाई की दोहरी मार डाल दी। पेट्रोल की कीमतें चार साल में अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई, जबकि डीजल ने जेब पर अब तक का सबसे बड़ा डाका डाल दिया।
पेट्रोल और डीजल दोनों के दामों में 18 पैसे प्रति लीटर का इजाफा हो गया। दिल्ली में अब एक लीटर पेट्रोल की कीमत 73 रुपए 73 पैसे है, जबकि एक लीटर डीजल 64 रुपए 58 पैसे प्रति लीटर।
नोएडा में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 75 रुपए 16 पैसे, जबकि डीजल की कीमत 64 रुपए 83 पैसे हो गई है। गाजियाबाद में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 75 रुपए 5 पैसे, जबकि एक लीटर डीजल अब 64 रुपए 72 पैसे में मिलेगा।
मुंबई में एक लीटर पेट्रोल के नए दाम 81 रुपए 59 पैसे होंगे, जबकि डीजल 68 रुपए 77 पैसे प्रति लीटर होगा। कोलकाता में एक लीटर पेट्रोल 76 रुपए 44 पैसे प्रति लीटर हो गया, जबकि डीजल के दाम 67 रुपए 27 पैसे प्रति लीटर तक जा पहुंचे।
इसके साथ ही चेन्नई में 76 रुपए 48 पैसे एक लीटर पेट्रोल की कीमत हुई, जबकि डीजल 68 रुपए 12 पैसे प्रति लीटर हो गया।
बता दें कि इस साल की शुरुआत में ही पेट्रोलियम मंत्रालय ने पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती की मांग की थी ताकि इंटरनेशनल मार्केट में तेल की बढ़ती कीमतों के असर से लोगों को राहत दी जा सके, लेकिन भारत के वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 1 फरवरी को अपने बजट में इस डिमांड पर कोई ध्यान नहीं दिया, नतीजा ये हुआ कि दक्षिण एशियाई देशों में भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए।
जानकारों के मुताबिक, जून 2017 के बाद से कच्चे तेल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में 50 फीसदी से ज्यादा बढ़ चुकी हैं। इंडियन बास्केट में कच्चा तेल 10 महीनों के भीतर 58 फीसदी महंगा हो चुका है। महंगे कच्चे तेल का असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी दिख रहा है और पेट्रोल-डीजल बढ़ोत्तरी का रिकॉर्ड बना रहे हैं।
हीरा कारोबारी नीरव मोदी की तर्ज पर तमिलनाडु में भी एक गोल्ड जूलर ने 14 बैंकों को सैकड़ों करोड़ का चूना लगाया है। एस बी आई के नेतृत्व में बैंकों के कंसोर्टियम ने कनिष्क गोल्ड प्राइवेट लिमिटेड को 824 करोड़ रुपये का लोन दिया था। भूपेश कुमार जैन और उसकी पत्नी नीता जैन इस कंपनी के प्रमोटर और डायरेक्टर हैं। कनिष्क गोल्ड का मुख्य कार्यालय चेन्नई के टी नगर में स्थित है।
बैंक अधिकारियों का कहना है कि व्यवसायी दंपती से कई बार संपर्क साधने की कोशिश की गई थी, लेकिन दोनों का कुछ अता-पता नहीं है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, भूपेश और नीता मॉरिशस में हैं। सारे प्रयास विफल होने के बाद एस बी आई ने 25 जनवरी को सी बी आई में इसकी शिकायत दी थी। बैंक ने भूपेश पर फर्जी दस्तावेज के आधार पर कर्ज लेने और रातोंरात अपने सभी शोरूम और फैक्टरी बंद कर भागने होने का आरोप लगाया है। सी बी आई ने फिलहाल इस मामले में एफ आई आर दर्ज नहीं की है। बता दें कि जांच एजेंसी प्राथमिक छानबीन के बाद ही केस दर्ज करती है।
अधिकारियों का कहना है कि कनिष्क गोल्ड को 824 करोड़ रुपये का लोन दिया गया था। ब्याज और अन्य शुल्क लगाकर 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान होने का अंदेशा है। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, एस बी आई ने 11 नवंबर, 2017 में कंपनी के खाते को फर्जी करार दिया था। आर बी आई को भी इसकी जानकारी दे दी गई थी। बाद में अन्य बैंकों ने भी ऐसी ही घोषणा की थी। एस बी आई ने इस कंपनी को वर्ष 2007 से ही कर्ज देना शुरू किया था। बाद में एक कंसोर्टियम बना दिया गया था, ताकि अन्य बैंक भी कनिष्क गोल्ड को लोन दे सके।
एस बी आई ने बताया कि भूपेश जैन की कंपनी पहली बार मार्च 2017 में डिफॉल्ट हुई थी। कंपनी ने आठ बैंकों को ब्याज का भुगतान नहीं किया था। कनिष्क गोल्ड ने अप्रैल 2017 से कंसोर्टियम में शामिल सभी बैंकों का भुगतान करना बंद कर दिया था। बैंक अधिकारियों ने 5 अप्रैल, 2017 में स्टॉक ऑडिट के लिए प्रमोटरों से संपर्क साधने की असफल कोशिश की थी। बैंक अधिकारी 25 मई को कनिष्क के कॉरपोरेट ऑफिस, फैक्टरी और शोरूम में गए थे, लेकिन सभी का शटर डाउन मिला था।
कनिष्क गोल्ड के प्रमोटर भूपेश जैन ने बैंकों को पत्र लिखकर रिकॉर्ड की जालासाजी करने और स्टॉक हटाने की बात स्वीकार की थी। भूपेश ने स्टॉक को कोलेटरल (लोन के बदले संपत्ति) के तौर पर रखा था। मद्रास जूलर्स एंड डायमंड मर्चेंट्स एसोसिएशन के एक प्रतिनिधि ने बताया कि नुकसान से उबर नहीं पाने के कारण कनिष्क गोल्ड ने मई, 2017 में अपना शटर गिरा लिया था।
भारत में खाने-पीने की चीजें तथा ईंधन की लागत में कमी आई है। इससे खुदरा मुद्रास्फीति फरवरी में घटकर चार महीने के न्यूनतम स्तर 4.44 प्रतिशत पर पहुंच गई। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित खुदरा मुद्रास्फीति जनवरी में 5.07 प्रतिशत थी।
हालांकि पिछले साल फरवरी में यह 3.65 प्रतिशत थी। इससे पहले, नवंबर 2017 में 4.88 प्रतिशत थी।
केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सी एस ओ) द्वारा जारी आंकड़े के अनुसार, उपभोक्ता खाद्य खंड में महंगाई दर फरवरी में कम होकर 3.26 प्रतिशत रही जो इससे पिछले महीने में 4.7 प्रतिशत थी। सब्जियों में मुद्रास्फीति पिछले महीने कम होकर 17.57 प्रतिशत रही जो जनवरी में 26.97 प्रतिशत थी। वहीं फलों की महंगाई दर आलोच्य महीने में 4.80 प्रतिशत रही जो इससे पूर्व महीने में 6.24 प्रतिशत थी।
आलोच्य महीने में दूध और उसके उत्पाद भी सस्ते हुए। इस खंड में महंगाई दर 4.21 प्रतिशत थी। अनाज और उसके उत्पाद की महंगाई दर 2.10 प्रतिशत, मांस एवं मछली 3.31 प्रतिशत, जबकि अंडे में मुद्रास्फीति 8.51 प्रतिशत रही।
ईंधन एवं लाइट श्रेणी में महंगाई दर फरवरी में 6.80 प्रतिशत थी जो जनवरी में 7.73 प्रतिशत थी।
हालांकि परिवहन और संचार सेवाओं के लिए कीमत में वृद्धि 2.39 प्रतिशत रही जो जनवरी में 1.97 प्रतिशत थी।
दूसरी तरफ, विनिर्माण क्षेत्र के बेहतर प्रदर्शन के साथ औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर इस साल जनवरी में 7.5 प्रतिशत रही जो एक साल पहले इसी महीने में 3.5 प्रतिशत थी। उपभोक्ता और पूंजीगत वस्तुओं की अच्छी मांग से भी औद्योगिक वृद्धि को गति मिली। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सी एस ओ) के आंकड़े के अनुसार, औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आई आई पी) में वृद्धि दिसंबर 2017 में 7.1 प्रतिशत रही थी।
इस साल जनवरी में आई आई पी वृद्धि का प्रमुख कारण विनिर्माण क्षेत्र का बेहतर प्रदर्शन है। सूचकांक में इस क्षेत्र की हिस्सेदारी 77.63 प्रतिशत है। इसमें आलोच्य माह में 8.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई जो जनवरी 2017 में 2.5 प्रतिशत थी। यह अर्थव्यवस्था में पुनरूद्धार का संकेत देता है। निवेश का आईना माने जाने वाले पूंजीगत सामान के उत्पादन में जनवरी 2018 में 14.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि एक साल पहले इसी महीने में 0.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। गैर- टिकाऊ उपभोक्ता सामान खंड में वृद्धि दर आलोच्य महीने में 10.5 प्रतिशत रही जो एक साल पहले जनवरी महीने में 9.6 प्रतिशत थी। इस खंड में रोजमर्रा के उपयोग के सामान शामिल हैं।
पंजाब नेशनल बैंक (पी एन बी) घोटाले की परतें अभी खुल ही रही हैं, इसी बीच सीबीआई ने एक और बैंक के साथ धोखाधड़ी किए जाने का मामला दर्ज किया है। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, सीबीआई ने दिल्ली की ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स (ओ बी सी) की एक शाखा के साथ 390 करोड़ की धोखाधड़ी किए जाने का मामला राजधानी के ही एक ज्वैलरी आउटलेट के खिलाफ गुरुवार (22 फरवरी) को दर्ज किया।
सीबीआई हीरे, सोने और चांदी के जेवरात बनाने और उनका कारोबार करने वाले करोल बाग के द्वारका दास सेठ इंटरनेशनल की जांच कर रही है, जिसने 2007 से ग्रेटर कैलाश-2 की ओ बी सी की शाखा से फॉरेन लेटर ऑफ क्रेडिट, फॉरेन डॉक्युमेंट्री बिल परचेज और अन्य जरियों का इस्तेमाल करते हुए कई क्रेडिट सुविधाओं का लाभ उठाया। कंपनी को चार लोग चलाते हैं, इनमें पंजाबी बाग के सभ्य सेठ, रीता सेठ और सराय काले खां के कृष्ण कुमार सिंह और रवि कुमार सिंह शामिल हैं। इन चारों के खिलाफ एफ आई आर दर्ज की गई है।
बैंक ने अपनी पड़ताल के बाद दावा किया कि सभ्य सेठ और अन्य डायरेक्टर अपने परिवार वालों समेत पिछले 10 महीनों से अपने घरों में नहीं हैं। ऐसा संदेह है कि सभ्य सेठ ने भारत छोड़ दिया है। पब्लिक सेक्टर की बैंक ने 16 अगस्त 2017 को द्वारका दास सेठ इंटरनेशनल के खिलाफ सीबीआई का रुख किया था , लेकिन एफ आई आर गुरुवार को दर्ज की गई।
इस मामले में इस बात पर भी सवाल उठ रहे हैं कि सीबीआई ने मामला दर्ज करने में 6 महीने क्यों लगाए? बैंक ने अपनी शिकायत में दावा किया है कि द्वारका दास सेठ इंटरनेशनल ने लेटर ऑफ क्रेडिट के तहत फॉरेन बिल डिस्काउंटिंग के जरिये कई क्रेडिट सुविधाओं का लाभ लिया। उन्होंने 2007 में पहली बार इस सुविधाओं का लाभ लिया और आगे के बिलों में छूट देने से पहले सभी बिलों को नियमित तौर पर जारी किया गया।
ओ बी सी बैंक की तरफ से कहा गया कि सभ्य सेठ विदेश की फॉरेन बैंकों के द्वारा स्थापित किए गए लेटर ऑफ क्रेडिट के जरिये सुविधा का इस्तेमाल कर रहे थे। इनमें से कुछ बैंकों को खराब रेटिंग दी गई है। ओ बी सी के अनुसार, धोखाधड़ी के बाद सभ्य सेठ ने दुबई में फ्रेया ट्रेडिंग के नाम से कंपनी बनाई। उसने भारत से एक प्रतिनिधि को भी नौकरी पर रखा जिसका नाम अतुल कुमार गर्ग है। गर्ग ने टी ओ आई को बताया कि पिछले चार वर्षों से वह सभ्य सेठ के संपर्क में नहीं है। गर्ग ने कहा, ''मैंने वर्षों पहले उनके साथ कुछ व्यापार किया था, लेकिन मुझे नहीं पता कि वह अब कहां हैं? मेरा उनके साथ कुछ भी लेना-देना नहीं है।'' सेठ और अन्य निदेशकों की लोकेशन का अभी पता नहीं चला है।
बैकिंग कर्मचारियों की एक प्रमुख यूनियन के शीर्ष नेतृत्व ने मांग की है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आर बी आई) के गर्वनर उर्जित पटेल को हीरा कारोबारी नीरव मोदी द्वारा किए गए 1.8 अरब डॉलर के घोटाले/धोखाधड़ी के बाद नैतिक आधार पर अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।
ऑल इंडिया बैंक इम्प्लाइज एसोसिएशन (ए आई बी ई ए) के महासचिव सी एच वेंकटचलम ने आई ए एन एस को बताया, ''इस घोटाले/धोखाधड़ी को लेकर आर बी आई गवर्नर की लगातार चुप्पी आश्चर्यजनक और विस्मयकारी है। यह आर बी आई की गहरी भागीदारी पी एन बी के नोस्ट्रो खातों की जांच में आर बी आई की कोताही को दिखाता है।''
उनके मुताबिक, घोटाले का शिकार बनी पी एन बी की मुंबई स्थित ब्रैडी शाखा एक श्रेणी की विदेशी मुद्रा बैंक शाखा है और भारतीय रिजर्व बैंक इस पर निगरानी रखने में विफल रहा है जिसके परिणामस्वरूप बड़े पैमाने पर घोटाले/धोखाधड़ी हुई है।
वेंकटचलम ने कहा, ''भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर को पूर्ण विफलता की नैतिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए और इस्तीफा दे देना चाहिए। उनके अनुसार, पी एन बी के निदेशक मंडल में भारतीय रिजर्व बैंक के उम्मीदवार भी हैं। इसके अलावा आर बी आई सभी बैंक शाखाओं में निरीक्षण करती है और इसलिए केंद्रीय बैंक जिम्मेदारी से नहीं बच सकती है। वेंकटचलम ने भारतीय रिजर्व बैंक के पुनर्गठन की भी मांग की, और कहा कि केंद्रीय बैंक पर शीघ्र सुधारात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।
भारत में कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने राज्यसभा में आज (08 फरवरी) को बजट को 'जुमलों की सुनामी' करार दिया और कहा कि बजट में की गयी घोषणाएं और अर्थव्यवस्था के बारे में किये गये दावे हकीकत से कोसों दूर हैं।
वित्त वर्ष 2018-19 के आम बजट पर चर्चा की शुरूआत करते हुए चिदंबरम ने मोदी सरकार के चौथे बजट को 'जुमलों की सुनामी' करार दिया और मोदी सरकार से 12 सवाल पूछे। चिदंबरम ने पूछा कि आपने हर साल दो करोड़ नौकरियां देने का वादा किया था, उसका क्या हुआ? उन्होंने सरकार से रोजगार की उसकी अपनी परिभाषा बताने और पिछले चार सालों में सृजित रोजगारों की संख्या का खुलासा करने की मांग करते हुये पूछा कि क्या सरकार आईएलओ को पकौड़ा बेचने को भी रोजगार की परिभाषा में शामिल करने का सुझाव देगी?
सत्ता पक्ष के सदस्यों के भारी शोर शराबे के बीच चिदंबरम ने सरकार पर बीते चार सालों से सिर्फ जुमलों की बारिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने बजट की घोषणाओं और अर्थव्यवस्था के बारे में किये गये दावों को हकीकत से दूर बताते हुये कहा कि सरकार के आधारहीन दावों के कारण ही राजकोषीय घाटा अब शीर्ष स्तर पर और विकास दर न्यूनतम स्तर पर आ गयी है।
उन्होंने सरकार पर आंकड़ों को छुपाने का आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले चार सालों में आर्थिक वित्तीय घाटा बढ़ने की दर 3.2 से 3.5 प्रतिशत होने के बाद सरकार की देनदारियां बढ़कर 85 हजार करोड़ रुपये पर पहुंच गयी।
चिदंबरम ने वित्त मंत्री अरुण जेटली से इन सवालों के जवाब देने की अपेक्षा व्यक्त करते हुए सरकार के तीन जुमलों का जिक्र किया। उन्होंने किसानों को उपज का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य मुहैया कराने के सरकार के दावे को पहला जुमला बताते हुए कहा कि सरकार ने पिछले दो सालों में समर्थन मूल्य में सिर्फ पांच रुपये की बढ़ोत्तरी की। इसे किसानों के साथ धोखा बताते हुए उन्होंने कहा कि संप्रग सरकार के दस साल के कार्यकाल में समर्थन मूल्य में 100 प्रतिशत वृद्धि हुई थी। रोजगार सृजन के आंकड़ों को बजट में छुपाने का आरोप लगाते हुए चिदंबरम ने कहा कि पिछले चार साल में सरकारी आंकड़ों में लगातार रोज़गार के अवसर बढ़ने का दावा किया गया है, जबकि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) लगातार घट रहा है। इसे दूसरा जुमला बताते हुए उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का एकमात्र देश बन गया है जिसमें जीडीपी घटे और रोजगार बढ़ें।
चिदंबरम ने बजट में घोषित चिकित्सा बीमा योजना को अब तक का सबसे बड़ा जुमला बताते हुए कहा कि 10 करोड़ परिवारों को पांच लाख रुपये के बीमा में शामिल करने पर 1.50 लाख करोड़ रुपये की प्रीमियम राशि का इंतजाम कहां से करेगी सरकार, इसका बजट में कोई उपाय नहीं बताया है।
सत्तापक्ष की नारेबाजी के बीच चिदंबरम ने लगभग 40 मिनट के अपने भाषण में सरकार की आर्थिक नीतियों को भारत की जनता के साथ धोखा बताते हुए भविष्य में इसके गंभीर प्रभावों की ओर आगाह किया।









