एमनेस्टी इंटरनेशनल ने प्रदर्शनकारियों के अधिकारों को लेकर चिंता जताई
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल ने दिल्ली और मुंबई में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद प्रदर्शनकारियों के अधिकारों को लेकर चिंता जताई है।
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने शुक्रवार को कहा कि विरोध प्रदर्शन करने के लिए सरकार की मंज़ूरी की ज़रूरत नहीं है। संगठन के मुताबिक़, शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार भारतीय संविधान के तहत मिला है।
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने एक्स पर लिखा, "विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार सरकार की मंज़ूरी पर निर्भर नहीं है। यह भारतीय संविधान और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार क़ानून के तहत सुरक्षित है।"
"दिल्ली और मुंबई में प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग कर रहे हैं। यह मांग चुनाव आयोग की मतदाता सूचियों में किए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चल रहे विवाद के बीच की जा रही है। 2025 से अब तक मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक लोगों के नाम हटाए जा चुके हैं।"
"अधिकारियों ने प्रदर्शनों पर रोक लगाने के आदेश जारी किया, सैकड़ों शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को गिरफ़्तार किया और इंटरनेट व सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को बंद किया।"
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने लिखा, "ये क़दम अभिव्यक्ति की आज़ादी और शांतिपूर्ण तरीक़े से एक जगह इकट्ठा होने के अधिकार पर खुला हमला हैं। जिन लोगों को बिना उचित कारण हिरासत में लिया गया है, उन्हें तुरंत रिहा किया जाना चाहिए और अधिकारियों को उनके विरोध प्रदर्शन करने के अधिकार की गारंटी देनी चाहिए।"
दरअसल, दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था और नई दिल्ली के कई इलाक़ों में धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू की गई थी।
बीबीसी संवाददाता दिलनवाज़ पाशा के अनुसार, इस दौरान जंतर मंतर पर पहुंचने से पहले ही सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया था।
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