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जेटली-माल्या बैठक और राफेल घोटाला: कांग्रेस मुख्यालय में रणदीप सिंह सुरजेवाला द्वारा एआईसीसी प्रेस ब्रीफिंग

जेटली-माल्या बैठक और राफेल घोटाला: कांग्रेस मुख्यालय में रणदीप सिंह सुरजेवाला द्वारा एआईसीसी प्रेस ब्रीफिंग

जेटली-माल्या बैठक पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा प्रेस ब्रीफिंग

जेटली-माल्या बैठक पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा प्रेस ब्रीफिंग 

भारतीय सेना में 1.5 लाख नौकरियां कटौती: कांग्रेस मुख्यालय में अभिषेक मनु सिंघवी द्वारा एआईसीसी प्रेस ब्रीफिंग

भारतीय सेना में 1.5 लाख नौकरियां कटौती: कांग्रेस मुख्यालय में अभिषेक मनु सिंघवी द्वारा एआईसीसी प्रेस ब्रीफिंग

बैंकिंग घोटाला पर कांग्रेस मुख्यालय में रणदीप सिंह सुरजेवाला द्वारा एआईसीसी प्रेस ब्रीफिंग

बैंकिंग घोटाला पर कांग्रेस मुख्यालय में रणदीप सिंह सुरजेवाला द्वारा एआईसीसी प्रेस ब्रीफिंग

भारत बंद : कांग्रेस मुख्यालय में अशोक गेहलोत और रणदीप सिंह सुरजेवाला द्वारा एआईसीसी प्रेस ब्रीफिंग

भारत बंद : कांग्रेस मुख्यालय में अशोक गेहलोत और रणदीप सिंह सुरजेवाला द्वारा एआईसीसी प्रेस ब्रीफिंग

बढ़ती बेरोज़गारी: मोदी सरकार भारतीय सेना में 1.5 लाख जवानों की कटौती करेगी

भारत में तेज़ी से बढ़ती बेरोज़गारी के बीच मोदी सरकार भारतीय सेना को भविष्य की लड़ाइयों के लिए तैयार करने के नाम पर अगले पांच साल में 1.5 लाख जवानों की कटौती कर सकती है। यह जानकारी खुद मामले से जुड़े सेना के दो अधिकारियों ने रविवार को दी।

अधिकारियों ने बताया कि 21 जून को कैडर समीक्षा आदेश में विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई है। इनमें सैनिकों की संख्या में 1.2 लाख कटौती से लेकर विभिन्न कार्यक्षमता की बेहतरी के लिए पुन: तैनाती तक शामिल है। सैन्य सचिव लेफ्टिनेंट जनरल जे एस संधू के नेतृत्व वाली 11 सदस्यीय पैनल पूरे मामले की समीक्षा कर रही है। माना जा रहा है कि पैनल इस महीने के आखिर में अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत को सौंपेगी। जबकि अंतिम रिपोर्ट नवंबर तक आने की उम्मीद है।

पदों और जिम्मेदारियों की समरूपता के आधार पर समायोजन के आधार पर अगले दो साल में 50 हजार सैनिकों की कटौती होगी। वहीं एक लाख सैनिकों की कटौती 2022-23 तक होने की उम्मीद है। हालांकि, अधिकारियों ने साफ किया कि यह मात्र प्रारंभिक आकलन है।

अधिकारियों ने बताया कि जवानों की कटौती का लक्ष्य सेना के प्रत्येक विभाग के पुनगर्ठन से हासिल किया जाएगा। इनमें सैन्य मुख्यालय निदेशालय, रणनीतिक प्रभाग, संचार अवस्थापना, मरम्मत विभाग, प्रशासनिक विभाग और सहायक क्षेत्र शामिल है। पैनल ने हाल के वर्षों में तंत्र में तकनीक को शामिल करने के बावजूद बहुस्तरीय पद सृजित होने पर भी चिंता जताई है।

21 जून के आदेश में जिम्मेदारी के अंतर की रेखा अस्पष्ट हो जाने से दोहराव की स्थिति उत्पन्न हो रही है। इसलिए सिफारिश की गई है कि पदक्रमों की समीक्षा की जाए और जरूरी होने पर उन्हें मिला दिया जाए।

पूर्व उत्तरी क्षेत्र कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) बी एस जसवाल ने कहा, लड़ाकू टुकड़ियों की संख्या में कटौती उच्च दक्षता वाले तकनीक को समाहित करने के साथ किया जाना चाहिए। हालांकि रणनीतिक विभाग में जिम्मेदारियों की ओवरलैंपिंग चिंता का विषय, इसलिए संरचनात्मक बदलाव की जरूरत है।

अनुच्छेद 35ए के मुद्दे पर पंचायत और निकाय चुनावों का बहिष्कार करेगी पीडीपी : महबूबा मुफ्ती

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी ने सोमवार को घोषणा की कि वह इस महीने के आखिर में होने वाले निकाय और पंचायत चुनावों का बहिष्कार करेगी। कुछ दिन पहले नेशनल कान्फ्रेंस ने भी चुनावों के बहिष्कार का ऐलान किया था।

पीडीपी की बैठक के बाद संवाददाताओं से बातचीत में जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री एवं पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कहा कि उनकी पार्टी चुनाव नहीं लड़ेगी क्योंकि मौजूदा हालात अनुकूल नहीं हैं।

मुफ्ती ने श्रीनगर में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ''हम अनुच्छेद 35 ए को बचाने के लिए किसी भी हद तक जाएंगे।''

उन्होंने कहा कि राज्य की जनता ने बहुत कुर्बानी दी है और कोई अनुच्छेद 35 ए की वैधता से इनकार नहीं कर सकता।

पीडीपी प्रवक्ता रफी अहमद मीर ने संवाददाताओं से कहा कि अनुच्छेद 35 ए के संबंध में लोगों की आशंकाओं को जब तक संतोषप्रद तरीके से नहीं सुलझाया जाता, हम समझते हैं कि निकाय और पंचायत चुनाव कराना बेकार की कवायद होगा।

कुछ दिन पहले ही नेशनल कान्फ्रेंस ने घोषणा की थी कि जब तक भारत सरकार और राज्य सरकार अनुच्छेद 35 ए पर अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं करेगी और इसे बचाने के लिए अदालत में तथा अदालत के बाहर प्रभावी कदम नहीं उठाती, तब तक वह पंचायत चुनाव नहीं लड़ेगी और 2019 के चुनाव भी नहीं लड़ेगी।

बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने लखनऊ के सत्र न्यायाधीश से रिपोर्ट मांगी

भारत में उच्चतम न्यायालय ने अयोध्या में बाबरी मस्जिद विध्वंस प्रकरण में सोमवार को लखनऊ की एक अदालत से जानना चाहा कि वह भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती से संबंधित मुकदमे की सुनवाई किस तरह अप्रैल, 2019 की निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरी करना चाहती है।

न्यायमूर्ति आर एफ नरिमन और न्यायमूर्ति इन्दु मल्होत्रा की पीठ ने निचली अदालत के न्यायाधीश एस के यादव की याचिका पर उत्तर प्रदेश सरकार से भी जवाब मांगा है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इस न्यायाधीश की पदोन्नति पर इस आधार पर रोक लगा दी थी कि शीर्ष अदालत ने उन्हें मुकदमे की सुनवाई पूरा करने का निर्देश दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने न्यायाधीश से यह रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में मांगी है।

शीर्ष अदालत ने 19 अप्रैल, 2017 को कहा था कि भाजपा के वरिष्ठ नेता आडवाणी, जोशी और उमा भारती पर 1992 के राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में आपराधिक साजिश के गंभीर आरोप में मुकदमा चलेगा और रोजाना सुनवाई करके इसकी कार्यवाही दो साल के भीतर 19 अप्रैल, 2019 तक पूरी की जायेगी।

शीर्ष अदालत ने मध्यकालीन स्मारक बाबरी मस्जिद को ढहाने की कार्रवाई को 'अपराध' बताते हुए कहा था कि इसने संविधान के 'धर्मनिरपेक्ष ताने बाने को हिलाकर रख दिया'। इसके साथ ही न्यायालय ने भाजपा के इन वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ आपराधिक साजिश के आरोप बहाल करने का जांच ब्यूरो का अनुरोध स्वीकार कर लिया था।

न्यायालय ने कहा था, ''इस मामले में कोई नये सिरे से सुनवाई नहीं होगी और न ही मुकदमे की सुनवाई पूरी होने तक संबंधित न्यायाधीश का तबादला ही होगा। मुकदमे की सुनवाई किसी तारीख विशेष पर करना संभव नहीं होने के बारे में न्यायाधीश के निष्कर्ष के अलावा किसी भी अन्य आधार पर स्थगित नहीं की जायेगी।

अयोध्या में छह दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद के विध्वंस की घटना से संबंधित दो मुकदमे हैं। पहले मुकदमे में अज्ञात 'कारेसवकों के नाम' हैं, जबकि दूसरे मुकदमे में भाजपा नेताओं पर राय बरेली की अदालत में मुकदमा चल रहा था।

शीर्ष अदालत ने राय बरेली और लखनऊ की अदालत में लंबित इन दोनों मुकदमों को मिलाने और लखनऊ में ही इस पर सुनवाई का आदेश दिया था।

आडवाणी, जोशी और उमा भारती सहित 13 आरोपियों के खिलाफ इस मामले में आपराधिक साजिश के आरोप हटा दिये गये थे। लेकिन हाजी महबूब अहमद और केन्द्रीय जांच ब्यूरो ने भाजपा नेताओं सहित 21 आरोपियों के खिलाफ साजिश के आरोप हटाने के आदेश को चुनौती दी थी। इन 21 आरोपियों में से आठ की मृत्यु हो चुकी है।

इस मामले में आठ व्यक्तियों के खिलाफ पूरक आरोपपत्र दाखिल किया गया था, परंतु विध्वंस की योजना बनाने के आरोप से मुक्त किये गये 13 व्यक्तियों के खिलाफ ऐसा नहीं किया गया था।

आडवाणी, जोशी और भारती के साथ ही कल्याण सिंह (अब राजस्थान के राज्यपाल), शिवसेना सुप्रीमो बाल ठाकरे और विहिप नेता आचार्य गिरिराज किशोर (दोनों दिवंगत) के खिलाफ साजिश के आरोप हटाये गये थे। अन्य नेताओं में विनय कटियार, विष्णु हरि डालमिया, सतीश प्रधान, सी आर बंसल, अशोक सिंघल (अब दिवंगत), साध्वी ऋतंबरा, महंत अवैद्यनाथ (अब दिवंगत), आर वी वेदांती, परमहंस रामचंद्र दास (अब दिवंगत), जगदीश मुनि महाराज, बैकुण्ठ लाल शर्मा प्रेम, नृत्य गोपाल दास (अब दिवंगत), धरम दास, सतीश नागर और मोरेश्वर सावे (अब दिवंगत) शामिल थे जिनके खिलाफ साजिश के आरोप खत्म कर दिये गये थे।

इन अपीलों में भाजपा और दूसरे नेताओं के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी हटाने संबंधी इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 20 मई, 2010 का आदेश निरस्त करने का अनुरोध किया गया था।

उच्च न्यायालय ने विशेष अदालत का आदेश बरकरार रखते हुए कहा था कि जांच ब्यूरो ने रायबरेली में सुनवाई के दौरान अथवा पुनरीक्षण याचिका के समय कभी भी यह नहीं कहा था कि इन नेताओं के खिलाफ आपराधिक साजिश का आरोप था।

भारत में यौन संबंध की मांग भी घूस माना जाएगा

भारत में नए भ्रष्टाचार रोधी कानून के तहत यौन तुष्टि की मांग करना और उसे मंजूर करना रिश्वत माने जा सकते हैं। इनके लिए सात साल तक जेल की सजा हो सकती है। सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रविवार को बताया कि भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2018 में 'अनुचित लाभ' पद को शामिल किया गया है। इसका मतलब कानूनी पारिश्रमिक के अलावा अन्य किसी भी तरह की प्राप्ति है। इसमें महंगे क्लब की सदस्यता और आतिथ्य भी शामिल हैं।

इस अधिनियम में 'रिश्वत' शब्द को सिर्फ पैसे या धन तक सीमित नहीं रखा गया है। इसको राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मंजूरी मिलने के बाद केंद्र सरकार ने जुलाई में अधिसूचित किया था। साल 2018 के संशोधन अधिनियम के जरिये 30 साल पुराने भ्रष्टाचार निवारण कानून में संशोधन किया गया है।

अधिकारी के अनुसार, संशोधित कानून के तहत सीबीआई जैसी जांच एजेंसियां यौन तुष्टि, महंगे क्लब की सदस्यता और आतिथ्य मांगने और स्वीकार करने या करीबी मित्रों या रिश्तेदारों को रोजगार प्रदान करने पर अधिकारियों के खिलाफ अब मामला दर्ज कर सकती हैं। इसमें रिश्वत देने वालों के लिए भी अधिकतम सात साल जेल की सजा का प्रावधान है। इससे पहले, रिश्वत देने वाले भ्रष्टाचार पर रोक लगाने संबंधी किसी भी घरेलू कानून के दायरे में नहीं आते थे।

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता जी वेंकटेश राव ने कहा, अनुचित लाभ में ऐसा कोई भी फायदा हो सकता है जो गैर-आर्थिक हो। मसलन, महंगा या मुफ्त तोहफा, मुफ्त छुट्टी की व्यवस्था या एयरलाइन टिकट व ठहरने की व्यवस्था। इसमें किसी सामान और सेवाओं के लिए भुगतान भी शामिल होगा। मसलन, किसी चल या अचल संपत्ति को खरीदने के लिए डाउन पेमेंट, किसी क्लब की सदस्यता के लिए भुगतान आदि। इसमें यौन तुष्टि की मांग भी खास तौर पर शामिल है, जो सभी अपेक्षाओं में सबसे निंदनीय है।

राहुल ने विपक्ष के बंद की अगुवाई की, कहा - पेट्रोल, डीज़ल और गैस की कीमतों पर चुप हैं पीएम मोदी

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और राफेल मामले को लेकर सोमवार को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला और कहा कि 2019 में विपक्षी दल मिलकर भाजपा को हराएंगे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने पिछले साढ़े चार वर्षों में भारत के लोगों को आपस में लड़ाने का काम किया है।

'भारत बंद' के तहत रामलीला मैदान के निकट आयोजित विरोध प्रदर्शन में गांधी ने कहा, ''2014 में नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमंत्री बनने से पहले महिलाओं की सुरक्षा, किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया था। जनता ने भरोसा कर उनकी सरकार बनवायी। अब लोगों को साफ़ एहसास हो गया कि उन्होंने साढ़े चार साल में क्या किया।''

समाचार एजेंसी भाषा के मुताबिक, कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ''मोदी जी सही कहते हैं कि जो उन्होंने साढ़े चार साल में वो किया, जो 70 साल में नहीं हुआ। अब लोगों को पता चल गया है कि उन्होंने साढ़े चार साल में हिंदुस्तानियों को आपस में लड़वाया। एक राज्य को दूसरे राज्य से लड़वाया। जातियों को लड़वाया।''

राहुल ने दावा किया, ''महिलाओं पर अत्याचार होते रहे पर प्रधानमंत्री ख़ामोश रहे। पूरे देश में मोदी जी पेट्रोल डीज़ल और गैस पर विपक्ष में रहते हुए खूब बोलते थे, लेकिन अब एक शब्द नहीं बोलते हैं।''

कांग्रेस नेता ने कहा कि राफ़ेल के सवाल पर प्रधानमंत्री ख़ामोश हैं। एक मित्र उद्योगपति को 45 हज़ार करोड़ दे दिये। ये देश की आम जनता का पैसा है। नोटबंदी के नाम पर अपने मित्रों का काला धन सफ़ेद करवाया। फिर गब्बर सिंह टैक्स लगा दिया। मंझोले और छोटे उद्योगों को बर्बाद कर दिया।''

उन्होंने कहा, ''आज बंद में शामिल सभी दल मिलकर मोदी को हरायेंगे। सब मिलकर भाजपा को हराने का काम करेंगे।'' इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और दूसरे नेताओं ने राजघाट से रामलीला मैदान तक मार्च किया। कांग्रेस ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोत्तरी के खिलाफ 'भारत बंद' बुलाया है।