भारत

भारत ने स्वदेशी सुपरसोनिक इंटरसेप्टर मिसाइल का सफल परीक्षण किया

भारत ने ओडिशा तट पर स्थित परीक्षण रेंज से स्वदेश में विकसित सुपरसोनिक इंटरसेप्टर मिसाइल का सफल परीक्षण किया। यह मिसाइल अपनी तरफ आने वाली दुश्मन की मिसाइल को मार गिराने में सक्षम है।

भारत के रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ''ओडिशा के अब्दुल कलाम द्वीप से आज सुबह साढ़े ग्यारह बजे डीआरडीओ ने बैलिस्टिक मिसाइल इंटरसेप्टर एडवांस्ड एरिया डिफेंस (एएडी) का सफल परीक्षण किया।''

परीक्षण को सफल करार देते हुए उसने कहा, ''मिशन के लक्ष्यों को सफलतापूर्वक हासिल किया गया। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) को सफल परीक्षण पर बधाई दी।

यह मिसाइल 15 से 25 किलोमीटर की ऊंचाई पर दुश्मन की तरफ से आने वाली मिसाइल को नष्ट करने में सक्षम है।

इस इंटरसेप्टर में नौवहन प्रणाली, एक हाईटेक कंप्यूटर और विद्युत-यांत्रिक उत्प्रेरक लगे हैं। इंटरसेप्टर मिसाइल का अपना खुद का मोबाइल लांचर होता है। इसके अलावा स्वतंत्र ट्रैकिंग क्षमता होती है, इसमें अत्याधुनिक रडार होता है। इंटरसेप्शन के लिए सुरक्षित डाटा लिंक भी होता है।

रक्षा मंत्रालय ने कहा कि वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल बी एस धनोआ इस परीक्षण के गवाह बने। इस मौके पर कई दूसरे वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। सूत्रों ने कहा कि इंटरसेप्टर, एक उन्नत वायु रक्षा मिसाइल है जिसे अभी कोई औपचारिक नाम नहीं दिया गया है। मिसाइल को डॉक्टर अब्दुल कलाम द्वीप के एकीकृत परीक्षण रेंज पर स्थित लॉन्चपैड संख्या-4 पर लगाया गया और यह समुद्र की सतह पर हवा में स्थित अपने लक्ष्य पर निशाना साधने के लिये बढ़ गई।

बहुस्तरीय बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली विकसित करने के प्रयासों के तहत विकसित यह प्रक्षेपास्त्र दुश्मन की तरफ से आने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों को नष्ट करने में सक्षम है।

एनआरसी प्रमाणन प्रक्रिया में पश्चिम बंगाल सबसे बड़ा डिफाल्टर था : आरजीआई

भारत के महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त शैलेश ने कहा कि राष्ट्रीय नागरिक पंजी संबंधी प्रमाणन प्रक्रिया में पश्चिम बंगाल सबसे बड़ा डिफाल्टर था। राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एन आर सी) संबंधी प्रमाणन प्रक्रिया उन लोगों से संबंधित हैं जो किसी दूसरे राज्य से हैं, लेकिन विभिन्न कारणों से असम में रहते हैं।
    
एन आर सी से जुड़ी समूची प्रक्रिया को देखने वाले भारत के महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त (आर जी आई) शैलेश ने यह भी कहा कि उन्होंने एनआरसी अधिकारियों द्वारा मांगे गए दस्तावेज एकत्र करने में पश्चिम बंगाल सरकार की मदद के लिए अपने खुद के स्टाफ तक को लगा दिया, लेकिन प्रयास बेकार रहे।
         
शैलेश ने कहा, ''सभी राज्यों में पश्चिम बंगाल ऐसा राज्य था जहां से हमें ज्यादातर दस्तावेज नहीं मिले। हमें संघर्ष करना पड़ा। हमें फॉलो अप करना पड़ा। पश्चिम बंगाल से हमें संतोषजनक संख्या में दस्तावेज नहीं मिले। पश्चिम बंगाल का जवाब संतोषजनक नहीं था।
    
असम के नागरिकों की सूची से संबंधित एन आर सी मसौदा गत 30 जुलाई को प्रकाशित हुआ था जिसमें असम में रहने वाले 40 लाख लोगों के नाम नहीं थे। ज्यादातर नाम भारतीय नागरिकता का सबूत देने वाले उचित दस्तावेजों की कमी के चलते बाहर किए गए। शैलेश ने यह भी कहा कि एन आर सी अधिकारियों और पश्चिम बंगाल के अधिकारियों के बीच वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक हुई और पश्चिम बंगाल से जवाब देने का आग्रह किया गया।
         
उन्होंने कहा, ''पश्चिम बंगाल अपवाद के रूप में एकमात्र ऐसा राज्य था जहां राज्य सरकार की मदद करने के लिए मुझे खुद का स्टाफ लगाना पड़ा। लेकिन हमें एन आर सी मसौदे के लिए सभी जरूरी दस्तावेज नहीं मिले। पश्चिम बंगाल द्वारा उपलब्ध नहीं कराए गए दस्तावेजों की संख्या के बारे में पूछे जाने पर शैलेश ने कहा कि यह एक बड़ी संख्या होगी।
         
आर जी आई की ये टिप्पणियां काफी मायने रखती हैं क्योंकि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी असम में एन आर सी मसौदे को लेकर भाजपा और केंद्र सरकार पर लगातार हमला बोल रही हैं। उनका आरोप है कि भाजपा वोट बैंक की राजनीति कर रही है।

ममता यह चेतावनी भी दे रही हैं कि इससे बांग्लादेश के साथ भारत के संबंध तबाह हो जाएंगे। उनका यह भी कहना है कि एन आर सी से बाहर किए गए 40 लाख लोगों में से केवल एक प्रतिशत लोग घुसपैठिया हो सकते हैं, लेकिन घुसपैठियों के नाम पर लोगों को प्रताड़ित किया जा रहा है।

ममता ने कल आरोप लगाया था कि असम में एन आर सी की प्रक्रिया लोगों को बांटने के लिए राजनीतिक उद्देश्य से की गई। उन्होंने चेतावनी दी कि इससे देश में रक्तपात और गृहयुद्ध छिड़ जाएगा। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि एक आकलन के मुताबिक पश्चिम बंगाल ने एन आर सी अधिकारियों द्वारा भेजे गए 1.14 लाख दस्तावेजों में से केवल छह प्रतिशत का ही जवाब दिया।
         
अन्य दूसरे बड़े डिफाल्टरों में बिहार, चंडीगढ़, मणिपुर और मेघालय थे जिन्होंने प्रमाणन के बाद महज दो से सात प्रतिशत दस्तावेजों को ही लौटाया। सूत्रों ने बताया कि एन आर सी के अंतिम मसौदे में कम से कम पांच लाख लोगों का नाम इसलिए शामिल नहीं किया गया क्योंकि दूसरे राज्य और केंद्रीय संगठन इन लोगों द्वारा किए गए नागरिकता के दावों की जांच करने और प्रमाणन के परिणाम वापस भेजने में असफल रहे।

सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली समूह के बैंक खाते, चल संपत्तियों को कुर्क करने का आदेश दिया

भारत में सुप्रीम कोर्ट ने निवेशकों से धोखाधड़ी करने और न्यायालय के साथ ओछा खेल खेलने के लिए आम्रपाली समूह को बुधवार को फटकार लगाई। साथ ही उसकी 40 फर्म के सारे बैंक खाते तथा चल संपत्तियों को कुर्क करने का आदेश दिया।

सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति उदय यू. ललित की पीठ ने आम्रपाली समूह को निर्देश दिया कि वह वर्ष 2008 से आज तक के अपने सारे बैंक खातों का विवरण पेश करे। न्यायालय ने इस समूह की 40 फर्म के सभी निदेशकों के बैंक खाते जब्त करने का भी आदेश दिया है।

शीर्ष अदालत ने आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के सचिव और नेशनल बिल्डिंग्स कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन इंडिया लिमिटेड के अध्यक्ष को न्यायालय की मंजूरी के बगैर ही समूह के मामलों में कार्यवाही करने को लेकर तलब किया है।

शीर्ष अदालत ने 17 मई को कानूनी लड़ाई में उलझे आम्रपाली समूह की अटकी हुई 12 परियोजनाओं को छह से 48 महीने के भीतर पूरा करने के लिए तीन को-डेवलपर को अपनी मंजूरी दी थी। न्यायालय ने इन परियोजनाओं को पूरा करने वाले को-डेवलपर को भुगतान करने के लिए आम्रपाली समूह को चार सप्ताह के भीतर 250 करोड़ एक एस्क्रो खाते में जमा करने का निर्देश दिया था। समूह की छह परियोजनाओं से 27,000 से 28,000 मकान खरीदारों को लाभ मिलेगा।

शीर्ष अदालत को आम्रपाली समूह द्वारा 2,700 करोड़ रुपए से भी अधिक की रकम को अन्यत्र ले जाने का 10 मई को पता चला था और इस संबंध में कंपनी द्वार किए गए वित्तीय कारोबारों का विवरण और इनके बैंक खातों के विवरण मांगे थे।

पीठ ने मकान खरीदारों की स्थिति का जिक्र करते हुए टिप्पणी करते हुए कहा था कि उन्हें इसी तरह से अधर में नहीं छोड़ा जा सकता। न्यायालय ने 25 अप्रैल को कहा था कि वह आम्रपाली समूह की परियोजनाओं को अपने हाथ में लेने की इच्छुक एक कंपनी की माली हालत और उसकी विश्वसनीयता के बारे में आश्वस्त होना चाहता है। इस कंपनी ने पहले एक हलफनामे पर न्यायालय को सूचित किया था कि वह इन परियोजनाओं को पूरा करने और 42,000 से अधिक मकान खरीदारों को समयबद्ध तरीके से फ्लैट का कब्जा देने की स्थिति में नहीं है।

अब शिक्षा और चिकित्सा फायदे का कारोबार बन चुके हैं : दिल्ली हाई कोर्ट

दिल्ली हाई कोर्ट ने निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम में नर्सों की स्थिति को लेकर दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान आज कहा कि शिक्षा और चिकित्सा धन ऐंठने वाले धंधे बन गए हैं।

दिल्ली हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी हरिशंकर की पीठ ने केंद्र को नोटिस जारी कर याचिका पर अपना रुख स्पष्ट करने को कहा है।

जनहित याचिका में दावा किया गया है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा नर्सों के अधिकारों की रक्षा को लेकर दिशा-निर्देश दिये जाने के बावजूद निजी चिकित्सा संस्थानों में नर्सों की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है।

केंद्र की ओर से अधिवक्ता मानिक डोगरा ने अदालत को बताया कि नर्सों के वेतन और काम से जुड़ी स्थितियों के बारे में दिशा-निर्देश तय किये जा चुके हैं और उन्हें लागू करना हर राज्य की जिम्मेदारी है।

पीठ ने कहा कि याचिका से नर्सों के शोषण का पता चलता है। उसने कहा कि अब शिक्षा और चिकित्सा फायदे का कारोबार बन चुके हैं।

पीठ इसी तरह की एक याचिका के साथ इस पीआईएल पर भी आठ अक्तूबर को आगे की सुनवाई करेगी।अधिवक्ता रोमी चाको की ओर से दायर याचिका में दावा किया गया है कि निजी चिकित्सा प्रतिष्ठानों में नर्स मामूली वेतन पर काम कर रही हैं और अमानवीय परिस्थितियों में रह रही हैं।

एनआरसी पर ममता बनर्जी की चेतावनी, देश में गृह युद्ध और रक्तपात छिड़ जाएगा

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आज आरोप लगाया कि असम में राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) की कवायद राजनैतिक उद्देश्यों से की गई ताकि लोगों को बांटा जा सके। उन्होंने चेतावनी दी कि इससे देश में रक्तपात और गृह युद्ध छिड़ जाएगा। ममता बनर्जी ने आज भारत के केंद्रीय गृह मंत्री से दिल्ली स्थित उनके सरकारी आवास पर मुलाकात की।

भाजपा पर हमला करते हुए उन्होंने कहा कि यह पार्टी देश को बांटने का प्रयास कर रही है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बनर्जी ने यहां एक सम्मेलन में कहा, ''एनआरसी राजनैतिक उद्देश्यों से किया जा रहा है। हम ऐसा होने नहीं देंगे। वे (भाजपा) लोगों को बांटने का प्रयास कर रहे हैं। इस स्थिति को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। देश में गृह युद्ध, रक्तपात हो जाएगा।

असम में रह रहे असली भारतीय नागरिकों की पहचान के लिये सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चल रही व्यापक कवायद के तहत अंतिम मसौदा सूची में 40 लाख से अधिक लोगों को जगह नहीं मिली है। इस मुद्दे की गूंज संसद के दोनों सदनों में सुनाई पड़ी।

भारत के केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने विपक्ष से अपील की कि वह इस संवेदनशील मामले का राजनीतिकरण नहीं करे क्योंकि सूची उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर प्रकाशित की गई है और केंद्र की इसमें कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने कहा कि एनआरसी की मसौदा सूची में जिन लोगों के नाम नहीं हैं, उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।

गौरव गोगोई का असम के एनआरसी के मसौदे पर स्पीच

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गौरव गोगोई और अधीर रंजन चौधरी असम के एनआरसी के मसौदे पर मीडिया को संबोधित किया

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असम के नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटीजन्स के मसौदे पर आनंद शर्मा द्वारा एआईसीसी प्रेस ब्रीफिंग

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वीरप्पा मोइली का दिवालियापन संहिता (दूसरा संशोधन) विधेयक, 2018 पर भाषण

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असम के नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन्स के मसौदे पर गुलाम नबी आजाद की टिप्पणी

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