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नोटबंदी एक गलती नहीं थी, यह एक जानबूझकर उठाया गया कदम था : राहुल गांधी

नोटबंदी एक गलती नहीं थी, यह एक जानबूझकर उठाया गया कदम था : राहुल गांधी

मोदी के नोटबंदी घोटाला पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का मीडिया को संबोधन

कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी ने मोदी के नोटबंदी (विमुद्रीकरण) घोटाले पर मीडिया को संबोधित किया।

प्रेस ब्रीफिंग के मुख्य अंश

- नोटबंदी ( Demonetisation) का उद्देश्य बहुत स्पष्ट था। पीएम मोदी के दोस्तों की मदद करना था। Demonetisation एक गलती नहीं थी, यह एक जानबूझकर उठाया गया कदम था।

- यूपीए सरकार के दौरान, एनपीए 2.5 लाख करोड़ रुपये थे। अब यह 12.5 लाख करोड़ रुपये हो गया है।

- राफेल एक स्पष्ट मामला है। अनिल अंबानी ने कभी विमान नहीं बनाया। उन पर 45000 करोड़ रुपये के ऋण है और उन्होंने राफेल सौदे से कुछ दिन पहले ही कंपनी खोला था।

- एचएएल पिछले 70 सालों से विमान बना रहा है। 520 करोड़ रुपये का एक विमान 1600 करोड़ रुपये में खरीदा गया, क्यों?

- पूरा देश जानना चाहता है कि मोदी और अनिल अंबानी के बीच क्या सौदा हुआ था? यह स्पष्ट करने के लिए संयुक्त संसदीय समिति लाया जाना चाहिए।

राफेल डील का सच

राफेल डील का सच

अनशन पर हार्दिक पटेल ने जल त्याग की चेतावनी दी

गुजरात में अहमदाबाद स्थित अपने आवास पर आमरण अनशन पर बैठे पाटीदार आरक्षण आंदोलन समिति के नेता हार्दिक पटेल ने आज छठे दिन से जल का भी त्याग करने की चेतावनी दी है, जबकि डाक्टरों ने कहा है कि अगर वह जल्द ही तरल पदार्थ और पयार्प्त पोषण नहीं लेते तो उनके गुर्दे (किडनी) और दिमाग पर प्रतिकूल असर हो सकता है।

उधर, किसानों की कर्ज माफी और पाटीदार आरक्षण के मुद्दे पर बाहर अनशन की सरकारी अनुमति नहीं मिलने के बाद अहमदाबाद में एस जी हाईवे के निकट स्थित अपने आवास पर गत 25 अगस्त से भूख हड़ताल पर बैठे हार्दिक उनके खिलाफ दर्ज राजद्रोह के एक मामले में यहां अदालत में पेश नहीं हो सके।

अगस्त 2015 में अहमदाबाद में जी एम डी सी मैदान में उनकी रैली के बाद हुई व्यापक हिंसा के मद्देनजर दर्ज इस मुकदमे में आरोप तय होने की कार्यवाही आज भी उनकी अनुपस्थिति के चलते नहीं हो सकी। अदालत ने इस मामले में 14 सितंबर को उन्हें अदालत में पेश रहने को कहा है।

इस बीच, उनके स्वास्थ्य की जांच करने वाले चिकित्सकों की टीम की अगुवा डॉक्टर नम्रता वडोदरिया ने कहा कि उनके रक्त में एसीटोन की मात्रा बढ़ रही है जिससे उनकी किडनी और दिमाग पर असर हो सकता है। उन्हें जल्द से जल्द पूरा पोषण मिलना चाहिए। अगर वह पानी लेना भी बंद करते हैं तो यह काफी नुकसानदायक हो सकता है।

हार्दिक के वजन में लगभग चार किलोग्राम की गिरावट दर्ज की गयी है। उधर, हार्दिक ने ट्वीट कर कहा है कि जनता की आवाज दबायी नहीं जा सकती। सत्ता के समक्ष जनता का विस्फोट होगा।

राफेल घोटाला में संयुक्त संसदीय समिति के गठन पर जेटली को जल्द जवाब देना चाहिए : राहुल गाँधी

राफेल मामले में संयुक्त संसदीय समिति (जे पी सी) के गठन की मांग पर वित्त मंत्री अरुण जेटली से 24 घंटे के भीतर जवाब मांगने के एक दिन बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने आज कहा कि जेटली को इस पर जल्द जवाब देना चाहिए क्योंकि समयसीमा खत्म हो रही है।

गांधी ने ट्वीट कर कहा, ''प्रिय जेटली जी, राफेल की जांच के लिए जेपीसी के गठन के संदर्भ में आपकी समयसीमा खत्म होने में छह घंटे बचे हैं।''

उन्होंने कहा, ''युवा भारत इंतजार कर रहा है। मैं आशा करता हूँ कि आप मोदी जी और अनिल अंबानी जी को इस बात के लिए मनाने में लगे हैं कि उन्हें आपकी बात क्यों सुननी चाहिए और इसकी अनुमति देनी चाहिए।''

जेटली द्वारा कल राफेल मामले में कांग्रेस पर झूठ फैलाने का आरोप लगाए जाने के बाद राहुल गांधी ने उन पर पलटवार किया था और आरोप लगाया कि आपके सुप्रीम लीडर अपने एक मित्र को बचा रहे हैं।

गांधी ने ट्वीट कर कहा था, ''जेटली जी, ग्रेट राफेल रॉबरी की तरफ राष्ट्र का ध्यान खींचने के लिए धन्यवाद। इस बारे में क्या खयाल है कि संयुक्त संसदीय समिति से इसका समाधान होगा? समस्या यह है कि आपके सुप्रीम लीडर अपने मित्र को बचा रहे हैं, इसलिए यह असुविधाजनक हो सकता है।''

कांग्रेस अध्यक्ष ने जेटली को संबोधित करते हुए कहा था, ''जांच-परख कीजिए और अगले 24 घंटों में जवाब दीजिए। हम इंतजार कर रहे हैं।''

गौरतलब है कि जेटली ने राफेल विमान सौदे के बारे में कांग्रेस के ऊपर झूठ फैलाने का आरोप लगाया और कहा कि विपक्षी पार्टी तथा उसके नेता राहुल गांधी फर्जी अभियान चलाकर राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ गंभीर खिलवाड़ कर रहे हैं।

नोटबंदी पर कांग्रेस की माँग : तुगलकी फरमान के लिए मोदी को देश से माफी मांगनी चाहिए

भारत में नोटबंदी के बाद जमा हुए नोटों का आधिकारिक आंकड़ा सामने आ गया है। इसके बाद कांग्रेस ने गुरुवार को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा और कहा कि 'तुगलकी फरमान' के लिए मोदी को देश से माफी मांगनी चाहिए। कांग्रेस ने दावा किया कि नोटबंदी की वजह से भारत की अर्थव्यवस्था को एक साल में 2.25 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

न्यूज एजेंसी भाषा के मुताबिक, कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने मीडिया से कहा, ''नोटबंदी के समय प्रधानमंत्री मोदी ने तीन मकसद बताये थे। पहला यह कि आतंकवाद पर चोट लगेगी, दूसरा यह कि जाली मुद्रा पर अंकुश लगेगा और तीसरा यह कि कालाधन वापस आएगा। सवाल यह है कि इस तुगलकी फरमान का क्या नतीजा निकला? नोटबंदी की वजह से अर्थव्यवस्था को जीडीपी के 1.5 फीसदी का नुकसान हुआ। इस हिसाब से एक साल में 2.25 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इसके अलावा कतारों में खड़े होने की वजह से 100 से अधिक लोगों की मौत हो गई। लाखों लोग बेरोजगार हो गए।''

मनीष तिवारी ने कहा, ''अगर प्रधानमंत्री में रत्ती भर भी नैतिकता होती तो वह इस्तीफा दे देते, लेकिन उनसे इसकी उम्मीद नहीं की जाती। हमारी मांग है कि अपने इस तुगलकी फरमान के लिए उनको जिम्मेदारी स्वीकारनी चाहिए और देश से माफी मांगनी चाहिए।''

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने भी इसको लेकर सरकार पर निशाना साधा और कहा कि नोटबंदी की वजह से भारत को 2.25 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का परोक्ष रूप से हवाला देते हुए सवाल किया, ''याद करिए कि किसने कहा था कि तीन लाख करोड़ रुपये वापस नहीं आएंगे और यह सरकार के लिए लाभ होगा?''

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, ''आरबीआई की रिपोर्ट से फिर साबित हो गया कि नोटबंदी व्यापक स्तर की 'मोदी मेड डिज़ास्टर' थी। चलन से बाहर हुए 99.30 फीसदी नोट वापस आ गये हैं।''

रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया की ओर से जारी ताजा आंकड़े के अनुसार, 8 नवंबर, 2016 में नोटबंदी लागू होने के बाद बंद किए गए 500 और 1,000 रुपये के नोटों का 99.30 प्रतिशत बैंकों के पास वापस आ गया है। नोटबंदी के समय मूल्य के हिसाब से 500 और 1,000 रुपये के 15.41 लाख करोड़ रुपये के नोट चलन में थे। इनमें से 15.31 लाख करोड़ रुपये के नोट बैंकों के पास वापस आ चुके हैं। इसका मतलब है कि बंद नोटों में सिर्फ 10,720 करोड़ रुपये ही बैंकों के पास वापस नहीं आए हैं।

भीमा-कोरेगांव केस: सुप्रीम कोर्ट का पांच मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी पर रोक

भारत में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को महाराष्ट्र पुलिस की ओर से भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले में हिरासत में लिए गए सभी पांच मानवाधिकार कार्यकताओं की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। लेकिन महाराष्ट्र पुलिस को उन्हें अपने घरों में अगली सुनवाई यानी 6 सितंबर तक नजरबंद रखने की अनुमति दे दी। साथ ही भारत की केंद्र और महाराष्ट्र सरकार से मामले में 5 सितंबर तक जवाब देने को कहा।

भारत के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने इस याचिका का उल्लेख कर इस पर बुधवार को ही सुनवाई करने का अनुरोध किया था। इस पर मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, जस्टिस ए एम खानविल्कर और जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की पीठ ने विशेष सुनवाई अदालत का समय पूरा हो जाने पर साढ़े चार बजे के बाद सुनवाई की। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने आरोपियों को 6 सितंबर तक घर में ही नजरबंद करने का आदेश दिया।

सुनवाई के दौरान पीठ ने टिप्पणी की कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतभेद सेफ्टी वाल्व की तरह होते हैं। अगर इन्हें रोका गया तो प्रेशर कुकर फट जाएगा। साथ ही महाराष्ट्र पुलिस की ओर से घटना के नौ महीने बाद गिरफ्तारी पर सवाल किए।

सुनवाई के दौरान आरोपियों की ओर से वरिष्ठ वकीलों ए एम सिंघवी, इंदिरा जयसिंह, राजीव धवन, दुष्यतं दवे, राजू रामचंद्रन, अमरेंद्र शरण और सी यू सिंह ने बहस की। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र पुलिस द्वारा की गई गिरफ्तारी असहमति को कुचलने का प्रयास है। ये लोग आदिवासियों के लिए काम कर रहे हैं। इनमें से एक वकील सुधा भारद्वाज ने अमेरिका की नागरिकता छोड़कर आदिवासियों के लिए काम करने का फैसला किया है। उन्हें भी गिरफ्तार करने पुलिस आ गई। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष दिसंबर में भीमा कोरेगांव में हुई हिंसा में यह लोग मौके पर भी नहीं थे। लेकिन फिर भी उन्हें अभियुक्त बनाया गया है।

महाराष्ट्र सरकार की ओर से ए ए ए जी तुषार मेहता ने बहस की। उन्होंने कहा कि अजनबी लोग आरोपियों के लिए रिट याचिका देकर जमानत की मांग नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि कोई भी आरोपी सुप्रीम कोर्ट में नहीं आया है। वहीं दिल्ली हाईकोर्ट इस मामले को सुन ही रहा है।

आरोपियों की ओर से पेश सिंघवी ने कहा कि याचिका में व्यापक मुद्दा उठाया गया है। यह अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत अधिकारों का मामला है। वहीं इसमें से दो लोग गौतम नवलखा और सुधा भारद्वाज संबंधित हाईकोर्ट गए हैं। लेकिन मुख्य न्यायाधीश ने सख्ती से इस तर्क को ठुकरा दिया।

कार्यकताओं के लिए इतिहासकार रोमिला थापर, प्रभात पटनायक, देवकी जैन, सतीष देशपांडे और माजु दारूवाला ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत रिट याचिका दायर की थी।

महाराष्ट्र पुलिस ने मंगलवार को अखिल भारतीय छापों में गौतम नवलखा को दिल्ली से, सुधा भारद्वाज को फरीदबाद से, वरवरा राव को आंध्रप्रदेश से और अरुण फरेरा व वर्नोन गोंजाल्विस को गिरफ्तार कर लिया था। नवलखा और भारद्वाज को हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र पुलिस को ले जाने से रोक दिया था और उन्हें नजरबंद रखने का आदेश दिया था।

याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि भीमा-कोरेगांव मामले में गिरफ्तार सभी पांच मानवाधिकार कार्यकताओं को जेल नहीं भेजा जाए, बल्कि अगली 6 सितंबर तक घर में नजरबंद रखा जाए। इसके साथ ही केंद्र और महाराष्ट्र सरकार से 5 सितंबर तक मामले में अपना पक्ष रखने को कहा। पीठ ने महाराष्ट्र पुलिस से भी घटना के नौ महीने बाद इन लोगों की गिरफ्तारी पर भी सवाल उठाया।

गौरतलब है कि पुणे के नजदीक एलगार परिषद ने 31 दिसंबर 2017 को एक कार्यक्रम आयोजित किया था, जिसकी वजह से भीमा-कोरेगांव में हिंसा हुई। पुलिस ने इस हिंसा में कथित भूमिका के आरोप में ये गिरफ्तारियां की।

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