भारत

क्या 2021 की शुरुआत में कोविड-19 का टीका मिलेगा?

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर आशीष झा ने कहा है कि तीन टीकों ने ट्रायल में कोरोना वायरस संक्रमण के ख़िलाफ़ बढ़िया नतीजे दिये हैं जिनमें से कोई एक टीका अगले वर्ष की शुरुआत में निश्चित रूप से तैयार हो जाएगा।

कांग्रेस पार्टी के नेता राहुल गांधी के साथ वीडियो कॉन्फ़्रेंस में प्रोफ़ेसर आशीष झा ने यह दावा किया है।

प्रोफ़ेसर आशीष ने कहा, ''अमरीका, चीन और ब्रिटेन में चल रहे टीकों के ट्रायल के शुरुआती नतीजे बढ़िया हैं। अभी यह उम्मीद की जा सकती है कि अगले वर्ष की शुरुआत में इनमें से कोई एक टीका कोविड-19 की रोकथाम में प्रभावी साबित होगा। भारत को इसके लिए प्लान तैयार करना चाहिए कि उन्हें अपने लोगों के लिए यह टीका किस तरह हासिल करना है।''

प्रोफ़ेसर आशीष हार्वर्ड ग्लोबल हेल्थ इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर हैं और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर उन्होंने काफ़ी काम किया है।

जब राहुल गांधी ने प्रोफ़ेसर आशीष से पूछा कि क्या बीसीजी का टीका मददगार है? और क्या कोरोना वायरस तेज़ गर्मी में निष्क्रिय हो सकता है? तो उन्होंने जवाब दिया, ''बीसीजी का टीका मददगार हो सकता है। इसके कुछ संकेत भी मिलते हैं, पर इनके आधार पर पुख्ता तरीक़े से कुछ नहीं कहा जा सकता। रही बात गर्मी की तो अभी तक तो ऐसा नहीं देखा गया कि गर्मी का इस वायरस पर कुछ असर पड़ा हो। लेकिन यह देखा गया है कि खुली जगह में होने पर संक्रमण का ख़तरा किसी बंद जगह की तुलना में कम होता है।''

प्रोफ़ेसर आशीष ने कहा कि टेस्टिंग की संख्या बढ़ाकर ही कोविड-19 को रोकना संभव है, संक्रमित लोगों का जितना तेज़ी से पता लगेगा, उतनी जल्दी ही इसे रोकने के प्रयास किये जा सकेंगे।

हालांकि राहुल गांधी ने उन्हें बताया कि कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने उनसे कहा है कि ज़्यादा टेस्ट करने का मतलब है लोगों को इस बीमारी से डराना।

राहुल गांधी ने कहा, ''जब मैंने कुछ वरिष्ठ अधिकारियों से सवाल किया कि टेस्टिंग के नंबर कम क्यों हैं? तो उनकी दलील थी कि ज़्यादा टेस्ट करेंगे तो लोग ज़्यादा डरेंगे। लोगों में डर बैठेगा। लेकिन ये बात वो अनाधिकारिक रूप से कहते हैं।''

राहुल गांधी बीते कुछ दिनों से, अलग-अलग क्षेत्रों के सम्मानित लोगों से वीडियो कॉल पर चर्चा कर रहे हैं। पिछले दिनों उन्होंने आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन और नॉबेल पुरस्कार से नवाज़े गए अभिजीत बनर्जी से कोविड-19 संकट पर चर्चा की थी।

भारत में आर्थिक पैकेज पर केंद्र सरकार का रवैया एक क्रूर मज़ाक बन गया: सोनिया गांधी

भारत में कांग्रेस पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा है कि आर्थिक पैकेज पर केंद्र सरकार का रवैया एक क्रूर मज़ाक बन गया।

सोनिया गांधी ने आज वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के ज़रिए 22 विपक्षी दलों के नेताओं के साथ बैठक में कहा, ''जाने-माने हर अर्थशास्त्री ने बड़े स्तर पर वित्तीय प्रोत्साहन की तत्काल आवश्यकता की सलाह दी थी। प्रधानमंत्री द्वारा 20 लाख करोड़ के ​पैकेज की घोषणा और अगले 5 दिनों तक वित्त मंत्री द्वारा उसकी जानकारी देना एक क्रूर मज़ाक बन गया।''

विपक्षी दलों की मांग, ग़रीब परिवारों को छह महीने तक प्रतिमाह 7,500 रुपए दे सरकार

भारत के 22 विपक्षी दलों ने आपस में चर्चा के बाद केंद्र की मोदी सरकार के सामने 11 मांगें रखी हैं जिनमें सबसे पहले ग़़रीब परिवारों को छह महीने के लिए नकद पैसा दिए जाने की मांग की गई है।

इसमें कहा गया है कि आयकर दायरे से बाहर आने वाले सभी परिवारों को छह महीने तक प्रतिमाह 7,500 रुपए दिए जाएँ।

पार्टियों ने सुझाया है कि सबसे पहले 10,000 रुपए दिए जाएँ और इसके बाद पाँच महीनों में समान किस्तों में ये राशि मज़दूरों के परिवारों तक पहुँचाई जाए।

शुक्रवार को कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी के निमंत्रण पर वीडियो माध्यम से हुई इस बैठक में केंद्र सरकार के आर्थिक पैकेज को नाकाफ़ी बताया गया और इसकी समीक्षा किए जाने की भी मांग की गई।

बैठक में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने भी हिस्सा लिया।

हालाँकि उत्तर प्रदेश के दो बड़े दल समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी इसमें शामिल नहीं हुए।

प्रियंका गांधी: हमारी बसें खड़ी हैं, योगी जी अनुमति दीजिए

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने वीडियो जारी कर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अनुरोध किया है कि उनकी पार्टी ने प्रवासी मज़दूरों के लिए बसों का इंतज़ाम किया है और राज्य सरकार उन्हें चलाने की मंज़ूरी दे।

पार्टी का कहना है कि उनकी तकरीबन 400 बसें उत्तर प्रदेश राजस्थान के बहज बॉर्डर, गोवर्धन के पास पहुंच चुकी हैं, और अभी और बसें आ रही हैं।

ग़रीबों के घावों पर नमक छिड़क निर्मला सीरियल समाप्त: यशवंत सिन्हा

भारत के पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की आर्थिक पैकेज की घोषणाओं को धारावाहिक बताते हुए ट्वीट में ये लिखा है, ''दूसरे सीरियलों की तरह निर्मला सीरियल भी अंततः ख़त्म हुआ। उसने वो किया जो सरकार ने अब तक नहीं किया था, उसने ग़रीबों के घावों पर नमक छिड़का है।''

पंजाब में 10 लाख लोगों की नौकरियाँ जा चुकी हैं: अमरिंदर सिंह

पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा है कि पंजाब में कोरोना संकट के कारण अब तक 10 लाख लोगों की नौकरियाँ ख़त्म हो चुकी हैं।

अमरिंदर सिंह ने कहा कि कुछ विशेषज्ञों के अनुसार ये संकट जुलाई या अगस्त तक जारी रह सकता है, इसलिए हम और भी बुरी स्थिति के लिए तैयारी कर रहे हैं

घरेलू उड़ानों पर एयर इंडिया का स्पष्टीकरण

एयर इंडिया ने ट्वीट कर कहा है कि वॉट्सऐप पर उनके दफ़्तर का एक ईमेल शेयर किया जा रहा है जिसे लेकर ग़लतफ़हमी हो रही है। एयरलाइंस ने स्पष्ट किया कि घरेलू उड़ानों को शुरू करने का फ़ैसला भारत की केंद्र सरकार लेगी ना कि एयर इंडिया।

मुंबई में कोरोना संक्रमित मरीज़ों की संख्या 20,000 के क़रीब

भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई में कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ते जा रहे हैं। बीते 24 घंटों में मुंबई में 1571 कोविड-19 के नए मामले सामने आए हैं जबकि 38 लोगों की मौत हुई है।

वहीं, पूरे महाराष्ट्र में बीते 24 घंटों में 2347 मामले सामने आए हैं जिसके बाद पूरे राज्य में संक्रमित मरीज़ों की संख्या 33053 हो गई है।

बृहत् मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (बीएमसी) के अनुसार, मुंबई में कुल कोरोना संक्रमण के मामले 19967 हो चुके हैं जबकि इनमें से 5012 लोग ठीक हो चुके हैं।

कोविड-19 के कारण सिर्फ़ मुंबई में 734 लोगों की मौत हुई है। वहीं, पूरे महाराष्ट्र में ये संख्या 1198 है।

बिहार में कोरोना संक्रमण के 58 नए मामले, 56 पटना के

बिहार में संक्रमण के 56 नए मामलों का पता चला है जिनमें से 56 मामले पटना के हैं।

बिहार सरकार के मुख्य स्वास्थ्य सचिव संजय कुमार के मुताबिक़ राज्य में संक्रमितों की संख्या बढ़कर 1251 हो गई है।

अंतरराज्यीय यात्री परिवहन दोनों राज्यों की आपसी सहमति से शुरू हो सकेगा

भारत में लॉकडाउन के चौथे चरण में दो राज्यों के बीच यात्री परिवहन आपसी सहमति के बाद ही चल सकेगा। गृह मंत्रालय ने जारी किए दिशानिर्देशों में बताया है कि यात्री परिवहन या बसें सिर्फ़ दो राज्यों की सहमति पर निर्भर करती हैं।

भारत में केंद्र सरकार ने कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए देशभर में लॉकडाउन को 31 मई तक बढ़ाने की घोषणा की है। यह लॉकडाउन का चौथा चरण होगा।

इसके अलावा अब से रेड, ऑरेंज, कंटेनमेंट और बफ़र ज़ोन कौन-सा क्षेत्र होगा इसका फ़ैसला ज़िला प्रशासन करेगा। यानी एक प्रकार से यह राज्य की ज़िम्मेदारी होगी।

इसके अलावा कंटेनमेंट ज़ोन में सिर्फ़ ज़रूरी गतिविधियों की अनुमति होगी। ज़रूरी सेवाओं में लगे लोगों को छोड़कर इन ज़ोन से लोगों के आने-जाने की अनुमति नहीं होगी।

सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को स्वास्थ्य सेवाओं के कर्मचारियों को बिना किसी रोकटोक के आने-जाने की अनुमति देने के लिए कहा गया है।

सभी तरह का सामान ले जा रही गाड़ियों और खाली ट्रकों को एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने की अनुमति दी गई है।

भारत में लॉकडाउन को 31 मई तक बढ़ाया गया, किन-किन चीज़ों पर प्रतिबंध रहेगा

भारत में केंद्र सरकार ने कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए देशभर में लॉकडाउन को 31 मई तक बढ़ाने की घोषणा की है। यह लॉकडाउन का चौथा चरण होगा।

लॉकडाउन के इस चौथे चरण के लिए गृह मंत्रालय ने नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। इसके तहत 31 मई तक सभी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ान सेवाओं पर प्रतिबंध रहेगा।

साथ ही मेट्रो रेल सेवा बंद रहेगी और रात 7 बजे से सुबह 7 बजे तक नाइट कर्फ़्यू जारी रहेगा।

इसके अलावा गृह मंत्रालय द्वारा जारी दिशानिर्देशों में और क्या-क्या प्रतिबंधित रहेगा, आइये जानते हैं।

-  देश में सिर्फ़ घरेलू एयर एंबुलेंस और सुरक्षा कारणों या गृह मंत्रालय द्वारा अनुमति प्राप्त ही हवाई यात्रा की जा सकेगी।
-  स्कूल, कॉलेज और सभी प्रकार के शैक्षणिक संस्थान 31 मई तक बंद रहेंगे। केवल ऑनलाइन या डिस्टेंस लर्निंग जारी रहेगी, जिसे और प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
-  आवश्यक सेवाओं में लगे लोगों या कहीं फँसे हुए लोगों को छोड़कर देशभर में सभी प्रकार के होटल, रेस्टॉरेंट और दूसरे हॉस्पिटेलिटी सेवाएं बंद रहेंगी। होम डिलिवरी के लिए रेस्टॉरेंट को किचन चालू रखने की अनुमति रहेगी।
-  सभी सिनेमा हॉल, शॉपिंग मॉल, जिम, स्विमिंग पूल, इंटरटेनमेंट पार्क, थियेटर, ऑडिटॉरियम, बार, असेंबली हॉल बंद रहेंगे। स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और स्टेडियम खोलने की अनुमति दी जाएगी लेकिन उसमें दर्शकों को आने की अनुमति नहीं होगी।
-  सभी प्रकार की सामाजिक, राजनीतिक, खेल, मनोरंजन, एकेडमिक, सांस्कृतिक या धार्मिक कार्यक्रमों पर प्रतिबंध बना रहेगा।
-  सभी प्रकार के धार्मिक स्थल बंद रहेंगे और धार्मिक जुटान पर प्रतबिंध रहेगा।  

एनडीएमए ने सरकार को दिया निर्देश, लॉकडाउन 31 मई तक बढ़ाया जाए

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने सभी केंद्रीय और राज्य मंत्रालयों, विभागों और प्राधिकरणों को निर्देश दिया है कि वो देश में लॉकडाउन को 31 मई तक बढ़ाएं।

एनडीएमए ने सरकार को कहा कि कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए इस लॉकडाउन को आपदा प्रबंधन क़ानून (2005) के तहत बढ़ाया जाना चाहिए।

साथ ही एनडीएमए ने नेशनल एक्ज़िक्युटिव कमिटी को निर्देश दिए हैं कि वो लॉकडाउन के दिशानिर्देशों में सुधार करे ताकि आर्थिक गतिविधियों को खोला जा सके।

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, एनडीएमए ने कहा है कि इस बारे में नए दिशानिर्देश जल्द ही जारी किए जाएंगे।

वित्त मंत्री ने प्रवासी मजदूरों और किसानों के लिए क्या घोषणाएँ की?

भारत की केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा कि अगले दो महीनों तक सभी प्रवासी मज़दूरों को मुफ़्त अनाज दिया जाएगा।

वित्त मंत्री ने बताया कि इस योजना के दायरे में वो मज़दूर भी आएंगे जो खाद्य सुरक्षा क़ानून के दायरे में नहीं आते, इस योजना का फ़ायदा उन मज़दूरों को भी मिलेगा जिनके पास राशन कार्ड नहीं है।

वित्त मंत्री ने कहा, ''ऐसे आठ करोड़ प्रवासी मज़दूरों के लिए 3500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। अगले दो महीनों तक हर प्रवासी मज़दूर परिवार को पांच किलो गेहूं या चावल और एक किलो चना मिलेगा।  इसे लागू कराने की ज़िम्मेदारी राज्य सरकारों की है।''

''वन नेशन, वन राशन कार्ड के ज़रिए मज़दूर चाहे देश के किसी भी कोने में हों, वहां राशन डिपो से अपने हिस्से का अनाज ले सकते हैं। इसका फ़ायदा उन सभी प्रवासी मज़दूरों को मिल पाएगा जो रोज़गार के लिए दूसरे राज्यों में जाते हैं।''

वित्त मंत्री ने कहा कि प्रवासी मज़दूरों और शहरी ग़रीबों को कम कीमत पर किराए के मकान मिल सके इसके लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत इसका इंतज़ाम किया जाएगा, राज्य सरकारें और उद्योगपति भी इसमें अपना योगदान करेंगे।

इसके अलावा वित्त मंत्री ने और भी बहुत सारी घोषणाएं की जो इस प्रकार हैं।

-  नाबार्ड (नेशनल बैंक फ़ॉर एग्रीकल्चर एंड रुरल डेवलेपमेंट) ने ग्रामीण और सहकारी बैंकों को 29,500 करोड़ रुपये की मदद दी है। किसान इन बैंकों से लोन ले सकेंगे।
-  25 लाख किसानों को क्रेडिट कार्ड दिए गए हैं। जिन किसानों के पास कार्ड नहीं है, उन्हें भी क़र्ज़ मिलेगा। 2.5 करोड़ किसानों और पशुपालकों को भी क्रेडिट कार्ड दिए जायेंगे।
-  केंद्र सरकार अपने ख़र्चे पर शहरों में रहने वाले बेघर लोगों को तीन वक़्त का खाना दे रही है।
-  असंगठित क्षेत्रों में काम करने वाले सिर्फ़ 30 फ़ीसदी मज़दूर ही न्यूनतम वेतन का फ़ायदा उठा पाते हैं। पूरे देश में एक जैसा न्यूनतम वेतन लागू किया जाएगा ताकि क्षेत्रीय असमानता दूर हो। इसे क़ानूनी रूप दिया जाएगा।
-  मज़दूरों को अपॉइंटमेंट लेटर दिया जाएगा। साल में एक बार उनका हेल्थ चेकअप अनिवार्य होगा और ख़तरनाक परिस्थितियों में काम करने वाले मज़दूरों का सामाजिक सुरक्षा स्कीमों के ज़रिए ध्यान दिया जाएगा।
-  कोरोना संकट के दौरान 12 हज़ार स्वयंसेवी समूहों ने तीन करोड़ से ज़्यादा मास्क और 1.2 लाख लीटर सैनिटाइज़र बनाया। पिछले दो महीनों में शहरी ग़रीबों की मदद के लिए 7,200 नए स्वयंसेवी समूह बनाए गए।
-  50 लाख रेहड़ी-पटरी वालों के लिए पांच हज़ार करोड़ रुपये की सहयोग राशि का ऐलान किया जाता है। इससे हर व्यक्ति को 10 हज़ार रुपये तक की लोन सुविधा मिलेगी। सरकार इसे एक महीने के भीतर लॉन्च कर देगी।

भारत की केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा कि वो नौ क़दमों का ऐलान करेंगी जिनमें तीन प्रवासी मज़दूरों, एक रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं और अपना रोज़गार करने वाले लोगों, दो छोटे किसानों और एक हाउसिंग के लिए है।

वित्त मंत्री ने कहा कि पिछले दो महीनों में कृषि क्षेत्र के लिए 86,000 करोड़ के बराबर राशि के 63 लाख लोन मंज़ूर किए गए। मार्च-अप्रैल का महीना खेती और अर्थव्यवस्था के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है, इसलिए सरकार ने ये फ़ैसला लिया।

वित्त मंत्री ने कहा, ''इन दिनों प्रवासी मज़दूरों और शहरी ग़रीबों की बहुत चर्चा हुई है। मोदी सरकार ने शहरी ग़रीबों को 11 हज़ार करोड़ रुपये की मदद दी है। ये मदद एसडीआरएफ़ (स्टेट डिज़ास्टर रिस्पॉन्स फ़ंड) के ज़रिए दी गई है।''

वित्त मंत्री ने कहा, ''जो प्रवासी मज़दूर अपने राज्यों में वापस गए हैं उनकी मदद करने के लिए 10 हज़ार करोड़ रुपये ख़र्च किए जा चुके हैं। वापस लौटे 40-50 फ़ीसदी मज़दूरों ने मनरेगा में काम करने के लिए नामांकन कराया है जो पिछले साल मई महीने के मुक़ाबले काफ़ी ज़्यादा है। मजदूरों की दिहाड़ी 182 रुपये प्रतिदिन से बढ़ाकर 202 रुपये प्रतिदिन कर दी गई है।''

वित्त मंत्री की प्रेस कांफ्रेंस अज्ञानता, अहंकार, असंवेदनशीलता का प्रदर्शन: कांग्रेस

कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने आर्थिक पैकेज पर भारत की केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की गुरुवार की ब्रीफ़िंग की आलोचना करते हुए कहा, "यह कहना दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन आज की उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस अज्ञानता, अहंकार और असंवेदनशीलता का एक बेजोड़ प्रदर्शन थी।''

मनीष तिवारी ने कहा, ''हमने सुना है कि वित्त मंत्री ने बेलआउट पैकेज की दूसरी किश्त पेश की है, जिसे इस सरकार ने अवधारणा के रूप में रखा है और यह कहना दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन आज की उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस अज्ञानता, अहंकार और असंवेदनशीलता का एक बेजोड़ प्रदर्शन थी।''

मनीष तिवारी ने कहा, ''दूसरे विश्व युद्ध की समाप्ति की सबसे शानदार तस्वीर न्यूयॉर्क में एक लड़की को अपनी बाहों में लेकर खुशी से झूमते नौसैनिक की थी। कई दशकों बाद वियतनाम युद्ध को परिभाषित करते हुए यह एक छोटी लड़की की तस्वीर थी, जो एक गाँव से भागने की कोशिश कर रही थी।''

मनीष तिवारी ने कहा, ''अगर कोई एक तस्वीर है, जो हमें परेशान करती रहेगी, तो हमारे लाखों मजदूरों की अपने घर पहुंचने की कोशिश करती तस्वीर है। इन लोगों को सुरक्षित घर पहुंचाने के लिए यह सरकार क्या कर रही है, हमें इस पर वित्तमंत्री से कुछ सुनने की उम्मीद की थी।''  

चिदंबरम ने कहा, आर्थिक पैकेज में ग़रीबों के लिए कुछ नहीं

कांग्रेस नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा है कि मौजूदा वित्त मंत्री ने आर्थिक पैकेज का जो ब्यौरा दिया है उसमें लाखों ग़रीबों और भूखे अपने घरों को पैदल लौटते मज़दूरों के लिए कुछ भी नहीं है।

उन्होंने कहा कि सूक्ष्म, लघु और घरेलू उद्योगों के लिए दिए गए पैकेज के अलावा बाक़ी की घोषणाएँ निराशाजनक हैं।

भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से केंद्र सरकार के 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज का ब्यौरा आने के बाद पूर्व वित्त मंत्री चिदंबरम ने सवाल किया, "वित्तमंत्री ने 20 लाख करोड़ के पैकेज में से केवल 3.6 लाख करोड़ रूपए का ब्यौरा दिया है, बाक़ी का 16.4 लाख करोड़ रूपया कहाँ गया?''

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार अपने ही अज्ञान और भय में क़ैद है, उसे अधिक ख़र्च करना होगा, लेकिन वह ऐसा करने को तैयार नहीं है।

चिदंबरम ने कहा, "सरकार को अधिक उधार लेना चाहिए, लेकिन वह ऐसा करने को तैयार नहीं है। सरकार को राज्यों को अधिक उधार लेने और अधिक ख़र्च करने की अनुमति देनी चाहिए, लेकिन वह ऐसा करने के लिए तैयार नहीं है।''

चिदंबरम ने साथ ही कहा कि सरकार का सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSMEs) के लिए कुछ समर्थन उपायों की घोषणा एक ठीक क़दम है लेकिन इसमें भी ख़ामी है।

उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि बड़े MSMEs (लगभग 45 लाख) के पक्ष में उपायों को मोड़ा गया है। मुझे लगता है कि 6.3 करोड़ MSMEs के बड़े समूह को नज़रअंदाज़ कर दिया गया है।''

वहीं कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट कर कहा, ''कल, आज और कल - कल 20,00,000 करोड़ का हेडलाइन पैकेज, आज 3,70,000 करोड़ का मात्र क़र्ज़ पैकेज, पर ''हेडलाइन से हेल्पलाइन पैकेज'' कब? न ग़रीब के हाथ में एक फूटी कौड़ी, न किसान के खाते में एक रूपया, न प्रवासी मज़दूर की घर वापसी या राशन, न दुकानदार/नौकरी पेशा को कुछ मिला।''

आर्थिक पैकेज पर प्रतिक्रिया देते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि इसमें राज्यों के लिए कुछ भी नहीं है।

ममता बनर्जी ने कहा, "लोगों को उम्मीद थी कि राहत मिलेगी ... मगर उन्हें कुछ नहीं मिला। राज्यों के लिए कुछ भी नहीं है। केंद्र ज़बरदस्ती संघीय शासन लाद रहा है, आर्थिक पैकेज से लोगों को गुमराह कर रहा है।''

आम आदमी पार्टी के राज्य सभा सांसद संजय सिंह ने इस पैकेज को करोड़ों को लूट का इंतज़ाम बताया है।

उन्होंने ट्वीट किया, "आज के पैकेज से एक बात तो साफ़ हो गई कि जिन बेईमानों ने देश का लाखों करोड़ रुपये एनपीए के नाम पर पहले से ही लूट रखा है उन्हीं को फिर से सरकार ने लाखों करोड़ लूटने का इंतज़ाम कर दिया है। ग़रीब के हाथ कुछ नहीं लगा उसे भगवान भरोसे छोड़ दिया गया।''

निर्मला सीतारमण ने आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत अभियान के बीस लाख करोड़ रुपए के राहत पैकेज की पहली किस्त की घोषणा की। अगले कुछ दिनों में रोज़ाना राहत पैकेज की घोषणाएं की जाएंगी।

लॉकडाउन-4 पूरी तरह से नए रंग-रूप में होगा: मोदी

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ़ कर दिया कि लॉकडाउन-4 भी होगा लेकिन वो पूरी तरह से नए रंग-रूप में होगा। मोदी ने कहा कि 18 मई से पहले इसकी जानकारी दे दी जाएगी।

उन्होंने कहा कि राज्य के मुख्यमंत्रियों से सलाह-मशविरा के बाद इस पर अंतिम फ़ैसला लिया जाएगा।

मोदी ने क़रीब बीस लाख करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज की घोषणा की।

मोदी ने कहा कि ये पैकेज भारत की जीडीपी का क़रीब-क़रीब दस प्रतिशत है।

उनके अनुसार इन सबके ज़रिए देश के विभिन्न वर्गों को, आर्थिक व्यवस्था की कड़ियों को बीस लाख करोड़ रुपए का सपोर्ट मिलेगा।

कोरोना संकट के बाद भी, दुनिया में जो स्थितियां बन रही हैं, उसे भी हम निरंतर देख रहे हैं। जब इन दोनों कालखंडों को भारत के नज़रिए से देखते हैं तो लगता है कि इक्कीसवीं सदी भारत की हो ये हमारा सपना ही नहीं, ये हम सबकी ज़िम्मेदारी भी है।

मोदी ने कहा कि बीस लाख करोड़ रुपए का ये पैकेज, दो हज़ार बीस में, देश की विकास यात्रा को, ट्वेंटी लैक्स करोड़, 20-20 में, आत्मनिर्भर भारत अभियान को एक नई गति देगा।

आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को सिद्ध करने के लिए इस पैकेज में लैंड, लेबर, लिक्विडिटी और लॉज़ सभी पर बल दिया गया है।

मोदी ने कहा कि ये आर्थिक पैकेज हमारे कुटीर उद्योग, गृह उद्योग, हमारे लघु-मंझोले उद्योग, हमारे एमएसएमई के लिए हैं, जो करोड़ों लोगों की आजीविका का साधन है, जो आत्मनिर्भर भारत के हमारे संकल्प का मज़बूत आधार है।

मोदी ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत की भव्य इमारत पाँच पिलर्स पर खड़ी होंगी।

पहला पिलर, इकोनॉमी: एक ऐसी इकोनॉमी जो इंक्रीमेंटल चेंज नहीं बल्कि क्वांटम जंप लाए।

दूसरा पिलर, इंफ्रास्ट्रक्चर: एक ऐसा इंफ्रास्ट्रक्चर जो आधुनिक भारत की पहचान बनें।

तीसरा पिलर, हमारा सिस्टम: एक ऐसा सिस्टम जो बीती शताब्दी की रीति-नीति नहीं बल्कि इक्कीसवीं सदी के सपनों को साकार करने वाली टेक्नोलॉजी ड्रिवन व्यवस्थाओं पर आधारित हो।

चौथा पिलर, हमारी डेमोग्राफ़ी: दुनिया की सबसे बड़ी डेमोक्रेसी में हमारी वाइब्रेंट डेमोग्राफ़ी हमारी ताक़त है। आत्मनिर्भर भारत के लिए हमारी ऊर्चा का स्रोत है।  

पाँचवा पिलर, डिमांड: हमारी अर्थव्यवस्था में डिमांड और सप्लाई चेन का जो चक्र है, जो ताक़त है, उसे पूरी क्षमता से इस्तेमाल किए जाने की ज़रूरत है। देश में डिमांड बढ़ाने के लिए, डिमांड को पूरा करने के लिए हमारी सप्लाई चेन के हर स्टेक होल्डर का सशक्त होना ज़रूरी है। हमारी सप्लाई चेन, हमारी आपूर्ति की उस व्यवस्था को हम मज़बूत करेंगे, जिसमें मेरे देश की मिट्टी की महक हो, हमारे मज़दूरों के पसीने की ख़ुशबू हो।

मोदी ने कहा कि भारत ने आपदा को, अवसर में बदल दिया।

विश्व की आज की स्थिति हमें सिखाती है कि इसका मार्ग एक ही है, आत्मनिर्भर भारत।

हमारे यहां, शास्त्रों में कहा गया है-एसपंथ- यानी यही रास्ता है, आत्मनिर्भर भारत।

साथियों, एक राष्ट्र के रूप में आज हम एक बहुत अहम मोड़ पर खड़े हैं।

इतनी बड़ी आपदा, भारत के लिए एक संकेत लेकर आई है। एक संदेश लेकर आई है, एक अवसर लेकर आई है।

मैं एक उदाहरण के साथ अपनी बात बताने का प्रयास करता हूं, जब कोरोना संकट शुरू हुआ, तब भारत में एक भी पीपीई किट नहीं बनती थी।

एन-95 मास्क का भारत में नाममात्र उत्पादन होता था, आज स्थिति ये है कि भारत में ही हर रोज़ दो लाख पीपीई और दो लाख एन 95 मास्क बनाए जा रहे हैं।

ये हम इसलिए कर पाए क्योंकि भारत ने आपदा को, अवसर में बदल दिया।

आपदा को अवसर में बदलने की भारत की ये दृष्टि आत्मनिर्भर भारत के हमारे संकल्प के लिए उतनी ही प्रभावी सिद्ध होने वाली हैं।

साथियों आज विश्व में आत्म निर्भर शब्द के मायने पूरी तरह बदल गए हैं।

ग्लोबल वर्ल्ड में आत्मनिर्भरता की परिभाषा बदल रही है।

धन केंद्रित वैश्वीकरण बनाम मानव केंद्रित वैश्वीकरण की चर्चा आज ज़ोंरों पर है।

विश्व के सामने भारत का मूलभूत चिंतन आज आशा की किरण नज़र आता है।

भारत की संस्कृति, भारत के संस्कार उस आत्मनिर्भरता की बात करते हैं जिसकी आत्मा वासुदेव कुटुम्बकम है। विश्व एक परिवार।

भारत जब आत्मनिर्भरता की बात करता है, तब आत्मकेंद्रित व्यवस्था की वकालत नहीं करता है।

भारत की आत्मनिर्भरता में संसार के सुख, सहयोग और शांति की चिंता होती है। जो संस्कृति जय जगत में विश्वास रखती हो, जो जीव मात्र का कल्याण चाहती हो, जो पूरे विश्व को परिवार मानती हो, जो अपनी आस्था में पृथ्वी को मां मानती हो, वो संस्कृति, वो भारत भूमि जब आत्मनिर्भर बनती है, तब उससे एक सुखी समृद्ध विश्व की संभावना भी सुनिश्चित होती है।

भारत की प्रगति में तो हमेशा विश्व की प्रगति समाहित रही है।

भारत के लक्ष्यों का प्रभाव, भारत के कार्यों का प्रभाव विश्व कल्याण पर पड़ता ही है।

जब भारत खुले में शौच से मुक्त होता है तो दुनिया की तस्वीर भी बदलती है। टीबी हो, कुपोषण हो, पोलियो हो, भारत के अभियानों का असर दुनिया पर पड़ता ही है। इंटरनेशनल सोलर अलायंस ग्लोबल वार्मिंग के ख़िलाफ़, भारत की दुनिया को सौग़ात है।

निश्चित तौर पर मानव जाति के लिए ये सबकुछ अकल्पनीय है। ये क्राइसिस अभूतपूर्व है। लेकिन थकना, हारना, टूटना, बिखरना मानव को मंज़ूर नहीं है।

सतर्क रहते हुए, ऐसी जंग के सभी नियमों का पालन करते हुए, अब हमें बचना भी है और आगे बढ़ना भी है। आज जब दुनिया संकट में है, तब हमें अपना संकल्प और मज़बूत करना होगा।

साथियों हम पिछली शताब्दी से ही लगातार सुनते आए हैं कि इक्कीसवीं सदी हिंदुस्तान की है।

हमें कोरोना से पहले की दुनिया, वैश्विक व्यवस्थाओं को विस्तार से देखने समझने का मौक़ा मिला है।

भारत में कोविड-19 का रिकवरी रेट 29.36%: स्वास्थ्य मंत्रालय

पिछले 24 घंटे में भारत में कोविड-19 संक्रमण के 3,390 नए मामले सामने आये हैं, जबकि 1,273 लोगों को पूरी तरह ठीक होने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।

ये आंकड़े केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने शुक्रवार शाम को हुई प्रेस वार्ता में दिये हैं।

उन्होंने बताया कि देश में कोरोना का मौजूदा रिकवरी रेट 29.36 प्रतिशत है। इसके अलावा उन्होंने कहा:

- भारत के 42 ज़िलों में पिछले 28 दिनों में कोरोना संक्रमण का कोई मामला दर्ज नहीं किया गया।
- 29 ज़िलों में पिछले 21 दिनों में कोरोना का कोई नया मामला सामने नहीं आया है।
- 36 ज़िलों में पिछले 14 दिनों में संक्रमण का कोई नया मामला नहीं देखा गया है।
- 46 ज़िलों में पिछले सात दिनों में कोरोना का कोई नया मामला नहीं आया है।

अब तक देश के 216 ज़िलों में कोविड-19 संक्रमण का एक भी मामला सामने नहीं आया है।