भारत

नूपुर शर्मा को सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार, उदयपुर की घटना के लिए 'ज़िम्मेदार' बताया

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा को कड़ी फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने नूपुर शर्मा की ही अर्ज़ी पर सुनवाई करते हुए कहा है कि नूपुर शर्मा के बयान ने पूरे देश में अशांति फैला दी।

बीजेपी से निलंबित नूपुर शर्मा ने पैग़ंबर विवाद में उनके ख़िलाफ़ भारत के अलग-अलग राज्यों में दर्ज हुई सभी एफ़आईआर को दिल्ली शिफ़्ट करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अर्ज़ी दी थी।

उनकी याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने नूपुर शर्मा के बयानों को उदयपुर में हुई दुर्भाग्यपूर्ण वारदात के लिए ज़िम्मेदार बताया।

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश सूर्यकांत और जेबी परदीवाला की अवकाशकालीन बेंच ने नूपुर शर्मा की अर्ज़ी पर विचार करने से इनकार करते हुए उन्हें हाई कोर्ट जाने को कहा है। इसके बाद नूपुर शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट से अपनी अर्ज़ी वापस ले ली।

नूपुर शर्मा ने जून 2022 में एक टीवी डिबेट के दौरान पैग़ंबर मोहम्मद पर विवादित टिप्पणी की थी, जिसके विरोध में भारत के कई राज्यों में उनके ख़िलाफ़ लगभग एक दर्जन एफ़आईआर दर्ज कराई गई थीं।

इस बयान के विरोध में 16 से अधिक मुस्लिम देश आ गए थे और भारत सरकार के समक्ष आधिकारिक तौर पर विरोध दर्ज कराया था।

हालाँकि, बाद में भारत सरकार ने कहा था कि ये कुछ फ़्रिंज एलिमेंट की ओर से दिए गए बयान हैं और ये भारत सरकार के विचारों को नहीं दर्शाते।

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियाँ

सुप्रीम कोर्ट ने अपनी सुनवाई के दौरान नूपुर शर्मा की टिप्पणियों को ''तकलीफ़देह'' बताया और कहा- ''उनको ऐसा बयान देने की क्या ज़रूरत थी?''

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने ये भी सवाल किया कि एक टीवी चैनल का एजेंडा चलाने के अलावा ऐसे मामले पर डिबेट करने का क्या मक़सद था, जो पहले ही न्यायालय के अधीन है।

सुप्रीम कोर्ट ने नूपुर शर्मा की बयानबाज़ी पर सवाल किया और कहा, ''अगर आप एक पार्टी की प्रवक्ता हैं, तो आपके पास इस तरह के बयान देने का लाइसेंस नहीं है।''

नूपुर शर्मा की ओर से पेश हुए सीनियर वकील मनिंदर सिंह ने कहा कि उनके मुवक्किल ने अपने बयान को तत्काल वापस ले लिया है और इसके लिए माफ़ी भी मांगी है।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने इससे नाख़ुशी ज़ाहिर करते हुए कहा कि नूपुर को टीवी पर जाकर पूरे देश से माफ़ी मांगनी चाहिए थी।

सुप्रीम कोर्ट ने नूपुर शर्मा के वकील से कहा, ''नूपुर शर्मा ने बहुत देर कर दी और बयान को भी सशर्त वापस लिया। उन्होंने (नूपुर) कहा कि अगर किसी की भावनाएं आहत हुई तो वो माफ़ी मांगती हैं।''

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ''जिस तरह से नूपुर शर्मा ने देशभर में भावनाओं को उकसाया, वैसे में ये देश में जो भी हो रहा है उसके लिए वो अकेली ज़िम्मेदार हैं।''

सुप्रीम कोर्ट में अर्ज़ी दायर करने पर भी नाख़ुशी जताते हुए शीर्ष न्यायालय ने कहा, ''ये याचिका नूपुर के अहंकार को दिखाती है, ऐसा लगता है कि देश के मजिस्ट्रेट उनके लिए बहुत छोटे हैं।''

सुप्रीम कोर्ट ने नूपुर शर्मा के वकील से ये भी कहा, ''जब आपके ख़िलाफ़ एफ़आईआर हो और आपको गिरफ़्तार नहीं किया जाए, तो ये आपकी पहुँच को दिखाता है। उन्हें लगता है उनके पीछे लोग हैं और वो ग़ैर-ज़िम्मेदार बयान देती रहती हैं।''

उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दिया

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भारत के राज्य महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया है।

बहुमत परीक्षण पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के कुछ वक़्त बाद सोशल मीडिया पर लाइव आकर उद्धव ठाकरे ने कहा कि वो नहीं चाहते कि शिवसैनिकों का ख़ून बहे। इसलिए वो महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री का पद छोड़ रहे हैं। उद्धव ठाकरे ने कहा कि उन्हें पद छोड़ने का कोई दुख नहीं है।

उद्धव ठाकरे ने कहा कि वो विधान परिषद की सदस्यता भी छोड़ रहे हैं।

इसके बाद वो राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को इस्तीफ़ा देने राजभवन पहुंचे।

इसके पहले बुधवार, 29 जून 2022 की रात करीब नौ बजे सुप्रीम कोर्ट ने बहुमत परीक्षण पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।

महाराष्ट्र के राज्यपाल ने गुरुवार, 30 जून 2022 की सुबह 11 बजे बहुमत परीक्षण के लिए कहा था।

उद्धव ठाकरे ने शिवसेना के बाग़ी विधायकों पर भी निशाना साधा।

उद्धव ठाकरे ने अपने संबोधन की शुरुआत महाविकास अघाड़ी गठबंधन के सदस्य दलों कांग्रेस और एनसीपी को धन्यवाद देने के साथ की। उन्होंने ढाई साल के कार्यकाल में सरकार की उपलब्धियों को गिनाया।

उद्धव ठाकरे ने अपने संबोधन में क्या-क्या कहा?

- मैं कुर्सी छोड़ रहा हूं। पिछले बुधवार को ही मैंने 'वर्षा' (महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री का आवास) छोड़ दिया था और 'मातोश्री' (बाल ठाकरे का आवास) आ गया था। मुझे मुख्यमंत्री पद छोड़ने का कोई दुख नहीं है।

- जब कुछ अच्छा हो रहा होता है तो नज़र तो लगती ही है

- जिन लोगों को बाला साहब ठाकरे ने बड़ा बनाया, जिन सामान्य लोगों को बाला साहेब ठाकरे और शिवसेना ने बड़ा बनाया, वे आज उन्हें भूल गए हैं।

- सुप्रीम कोर्ट ने आज जो भी फ़ैसला दिया है, हम उसका सम्मान करते हैं और उसका पालन करेंगे।

- बाग़ी विधायकों को अगर कोई शिकायत थी तो सूरत या गुवाहाटी के बजाय मातोश्री आकर अपनी बात रखनी चाहिए थी।

- शिवसेना हमसे कोई छीन नहीं सकता।

- शिवसैनिकों से अनुरोध है कि बाग़ी विधायकों के ख़िलाफ़ कोई प्रदर्शन ना करें।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फ़ैसले में क्या कहा?

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार, 29 जून 2022 को महाराष्ट्र में जारी सियासी संग्राम पर फ़ैसला देते हुए कहा है कि विधानसभा में फ़्लोर टेस्ट नहीं रोका जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्य कांत और जेबी पार्डीवाला की अवकाश पीठ ने शिवसेना नेता सुनील प्रभू की याचिका पर सुनवाई के बाद ये फ़ैसला दिया।

महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने बुधवार, 29 जून 2022 को आदेश जारी कर 30 जून 2022 की सुबह 11 बजे विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया था।

इसका उद्देश्य उद्धव ठाकरे सरकार का शक्ति परीक्षण था।

शिव सेना नेता सुरेश प्रभू ने राज्यपाल के इसी फ़ैसले को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

सुरेश प्रभू ने अपनी याचिका में कहा था कि राज्यपाल द्वारा फ़्लोर टेस्ट कराने का फ़ैसला ग़ैर-कानूनी है क्योंकि उन्होंने इस पर ध्यान नहीं दिया कि डिप्टी स्पीकर ने 39 में से 16 विधायकों को अयोग्यता नोटिस जारी किया है।

सुरेश प्रभू ने ये भी कहा है कि 39 में से किसी भी विधायक ने महाविकास अगाड़ी सरकार से अपना समर्थन वापस नहीं लिया है।

ज्ञानवापी मस्जिद मामला : सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा?

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानवापी मस्जिद मामले पर सुनवाई करते हुए मंगलवार, 17 मई, 2022 को आदेश दिया है कि मस्जिद परिसर में जिस जगह शिवलिंग मिलने की बात कही जा रही है, उस जगह को संरक्षित रखा जाए। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मुस्लिम पक्ष के वहाँ नमाज़ पढ़ने पर कोई रोक नहीं होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई की अगली तारीख गुरुवार, 19 मई, 2022 को तय की है।

हालांकि निचली अदालत में ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर चल रही कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने कोई रोक नहीं लगाई है। मुस्लिम पक्ष की ओर से ये मांग की गई थी कि ज्ञानवापी मस्जिद में यथास्थिति बरकरार रखी जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, "वाराणसी की अदालत के फ़ैसले पर हुए विवाद का निराकरण करते हुए ये आदेश दिया जाता है कि 16 मई 2022 का आदेश केवल इसी हद तक प्रभावी रहेगा कि वाराणसी के ज़िलाधिकारी ये सुनिश्चित करेंगे कि अगर जिस जगह पर शिवलिंग पाया गया है, अगर वहां किसी के कदम पड़े तो उससे क़ानून और व्यवस्था की समस्या पैदा हो जाएगी।''

सुप्रीम कोर्ट ने ये भी स्पष्ट किया है कि मुसलमान वहां पर वजू भी कर सकेंगे क्योंकि ये उनकी धार्मिक प्रक्रिया का हिस्सा है।

मुस्लिम पक्ष का प्रतिनिधित्व कर रहे एडवोकेट हुज़ेफ़ा अहमदी ने जब अदालत से वजू की प्रक्रिया को संरक्षित करने की मांग की तो सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा, "क्या वजू धार्मिक क्रिया नहीं है? हम इसे भी संरक्षित कर रहे हैं।''

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से इस मामले में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता प्रतिनिधित्व कर रहे थे। उनके विरोध के बाद कोर्ट ने वाराणसी के सिविल कोर्ट में ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर चल रही सुनवाई पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।

इससे पहले सोमवार, 16 मई, 2022 को वाराणसी की एक अदालत ने ज़िला प्रशासन को ज्ञानवापी मस्जिद परिसर की उस जगह को सील करने का आदेश दिया था जहाँ सर्वे करने वाली टीम में शामिल हिन्दू पक्ष ने कथित शिवलिंग मिलने का दावा किया था। जबकि मुस्लिम पक्ष ने इसे फव्वारा कहा है।

मंगलवार, 17 मई, 2022 को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और पीएस नरसिम्हा की खंडपीठ के सामने अंजुमन इंतेज़ामिया मस्जिद की प्रबंध कमेटी की याचिका पर सुनवाई हुई। यही कमेटी ज्ञानवापी मस्जिद की देखरेख करती है।

शुक्रवार, 13 मई, 2022 को भारत के चीफ़ जस्टिस एनवी रमन्ना की अगुवाई वाली बेंच ने अपने लिखित आदेश में इस मामले पर जस्टिस चंद्रचूड़ के नेतृत्व वाली बेंच को सुनवाई के लिए कहा था।

शुक्रवार, 13 मई, 2022 को चीफ़ जस्टिस एनवी रमन्ना की अगुवाई वाली बेंच ने मुस्लिम पक्ष की याचिका पर ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में चल रहे सर्वे के ख़िलाफ़ यथास्थिति बनाए रखने के लिए कोई अंतरिम आदेश जारी करने से इनकार कर दिया था।

शुक्रवार, 13 मई, 2022 की सुनवाई में क्या हुआ था?

लेकिन सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर सुनवाई के लिए सहमत हो गई। इस बेंच में चीफ़ जस्टिस के अलावा जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस हिमा कोहली भी शामिल थे।

बेंच ने कहा, ''याचिकाकर्ता की तरफ़ से पैरवी कर रहे वरिष्ठ वकील हुज़ेफ़ा अहमदी की बात सुनने के बाद हमारा ये मानना है कि इस मामले पर अदालत की रजिस्ट्री को जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ के नेतृत्व वाली बेंच के सामने सुनवाई के लिए इस केस को लिस्ट करने का निर्देश दिया जाए।''

अंजुमन इंतेज़ामिया मस्जिद की प्रबंध कमेटी का पक्ष रख रहे हुज़ेफ़ा अहमदी ने बेंच से कहा कि ज्ञानवापी मस्जिद में चल रहे सर्वे कार्य के ख़िलाफ़ याचिका दायर की गई है और उन्होंने इस मामले में अदालत से अंतरिम आदेश जारी किए जाने की मांग की।

हुज़ेफ़ा अहमदी ने कहा कि ज्ञानवापी मस्जिद में सर्वे कराए जाने के आदेश के ख़िलाफ़ हमने एक याचिका दायर की है। ये जगह पुराने समय से मस्जिद रही है और धार्मिक उपासना स्थल क़ानून, 1991 के तहत भी इस तरह की किसी कार्रवाई पर पूरी तरह से रोक है।

मुस्लिम पक्ष की ओर से प्लेस ऑफ़ वरशिप (स्पेशल प्रोविजंस) ऐक्ट, 1991 और इसके सेक्शन चार का हवाला दिया गया है।

ये प्रावधान 15 अगस्त, 1947 को मौजूद किसी भी उपासना स्थल के धार्मिक चरित्र में किसी तरह के बदलाव के लिए कोई मुक़दमा दायर करने या किसी किस्म की क़ानूनी प्रक्रिया शुरू करने पर रोक लगाता है।

सुप्रीम कोर्ट में ऑक्सीजन पर कोई रिपोर्ट पेश नहीं हुई: मनीष सिसोदिया

भारतीय मीडिया में ऐसी ख़बरें हैं कि भारत की सर्वोच्च अदालत द्वारा गठित एक 'ऑक्सीजन ऑडिट कमेटी' ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि 'केजरीवाल सरकार ने कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान ज़रूरत से चार गुना ज़्यादा ऑक्सीजन की माँग की'।

लेकिन आम आदमी पार्टी ने ऐसी किसी रिपोर्ट के अस्तित्व पर ही सवाल उठा दिए हैं।

अख़बारों मे छपी ख़बरों के मुताबिक, दिल्ली सरकार को असल में क़रीब 289 मैट्रिक टन ऑक्सीजन की दरकार थी, लेकिन उनके द्वारा क़रीब 1,200 मैट्रिक टन ऑक्सीजन की माँग की गई।

आम आदमी पार्टी से जुड़े लोगों का कहना है कि ये रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के पेनल की नहीं, बल्कि एक सब-पेनल की है जो मुख्य पेनल को भेजी गई है और ये सब-पेनल दरअसल केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार का ही है। गौरतलब है कि केंद्र में बीजेपी की सरकार है।

आम आदमी पार्टी का जवाब

आम आदमी पार्टी ने इस ख़बर का पुरजोर खंडन किया है। आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने मीडिया को बताया कि ऐसी कोई रिपोर्ट है ही नहीं।

मनीष सिसोदिया ने कहा, "सच ये है कि ऐसी कोई रिपोर्ट है ही नहीं। बीजेपी झूठ बोल रही है। सुप्रीम ने एक ऑक्सीजन ऑडिट कमेटी बनाई है। हमने इसके कई सदस्यों से बात की है। उनका कहना है कि उन्होंने तो रिपोर्ट साइन ही नहीं की है। अगर रिपोर्ट अप्रूव नहीं है, तो ये रिपोर्ट है कहां? मैं चुनौती देता हूं कि रिपोर्ट लाइए जो अप्रूव की गई हो। झूठ की इंतहा होती है।''

मीडिया में छपी ख़बरों में कहा गया था कि केजरीवाल सरकार की ज़रुरत से अधिक माँग का असर उन 12 राज्यों पर देखा गया जहाँ ऑक्सीजन की कमी से कई मरीज़ों को अपनी जान गँवानी पड़ी।

भारत में कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की भारी किल्लत देखने को मिली थी। कई बार ऐसी ख़बरें आयीं थी कि ऑक्सीजन की कमी के चलते रातोंरात कई मरीज़ों की मौत हो गई।

उस दौर में केजरीवाल सरकार ने केंद्र सरकार से ऑक्सीजन की माँग की थी।

इस कथित रिपोर्ट के आधार पर भारतीय जनता पार्टी के कई नेता अब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को घेर रहे हैं।

विजय माल्या, नीरव मोदी और मेहुल चोकसी की ज़ब्त संपत्ति का 9371 करोड़ रुपए बैंको को दिया गया: ईडी

भारत के प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी (डायरेक्टोरेट ऑफ एन्फ़ोर्समेंट) ने फ़रार कारोबारी विजय माल्या, मेहुल चोकसी और नीरव मोदी की ज़ब्त की गई संपत्ति में से 9371.17 करोड़ रुपए सरकारी बैंकों को ट्रांसफर कर दिया है।

जाँच एजेंसियों का कहना है कि इन कारोबारियों की वित्तीय धोखाधड़ी के कारण बैंकों को भारी नुक़सान हुआ है। ईडी ने इन कारोबारियों की कुल 18,170.02 करोड़ रुपए की क़ीमत की संपत्ति को अटैच किया है।

ईडी की तरफ़ से जारी बयान में कहा गया है, "ईडी ने न केवल 18,170.02 करोड़ रुपए की संपत्ति ज़ब्त की है बल्कि विजय माल्या, नीरव मोदी और मेहुल चोकसी मामले में पीएमएलए के तहत 9371.17 करोड़ रुपए सरकारी बैंकों और केंद्र सरकार को दे दिया गया है।"

ईडी का कहना है कि तीनों कारोबारियों की जितनी संपत्ति ज़ब्त की गई है वो बैंकों के नुक़सान का 80.45 फ़ीसदी है।

भारत तीन फ़रार कारोबारियों को विदेशों से वापस लाने की कोशिश कर रहा है। विजय माल्या और नीरव मोदी ब्रिटेन में हैं। फ़रवरी 2021 में ब्रिटेन की गृह मंत्री प्रीति पटेल ने नीरव मोदी को भारत भेजने के आदेश पर हस्ताक्षर किया था।

उसी तरह विजय माल्या को वापस लाने के लिए भी ब्रिटेन में क़ानूनी प्रक्रिया चल रही है। विजय माल्या पर 9,000 करोड़ रुपए की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है।

मोदी के साथ बैठक से पहले ग़ुलाम नबी आज़ाद ने कहा, पूर्ण राज्य की बहाली इस बैठक का टॉप एजेंडा है

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ जम्मू-कश्मीर के नेताओं की 24 जून 2021 को होने वाली बैठक से पहले कांग्रेस के नेता और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री ग़ुलाम नबी आज़ाद ने कहा कि पूर्ण राज्य की बहाली इस बैठक का टॉप एजेंडा है।

पाँच अगस्त, 2019 को मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा ख़त्म किया था तो पूर्ण राज्य का दर्जा वापस ले लिया था और जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बाँट दिया था।

ग़ुलाम नबी आज़ाद को भी 24 जून 2021 को होने वाली इस बैठक में आमंत्रित किया गया है। ग़ुलाम नबी आज़ाद ने अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस से कहा है कि इस बैठक में पूर्ण राज्य की बहाली अहम मुद्दा है लेकिन वे अनुच्छेद 370 को फिर से लागू करने की मांग करेंगे या नहीं। इस पर कुछ नहीं बोले।

पाँच अगस्त, 2019 को जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा ख़त्म किए जाने के बाद मोदी सरकार वहाँ के नेताओं के साथ पहली बार इस तरह की वार्ता करने जा रही है।

ग़ुलाम नबी आज़ाद ने कहा कि पूर्ण राज्य की बहाली की बात संसद में भी कही गई थी। क्या ग़ुलाम नबी आज़ाद जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 को फिर से लागू किए जाने की मांग करेंगे?

इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, "मैं इस मामले में जम्मू और कश्मीर के कांग्रेस नेताओं से बात कर रहा हूँ। इसके बाद मैं पार्टी से मार्गदर्शन लूंगा। इसके लिए कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से बात करूंगा। इसके साथ ही उन सहकर्मियों से भी बात करूंगा जो इसमें प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से शामिल रहे हैं। अभी इस बारे में कुछ भी कहना जल्दबाज़ी होगी। हाँ मैं, ये ज़रूर कह सकता हूँ कि पूर्ण राज्य की बहाली हमारा टॉप एजेंडा है।''

मुस्लिम और महिलाओं के बीच वैक्सीन को लेकर भ्रम पर राहुल ने क्या कहा?

भारत में कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा सांसद राहुल गाँधी ने सीओवीआईडी-19 पर ज़ूम प्रेस कॉन्फ़्रेंस में मंगलवार, 22 जून 2021 को केंद्र की मोदी सरकार की जमकर आलोचना की।

राहुल ने कहा कि प्रधानमंत्री के आँसू बहाने से लोग नहीं बचेंगे। राहुल ने कहा, "सब परिवार जानते हैं तो उनके परिवार के लोग मरे तो वहाँ प्रधानमंत्री नहीं थे। प्रधानमंत्री के आँसू ने उन्हें नहीं बचाया था। प्रधानमंत्री ने ऑक्सीजन की ज़रूरत को गंभीरता से नहीं लिया। प्रधानमंत्री की प्राथमिकता तब चुनाव था लेकिन लोग मर रहे थे।"

राहुल गांधी ने कहा कि निजी अस्पतालों में पैसे से वैक्सीन लगाई जा रही है लेकिन दुनिया के बाक़ी देशों में बिना पैसे के वैक्सीन लगाई जा रही है।  राहुल ने कहा कि प्रधानमंत्री की मार्केटिंग का नतीजा पूरी दुनिया ने देखा है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि सीओवीआईडी के ख़िलाफ़ जंग में जीत की घोषणा करने में जल्दीबाज़ी करने का कोई मतलब नहीं है।

राहुल ने कहा, ''मैं पिछले डेढ़ साल से कह रहा हूँ कि सीओवीआईडी देश को बहुत बड़ा नुकसान पहुँचाएगा। सीओवीआईडी को लेकर केवल मैं सरकार को आगाह नहीं कर रहा था बल्कि कई लोग कर रहे थे। वैक्सीन की दूसरी डोज़ में देरी राजनीतिक वजह है। वैक्सीन की कमी है इसलिए देरी की जा रही है। प्रधानमंत्री को ये समझना है कि ये कोई राजनीतिक लड़ाई नहीं है। ये वायरस के ख़िलाफ़ लड़ाई है और पूरा हिन्दुस्तान साथ खड़ा है।''

राहुल गाँधी ने कहा, "वैक्सीन के नतीजों की जाँच होनी चाहिए और लगे कि सही नहीं है तो बदलनी चाहिए। केंद्र सरकार लोगों से ही टैक्स ले रही है और अगर आज लोगों को ज़रूरत है तो वो हाथ खड़े कर रही है। जिन्होंने अपने परिवारों को खोया है, उन्हें मदद की ज़रूरत है।''

मुस्लिम और महिलाओं के बीच वैक्सीन को लेकर ऊहापोह की स्थिति के सवाल पर राहुल गाँधी ने कहा कि अगर स्पष्टता से उन्हें समझाया जाए तो इसे आराम से ठीक किया जा सकता है। राहुल ने कहा कि जागरूकता अभियान चलाना चाहिए। राहुल से इस प्रेस कॉन्फ़्रेंस में एक सवाल पूछा गया था कि मुस्लिम और महिलाओं के बीच वैक्सीन को लेकर कई तरह के भ्रम हैं।

राहुल गांधी ने कहा, ''जब कोरोना की तीसरी लहर आए तो दूसरी लहर की दिक़्क़तें ना हों ताकि हज़ारों की जान बचाई जा सके। सरकार को किसी भी राज्य को सीओवीआईडी के ख़िलाफ़ लड़ाई में बीजेपी और कांग्रेस शासित राज्य के रूप में नहीं देखना चाहिए। वायरस म्यूटेट करेगा तो ये नहीं देखेगा।''

होटलों के कोरोना वैक्सीन पैकेज देने पर केंद्र सरकार नाराज

भारत में केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा है कि वो उन संस्थाओं के ख़िलाफ़ क़ानूनी और प्रशासनिक कदम उठाएं जो सीओवीआईडी-19 के मद्देनज़र जारी किए गए दिशानिर्देशों का उल्लंघन करके कोरोना टीकाकरण का पैकेज दे रही हैं।

भारत सरकार ने कहा है कि इसे तुरंत रोका जाना चाहिए।

रविवार, 30 मई 2021 को इस बारे में भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव मनोहर अगानी ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एक पत्र लिखा है।

पत्र में कहा गया है, ''स्वास्थ्य मंत्रालय के संज्ञान में आया है कि होटलों के साथ मिल कर कुछ निजी अस्पताल सीओवीआईडी वैक्सीनेशन पैकेज दे रहे हैं। ये राष्ट्रीय सीओवीआईडी टीकाकरण कार्यक्रम के लिए जारी किए गए दिशानिर्देशों का उल्लंघन है।''

अपने पत्र में मनोहर अगानी ने लिखा कि सरकारी और निजी कोरोना वैक्सीनेशन सेंटर्स के अलावा काम की जगहों और बड़े-बूढ़ों और अक्षम लोगों के लिए घरों में कोरोना टीकाकरण किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि इसके अलावा स्टार होटलों जैसी किसी और जगह पर टीकाकरण करना दिशानिर्देशों का उल्लंघन है इसे तुंरत बंद किया जाना चाहिए।

कोरोना वैक्सीन: जून 2021 के लिए 12 करोड़ डोज़ उपलब्ध, केंद्र ने बताया राज्यों को टीका कैसे मिलता है?

भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया है कि देश भर में कोरोना टीकाकरण अभियान के लिए जून 2021 में वैक्सीन की करीब 12 करोड़ डोज़ उपलब्ध कराई जाएगी।

प्रेस इन्फ़ॉर्मेशन ब्यूरो के जरिए जारी किए गए बयान में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि मई 2021 के लिए वैक्सीन की 7,94,05,200 डोज़ मौजूद है।

बयान में कहा गया है कि भारत सरकार राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को वैक्सीन का आवंटन कई मानकों के आधार पर करती है।

उदाहरण के लिए, वहाँ की आबादी कितनी है, वैक्सीन की खपत कितनी है और कितनी वैक्सीन बर्बाद हो रही है यानी कितनी वैक्सीन का इस्तेमाल नहीं हो रहा है।

जून 2021 के लिए वैक्सीन की उपलब्धता के बारे में राज्यों को जानकारी दे दी गई है।

कोरोना: 24 घंटे में 1,65,553 नए मामले, 3,460 लोगों ने जान गँवाई

पिछले 24 घंटे में भारत में कोरोना संक्रमण के 1,65,553 नए मामले सामने आए हैं और इस दौरान 3,460 लोगों की मौत हुई है।

इसी के साथ भारत में कोरोना वायरस संक्रमण के कुल 2,78,94,800 मामले हो गए हैं जिनमें 21,14,508 एक्टिव मामले हैं।

इंडियन काउंसिल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के अनुसार पिछले 24 घंटों में 20,63,839 सैंपल्स का सीओवीआईडी-19 के लिए टेस्ट किया गया।

सीओवीआईडी-19 की चपेट में आकर अब तक कुल 3,25,972 लोगों की मौत हुई है और 2,54,54,320 लोग इलाज के बाद ठीक हो गए हैं।

भारत में अब तक कुल 21,20,66,614 लोगों को कोरोना की वैक्सीन लगाई जा चुकी है।

लॉकडाउन: भारत की जीडीपी 2021 में 2019 से भी कम रह सकती है: यूएन रिपोर्ट

कोरोना महामारी से लड़ने के लिए व्यापक पैमाने पर टीकाकरण अभियान की शुरुआत करने के बावजूद साल 2021 के लिए भारत का सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी का स्तर साल 2019 के स्तर से नीचे रहने की आशंका है।

एशिया प्रशांत क्षेत्र के लिए संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक आयोग (यूएनईएससीएपी) ने मंगलवार, 30 मार्च 2021 को एक रिपोर्ट जारी की है।

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में कोरोना महामारी के शुरू होने से पहले ही जीडीपी और निवेश धीमा पड़ चुका था।

रिपोर्ट के अनुसार कोरोना महामारी को फैलने से रोकने के लिए लगाए गए पूर्ण लॉकडाउन के कारण 2020 की दूसरी तिमाही (अप्रैल से जून 2020) में आर्थिक बाधाएं अपने चरम पर थीं।

लॉकडाउन में ढील दिए जाने के बाद अर्थव्यवस्था पटरी पर लौटना शुरू हुई लेकिन सालाना आधार पर शून्य के क़रीब आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान के साथ चौथी तिमाही में अर्थव्यवस्था की गति हल्की पड़ गई।

एशिया प्रशांत क्षेत्र के लिए संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक आयोग की रिपोर्ट के अनुसार 2021-22 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर के सात फीसद रहने का अनुमान है जबकि इससे पहले के साल में यानी 2020-21 में कोरोना महामारी और उसके असर के कारण इसमें 7.7 फीसदी से अधिक के गिरावट होने का अनुमान है।

भारत-पाकिस्तान संबंध: नरेंद्र मोदी की चिट्ठी के जवाब में आई इमरान ख़ान की चिट्ठी

पाकिस्तान दिवस की मुबारकबाद देते हुए पीएम इमरान ख़ान को लिखी गई पीएम नरेंद्र मोदी की चिट्ठी का जवाबी खत पाकिस्तान से आ गया है।  

पाकिस्तान के पीएम इमरान ख़ान ने इस जवाबी खत में 29 मार्च 2021 को लिखा है, ''पाकिस्तान दिवस की शुभकामनाओं के साथ भेजी गई चिट्ठी के लिए मैं आपको शुक्रिया अदा करता हूं।''

पीएम इमरान ख़ान ने आगे लिखा है, ''पाकिस्तान के लोग अपने संस्थापकों की दूरदर्शिता और बुद्धिमत्ता को श्रद्धांजलि देने के लिए ये दिवस मनाते हैं जिन्होंने एक स्वतंत्र, संप्रभु राज्य की परिकल्पना की थी और जहां लोग आज़ादी से रह सकें और अपनी पूरी क्षमता को हासिल कर सकें।''

पीएम इमरान ख़ान ने लिखा, ''पाकिस्तान के लोग भी भारत समेत अपने सभी पड़ोसी देशों के साथ शांतिपूर्ण और सहयोगपूर्ण रिश्ते चाहते हैं। हम इस बात को लेकर निश्चिंत हैं कि दक्षिण एशिया में स्थाई शांति और स्थिरता भारत और पाकिस्तान के बीच सभी मुद्दों, जिनमें ख़ासतौर पर जम्मू और कश्मीर का विवाद शामिल है, के सुलझ जाने से जुड़ी है।''

इमरान ख़ान ने लिखा, ''एक सकारात्मक और नतीजा देने वाली बातचीत के लिए अनुकूल माहौल बनाना ज़रूरी है। मैं इस मौके पर भारत के लोगों को सीओवीआईडी-19 की महामारी के ख़िलाफ़ लड़ाई में शुभकामनाएं भी देना चाहता हूं।''

इमरान के नाम मोदी की चिट्ठी में क्या लिखा था

इससे पहले भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को पाकिस्तान दिवस की मुबारकबाद देते हुए लिखा था कि एक पड़ोसी देश के तौर पर भारत, पाकिस्तान के लोगों के साथ ख़ुशगवार रिश्ते चाहता है।

22 मार्च 2021 को लिखी गई इस चिट्ठी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लिखा, ''ऐसा संभव बनाने के लिए आतंकवाद और शत्रुता से मुक्त एवं विश्वास और भरोसे से भरे माहौल की ज़रूरत है।''

वहीं भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ़ अल्वी के नाम लिखे पत्र में पाकिस्तान दिवस की मुबारकबाद पेश की थी।

नरेंद्र मोदी ने इमरान ख़ान को ये ख़त ऐसे वक़्त में लिखा था जब दोनों देशों के बीच लाइन ऑफ़ कंट्रोल पर नए सिरे से संघर्ष-विराम लागू किया गया है।

भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम

फरवरी 2021 में दोनों देशों के मिलिट्री ऑपरेशन के डायरेक्टर जनरल (डीजीएमओ) ने एक साझा बयान जारी करते हुए नियंत्रण रेखा पर अचानक संघर्ष-विराम की घोषणा की थी।

तब से सीमा पर पहले के मुक़ाबले शांति है और दोनों तरफ़ से संघर्ष विराम का पूर्ण पालन किया जा रहा है।

वहीं सिंधु नदी जल वार्ता के लिए पाकिस्तान का आठ सदस्यीय एक दल इंडस वॉटर कमिश्नर सैयद मेहर-ए-आलम के नेतृत्व में भारत में अपने समकक्षों के साथ नई दिल्ली में वार्ता कर रहा है। ये बातचीत दो साल बाद हो रही है।

हाल ही में पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा ने भी अपने एक बयान में कहा था कि दोनों देशों को पुरानी बातें भुलाकर आगे बढ़ना चाहिए।

शुभकामनाओं का सिलसिला

नरेंद्र मोदी ने अपने ख़त में लिखा था कि पाकिस्तान दिवस के मौके पर वो पाकिस्तान के लोगों को अपनी मुबारकबाद देना चाहते हैं।

मोदी ने इमरान ख़ान को संबोधित करते हुए लिखा कि इस मुश्किल वक़्त में वो उन्हें और पाकिस्तान के लोगों को सीओवीआईडी-19 की चुनौतियों से निबटने के लिए शुभकामनाएं देते हैं।

कुछ दिन पहले इमरान ख़ान जब कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए थे, तब भी भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके लिए शुभकामनाएं भेजी थीं।

भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में हाल के महीनों में अचानक आई गर्माहट के पीछे किसी तीसरे देश के होने के क़यास भी लगाए जा रहे हैं।

सऊदी अरब के उप-विदेश मंत्री आदिल अल जुबैर ने कुछ दिन पहले स्वीकार किया था कि सऊदी अरब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव को कम करने की कोशिशें कर रहा है।

संयुक्त अरब अमीरात का दावा

अरब न्यूज़ को दिए एक इंटरव्यू में आदिल अल जुबैर ने कहा था कि सऊदी अरब पूरे इलाके में अमन चाहता है और इसके लिए कोशिशें कर रहा है।

वहीं मीडिया रिपोर्टों में भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत में संयुक्त अरब अमीरात के मध्यस्थता करने का दावा भी किया गया है।

द हिंदू की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि संयुक्त अरब अमीरात की मध्यस्थता में भारत और पाकिस्तान के बीच पर्दे के पीछे बातचीत हुई है।

हालांकि भारत या पाकिस्तान ने इसकी पुष्टि नहीं की है। विश्लेषक ये भी मान रहे हैं कि हाल की घटनाएं पर्दे के पीछे चल रहीं गतिविधियों का नतीजा हैं।