भारत

भारत में नागरिकता संशोधन क़ानून की अधिसूचना जारी

भारत में नागरिकता संशोधन क़ानून की अधिसूचना जारी

सोमवार, 11 मार्च 2024

भारत की केंद्र सरकार ने नागरिकता संशोधन क़ानून लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी है।

भारत के गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने इसकी जानकारी देते हुए बताया है कि नागरिकता लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा। इसके लिए जल्द ही एक वेब पोर्टल लांच किया जाएगा।

भारत के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसकी जानकारी देते हुए एक्स पर लिखा, ''मोदी सरकार ने नागरिकता (संशोधन) नियम, 2024 की अधिसूचना जारी कर दी है इससे पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न की वजह से भारत आए अल्पसंख्यकों को यहां की नागरिकता मिल जाएगी।''

"इस अधिसूचना के ज़रिये भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक और प्रतिबद्धता पूरी की है इन देशों में रहने वाले हिन्दुओं, सिखों, बौद्धों, जैनों, पारसियों और ईसाइयों को संविधान निर्माताओं की ओर से किए गए वादे को पूरा किया है।''

इससे पहले भारत के गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने एक्स पर लिखा था, "गृह मंत्रालय आज नागरिकता (संशोधन) कानून, 2019 के प्रावधानों को लेकर अधिसूचना जारी करेगा। इससे सीएए-2019 के तहत योग्य कोई भी व्यक्ति भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर सकता है।''

अधिसूचना जारी किए जाने के बाद भारत के कानून मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने एक्स पर लिखा, ''जो कहा सो किया... मोदी सरकार ने नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) की अधिसूचना जारी कर पूरी की अपनी गारंटी।''
 
नागरिकता संशोधन क़ानून क्या है?

नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019, 11 दिसंबर 2019 में भारत के संसद में पारित किया गया था।

इसका मक़सद पाकिस्तान,अफ़ग़ानिस्तान और बांग्लादेश में धार्मिक उत्पीड़न की वजह से भारत आए हिंदुओं, सिखों, बौद्धों, जैनियों, पारसी और ईसाई अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता देना है। इसमें मुसलमानों को शामिल नहीं किया है।

इसमें मुसलमानों को शामिल नहीं किया जाना विवाद की वजह है। विपक्ष का कहना है कि ये भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है जो सभी नागरिकों को समानता का अधिकार देता है। एक तरफ़ ये कहा जा रहा है कि ये धार्मिक उत्पीड़न के शिकार अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने की कोशिश है। वहीं दूसरी ओर मुस्लिमों का आरोप है कि इसके ज़रिये उन्हें बेघर करने के क़दम उठाए जा रहे हैं।

इस क़ानून पर धर्मनिरपेक्षता का उल्लंघन करने के आरोप लगाए गए हैं।  भारतीय संविधान के अनुसार देश में किसी के साथ भी धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता। लेकिन इस क़ानून में मुसलमानों को नागरिकता देने का प्रावधान नहीं है। इसी वजह से धर्मनिरपेक्षता के उल्लंघन के आरोप लगाए जा रहे हैं।

सीएए के नियमों को अधिसूचित किए जाने के बाद असम और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में बड़े पैमाने पर आंदोलन शुरू करने का आह्वान किया गया है।

भारत के राज्य असम के गुवाहाटी में बीबीसी के सहयोगी संवाददाता दिलीप कुमार शर्मा ने बताया है कि सोमवार, 11 मार्च 2024 की शाम को जैसे ही सीएए की अधिसूचना जारी हुई। ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आसू) के कार्यकर्ताओं ने प्रत्येक ज़िले में सीएए क़ानून की प्रतिलिपि को जलाकर अपना विरोध जताया।

छात्र संगठन ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आसू) ने मंगलवार, 12 मार्च 2024 से राज्यभर में आंदोलन शुरू करने की हुंकार भरी है। इस बीच क्षेत्रीय दल असम जातीय परिषद ने  मंगलवार, 12 मार्च 2024 को लोगों से इस कानून के खिलाफ हड़ताल करने का आह्वान किया है।

भारत के राज्य पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि अगर देश में सीएए लागू होगा तो वो इसका विरोध करेंगी।

ममता बनर्जी ने कहा कि देश में समूहों के बीच भेदभाव हुआ तो वो चुप नहीं रहेंगी। ममता ने कहा कि सीएए और एनआरसी पश्चिम बंगाल और उत्तर पूर्व के लिए संवेदनशील मसला है और वो नहीं चाहतीं कि लोकसभा चुनाव से पहले देश में अशांति फैल जाए।

कोलकाता में राज्य सचिवालय में औचक बुलाई प्रेस कॉन्फ्रेंस में ममता बनर्जी ने कहा, ''ऐसी अटकलें हैं कि सीएए लागू करने के लिए अधिसूचना जारी होगी। लेकिन मैं ये साफ कर दूं कि लोगों के बीच भेदभाव करने वाले किसी भी फ़ैसले का विरोध किया जाएगा।''

बीबीसी के सहयोगी संवाददाता प्रभाकर मणि तिवारी के मुताबिक़ प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ममता बनर्जी ने कहा, "हिम्मत होती तो और पहले लागू करते सीएए, चुनाव के मौके पर क्यों? मैं किसी की नागरिकता नहीं जाने दूंगी।''

सीएए नियम लागू होने की अधिसूचना पर ओवैसी ने क्या कहा?

सोमवार, 11 मार्च 2024

भारत में सीएए कानून से जुड़े नियमों की अधिसूचना जारी होने के बाद एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन औवैसी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।

असदुद्दीन औवैसी ने एक्स पर लिखा है, ''आप क्रोनोलॉजी समझिए। पहले इलेक्शन सीज़न आएगा, फिर सीएए रूल्स आएंगे। सीएए के ख़िलाफ़ हमारा विरोध बरक़रार है। ये विभाजनकारी क़ानून है और गोडसे के विचारों पर बना है। वो विचार जो भारत के मुसलमानों को दूसरे दर्जे का नागरिक बना देना चाहते हैं।''

असदुद्दीन औवैसी ने लिखा है, ''धर्म के नाम पर जिसका भी उत्पीड़न हो रहा है उसे राजनीतिक शरण दीजिये, लेकिन नागरिकता का आधार धर्म या राष्ट्रीयता नहीं होनी चाहिए।''

"सरकार बताए कि उसने इस नियम को पांच साल तक टाले क्यों रखा और अब इसे क्यों लागू कर रही है। एनपीआर-एनआरसी के साथ ही सीएए का मक़सद मुस्लिमों का टारगेट करना है। इसका और कोई दूसरा मक़सद नहीं है।''

ओवैसी ने लिखा है कि जो लोग सीएए, एनपीआर और एनआरसी के ख़िलाफ़ सड़कों पर उतरे थे उनके लिए अब एक और बार इसके ख़िलाफ़ उतरने के अलावा और कोई चारा नहीं है।

इलेक्टोरल बॉन्ड पर एसबीआई को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं, कल तक जानकारी देनी होगी

इलेक्टोरल बॉन्ड पर एसबीआई को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं, कल तक जानकारी देनी होगी

सोमवार, 11 मार्च 2024

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ी जानकारी साझा करने की समय सीमा 30 जून 2024 तक बढ़ाने की एसबीआई की मांग ख़ारिज कर दी है।

सुप्रीम कोर्ट ने एसबीआई से कहा है कि वह मंगलवार, 12 मार्च 2024 तक इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ी जानकारी दे।

साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय चुनाव आयोग को आदेश दिया है कि वे सारी सूचनाएं इकट्ठा करके चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर 15 मार्च 2024 की शाम पांच बज़े तक सार्वजनिक करें।

एसबीआई ने 5 मार्च 2024 को सुप्रीम कोर्ट में अर्ज़ी दी थी कि इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने के लिए उसे 30 जून 2024 तक का समय दिया जाए।

इस पर चीफ़ जस्टिस ऑफ़ इंडिया डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई में पाँच सदस्यों वाली पीठ ने सोमवार, 11 मार्च 2024 को ये फ़ैसला दिया है।

बेंच की अगुवाई चीफ़ जस्टिस ऑफ़ इंडिया डीवाई चंद्रचूड़ कर रहे हैं।  उनके साथ इस पीठ में जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने 15 फ़रवरी 2024 को हुई सुनवाई के दौरान इलेक्टोरल बॉन्ड्स को असंवैधानिक करार देते हुए एसबीआई को इससे जुड़ी सभी जानकारियां छह मार्च 2024 तक चुनाव आयोग को देने के लिए कहा था।

इलेक्टोरल बॉन्ड पर सुप्रीम कोर्ट ने एसबीआई की अर्ज़ी ठुकराई, प्रशांत भूषण ने क्या कहा?

सोमवार, 11 मार्च 2024

इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ी जानकारी साझा करने की समय सीमा 30 जून 2024 तक बढ़ाने की एसबीआई की मांग ख़ारिज होने के बाद जाने माने वकील प्रशांत भूषण ने इस फ़ैसले का स्वागत किया है।

प्रशांत भूषण ने कहा कि इस मामले पर अदालत के पहले के फ़ैसले की तरह यह बढ़िया और ठोस फ़ैसला है।

प्रशांत भूषण ने एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स यानी एडीआर की ओर से एसबीआई पर अदालत की अवमानना का मामला दायर किया था।

समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में प्रशांत भूषण ने कहा, "चुनावी बॉन्ड ख़रीदकर दान देने वालों और इन बॉन्ड को भुनाने वालों से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने की समय सीमा 30 जून 2024 तक बढ़ाने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख़ अपनाया है।''

प्रशांत भूषण ने कहा, "अदालत ने एसबीआई की याचिका ख़ारिज कर दी और ज़िक्र किया कि अदालत ने जो आंकड़ें उनसे मांगे थे, वो एसबीआई के पास पहले से उपलब्ध हैं।''

इलेक्टोरल बॉन्ड पर सुप्रीम कोर्ट से एसबीआई को और समय न मिलने पर कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने क्या कहा?

सोमवार, 11 मार्च 2024

इलेक्टोरल बॉन्ड को लेकर सुप्रीम कोर्ट से एसबीआई को और समय न दिए जाने के फ़ैसले का कांग्रेस पार्टी ने स्वागत किया है।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला पारदर्शिता, जवाबदेही और लोकतंत्र में बराबरी के मौके़ की जीत है।

एसबीआई ने एक अर्ज़ी देकर सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ी जानकारी दिए जाने की समय-सीमा बढ़ाकर 30 जून 2024 कर दी जाए।

सोमवार, 11 मार्च 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने ये अर्ज़ी ख़ारिज करते हुए एसबीआई को कल यानी मंगलवार, 12 मार्च 2024 तक जानकारी देने का आदेश दिया है।

साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ये जानकारी 15 मार्च 2024 की शाम पाँच बजे तक चुनाव आयोग की वेबसाइट पर अपलोड हो जानी चाहिए।

मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस फ़ैसले पर कहा, "इलेक्टोरल बॉन्ड प्रकाशित करने के लिए एसबीआई द्वारा साढ़े चार महीने मांगने के बाद साफ़ हो गया था कि मोदी सरकार अपने काले कारनामों पर पर्दा डालने की हरसंभव कोशिश कर रही है। आज के माननीय सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले से देश को जल्द इलेक्टोरल बॉन्ड से भाजपा को चंदा देने वालों की लिस्ट पता चलेगी।''

मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, "मोदी सरकार के भ्रष्टाचार, घपलों और लेन-देन की कलई खुलने की ये पहली सीढ़ी है। अब भी देश को ये नहीं पता चलेगा कि भाजपा के चुनिंदा पूंजीपति चंदाधारक किस-किस ठेके के लिए मोदी सरकार को चंदा देते थे, उसके लिए माननीय सुप्रीम कोर्ट को उचित निर्देश देने चाहिए। मीडिया रिपोर्ट्स से ये तो उजागर हुआ ही है कि भाजपा किस तरह ईडी-सीबीआई-आईटी रेड डलवाकर जबरन चंदा वसूलती थी। सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला पारदर्शिता, जवाबदेही और लोकतंत्र में बराबरी के मौके की जीत है।''

राहुल गांधी ने इलेक्टोरल बॉन्ड को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एसबीआई की अर्ज़ी ठुकराए जाने पर क्या कहा?

सोमवार, 11 मार्च 2024

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इलेक्टोरल बॉन्ड के मुद्दे पर एसबीआई को सुप्रीम कोर्ट से मिले झटके के बाद कहा है कि 'नरेंद्र मोदी के चंदे के धंधे की पोल खुलने वाली है।'

राहुल ने एक्स पर लिखा, "100 दिन में स्विस बैंक से काला धन लाने का वायदा कर सत्ता में आई सरकार अपने ही बैंक का डेटा छिपाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में सिर के बल खड़ी हो गई।''

राहुल गांधी ने कहा, "इलेक्टोरल बॉन्ड भारतीय इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला साबित होने जा रहा है, जो भ्रष्ट उद्योगपतियों और सरकार के नेक्सस की पोल खोल कर नरेंद्र मोदी का असली चेहरा देश के सामने लेकर आएगा।''

"क्रोनोलॉजी स्पष्ट है- चंदा दो-धंधा लो, चंदा दो-प्रोटेक्शन लो। चंदा देने वालों पर कृपा की बौछार और आम जनता पर टैक्स की मार, यही है भाजपा की मोदी सरकार।''

सोमवार, 11 मार्च 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने एसबीआई की ओर से इलेक्टोरल बॉन्ड की जानकारी देने के लिए 30 जून 2024 तक का समय मांगने वाली याचिका को ख़ारिज कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने एसबीआई को कहा है कि वह 12 मार्च 2024 तक इसकी जानकारी दे।

अनुच्छेद 370 के रद्द किए जाने की आलोचना करना कोई अपराध नहीं है: सुप्रीम कोर्ट

अनुच्छेद 370 के रद्द किए जाने की आलोचना करना कोई अपराध नहीं है: सुप्रीम कोर्ट

शुक्रवार, 8 मार्च 2024

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक अहम फ़ैसले में गुरुवार, 7 मार्च 2024 को कहा कि अनुच्छेद 370 के रद्द किए जाने की आलोचना करना कोई अपराध नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने भारत के राज्य महाराष्ट्र के एक प्रोफेसर जावेद अहमद हजाम पर दर्ज मुक़दमे को रद्द करते हुए यह बात कही।

सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि पुलिस को भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान द्वारा दी गई अभिव्यक्ति की आज़ादी को लेकर संवेदनशील होना चाहिए।

मामला क्या है?

प्रोफेसर जावेद अहमद हजाम ने अपने व्हाट्सएप स्टेटस में अनुच्छेद 370 को रद्द करने की आलोचना करते हुए 5 अगस्त, 2019 को जम्मू और कश्मीर के लिए 'काला दिन' बताया था।

प्रोफेसर जावेद अहमद हजाम ने अपने व्हाट्सएप स्टेटस पर '5 अगस्त- ब्लैक डे जम्मू-कश्मीर' और '14 अगस्त- स्वतंत्रता दिवस पाकिस्तान' लिखा था।

प्रोफेसर जावेद अहमद हजाम की इस टिप्पणी पर पुलिस ने प्रोफेसर जावेद अहमद हजाम के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज किया था। महाराष्ट्र पुलिस ने प्रोफेसर जावेद अहमद हजाम पर भारतीय दंड संहिता की धारा 153-ए लगाई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकार के खिलाफ हर आलोचना या विरोध को अगर धारा 153-ए के तहत अपराध मान लिया जाएगा, तो देश (भारत) में लोकतंत्र नहीं बचेगा।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने कहा कि 5 अगस्त, 2019 को 'काला दिवस' बताना विरोध और पीड़ा की अभिव्यक्ति है।

इससे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट ने प्रोफेसर जावेद अहमद हजाम के खिलाफ एफआईआर को रद्द करने से इनकार कर दिया था और कहा था कि प्रोफेसर जावेद अहमद हजाम की ​टिप्पणी समाज के विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य और दुर्भावना को बढ़ावा दे सकती है।

भारत के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 5 अगस्त, 2019 को संसद में अनुच्छेद 370 को रद्द करने का ऐलान किया था।

भारत सरकार के इस फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती भी दी गई थी।

अब से लगभग तीन महीने पहले 11 दिसंबर, 2023 को सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से सरकार के पक्ष में फ़ैसला सुनाया कि अनुच्छेद 370 को हटाया जाना ठीक था।

जीएन साईबाबा ने जेल से बाहर आने के बाद क्या कहा?

जीएन साईबाबा ने जेल से बाहर आने के बाद क्या कहा?

गुरुवार, 7 मार्च 2024

भारत में स्थित दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफे़सर जीएन साईबाबा ने माओवादियों के साथ कथित संबंधों के मामले में जेल से रिहा होने के बाद मीडियाकर्मियों से बात की।

जीएन साईबाबा ने कहा, "अगर देश का संविधान 50 फ़ीसदी भी लागू हो तो निश्चित तौर पर बदलाव होगा। मुझे इसकी उम्मीद है।"

जीएन साईबाबा से एक रिपोर्टर ने जेल से बाहर निकलने की उम्मीद पर सवाल किया तो उन्होंने कहा, "देखिए उम्मीद ही ऐसी चीज थी जिसने मेरी मदद की और मैं इन सब चीज़ों से गुजर पाया। ये आश्चर्य है कि मैं जेल से जीवित बाहर निकल पाया।"

माओवादियों से कथित संबंध के मामले में बरी किए गए दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफे़सर जीएन साईबाबा नागपुर की सेंट्रल जेल से गुरुवार, 7 मार्च 2024 को बाहर आ गए।

पाँच मार्च 2024 को बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने जीएन साईबाबा, हेम मिश्रा, महेश तिर्की, विजय तिर्की, नारायण सांगलीकर, प्रशांत राही और पांडु नरोट (निधन) को माओवादियों से कथित संबंध के मामले में बरी कर दिया था।

जीएन साईबाबा साल 2017 में भारत के राज्य महाराष्ट्र के गढ़चिरौली की एक अदालत के फ़ैसले के बाद से जेल में थे।

इससे पहले वह साल 2014 से 2016 के बीच भी जेल में रहे लेकिन उस समय बेल पर बाहर आ गए थे।

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, जेल से बाहर आने पर जीएन साईबाबा ने मीडियाकर्मियों से कहा, "मेरा स्वास्थ्य बेहद खराब है। मैं बात नहीं कर सकता। पहले मुझे इलाज करवाना होगा, तभी मैं बोलने के लायक हो पाऊंगा।''

नागपुर बेंच ने मंगलवार, 5 मार्च 2024 को ही साईबाबा की उम्रकैद की सज़ा को ये कहते हुए पलट दिया था कि अभियोजन पक्ष उन पर लगे आरोपों को साबित नहीं कर सका।

54 साल के साईबाबा व्हीलचेयर से चलते हैं और 99 फ़ीसदी विकलांग हैं। वह पिछले 11 साल से नागपुर की सेंट्रल जेल में कैद थे।

एसबीआई के इलेक्टोरल बॉन्ड पर जानकारी देने के लिए समय मांगने को लेकर राहुल गाँधी ने क्या कहा?

एसबीआई के इलेक्टोरल बॉन्ड पर जानकारी देने के लिए समय मांगने को लेकर राहुल गाँधी ने क्या कहा?

सोमवार, 4 मार्च 2024

भारत में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एसबीआई की ओर से इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ी जानकारी देने की तारीख बढ़ाने की अपील पर मोदी सरकार की आलोचना की है।

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने 15 फ़रवरी 2024 को इलेक्टोरल बॉन्ड को असंवैधानिक करार दिया था।

साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया से राजनीतिक पार्टियों को इलेक्टोरल बॉन्ड के ज़रिए मिली धनराशि की जानकारी 6 मार्च 2024 तक चुनाव आयोग को देने के लिए भी कहा था।

हालांकि, एसबीआई ने सुप्रीम कोर्ट से इस समयसीमा को बढ़ाकर 30 जून 2024 करने की अपील की है।

इस पर राहुल गांधी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर लिखा है, "नरेंद्र मोदी ने चंदे के धंधे को छिपाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। जब सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इलेक्टोरल बॉन्ड का सच जानना देशवासियों का हक़ है, तब एसबीआई क्यों चाहता है कि चुनाव से पहले ये जानकारी सार्वजनिक न हो पाए?"

राहुल गांधी ने लिखा, "एक क्लिक पर निकाली जा सकने वाली जानकारी के लिए 30 जून 2024 तक का समय मांगना बताता है कि दाल में कुछ काला नहीं है, पूरी दाल ही काली है।''

"देश की हर स्वतंत्र संस्था 'मोडानी परिवार' बन कर उनके भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने में लगी है. चुनाव से पहले मोदी के 'असली चेहरे' को छिपाने का यह अंतिम प्रयास है।''

घूस लेने के मामलों में सांसदों और विधायकों को छूट नहीं मिलेगी: सुप्रीम कोर्ट

घूस लेने के मामलों में सांसदों और विधायकों को छूट नहीं मिलेगी: सुप्रीम कोर्ट

सोमवार, 4 मार्च 2024

भारत के सुप्रीम कोर्ट की सात जजों की बेंच ने सांसदों और विधायकों के विशेषाधिकार से जुड़े केस में सोमवार, 4 मार्च 2024 को अहम फ़ैसला सुनाया है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि रिश्वत लेने के मामलों में सांसदों और विधायकों को विशेषाधिकार के तहत किसी तरह का कोई क़ानूनी सरंक्षण हासिल नहीं होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने इसी के साथ 1998 के नरसिम्हा राव जजमेंट के अपने फ़ैसले को पलट दिया है।

तब पांच जजों की बेंच ने 3:2 के बहुमत से तय किया था कि ऐसे मामलों में जनप्रतिनिधियों पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद वकील अश्विनी उपाध्याय ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, ''सात जजों की बेंच ने एकमत से कहा कि पैसे लेकर सवाल पूछना या पैसे लेकर राज्यसभा चुनाव में वोट देना, ये पूरी तरह से संवैधानिक भावना के ख़िलाफ़ है। ये संविधान के ख़िलाफ़ है. इसलिए कोई भी विशेषाधिकार प्राप्त नहीं होगा। सांसदों, विधायकों को संसद या विधानसभा में जो बोलने की आज़ादी है, वो ईमानदारी से काम करने की आज़ादी है। भ्रष्टाचार करने की आज़ादी नहीं है।''

कानूनी ख़बरों से जुड़ी वेबसाइट लाइव लॉ के मुताबिक़, चीफ़ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने इस मामले पर फ़ैसला सुनाते हुए कहा, "विधायी विशेषाधिकारों का उद्देश्य सामूहिक रूप से सदन को विशेषाधिकार देना है। अनुच्छेद 105/194 सदस्यों के लिए एक भय मुक्त वातावरण बनाने के लिए है। भ्रष्टाचार और रिश्वत संसदीय लोकतंत्र को बर्बाद करने वाला है।''

सांसदों और विधायकों को घूस के मामलों में कोई क़ानूनी सरंक्षण ना दिए जाने के सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वागत किया है।

नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा, ''स्वागतम। माननीय सुप्रीम कोर्ट ने बहुत महान फ़ैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला स्वच्छ राजनीति सुनिश्चित करेगा और इससे व्यवस्था में लोगों का भरोसा बढ़ेगा।''

भारत म्यांमार से सटी 1643 किलोमीटर लंबी सीमा पर बाड़बंदी करवाएगी

भारत म्यांमार से सटी 1643 किलोमीटर लंबी सीमा पर बाड़बंदी करवाएगी

मंगलवार, 6 फरवरी 2024

भारत की केंद्र सरकार ने म्यांमार से सटी 1643 किलोमीटर लंबी सीमा पर बाड़बंदी करवाने का निर्णय लिया है। भारत के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ट्वीट कर के इसकी जानकारी दी।

अमित शाह ने कहा कि इससे सीमा पर बेहतर सर्विलांस, पेट्रोलिंग और ट्रैकिंग की जा सकेगी। अमित शाह ने कहा कि भारत के राज्य मणिपुर के मोरेह में 10 किलोमीटर लंबी सीमा की बाड़बंदी की जा चुकी है।

अमित शाह ने बताया, "हाइब्रिड सर्विलांस सिस्टम (एचएसएस) के ज़रिए बाड़बंदी के दो पायलट प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है। भारत के राज्यों अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर में एक किलोमीटर लंबी सीमा को इसके तहत बाड़बंद किया जाएगा।''

अमित शाह ने कहा कि मणिपुर में करीब 20 किलोमीटर लंबी बाड़बंदी को मंज़ूरी मिल गई है और इस पर जल्द काम शुरू हो जाएगा।

बाड़बंदी की ये घोषणा ऐसे समय में हुई है जब पिछले कई महीनों से मणिपुर में हिंसा जारी है। मणिपुर राज्य की करीब 400 किलोमीटर लंबी सीमा म्यांमार से लगती है। हाल ही में मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बिरेन सिंह ने पिछली केंद्र सरकारों पर पूर्वोत्तर के राज्यों की अनदेखी करने का आरोप लगाया था।

भारत ने अपने नागरिकों से म्यांमार के रखाइन प्रांत की यात्रा न करने को कहा

मंगलवार, 6 फरवरी 2024

भारत ने अपने नागरिकों से म्यांमार के रखाइन प्रांत की यात्रा न करने को कहा है। इस संबंध में भारत के विदेश मंत्रालय ने एक एडवाइज़री जारी की है।

भारत के विदेश मंत्रालय की एडवाइज़री के अनुसार, "सुरक्षा स्थिति के बिगड़ने, लैंडलाइन सहित अन्य संचार सेवाओं के बाधित होने और बुनियादी सामान की भारी कमी के कारण सभी भारतीयों को ये सलाह दी जाती है कि वे म्यांमार के रखाइन प्रांत न जाएं।''

"जो भारतीय पहले से रखाइन प्रांत में मौजूद हैं, उन्हें फ़ौरन ये इलाक़ा खाली कर देना चाहिए।''

रखाइन प्रांत में साल 2016 से ही हिंसा जारी है। हालांकि, हालिया दिनों में रखाइन प्रांत में म्यांमार की सैन्य सत्ता और विद्रोही गुट अराकन आर्मी (एए) के बीच संघर्ष और तेज़ हुआ है।

अमेरिका ने भारत के साथ चार अरब डॉलर के ड्रोन समझौते को मंज़ूरी दी

अमेरिका ने भारत के साथ चार अरब डॉलर के ड्रोन समझौते को मंज़ूरी दी
 
शुक्रवार, 2 फरवरी 2024

भारत को 31 अत्याधुनिक हथियारबंद ड्रोन देने के चार अरब डॉलर के समझौते को अमेरिकी विदेश विभाग ने मंज़ूरी दे दी है।

जून 2023 में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिकी यात्रा के दौरान एमक्यू-9बी प्रीडेटर ड्रोन के समझौते की घोषणा हुई थी।

अमेरिका में एक भारतीय की हत्या की कथित साज़िश की जांच के कारण सीनेट कमेटी ने दिसम्बर 2023 में इस समझौते पर रोक लगा दी थी।

अब इस समझौते को अमेरिकी कांग्रेस ने मंज़ूरी दे दी है।

पेंटागन ने कहा कि इस समझौते में 31 हथियारबंद एमक्यू-9बी स्काईगार्डियन ड्रोन, 170 एजीएएम-114आर हेलफ़ायर मिसाइलें और 310 छोटे व्यास वाले बम, कम्युनिकेशन और सर्विलांस उपकरण और प्रिसीशन ग्लाइड बम की बिक्री शामिल है।

इस समझौते का प्रमुख कॉन्ट्रैक्टर जनरल एटोमिक्स एरोनॉटिक्स सिस्टम्स होगा।

समाचार एजंसी रॉयटर्स के अनुसार, सीनेटर बेन कार्डिन ने कहा कि अमेरिकी सरकार द्वारा गुरपतवंत सिंह पन्नू हत्या की साज़िश की पूरी जांच करने पर सहमति के बाद ही इस समझौते को अंतिम रूप दिया गया।

सीनेटर बेन कार्डिन ने बताया, "बाइडेन प्रशासन ने मांग की है कि अमेरिकी धरती पर साज़िश को लेकर जांच और जवाबदेही तय होनी चाहिए और इस तरह की गतिविधियों को लेकर भारत में भी जवाबदेही तय होनी चाहिए।''

साल 2023 में अमेरिका ने भारत सरकार पर, खालिस्तान का समर्थन करने वाले एक अमेरिकी नागरिक की हत्या की साज़िश रचने का आरोप लगाया था।

गुरुवार, 1 फरवरी 2024 को पेंटागन ने कहा कि "अमेरिका-भारत रणनीतिक रिश्ते को मजबूत करने के लिए, भारत के साथ प्रस्तावित यह ड्रोन समझौता अमेरिका की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा लक्ष्यों में मदद करेगा।''

ज्ञानवापी मस्जिद केस: अदालत ने हिंदू पक्ष को तहखाने में पूजा का अधिकार दिया

ज्ञानवापी मस्जिद केस: अदालत ने हिंदू पक्ष को तहखाने में पूजा का अधिकार दिया

बुधवार, 31 जनवरी 2024

भारत के राज्य उत्तर प्रदेश के वाराणसी की अदालत ने ज्ञानवापी मस्जिद के मामले में हिंदू पक्ष के समर्थन में फ़ैसला सुनाया है। वाराणसी की अदालत ने हिंदू पक्ष को ज्ञानवापी मस्जिद के व्यास तहखाने में पूजा का अधिकार दे दिया है।

अदालत की ओर से जारी आदेश में लिखा गया है - "जिला मजिस्ट्रेट, वाराणसी / रिसीवर को निर्देश दिया जाता है कि वह सेटेलमेण्ट प्लाट नं0-9130 थाना-चौक, जिला वाराणसी में स्थित भवन के दक्षिण की तरफ स्थित तहखाने जो कि वादग्रस्त सम्पत्ति है, वादी तथा काशी विश्वनाथ ट्रस्ट बोर्ड के द्वारा नाम निर्दिष्ट पुजारी से पूजा, राग-भोग, तहखाने में स्थित मूर्तियों का कराये और इस उद्देश्य के लिए 7 दिन के भीतर लोहे की बाड़ आदि में उचित प्रबन्ध करें।''

हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "ज़िला प्रशासन को सात दिन के अंदर पूजा कराने के लिए इंतज़ाम कराने को कहा गया है। जैसे ही प्रशासन ये कर लेगा, वैसे ही पूजा शुरू हो जाएगी।''

मस्जिद परिसर में पूजा करने के विधि-विधान पर भी विष्णु शंकर जैन ने अपनी टिप्पणी की है।

विष्णु शंकर जैन ने कहा, "काशी विश्वनाथ ट्रस्ट ये तय करेगा कि पूजा कैसे होगी। उसे बेहतर पता है। हमारा क़ानूनी काम था जो कि हमने पूरा किया है। अब काशी विश्वनाथ ट्रस्ट के ऊपर है कि पूजा शुरू हो जाए। भक्तों से लेकर पुजारी आदि सभी को जाने की इजाज़त होगी।''

"मैं ये कहना चाहता हूं कि जो जस्टिस केएम पांडेय ने एक फरवरी, 1986 को राम मंदिर में ताला खोलने का आदेश दिया था। मैं आज के इस ऑर्डर को उसी की तुलना में देखता हूं। ये इस केस का टर्निंग पॉइंट है। एक सरकार ने अपनी ताक़त का दुरुपयोग करते हुए हिंदू समाज की पूजा-पाठ रोकी थी। आज अदालत ने उसे अपनी कलम से ठीक किया है।''

भारत के सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील और संविधान मामलों के जानकार डॉक्टर राजीव धवन को यहां तक लगता है कि धर्मनिरपेक्षता को बरकरार रखने के मामले में अदालतें कमज़ोर पड़ गई हैं। डॉक्टर राजीव धवन ने कहा, ''ज्ञानवापी मामले में प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट को पूरी तरह से भुला दिया गया।''

पूजा स्थल अधिनियम (प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट) क्या है?

इसे धार्मिक पूजा स्थलों की स्थिति को स्थिर करने के लिए अधिनियमित किया गया था क्योंकि वे 15 अगस्त, 1947 को अस्तित्व में थे, और किसी भी पूजा स्थल के रूपांतरण पर रोक लगाते हैं और उनके धार्मिक चरित्र के रखरखाव को सुनिश्चित करते हैं।

पूजा स्थल अधिनियम की धारा 3 घोषित करती है कि कोई भी व्यक्ति किसी भी धार्मिक संप्रदाय के पूजा स्थल को किसी भिन्न धार्मिक संप्रदाय या संप्रदाय में परिवर्तित नहीं करेगा। धारा 4(1) में प्रावधान है कि पूजा स्थल का धार्मिक चरित्र वही रहेगा जो 15 अगस्त 1947 को था।

वाराणसी की अदालत ने ज्ञानवापी मस्जिद के मामले में हिंदू पक्ष के समर्थन में फ़ैसला सुनाया है। वाराणसी की अदालत ने हिंदू पक्ष को ज्ञानवापी मस्जिद के व्यास तहखाने में पूजा का अधिकार दे दिया है। यहाँ सवाल उठता है कि क्या यह ज्ञानवापी मामले में प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट का वाराणसी की अदालत के द्वारा पूरी तरह से उल्लंघन नहीं है? क्या यह ज्ञानवापी मामले में ज्ञानवापी मस्जिद के चरित्र में बदलाव करने की कोशिश नहीं है?

प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट के मुताबिक कोई भी व्यक्ति किसी भी धार्मिक संप्रदाय के पूजा स्थल को किसी भिन्न धार्मिक संप्रदाय या संप्रदाय में परिवर्तित नहीं करेगा। धारा 4(1) में प्रावधान है कि पूजा स्थल का धार्मिक चरित्र वही रहेगा जो 15 अगस्त 1947 को था।

तो फिर वाराणसी की अदालत ने हिंदू पक्ष को ज्ञानवापी मस्जिद के व्यास तहखाने में पूजा का अधिकार क्यों दिया? यह बड़ा सवाल है जिसका जवाब दिया जाना जरूरी है।

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर भारत की राष्ट्रपति का भाषण, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने क्या कहा?

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर भारत की राष्ट्रपति का भाषण, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने क्या कहा?

गुरुवार, 25 जनवरी 2024

भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर अपने भाषण में कहा कि गणतंत्र दिवस आधारभूत मूल्यों और सिद्धांतों को स्मरण करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।

राष्ट्रपति ने ये बातें कहीं

हमारा देश स्वतंत्रता की शताब्दी की ओर बढ़ते हुए अमृतकाल के प्रारंभिक दौर से गुजर रहा है। ये युगांतकारी परिवर्तन का कालखंड है।

जब संसद ने ऐतिहासिक महिला आरक्षण विधेयक पारित किया तो हमारा देश, स्त्री-पुरुष समानता के आदर्श की ओर बढ़ा।

मेरा मानना है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम, महिला सशक्तिकरण का एक क्रांतिकारी माध्यम सिद्ध होगा। इस अवधि में भारत, चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के क्षेत्र पर उतरने वाला पहला देश बना।

चंद्रयान-3 के बाद इसरो ने एक और सौर मिशन भी शुरू किया। पहला मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम गगनयान मिशन की तैयारी भी सुचारू रूप से बढ़ रही है।

सभी प्रकार के भेदभाव को समाप्त करने के लिए सामाजिक न्याय के मार्ग पर हमें अडिग बनाए रखा है। भारत की अध्यक्षता में दिल्ली में जी20 शिखर सम्मेलन का सफल आयोजन एक अभूतपूर्व उपलब्धि थी।

इस सप्ताह के शुरुआत में भगवान श्री राम के नए, भव्य मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा का पवित्र अवसर देखने का सौभाग्य मिला। इसे इतिहास के बड़े नजरिए से देखें तो आने वाले इतिहासकार इसे भारतीय सभ्यता के पुनर्जागरण का एक महत्वपूर्ण चिह्न कहेंगे।

पिछले कुछ सालों में हमारी जीडीपी ग्रोथ रेट दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे ऊपर रही है, और हमें पूरा विश्वास है कि ये प्रदर्शन 2024 और उसके बाद भी जारी रहेगा।