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असम एनआरसी के अंतिम मसौदे के जारी होने पर आनंद शर्मा द्वारा एआईसीसी प्रेस ब्रीफिंग

असम एनआरसी के अंतिम मसौदे के जारी होने पर आनंद शर्मा द्वारा एआईसीसी प्रेस ब्रीफिंग

सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर फर्जी एनकाउंटर मामले में सीबीआई के निदेशक को फटकार लगाई

भारत में सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर फर्जी एनकाउंटर मामले में सीबीआई के निदेशक को फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई से सवाल किया है कि मणिपुर एनकाउंटर केस में अगर चार्जशीट फाइल हो चुकी है तो अब तक किसी की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई है?

सुप्रीम ने कहा, ''अगर हम सीबीआई की मानें तो मणिपुर में इस वक्त चार हत्यारे खुले घूम रहे हैं, अगर यही सब चलता रहा तो समाज का क्या हाल होगा?'' सुप्रीम कोर्ट के इन सवालों का सीबीआई ने जवाब दिया है।

सीबीआई के निदेशक ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि मणिपुर में सेना, असम राइफल्स और राज्य पुलिस द्वारा कथित फर्जी मुठभेड़ों के मामलों में दो आरोप पत्र दाखिल किए हैं और 31 अगस्त तक पांच अन्य मामलों में भी अंतिम रिपोर्ट दायर कर दी जाएगी। नयायमूर्ति मदन बी लोकूर और न्यायमूर्ति उदय यू ललित की पीठ को सीबीआई के निदेशक आलोक कुमार वर्मा ने बताया कि मणिपुर फर्जी मुठभेड़ के मामलों के संबंध में कथित रूप से हत्या, आपराधिक साजिश और साक्ष्य नष्ट करने के लिये आरोप पत्र में 14 व्यक्तियों को नामित किया गया है।

उन्होंने कहा कि एनकाउंटर के पांच अन्य मामलों में सीबीआई 31 अगस्त तक अपनी अंतिम रिपोर्ट पेश करेगा और 20 अन्य ऐसे मामलों की जांच दिसंबर के अंत तक पूरी हो जाएगी।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर में कथित फर्जी मुठभेड़ मामलों की जांच पर नाराजगी व्यक्त करते हुए सीबीआई के निदेशक आलोक कुमार वर्मा को तलब किया था। न्यायालय के इसी आदेश पर वह आज व्यक्तिगत रूप से हाजिर हुए थे।

हालांकि, सुप्रीम न्यायालय ने हत्या, आपराधिक साजिश और साक्ष्य नष्ट करने के आरोप में आरोप पत्र में नामित व्यक्तियों को गिरफ्तार करने या नहीं करने का निर्णय सीबीआई के निदेशक और एसआईटी के प्रभारी के विवेक पर छोड़ दिया है। इस मामले में न्यायालय अब 20 अगस्त को आगे सुनवाई करेगा। न्यायालय मणिपुर में कथित रूप से हत्याओं के 1528 से अधिक मामलों की जांच के लिये दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा है। न्यायालय ने इस मामले में पिछले साल 14 जुलाई को विशेष जांच दल गठित किया था और उसे प्राथमिकी दर्ज करके उनकी जांच का आदेश दिया था।

असम के एनआरसी सूची से 40 लाख लोगों को हटाया गया

भारत के असम में कड़ी सुरक्षा के बीच सरकार ने असम के राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के दूसरे एवं अंतिम मसौदा को जारी कर दिया है, ताकि अवैध तौर पर वहां पर रह रहे लोगों का पता लगाया जा सके। इसे कड़ी सुरक्षा के बीच जारी किया गया है।

हालांकि, सरकार ने यह साफ कर दिया है कि अभी लोगों को इसमें अपना नाम शामिल कराने के लिए पर्याप्त मौका दिया जाएगा और फिलहाल किसी को नहीं निकाल जाएगा।

रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया शैलेख ने सोमवार को कहा, ''2 करोड़ 89 लाख 83 हजार छह सौ सात लोगों को राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर में योग्य पाकर उन्हें शामिल किया गया है।''

करीब 3 करोड़ 29 लाख लोगों ने इस सूची के लिए एप्लाई किया था। शैलेश ने कहा कि जिन लोगों का नाम इस सूची में शामिल नहीं है उन्हें पर्याप्त मौका दिए जाएगा ताकि वह अपने दावे और विरोध दर्ज करा सकें।

उधर, इस रिपोर्ट के बाद भारत के केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि कुछ लोग बेवजह भय का वातावरण पैदा कर रहे हैं। यह एक निष्पक्ष रिपोर्ट है। गलत जानकारियों को नहीं फैलाया जाना चाहिए। यह एक ड्राफ्ट है ना कि अंतिम सूची।

उधर, तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने राज्यसभा में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर को लेकर जमकर बवाल किया। जिसके चलते राज्यसभा को 12 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा। टीएमसी नेता एस एस रॉय ने कहा, ''केन्द्र सरकार जानबूझकर करीब 40 लाख लोगों को धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों के आधार पर एनआरसी सूची से हटा रहा है। इसके गंभीर भौगोलिक नतीजे असम में हो सकते हैं। प्रधानमंत्री को इस मुद्दे पर सदन में आकर सफाई देनी चाहिए।

आवेदक अपने नामों को सूची में देख सकते हैं। इसमें आवेदकों का नाम, पता और तस्वीर शामिल होगा। एनआरसी में उन सभी भारतीय नागरिकों के नामों को शामिल किया गया है जो 25 मार्च, 1971 से पहले से असम में रह रहे हैं।

पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बहरहाल, सुरक्षा कानून एवं व्यवस्था को बनाए रखने के लिए समूचे राज्य में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। असम एवं पड़ोसी राज्यों में सुरक्षा चुस्त-दुरुस्त रखने के लिए केंद्र ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल की 220 कंपनियों को भेजा गया।

असम की राज्य सरकार ने कहा कि मसौदा में जिनके नाम उपलब्ध नहीं होंगे, उनके दावों की गुंजाइश होगी। उन्हें (महिला/पुरूष) संबंधित सेवा केन्द्रों में निर्दिष्ट फॉर्म को भरना होगा। ये फॉर्म सात अगस्त से 28 सितंबर के बीच उपलब्ध होंगे। इसके बाद अगले कदम के तहत उन्हें अपने दावे को दर्ज कराने के लिए अन्य निर्दिष्ट फॉर्म भरना होगा, जो 30 अगस्त से 28 सितंबर तक उपलब्ध रहेगा। एनआरसी उच्चतम न्यायालय की निगरानी में अपडेट किया जा रहा है।

एनआरसी बंगालियों और बिहारियों को असम से निकालने की साजिश : ममता बनर्जी

भारत में असम राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर के दूसरे और अंतिम ड्राफ्ट सोमवार को जारी होने और इसमें करीब 40 लाख लोगों के नाम नहीं होने के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी की अगुवाई में विपक्ष ने केन्द्र और बीजेपी पर बड़ा हमला किया है।

ममता ने कहा, ''जिन लोगों के पास अपना आधार कार्ड और पासपोर्ट्स है, उनका नाम भी इस ड्राफ्ट लिस्ट में शामिल नहीं किया गया है। इन लोगों के नाम उनके उपनाम के चलते हटाए गए हैं। क्या यह सरकार जबरदस्ती लोगों को निकालना चाहती है?''

बनर्जी ने कहा, ''लोगों को एक गेमप्लान के तहत अलग किया जा रहा है। हम इसको लेकर चिंतित हैं क्योंकि देश में अपने लोगों को शरणार्थी बनाया जा रहा है। यह योजना है कि वहां से बंगाली बोलनेवाले लोगों और बिहारियों को निकाला जाए। हमारे राज्य में भी इसके नतीजे महसूस किए जाएंगे।''

कांग्रेस ने भी एनआरसी ड्राफ्ट की आलोचना की है। असम कांग्रेस ईकाई के अध्यक्ष रिपुण बोरा ने सत्ताधारी बीजपी पर 40 लाख आवेनदकर्ताओं के नाम नहीं होने के पीछे 'राजनीतिक' साजिश करार दिया। बोरा ने कहा, ''40 लाख लोगों का सूची से अयोग्य होना ये काफी बड़ा आंकड़ा है जो हैरानी पैदा करता है। हम इस मुद्दे को सरकार के सामने संसद में उठाएंगे। इसके पीछे बीजेपी की राजनीतिक मंशा है।''

तृणमूल कांग्रेस के एसएस रॉय ने कहा कि एनआरसी से 40 लाख लोगों का बाहर निकालने के गंभीर नतीजे होंगे। रॉय ने कहा, ''केन्द्र सरकार ने जानबूझकर धार्मिक और भाषाई आधार पर एनआरसी से 40 लाख लोगों को बाहर कर दिया है। इसका असम से भौगोलिक तौर पर लगते राज्यों में गंभीर असर देखने को मिलेगा। प्रधानमंत्री को इसके ऊपर सदन में आकर स्पस्टीकरण देना चाहिए।''

भारत के केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने एनआरसी का बचाव करते हुए इसे एक निष्पक्ष रिपोर्ट करार दिया है। राजनाथ ने कहा, ''कुछ लोग बेवजह डर का वातावरण पैदा कर रहे हैं। यह पूरी तरह से निष्पक्ष रिपोर्ट है। गलत जानकारी नहीं फैलाई जानी चाहिए। यह एक ड्राफ्ट है ना कि अंतिम सूची।''

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, सिर्फ शादी के लिए लड़कियों का खतना करना सही नहीं है

भारत में महिलाओं के खतने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने की मांग वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने गंभीरता से लिया है। याचिका पर सोमवार को सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दाऊदी बोहरा मुस्लिम समुदाय में होने वाले नाबालिग लड़कियों के खतने पर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ शादी के लिए महिलाओं का खतना करना सही नहीं है।

महिलाओं का जीवन केवल शादी और पति के लिए नहीं होता। शादी के अलावा भी महिलाओं के लिए बहुत कुछ है। खतना करने की प्रथा महिलाओं की निजता के अधिकार का हनन है। यह लैंगिक संवेदनशीलता का मामला है। इतना ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने खतने को महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक भी बताया।

कोर्ट ने कहा कि किसी की पहचान के लिए खतने जैसा कृत्य जरूरी नहीं है। याचिका पर मंगलवार को भी कोर्ट में सुनवाई जारी रहेगी। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया था कि धर्म के नाम पर कोई भी किसी महिला के प्राइवेट पार्ट को कैसे छू सकता है? ऐसा करना महिलाओं की गरिमा और सम्मान के खिलाफ है।

महिलाओं का दर्द समझते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि खतने जैसे कृत्य औरत को आदमी के लिए तैयार करने के लिए किए जाते हैं। महिलाओं के साथ ऐसा करना जानवर की तरह बर्ताव करना है। कोर्ट ने पूछा कि महिला पर ही यह जिम्मेदारी क्यों हो कि वह पति को खुश करे।

भारत में केंद्र सरकार भी नाबालिग लड़कियों के खतने के खिलाफ है। सरकार ने खतने के खिलाफ कोर्ट में दायर याचिका का समर्थन किया है। याचिका में दाऊदी बोहरा मुस्लिम समुदाय की नाबालिग लड़कियों का खतना किए जाने की प्रथा का विरोध किया गया है।

दाऊदी बोहरा मुस्लिम समुदाय में नाबालिग लड़कियों के खतने के विरोध में दलील देते हुए अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने कहा कि ऐसे कृत्यों को सिर्फ इसलिए इजाजत नहीं दी जा सकती है क्योंकि इसे प्रथा बताया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि प्राइवेट पार्ट को छूना पॉस्को एक्ट के तहत अपराध है।

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संसद का मानसून सत्र: तत्काल सार्वजनिक महत्व के मामलों पर शशि थरूर का भाषण

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कर्नाटक: टीपू सुल्तान के एक हजार से ज्यादा रॉकेट मिले

भारत में कर्नाटक के शिवमोगा में खुदाई के दौरान कुएं से 18वीं शताब्दी के शासक टीपू सुल्तान के एक हजार से अधिक रॉकेट मिले हैं। कर्नाटक के सहायक पुरातत्व निदेशक आर. शेजेश्वर नायक ने शनिवार को बताया कि इन रॉकेट को देखकर लगता है कि टीपू ने इन्हें जंग में इस्तेमाल करने के लिए छुपाया था।
 
शेजेश्वर नायक ने बताया कि कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से 385 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में स्थित शिवमोगा में ये रॉकेट मिले।

उन्होंने बताया कि खुदाई के दौरान मिट्टी की गंध गन पाउडर की तरह लग रही थी। इसमें जब और खुदाई की गई, वहां एक ढेर में रॉकेट और गोले बरामद हुए। इन रॉकेट में पोटेशियम नाइट्रेट, चारकोल और मैग्नीशियम पाउडर भरा हुआ था। रॉकेट तोपखाने का उपयोग करने में अग्रणी टीपू सुल्तान रॉकेट की तैनाती ब्रिटिश सेनाओं को अपने क्षेत्र में आगे बढ़ने से रोकने के लिए करते थे।

बरामद हुए टीपू सुल्तान के रॉकेट शिवमोगा में सार्वजनिक प्रदर्शनी के लिए रखे जाएंगे। पुरातात्विक अभिलेखों के अनुसार, शिवमोगा का किला क्षेत्र टीपू सुल्तान के साम्राज्य और युद्ध में इस्तेमाल होने वाले रॉकेट का हिस्सा था।

ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ लगातार जीत हासिल करने के बाद साल 1799 में चौथे एंग्लो-मैसूर युद्ध में लड़ते हुए टीपू सुल्तान शहीद हो गए। उन्हें नेपोलियन वार में इस्तेमाल होने वाले कॉंग्रेव रॉकेट (ब्रिटिश सैन्य हथियार), जो मैसूरियन रॉकेट पर आधारित था, को विकसित करने का श्रेय दिया जाता है।

कॉंग्रेव रॉकेट (Congreve Rocket), 1804 में विलियम कॉंग्रेव द्वारा डिज़ाइन और विकसित एक ब्रिटिश सैन्य हथियार था, जो सीधे मैसूरियन रॉकेट पर आधारित था जो मैसूर के शासक टीपू सुल्तान ने विकसित किया था।

मुजफ्फरपुर बालिका आश्रय घर बलात्कार के मामले में कांग्रेस मुख्यालय में एआईसीसी प्रेस ब्रीफिंग

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